<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>The Voice TV Feed</title><link>https://thevoicetv.in</link><description>The Voice TV Feed Description</description><item><title>आईसीएमआर-एनआईएन अध्ययन में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को मनोभ्रंश के उच्च जोखिम से जोड़ा गया है।</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=54130</link><description>भारतीय चिकित्सा मंत्रालय (आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान) द्वारा किए गए एक अध्ययन में भारतीय वयस्कों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और मनोभ्रंश के उच्च जोखिम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पाया गया है, जो संज्ञानात्मक गिरावट को रोकने और स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देने में पोषण की संभावित भूमिका को उजागर करता है।
जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के साथ, भारत में बुजुर्ग आबादी में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मनोभ्रंश सहित उम्र से संबंधित गैर-संक्रामक रोगों का बोझ भी बढ़ रहा है। भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में वैश्विक मनोभ्रंश के लगभग 60 प्रतिशत मामले हैं।
हालांकि मनोभ्रंश के लिए आनुवंशिक कारक भी जिम्मेदार होते हैं, लेकिन लगभग आधे मामले उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अवसाद और सामाजिक अलगाव जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारकों से जुड़े होते हैं। पोषण, विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन, मस्तिष्क स्वास्थ्य के एक महत्वपूर्ण निर्धारक के रूप में तेजी से पहचाना जा रहा है।
तेलंगाना के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से 40-80 वर्ष आयु वर्ग के 556 वयस्कों पर किए गए इस सामुदायिक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने मनोभ्रंश के जोखिम का मूल्यांकन करने और सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति के साथ इसके संबंध की जांच करने के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स, एजिंग एंड इंसिडेंस ऑफ डिमेंशिया (CAIDE) स्कोर के सांस्कृतिक रूप से अनुकूलित संस्करण का उपयोग किया।
संज्ञानात्मक क्षमता का आकलन मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट (MoCA) उपकरण का उपयोग करके किया गया, जबकि रक्त में विटामिन की मात्रा का मापन उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों के माध्यम से किया गया। आहार सेवन और आहार विविधता का भी मूल्यांकन किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि लगभग 40 प्रतिशत प्रतिभागियों को मनोभ्रंश के उच्च जोखिम वाले वर्ग में रखा गया था। उच्च जोखिम वाले वर्ग के व्यक्तियों में पोषण की स्थिति काफी खराब थी, जिनमें विटामिन डी, बी2, बी6 और बी12 की कमी अधिक पाई गई।
जिन प्रतिभागियों में मनोभ्रंश का खतरा अधिक था, उन्होंने आहार में विविधता की कमी, संतृप्त वसा का अधिक सेवन और असंतृप्त वसा का कम सेवन पाया। विटामिन की कमी ग्रामीण प्रतिभागियों में शहरी निवासियों की तुलना में अधिक आम थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों की विशिष्ट कमजोरियों को दर्शाती है और मनोभ्रंश के बढ़ते खतरे में योगदान दे सकती है।
निष्कर्षों से यह भी पता चलता है कि सूक्ष्म पोषक तत्वों, विशेष रूप से फलों और सब्जियों से भरपूर आहार, मनोभ्रंश के जोखिम कारकों के कम बोझ से जुड़ा हुआ है।
आईसीएमआर-एनआईएन में वैज्ञानिक जी और अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक डॉ. जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने कहा कि भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण 2050 तक मनोभ्रंश के मामलों में काफी वृद्धि होने की आशंका है।
उन्होंने कहा, हमारे निष्कर्ष इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति भारतीय वयस्कों में मनोभ्रंश के जोखिम कारकों के बोझ से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। हालांकि इस अध्ययन का क्रॉस-सेक्शनल डिज़ाइन कारण-कार्य संबंध स्थापित करने की क्षमता को सीमित करता है, फिर भी यह अध्ययन इस बात पर बल देता है कि पोषण, विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्तता और आहार विविधता, एक ऐसा परिवर्तनीय कारक है जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के माध्यम से लक्षित किया जा सकता है।
आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि मनोभ्रंश के लिए प्रभावी रोग-संशोधक उपचारों की अनुपस्थिति में, जोखिम कारकों की प्रारंभिक पहचान के माध्यम से रोकथाम महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने कहा, यह अध्ययन महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करता है कि पोषण संबंधी कारकों, विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति को, भविष्य में मनोभ्रंश की रोकथाम की रणनीतियों में एकीकृत किया जाना चाहिए।
यह अध्ययन स्टैनफोर्ड सेंटर फॉर इनोवेशन इन ग्लोबल हेल्थ और कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के सहयोग से किया गया था। इसके निष्कर्ष द लैंसेट रीजनल हेल्थ  साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुए हैं। </description><guid>54130</guid><pubDate>10-Jun-2026 12:24:35 pm</pubDate></item><item><title>ऑक्युपेशनल थेरेपी: मानव शरीर की सुप्त क्षमताओं को पुनर्जीवित करने वाला विज्ञान</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=54129</link><description>सृष्टि के प्रारंभ से ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य आरोग्यता रहा है। मानव जीवन की सार्थकता स्वस्थ शरीर और संतुलित मन में निहित है। भारतीय चिंतन परंपरा में भी कहा गया है शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्, अर्थात् शरीर ही समस्त कर्मों और उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रथम साधन है। वर्तमान समय में तीव्र शहरीकरण, बदलती जीवन शैली, शारीरिक निष्क्रियता, मानसिक तनाव, बढ़ती आयु तथा विभिन्न प्रकार की असंक्रामक बीमारियों ने मानव स्वास्थ्य के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की परंपरागत अवधारणाएं भी परिवर्तित हुई हैं और चिकित्सा विज्ञान केवल रोग-उपचार तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य संरक्षण, पुनर्वास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में अग्रसर हुआ है।


इसी परिप्रेक्ष्य में ऑक्युपेशनल थेरेपी आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली शाखा के रूप में उभरी है। यह केवल व्यायाम अथवा मालिश तक सीमित चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित ऐसी उपचार प्रणाली है जो शरीर की कार्यक्षमता, गतिशीलता, संतुलन, मांसपेशीय शक्ति तथा जीवन-क्षमता को पुनर्स्थापित और विकसित करने का कार्य करती है। आज ऑक्युपेशनल थेरेपी रोगों के उपचार, चोटों के प्रबंधन, शल्य क्रिया के पश्चात पुनर्वास, वृद्धजन स्वास्थ्य, खेल चिकित्सा तथा मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। स्वास्थ्य की समग्र अवधारणा को साकार करने में ऑक्युपेशनल थेरेपी की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। यह न केवल रोगियों को दर्द और विकलांगता से मुक्ति दिलाती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में भी सक्षम बनाती है। प्रस्तुत आलेख में मानव स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों में ऑक्युपेशनल थेरेपी की भूमिका, उपयोगिता, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का शोधपरक विश्लेषण किया गया है।


ऑक्युपेशनल थेरेपी : अवधारणा एवं विकास


ऑक्युपेशनल थेरेपी चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो शारीरिक क्रियाशीलता को बनाए रखने, पुनः स्थापित करने तथा विकसित करने का कार्य करती है। इसका उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति की सम्पूर्ण कार्यात्मक क्षमता को पुनर्जीवित करना है। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में विकसित हुई यह विधा आज आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का अभिन्न अंग बन चुकी है। विश्व भर के अस्पतालों, पुनर्वास केन्द्रों तथा खेल संस्थानों में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।


मानव स्वास्थ्य के लिए ऑक्युपेशनल थेरेपी का महत्व


ऑक्युपेशनल थेरेपी मानव शरीर की स्वाभाविक गतिशीलता को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह मांसपेशियों की शक्ति बढ़ाने, जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने तथा दर्द को नियंत्रित करने में प्रभावी सिद्ध होती है। अनेक शोध अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि नियमित ऑक्युपेशनल थेरेपी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि रोगों की पुनरावृत्ति की संभावना को भी कम करती है। इसके माध्यम से रोगी दवाओं पर अत्यधिक निर्भरता से बच सकता है तथा स्वाभाविक रूप से स्वस्थ जीवन शैली की ओर अग्रसर हो सकता है।


अस्थि एवं मांसपेशीय रोगों के उपचार में भूमिका


आधुनिक जीवन शैली के कारण कमर दर्द, गर्दन दर्द, गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस तथा मांसपेशीय विकारों की समस्या व्यापक रूप से बढ़ी है। लंबे समय तक बैठकर कार्य करने की प्रवृत्ति ने इन समस्याओं को और गंभीर बनाया है। ऑक्युपेशनल थेरेपी विशेष व्यायामों, स्ट्रेचिंग तकनीकों, मैनुअल थेरेपी तथा इलेक्ट्रोथेरेपी के माध्यम से दर्द को कम करती है और प्रभावित अंगों की कार्यक्षमता को पुनः स्थापित करती है। खेल चोटों के उपचार एवं खिलाड़ियों की शीघ्र वापसी में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।


न्यूरोलॉजिकल रोगों के पुनर्वास में योगदान


मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित रोगों जैसे पक्षाघात, पार्किंसन रोग, सेरेब्रल पाल्सी तथा रीढ़ की हड्डी की चोटों में ऑक्युपेशनल थेरेपी पुनर्वास की आधारशिला मानी जाती है। विशेष प्रकार के प्रशिक्षण एवं व्यायाम रोगियों में संतुलन, समन्वय और गतिशीलता को पुनर्स्थापित करने में सहायक होते हैं। इससे रोगी की आत्मनिर्भरता बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है।


हृदय एवं श्वसन स्वास्थ्य में ऑक्युपेशनल थेरेपी


हृदयाघात, अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) तथा अन्य श्वसन रोगों में ऑक्युपेशनल थेरेपी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है। श्वसन व्यायाम, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने वाली तकनीकें तथा कार्डियक रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम रोगियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करते हैं। इससे रोगी सामान्य जीवन की ओर शीघ्र लौट सकता है।


वृद्धावस्था और ऑक्युपेशनल थेरेपी


बढ़ती आयु के साथ शरीर की कार्यक्षमता में स्वाभाविक गिरावट आती है। जोड़ों का दर्द, मांसपेशीय कमजोरी, संतुलन की कमी तथा गिरने की आशंका वृद्धजनों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ऑक्युपेशनल थेरेपी इन समस्याओं को नियंत्रित करने में अत्यंत प्रभावी है। नियमित व्यायाम और संतुलन प्रशिक्षण वृद्धजनों को सक्रिय, आत्मनिर्भर तथा स्वस्थ जीवन जीने में सहायता प्रदान करते हैं।


पुनर्वास चिकित्सा में ऑक्युपेशनल थेरेपी की भूमिका


दुर्घटनाओं, शल्यक्रियाओं तथा गंभीर बीमारियों के पश्चात पुनर्वास प्रक्रिया में ऑक्युपेशनल थेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह रोगी को पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता करती है। विशेष रूप से अंग-विच्छेदन, फ्रैक्चर, स्पाइनल इंजरी तथा खेल चोटों के मामलों में ऑक्युपेशनल थेरेपी जीवन की गुणवत्ता को पुनर्स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनती है।


महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य में योगदान


गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को अनेक शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऑक्युपेशनल थेरेपी उन्हें सुरक्षित मातृत्व, प्रसवोत्तर स्वास्थ्य तथा शारीरिक पुनर्स्थापन में सहायता प्रदान करती है। इसी प्रकार बच्चों में विकासात्मक विकार,ऑटिज्म,स्पीच डिले, सेरेब्रल पाल्सी तथा अन्य न्यूरो-मस्कुलर समस्याओं के उपचार में भी ऑक्युपेशनल थेरेपी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।


मानसिक स्वास्थ्य और ऑक्युपेशनल थेरेपी


स्वास्थ्य केवल शारीरिक अवस्था नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति भी है। नियमित शारीरिक गतिविधियां तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक होती हैं। ऑक्युपेशनल थेरेपी आधारित व्यायाम कार्यक्रम व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, मानसिक संतुलन स्थापित करते हैं तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं।


आधुनिक तकनीक और ऑक्युपेशनल थेरेपी


विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास ने ऑक्युपेशनल थेरेपी को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। आज इलेक्ट्रोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड, लेजर थेरेपी, रोबोटिक पुनर्वास तथा वर्चुअल रियलिटी आधारित उपचार पद्धतियां व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त टेली-ऑक्युपेशनल थेरेपी सेशन ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का नया मार्ग प्रशस्त किया है।


भारत में ऑक्युपेशनल थेरेपी : चुनौतियां और संभावनाएं


भारत में ऑक्युपेशनल थेरेपी का क्षेत्र तीव्र गति से विकसित हो रहा है, पर अभी भी जागरूकता की कमी, विशेषज्ञों का असमान वितरण तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियां विद्यमान हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों में ऑक्युपेशनल थेरेपी को अधिक महत्व देकर तथा जन जागरूकता बढ़ाकर इसकी पहुंच को व्यापक बनाया जा सकता है। बढ़ती वृद्धजन आबादी और जीवन शैली जनित रोगों के कारण भविष्य में इसकी आवश्यकता और अधिक बढ़ने की संभावना है।


वैज्ञानिक तकनीक और नैसर्गिक उपचार का संगम


ऑक्युपेशनल थेरेपी केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि मानव जीवन को उसकी संपूर्ण क्षमता, गरिमा और गतिशीलता के साथ पुनर्स्थापित करने वाला वैज्ञानिक एवं मानवीय अनुशासन है। यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में उपचार, पुनर्वास और स्वास्थ्य संवर्धन के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य करती है। इसका उद्देश्य केवल रोग या चोट का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता, स्वतंत्रता और जीवन-गुणवत्ता को पुनः स्थापित करना है।


वर्तमान समय में जीवन शैली जनित रोगों, दुर्घटनाओं, वृद्धावस्था संबंधी चुनौतियों, खेल चोटों तथा मानसिक तनाव से उत्पन्न शारीरिक समस्याओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे परिदृश्य में ऑक्युपेशनल थेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह औषधियों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए प्राकृतिक, सुरक्षित और वैज्ञानिक उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार का मार्ग प्रशस्त करती है। साथ ही, यह निवारक स्वास्थ्य देखभाल को प्रोत्साहित कर भविष्य में होने वाली जटिलताओं और विकलांगताओं की संभावना को भी कम करती है। एक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ऑक्युपेशनल थेरेपी को स्वास्थ्य व्यवस्था के अभिन्न अंग के रूप में प्राथमिक स्तर से ही समाविष्ट किया जाए तथा इसकी सेवाएं समाज के प्रत्येक वर्ग तक सुलभ बनाई जाए। इससे न केवल रोगियों के पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की समग्र गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।


अंततः, जहां पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां जीवन की अवधि (Years to Life) बढ़ाने में योगदान देती हैं, वहीं ऑक्युपेशनल थेरेपी उन वर्षों में सक्रियता, स्वावलंबन और बेहतर जीवन-गुणवत्ता (Life to Years) का संचार करती है। इस दृष्टि से ऑक्युपेशनल थेरेपी आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की एक अनिवार्य आवश्यकता है, जो मानव को गतिहीनता से गतिशीलता, निर्भरता से आत्मनिर्भरता और सीमाओं से संभावनाओं की ओर अग्रसर करती है। भारतीय चिंतन के शाश्वत संदेश चरैवेति-चरैवेति (चलते रहो, आगे बढ़ते रहो) को वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हुए ऑक्युपेशनल थेरेपी वास्तव में स्वस्थ, सक्षम और सशक्त मानव समाज के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होती है। यह रिपोर्ट हेडगेवार आरोग्य संस्थान की ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. दीप्ति कारल (एम.ओ.टी. (मस्कुलोस्केलेटल), बी.ओ.टी., डी.एन.वाई.एस.) के साथ हुई विस्तृत बातचीत , उनके दीर्घकालिक चिकित्सीय अनुभव, व्यावहारिक अवलोकनों तथा ऑक्युपेशनल थेरेपी एवं पुनर्वास विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्ध शोध अध्ययनों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। </description><guid>54129</guid><pubDate>10-Jun-2026 12:19:48 pm</pubDate></item><item><title>जामुन खाने का सही समय क्या है? जानें हेल्थ के लिए सबसे अच्छा तरीका  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=54040</link><description>गर्मियों और बरसात के मौसम में मिलने वाला छोटा सा, काले और बैंगनी रंग का जामुन हर किसी को ही पसंद आता है. स्वाद में हल्का सा खट्टा-मीठा होने के साथ ही इसे सेहत के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. साइज मे छोटे होने के बावजूद भी आपको जामुन में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल जाते हैं. जब आप इसका इस्तेमाल रेगुलर बेसिस पर करना शुरू करते हैं तो आपकी इम्युनिटी तो बूस्ट होती ही है, बल्कि साथ ही यह डायबिटीज जैसी बीमारी में भी फायदेमंद साबित होता है. अगर आपको जामुन खाना पसंद है तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की होने वाली है. बता दें अगर जामुन को गलत समय या फिर गलत तरीके से खाया जाए, तो इससे आपके सेहत को फायदे की जगह पर नुकसान भी हो सकते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको जामुन खाने का सबसे सही समय और तरीका बताने जा रहे हैं. इसके अलावा हम 3 ऐसी गलतियों का भी जिक्र करने वाले हैं जो लोग अक्सर जामुन खाते समय अनजाने में कर देते हैं.
 जामुन खाने का सही समय क्या है? किसी भी फल का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही समय पर खाया जाए. जामुन खाने का सबसे अच्छा समय दोपहर का वक्त माना जाता है. आप इसे सुबह के ब्रेकफास्ट के एक से दो घंटे बाद या फिर दोपहर के लंच के बाद खा सकते हैं. इस समय इसे खाने से यह खाने को डाइजेस्ट करने में मदद करता है और शरीर को भरपूर एनर्जी देता है. वहीं, शाम के समय या फिर रात को आपको जामुन खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है जिससे खांसी-जुकाम या पेट में ऐंठन जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. क्या है जामुन खाने का सही तरीका? जामुन को हमेशा अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए, क्योंकि इसके ऊपर धूल-मिट्टी और बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं. जामुन को सादे पानी से धोने के बाद थोड़ी देर के लिए गुनगुने नमक के पानी में छोड़ देना सबसे अच्छा तरीका है. इसे खाते समय इस पर थोड़ा सा काला नमक या जीरा पाउडर छिड़कने से इसका स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ ही यह पेट में गैस भी नहीं बनने देता. इस बात का ख्याल रखें कि जामुन को हमेशा चबाकर खाएं और इसकी गुठली को फेंक दें. हालांकि, गुठली को सुखाकर बनाया गया पाउडर शुगर के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 3 गलतियां? खाली पेट जामुन खाना कई लोग सुबह उठते ही या लंबे समय तक भूखे रहने के बाद जामुन खा लेते हैं. आपकी सेहत के लिए यह बेहद ही नुकसानदेह हो सकता है. जामुन में नैचुरली खट्टापन होता है, जिस वजह से इसे खाली पेट खाने से पेट में तेज एसिडिटी, जलन, दर्द और जी मिचलाने की प्रॉब्लम हो सकती है. जामुन खाने के तुरंत बाद पानी पीना जामुन खाने के तुरंत बाद कभी भी पानी नहीं पीना चाहिए. ऐसा करने से पेट का डाइजेस्टिव सिस्टम बिगड़ जाता है। इससे आपको डायरिया, पेट में मरोड़ या गैस की गंभीर समस्या हो सकती है. जामुन खाने के कम से कम 30 से 45 मिनट बाद ही पानी पिएं. जामुन और दूध का साथ में सेवन आपको भूलकर भी कभी जामुन खाने के तुरंत पहले या बाद में दूध, दही या चाय-कॉफी जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. दूध और जामुन का कॉम्बिनेशन शरीर में जाकर टॉक्सिक एलिमेंट्स बना सकता है, जिससे स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम्स, एलर्जी या बदहजमी जैसी दिक्कतें आ सकती हैं.
 </description><guid>54040</guid><pubDate>09-Jun-2026 12:13:28 pm</pubDate></item><item><title>रोज तरबूज से सेहत को बड़ा लाभ  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=54039</link><description>गर्मियों में जैसे ही तापमान तेजी से बढ़ता है, लोगों के खानपान में भी बदलाव आने लगता है। इस मौसम में शरीर को ऐसी चीजों की जरूरत होती है जो न केवल ठंडक दें बल्कि पानी की कमी को भी पूरा करें। इसी वजह से तरबूज को गर्मियों का सबसे लोकप्रिय फल माना जाता है। इसका मीठा स्वाद, ज्यादा रस और ठंडक देने वाली प्रकृति इसे हर उम्र के लोगों की पसंद बनाती है। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई इस फल को बड़े चाव से खाता है। अक्सर लोग इसे सिर्फ एक साधारण फल समझते हैं जो प्यास बुझाने या गर्मी में राहत देने का काम करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि इसके अंदर कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। तरबूज में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। गर्मियों में जब पसीने के कारण शरीर से पानी और नमक दोनों की कमी हो जाती है, तब तरबूज इस कमी को पूरा करने में सहायक होता है। इसके नियमित सेवन से थकान कम महसूस होती है और शरीर में ताजगी बनी रहती है। 
इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर को हल्की ऊर्जा भी देती है, जिससे कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा तरबूज में कई तरह के विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए आंखों के लिए अच्छा माना जाता है, जबकि विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायता करता है। साथ ही इसमें ऐसे तत्व भी होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। गर्मी के मौसम में त्वचा अक्सर रूखी और थकी हुई दिखने लगती है, ऐसे में तरबूज का सेवन इसे अंदर से पोषण देता है। तरबूज का एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसमें फाइबर की मात्रा मौजूद होती है जो पेट को साफ रखने और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है। हल्का और आसानी से पचने वाला होने के कारण यह हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है। खासकर गर्मियों में भारी भोजन की बजाय लोग हल्के और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ पसंद करते हैं, जिसमें तरबूज एक अच्छा विकल्प बन जाता है।


आजकल लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं और अपनी डाइट में प्राकृतिक चीजों को शामिल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में तरबूज एक ऐसा फल है जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है। इसे नाश्ते में, दोपहर के समय या शाम को हल्के स्नैक के रूप में भी खाया जा सकता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि तरबूज सिर्फ गर्मी में राहत देने वाला फल नहीं है, बल्कि यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाने वाला एक संपूर्ण फल है, जिसे नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
 </description><guid>54039</guid><pubDate>09-Jun-2026 12:08:50 pm</pubDate></item><item><title>गर्मी से राहत: पारंपरिक थादल बनाए शरीर को ठंडा </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53980</link><description>गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी, पेट में गर्मी, एसिडिटी, अपच और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में लोग अक्सर यह सोचते हैं कि ऐसा क्या खाया या पिया जाए जिससे शरीर को ठंडक मिले और स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। इन्हीं समस्याओं का एक पारंपरिक और प्रभावी समाधान है **थादल (Thadal)**, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने और हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। यह एक पारंपरिक शीतल पेय है, जो खासतौर पर गर्म इलाकों में बेहद लोकप्रिय है। थादल न केवल शरीर को तरोताजा रखता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत करने में सहायक माना जाता है। 
विशेषज्ञों और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, थादल में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे बादाम, सौंफ, खसखस, इलायची और काली मिर्च शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करती हैं। यह पेय शरीर में पानी की कमी को दूर करता है और ऊर्जा को बनाए रखता है। थादल बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान मानी जाती है। इसे बनाने के लिए बादाम, सौंफ और खसखस को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो दिया जाता है। इसके बाद इन सभी सामग्री को पीसकर दूध या पानी में मिलाया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी या मिश्री डाली जाती है। कुछ लोग इसमें इलायची और गुलाब जल भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। यह पेय न केवल बड़ों के लिए फायदेमंद है, बल्कि बच्चों को भी यह बेहद पसंद आता है। 
गर्मी के दिनों में इसे नियमित रूप से पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, थादल जैसे शीतल पेय शरीर की पाचन क्रिया को सुधारते हैं और पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जा प्रदान करता है और थकान को दूर करता है। गर्मियों में बढ़ते तापमान के बीच लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक और घरेलू पेय जैसे थादल अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। कुल मिलाकर, गर्मी के मौसम में **थादल एक बेहतरीन पारंपरिक पेय** है, जो शरीर को ठंडा, हाइड्रेटेड और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि इसे घर पर आसानी से तैयार भी किया जा सकता है। इसलिए इस गर्मी में शरीर को राहत देने के लिए थादल एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।


 </description><guid>53980</guid><pubDate>08-Jun-2026 11:55:20 am</pubDate></item><item><title>टेस्टी और हेल्दी: घर पर बनाएं लाजवाब बीटरूट पनीर कबाब </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53979</link><description>खाने में अगर कुछ नया और स्वादिष्ट मिले, तो उसका मजा ही अलग होता है। ऐसे में हेल्दी और टेस्टी स्नैक्स का विकल्प हमेशा पसंद किया जाता है। आज हम बात कर रहे हैं **बीटरूट पनीर कबाब** की, जो न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह स्नैक बनाने में आसान है और इसे घर पर तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं। बीटरूट पनीर कबाब उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो मांसाहारी डिशेज के बजाय शाकाहारी विकल्प पसंद करते हैं। आमतौर पर लोग चिकन कबाब खाना पसंद करते हैं, लेकिन बीटरूट पनीर कबाब खाने के बाद आप इसे बार-बार बनाने का मन करेंगे। यह स्नैक शाम की हल्की भूख मिटाने के लिए, बच्चों के टिफिन के लिए या अचानक आए मेहमानों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।
 बीटरूट पनीर कबाब बनाने में मुख्य सामग्री **बीटरूट, पनीर, हरी मिर्च, हरा धनिया और बेसन** होती है। बीटरूट को उबालकर मैश किया जाता है और पनीर के साथ मिलाया जाता है। इसमें मसालों का संतुलन खाने को और स्वादिष्ट बनाता है। हरी मिर्च और हरा धनिया स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाते हैं। तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे कबाब आकार के गोले बनाए जाते हैं और हल्के तेल में तले या ओवन में बेक किए जाते हैं। इस डिश की खासियत यह है कि यह **स्वस्थ और स्वादिष्ट** दोनों का संतुलन बनाए रखती है। बीटरूट में मौजूद पोषक तत्व जैसे फाइबर, विटामिन और मिनरल्स शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। वहीं पनीर प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जो मांसाहारी विकल्पों का सही शाकाहारी विकल्प बनाता है। इसलिए यह स्नैक न केवल टेस्टी है बल्कि हेल्थी भी है। बीटरूट पनीर कबाब बच्चों को भी बेहद पसंद आता है।
 टिफिन में इसे रखने से बच्चे हेल्दी स्नैक का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा, अचानक आए मेहमानों के लिए यह एक बढ़िया अपीलिंग स्नैक है। इसे हरी चटनी या ताजे दही के साथ सर्व किया जा सकता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। कुल मिलाकर, **बीटरूट पनीर कबाब** घर पर बनाने में आसान, हेल्दी और स्वाद में लाजवाब स्नैक है। यह शाम की हल्की भूख मिटाने, बच्चों के टिफिन के लिए या अचानक आए मेहमानों के लिए परफेक्ट ऑप्शन है। यदि आप हेल्थ और स्वाद दोनों का संतुलन चाहते हैं, तो इसे अपनी रेसिपी में जरूर शामिल करें। यह डिश आपके खाने की मेज को और भी रंगीन और स्वादिष्ट बना देगी।

 </description><guid>53979</guid><pubDate>08-Jun-2026 11:50:07 am</pubDate></item><item><title>मुंबई में स्वाद का खजाना: बटर बन्स, नीर और कई लाजवाब व्यंजन  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53954</link><description>एक क्रिस्पी डिश, जो सादी हो या मसालेदार प्याज-आलू मसाला से भरी हो, गरमागरम स्वादिष्ट सांभर या ताज़ी पिसी नारियल की चटनी में डुबोकर खाई जाती है, यह देश भर में लोगों को बहुत पसंद आती है। बेन्ने या मक्खन से सराबोर डोसा आजकल सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है। सादा डोसा के अलावा भी ऐसे डोसा स्टॉप देखें जो और भी अच्छे हों।

अखिल अय्यर और श्रेया नारायण ने बांद्रा में बेन्ने को बैंगलोर के दर्शिनी-स्टाइल (QSR) खाने की जगह के तौर पर लॉन्च किया, जिसमें एक फिल्टर कॉफी कियोस्क भी था। बेन्ने या सफेद मक्खन से भरे डोसे और गरमागरम पोडी इडली दिल को सुकून देने वाले बन गए। इसकी सफलता से उत्साहित होकर, इसने बांद्रा से स्टैंड-एंड-ईट सुविधा के साथ जुहू में सीमित बैठने की जगह तक विस्तार किया, और आज चौपाटी में इसका तीसरा बड़ा आउटलेट है, जिसमें खड़े होने और बैठने के सेक्शन हैं, जहाँ थट्टे इडली, फिल्टर कॉफी सॉफ्ट सर्व, आइस्ड फिल्टर कॉफी और मिठाई के लिए मैसूरपाक मिलता है। बोरीवली, चेंबूर, लोअर परेल में मालगुडी साउथ इंडियन रेस्टो-कैफ़े म्यूज़िक आइकॉन शंकर महादेवन का कैफ़े साउथ इंडियन स्नैक्स परोसता है जो नई राह दिखाता है।
 दक्षिणी डिशेज़ को नए तरीके से बनाना इसकी USP है। दावणगेरे बेने और मुलबगल लेगेसी डोसा ज़रूर ट्राई करें, यह 100 साल पुरानी कन्नड़ रेसिपी है  यह गाढ़ा और फूला हुआ है, बाहर से घी से क्रिस्पी और अंदर से मुलायम। प्लेन, मसाला, चीज़ और दूसरी वैरायटी में से अपनी पसंद का खाना चुनें। डोसे में इंटरनेशनल ट्विस्ट के लिए ट्रफल ऑयल, मशरूम और एडामे के साथ एडवेंचर करें। सिग्नेचर मालगुडी पिकांटे या फ़िल्टर कापी का मज़ा लें। इडली पसंद करने वालों के पास चुनने के लिए कई तरह के ऑप्शन हैं। खाने के शौकीन लोग श्रीलंकाई तमिल करी के साथ इडियप्पम या बिसिबेले बिबिमपाप और फ़िल्टर कापी पन्नाकोटा का मज़ा ले सकते हैं। असल में, मेन्यू में पुराने तरीकों को क्रिएटिव अंदाज़ के साथ मिलाया गया है।

रामेश्वरम कैफ़े, चर्चगेट को-फ़ाउंडर राघवेंद्र राव के मशहूर कैफ़े में नीचे के लेवल पर दर्शिनी-स्टाइल फ़ॉर्मेट है, जबकि ऊपर के लेवल पर बैठने का सिस्टम है। ताज़ी चीज़ों और पारंपरिक तरीकों से घी पोडी/बेन्ने मसाला डोसा, गार्लिक रोस्ट डोसा, कॉटन-सॉफ़्ट इडली, मेदू वड़ा और चटनी की एक परत के साथ केम्पू चटनी डोसा परोसने ने इस कैफ़े को मशहूर बना दिया है। कॉम्प्लिमेंट्री रसम से शुरू करें, फिर घी से भरे डोसे, घी पोडी इडली के साथ टैंगी सांभर, उनकी सिग्नेचर चटनी, और आखिर में केसरी (शीरा), क्रीमी फ़िल्टर कॉफ़ी सॉफ़्टी या हॉट फ़िल्टर कापी के साथ परोसें। आनंद भवन, माटुंगा इस हैश हाउस के डोसा मेन्यू में सादा डोसा से लेकर घी, मसाला, रवा, प्याज़ रवा, मैसूर मसाला, बेंगलुरु बेन्ने और कई और कॉम्बो तक की एक लंबी लिस्ट है। डोसा के अलावा इडली, भज्जी, पकौड़ा, पेसरतु, पोंगल, सेवई और उत्तपम भी कई तरह के ऑप्शन में मिलते हैं।
 चटनी और सांभर के साथ परोसा जाने वाला यह साउथ इंडियन स्नैक पसंद करने वालों के लिए एक बढ़िया ब्रेकफ़ास्ट और टिफ़िन की जगह है। राम आश्रय, माटुंगा अपने डोसा के लिए मशहूर, यह सात दशक से भी ज़्यादा पुराना उडुपी रेस्टोरेंट खासकर ब्रेकफ़ास्ट के लिए बहुत भीड़ खींचता है। एक सिंपल, बिना किसी झंझट के मेन्यू में क्रिस्प साडा, मसाला, प्याज़, रवा से लेकर मैसूर डोसा के अलावा उपमा, वड़ा, इडली और गोली भज्जी भी हैं। उनका नीर डोसा भी ट्राई करने लायक है। बनाना लीफ़  मलाड, नेरुल, मुलुंड, और बाकी सभी आउटलेट मसालेदार आलू की स्टफिंग वाले बेन्ने मसाला डोसा के लिए आएं, हेल्दी और डेज़र्ट वाले चोको डोसा के लिए रुकें। बेन्ने ओपन मसाला में स्वादिष्ट आलू मिक्स और ढेर सारा मक्खन होता है। क्लासिक मैसूर मसाला/करा रवा के अलावा, पाव भाजी जैसे फ्यूज़न डोसा और चीज़ के साथ चटपटे मसालेदार स्वाद वाले रजनी डोसा भी बहुत पसंद किए जाते हैं। हेल्थ का ध्यान रखने वाले लोग रागी/रागी मसाला या पोडी अनियन डोसा ले सकते हैं। कोझुकट्टई बॉम्ब्स, थायर/रसम वड़ा, उत्तपम, उपमा भी कुछ ऐसे ही स्वादिष्ट व्यंजन हैं।
 </description><guid>53954</guid><pubDate>07-Jun-2026 12:47:41 pm</pubDate></item><item><title>अब पूरे देश में पसंद किया जा रहा है थेपला, जानिए लसूनी रेसिपी </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53953</link><description>थेपला एक पारंपरिक गुजराती व्यंजन है, जिसे अब भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोग बड़े चाव से खाने लगे हैं। यह न सिर्फ नाश्ते के रूप में लोकप्रिय है, बल्कि ट्रैवल स्नैक और हल्के लंच के विकल्प के तौर पर भी काफी पसंद किया जाता है। लंबे सफर के दौरान यह डिश आसानी से खराब नहीं होती, इसी वजह से यह यात्रियों की पहली पसंद बन चुकी है। मुख्य रूप से थेपला गेहूं के आटे और बेसन को मिलाकर तैयार किया जाता है। कुछ जगहों पर इसमें बाजरा या ज्वार का आटा भी मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ जाते हैं। 
पारंपरिक रूप से Methi Thepla सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है, जिसमें ताजी मेथी की पत्तियों को आटे में मिलाकर रोटी जैसा पराठा तैयार किया जाता है। हाल के समय में थेपला की कई वैरायटी सामने आई हैं, जिनमें अलग-अलग फ्लेवर और ट्विस्ट जोड़े जा रहे हैं। इसी क्रम में अब लसूनी थेपला यानी गार्लिक फ्लेवर वाला थेपला भी लोगों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। इसका स्वाद तीखा और सुगंधित होता है, जो इसे आम मेथी थेपला से अलग बनाता है। लसूनी थेपला बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में बेसन मिलाया जाता है। इसमें बारीक कटा या कद्दूकस किया हुआ लहसुन, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक और थोड़ा सा तेल डाला जाता है। 
सभी सामग्री को अच्छे से मिलाकर नरम आटा गूंथा जाता है। कुछ लोग इसमें दही मिलाकर भी आटा तैयार करते हैं, जिससे थेपला और भी नरम और स्वादिष्ट बनता है। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर बेल लिया जाता है और तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लिया जाता है। तैयार होने के बाद इसे दही, अचार या चाय के साथ परोसा जा सकता है। यह डिश झटपट बन जाती है और खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार थेपला जैसी पारंपरिक डिश न केवल स्वाद में अच्छी होती है, बल्कि यह सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें अनाज और मसालों का संतुलित उपयोग होता है।
 कुल मिलाकर, Methi Thepla की तरह लसूनी थेपला भी एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है, जो अब पारंपरिक स्वाद के साथ नए फ्लेवर का आनंद भी दे रहा है। यह रेसिपी घर पर आसानी से बनाई जा सकती है और हर उम्र के लोगों को पसंद आती है।

 </description><guid>53953</guid><pubDate>07-Jun-2026 12:37:20 pm</pubDate></item><item><title>ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन में फेफड़ों के कैंसर के जोखिम के लिए प्रारंभिक रक्त मार्कर की पहचान की गई है।</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53883</link><description>एक अध्ययन से पता चला है कि हाल ही में पहचाना गया एक रक्त संकेत निदान से पांच साल पहले ही फेफड़ों के कैंसर के जोखिम की भविष्यवाणी कर सकता है, जिससे प्रारंभिक रोकथाम का एक संभावित मार्ग खुल सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के वाल्टर और एलिजा हॉल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआई) द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्ष उन लोगों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं जिन्हें फेफड़ों के कैंसर का निदान होने से पहले ही निवारक दवाओं से लाभ होगा।
इस अध्ययन में 48,000 से अधिक रक्त नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें 14 प्रोटीन के एक ऐसे समूह की पहचान की गई जो पांच वर्षों के भीतर फेफड़ों के कैंसर के जोखिम की भविष्यवाणी करता है और धूम्रपान न करने वालों सहित आठ अंतरराष्ट्रीय डेटासेट में इसकी पुष्टि की गई।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि यह संकेत ट्यूमर से ही नहीं आता है, बल्कि फेफड़ों के एक परिवर्तित सूजन वाले वातावरण को दर्शाता है जो कैंसर से पहले होता है, और एक पूर्व-रोग चरण को उजागर करता है जिसमें हस्तक्षेप संभव हो सकता है।
अध्ययन में यह बात सामने आई है कि फेफड़ों का कैंसर विश्व स्तर पर कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बना हुआ है, और वर्तमान स्क्रीनिंग कार्यक्रम धूम्रपान के इतिहास वाले वृद्ध लोगों तक ही सीमित हैं, जिसके कारण कई मामले देर से पता चलने तक अनदेखे रह जाते हैं।
डब्ल्यूईएचआई प्रयोगशाला की प्रमुख क्लेयर वीडेन, जो इस शोध पत्र की एक संबंधित लेखिका भी हैं, ने कहा कि यह अध्ययन ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर के लोगों के लिए अधिक समावेशी और प्रभावी स्क्रीनिंग दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हो सकता है।
ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट में अपने कार्यकाल के दौरान शोध करने वाली वीडेन ने कहा, ऐसा करने से, ये निष्कर्ष हमें एक ऐसे भविष्य के करीब लाते हैं जहां कैंसर के विकसित होने से पहले ही प्रारंभिक हस्तक्षेप संभव हो सकता है।
क्रिक इंस्टीट्यूट के क्लिनिकल रिसर्च डायरेक्टर चार्ली स्वैंटन ने कहा कि यह अध्ययन इस बढ़ते विचार का समर्थन करता है कि उम्र से संबंधित कुछ सामान्य बीमारियों में सूजन की एक सामान्य, पूर्व-लक्षण अवस्था होती है, और यह संकेत अंततः फेफड़ों के कैंसर और अन्य फेफड़ों की बीमारियों का पूर्वानुमान लगाने और उन्हें रोकने में मदद कर सकता है। </description><guid>53883</guid><pubDate>06-Jun-2026 3:29:19 pm</pubDate></item><item><title>देसी या हाइब्रिड खीरा खरीदने से पहले जान लें इनके फायदे </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53845</link><description>गर्मियों के मौसम में खीरा सलाद, रायता और ठंडे स्नैक्स के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। यह सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि हाइड्रेटिंग और हेल्दी भी माना जाता है। गर्मियों की तेज़ धूप में शरीर को तरोताजा रखने में खीरा बहुत मददगार साबित होता है। लेकिन जब आप मार्केट से खीरा खरीदने जाते हैं, तो अक्सर कंफ्यूजन हो जाता है कि कौन-सा खीरा लेना चाहिए। बाजार में मुख्य रूप से देसी और हाइब्रिड खीरे की दो किस्में उपलब्ध होती हैं। इन दोनों में दिखने और स्वाद में फर्क होता है। देसी खीरे आमतौर पर छोटे और हल्के हरे रंग के होते हैं। इनका स्वाद हल्का और ताज़गी भरा होता है। 
देसी खीरे के स्वास्थ्य लाभ अधिक होते हैं क्योंकि यह रासायनिक रूप से कम प्रोसेस्ड होते हैं। वहीं, हाइब्रिड खीरे लंबे और मोटे होते हैं। इनकी सतह चिकनी और चमकदार दिखती है। हाइब्रिड खीरे जल्दी बड़े होते हैं और इन्हें बाजार में आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता देते हैं, तो देसी खीरे बेहतर विकल्प हैं। वहीं, अगर आप उपलब्धता और आकार को देखते हैं तो हाइब्रिड खीरे भी सही विकल्प हो सकते हैं। खरीदते समय ध्यान दें कि खीरे का रंग समान और हरा हो। किसी भी खीरे में पीलापन, दाग या नरम हिस्से न हों। ऐसे खीरे लंबे समय तक फ्रिज में भी सुरक्षित रहते हैं।
 इसके अलावा, खीरे को धोकर और हल्के छिलके के साथ खाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। सलाद या रायते में इस्तेमाल करने से पहले खीरे को छोटे टुकड़ों में काटकर ही प्रयोग करना चाहिए। कुल मिलाकर, गर्मियों में खीरा स्वाद, पोषण और हाइड्रेशन का बेहतरीन स्रोत है। बाजार में देसी और हाइब्रिड खीरे उपलब्ध हैं, लेकिन स्वास्थ्य और स्वाद के लिहाज से देसी खीरे को तरजीह दी जा सकती है।
 </description><guid>53845</guid><pubDate>06-Jun-2026 11:19:49 am</pubDate></item><item><title>खट्टे-मीठे जामुन में छिपे हैं सेहत के कई फायदे  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53844</link><description>गर्मी और बरसात के बीच आने वाला जामुन एक ऐसा मौसमी फल है, जो अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए काफी पसंद किया जाता है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ जामुन सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में बाजारों में इसकी मांग बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जामुन में कई जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है और नियमित मात्रा में इसका सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है। जामुन को खासतौर पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
 इसके अलावा यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी सहायक हो सकता है। कई लोग इसे पेट से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोगी मानते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जामुन में मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक माने जाते हैं। जामुन का सेवन करने से शरीर को ताजगी मिलती है और यह गर्मी के मौसम में हाइड्रेशन बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद तत्व त्वचा और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।
 हालांकि विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में ही जामुन खाने की सलाह देते हैं। किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इसका सेवन भी संतुलन के साथ करना बेहतर माना जाता है। कुल मिलाकर, जामुन सिर्फ स्वाद का ही नहीं बल्कि पोषण का भी अच्छा स्रोत है। खट्टे-मीठे स्वाद के साथ यह शरीर को कई आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
 </description><guid>53844</guid><pubDate>06-Jun-2026 11:16:29 am</pubDate></item><item><title>हल्की, स्वादिष्ट और पौष्टिक: गर्मियों के लिए बेस्ट है लौकी दही तड़का</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53783</link><description>गर्मियों के मौसम में किचन में ज्यादा समय बिताना किसी चुनौती से कम नहीं होता। बढ़ती गर्मी और उमस के बीच हर कोई ऐसी रेसिपी की तलाश में रहता है जो जल्दी तैयार हो जाए, स्वादिष्ट हो और सेहत के लिए भी फायदेमंद हो। ऐसे में लौकी दही तड़का एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह डिश सिर्फ 10 मिनट में तैयार हो जाती है और गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम भी करती है।
लौकी दही तड़का की खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली दोनों मुख्य सामग्रीलौकी और दहीपोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है, जबकि दही पाचन को बेहतर बनाने वाले प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत माना जाता है।
ऐसे बनाएं लौकी दही तड़का
सबसे पहले लौकी को अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। एक बाउल में दही को अच्छी तरह फेंटकर उसमें स्वादानुसार नमक और थोड़ा-सा हल्दी पाउडर मिला लें।
अब एक पैन में थोड़ा तेल या घी गर्म करें। इसमें राई, जीरा, कड़ी पत्ता और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर तड़का लगाएं। जब मसालों की खुशबू आने लगे, तब इसमें लौकी के टुकड़े डालकर कुछ मिनट तक हल्का भून लें। लौकी नरम होने पर इसमें तैयार दही डालें और 2-3 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।
अंत में ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और थोड़ा लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर सर्व करें। अगर आप इसका स्वाद और बढ़ाना चाहते हैं, तो तड़के में चुटकीभर हींग का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
सेहत और स्वाद दोनों का ख्याल
लौकी दही तड़का न केवल हल्का और स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह पोषण से भी भरपूर है। यह डिश आसानी से पच जाती है, इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसे चपाती, पराठे या सादे चावल के साथ परोसा जा सकता है।
अगर आप गर्मियों में कम समय में स्वादिष्ट और हेल्दी भोजन तैयार करना चाहते हैं, तो लौकी दही तड़का आपकी रसोई के लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। एक बार इसे जरूर ट्राई करें और परिवार के साथ इसके स्वाद का आनंद लें। </description><guid>53783</guid><pubDate>05-Jun-2026 11:35:26 am</pubDate></item><item><title>प्रोटीन पाउडर का अत्यधिक सेवन पड़ सकता है भारी, जानें संभावित स्वास्थ्य जोखिम </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53782</link><description>आजकल जिम जाने वाले लोगों के बीच प्रोटीन शेक और प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। मसल्स बनाने और फिटनेस लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लोग इन सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। हालांकि, प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं प्रोटीन सप्लीमेंट्स के ज्यादा इस्तेमाल से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में।
1. पाचन संबंधी समस्याएं
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोटीन पाउडर का अधिक सेवन पेट की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इससे पेट में ऐंठन, गैस, ब्लोटिंग और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर जिन लोगों को डेयरी या कुछ विशेष प्रोटीन स्रोतों से संवेदनशीलता होती है, उनमें ये लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं।
2. डिहाइड्रेशन का खतरा
बहुत अधिक प्रोटीन लेने पर शरीर को उसके अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। इससे बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
3. किडनी पर बढ़ता दबाव
अत्यधिक प्रोटीन का सेवन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। जिन लोगों को पहले से किडनी संबंधी समस्याएं हैं, उनके लिए हाई-प्रोटीन डाइट नुकसानदायक साबित हो सकती है और उनकी स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
4. बढ़ सकता है वजन
कई प्रोटीन पाउडर में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी मौजूद होती है। यदि आप सामान्य भोजन के साथ नियमित रूप से कई प्रोटीन शेक भी लेते हैं, तो कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है, जिससे समय के साथ वजन बढ़ने की संभावना रहती है।
5. मिलावट और गुणवत्ता की चिंता
प्रोटीन पाउडर डाइटरी सप्लीमेंट्स की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इनके निर्माण और गुणवत्ता की निगरानी हमेशा समान स्तर पर नहीं होती। कुछ मामलों में इनमें हेवी मेटल्स या ऐसे तत्व पाए गए हैं जिनका उल्लेख लेबल पर नहीं किया गया था।
6. मुंहासों की समस्या
कुछ अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक प्रोटीन सेवन शरीर में इंसुलिन और IGF-1 हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है। इससे त्वचा में तेल का उत्पादन बढ़ता है, जिससे पोर्स बंद हो सकते हैं और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है।
7. पोषण असंतुलन
यदि कोई व्यक्ति प्राकृतिक और संतुलित आहार की बजाय प्रोटीन सप्लीमेंट्स पर अधिक निर्भर हो जाता है, तो उसे अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इससे शरीर में पोषण असंतुलन पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। </description><guid>53782</guid><pubDate>05-Jun-2026 11:32:43 am</pubDate></item><item><title>जामुन खाने के फायदे: स्वाद के साथ सेहत भी सुधरे </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53694</link><description>जामुन सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद फल है। आयुर्वेद में इसे अमृत फल कहा गया है, क्योंकि इसमें कई जरूरी विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर मौजूद हैं। नियमित रूप से जामुन का सेवन कई तरह की सेहत संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जामुन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फल प्राकृतिक उपाय के रूप में उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा जामुन में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर से फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालते हैं, जिससे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।
 जामुन का सेवन दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। जामुन में विटामिन C और आयरन भी अच्छी मात्रा में होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। जामुन का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। ताजा जामुन सीधे खाने के अलावा इसका जूस, स्मूदी, पाउडर या सूप भी बनाया जा सकता है। जामुन की पत्तियों का उपयोग भी आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है।
 विशेषज्ञों की सलाह है कि जामुन का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से पेट में एसिडिटी या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। वर्षों से जामुन का उपयोग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, वजन नियंत्रण और त्वचा की सुंदरता के लिए भी किया जाता रहा है। आयुर्वेद में इसे ब्लड प्यूरीफायर और टॉनिक के रूप में भी माना गया है। संक्षेप में, जामुन सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी गुणकारी है। यह ब्लड शुगर नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य, पाचन सुधार, इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे स्वास्थ्यवर्धक फल मानते हैं।
 </description><guid>53694</guid><pubDate>04-Jun-2026 11:55:28 am</pubDate></item><item><title>गर्मियों में आम का जलवा, लोग पेड़ से सीधे आम तोड़ रहे  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53693</link><description>गर्मियों का मौसम आते ही आम खाने के शौकीनों में खास उत्साह देखा जाता है। आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि लोगों की यादों और भावनाओं से जुड़ा स्वाद बन चुका है। भारत में आम की कई किस्में पाई जाती हैं, जैसे केसर, लंगड़ा, अल्फांसो और दशहरी। हर साल गर्मियों में लोग अपने पसंदीदा आम का स्वाद लेने के लिए अलग-अलग जगहों पर पहुंचते हैं। बाजारों में अब आम हर तरह के आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन लोगों के बीच पेड़ से सीधे आम तोड़कर खाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसा करना न केवल फल खाने का आनंद बढ़ाता है, बल्कि बच्चों और युवाओं के बीच एक तरह की उत्सुकता और रोमांच भी पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ से सीधे आम तोड़ने में फल का स्वाद और भी ताजा और मीठा लगता है।
साथ ही, यह अनुभव लोगों को प्रकृति के करीब लाता है और खाने के प्रति अलग ही उत्साह पैदा करता है। आम खाने के शौकीनों के लिए यह एक तरह का स्मरणीय अनुभव बन गया है। भारत में आम का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। खासकर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आम के बागान हैं। गर्मियों में लोग इन बागानों का दौरा कर के ताजे आम का आनंद लेते हैं। वहीं, शहरों में भी कई किसानों द्वारा सीधे आम बेचने की व्यवस्था की जाती है, जिससे लोगों को पेड़ से तोड़ने जैसा अनुभव मिलता है। सर्दियों में आम नहीं होते, इसलिए गर्मियों का यह फल हर किसी के लिए इंतजार का प्रतीक बन गया है।
इसके अलावा, आम खाने के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। इसमें विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। संक्षेप में, गर्मियों में आम का क्रेज केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के लिए अनुभव और आनंद का भी प्रतीक बन चुका है। लोग अब न केवल बाजार से आम खरीदते हैं बल्कि पेड़ से सीधे तोड़कर खाने का मज़ा लेना पसंद कर रहे हैं। यह ट्रेंड देशभर में तेजी से फैल रहा है और आम के प्रेमियों के लिए गर्मियों की खुशियों में चार चांद लगा रहा है। </description><guid>53693</guid><pubDate>04-Jun-2026 11:53:02 am</pubDate></item><item><title>फाइबरमैक्सिंग क्या है? वायरल हेल्थ ट्रेंड के फायदे और जोखिम जानें  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53621</link><description>सोशल मीडिया पर अक्सर नए वेलनेस ट्रेंड शेयर होते रहते हैं, और उनमें से एक जो पॉपुलर हो रहा है, वह है फाइबरमैक्सिंग। यह प्रैक्टिस पूरे दिन फाइबर इनटेक बढ़ाने पर फोकस करती है। सपोर्टर्स का कहना है कि यह डाइजेशन को बेहतर बनाने, वेट मैनेजमेंट में मदद करने और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि यह ट्रेंड न्यूट्रिशनल साइंस पर आधारित है, लेकिन एक्सपर्ट्स फाइबर से भरपूर खाना खाने से पहले कुछ ज़रूरी बातों पर विचार करने की सलाह देते हैं। फाइबरमैक्सिंग क्या है? आसान शब्दों में, फाइबरमैक्सिंग एक न्यूट्रिशन ट्रेंड है जो लोगों को अपनी डाइट में ज़्यादा फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज शामिल करके फाइबर इनटेक बढ़ाने के लिए बढ़ावा देता है। इस डाइट का मकसद है कि आप जो खा रहे हैं उसमें फाइबर कंजम्पशन की लिमिट को पार कर जाएं। आम हेल्दी खाने की सलाह के उलट, फाइबरमैक्सिंग ज़्यादा सोच-समझकर और नंबरों पर आधारित होती है।
 बहुत से लोग रोज़ाना फाइबर इनटेक को ट्रैक करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे दूसरे न्यूट्रिशन ट्रेंड्स में अक्सर प्रोटीन इनटेक को ट्रैक किया जाता है। फाइबरमैक्सिंग के फायदे फाइबरमैक्सिंग से कई तरह के फायदे मिलते हैं। यहाँ कुछ खास फायदे दिए गए हैं: पेट की सेहत के लिए अच्छा डाइट में फाइबर रेगुलर पॉटी करने में मदद करता है, और अलग-अलग तरह के फाइबर डाइजेस्टिव सिस्टम के अलग-अलग कामों में मदद करते हैं। यह फायदा सबसे ज़्यादा तब दिखता है जब फाइबर को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए और उसे सही हाइड्रेशन के साथ लिया जाए। वज़न मैनेजमेंट में मदद करता है फाइबर से भरपूर खाना पेट भरने वाला होता है और लोगों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है, जिससे लोग खाने के बाद संतुष्ट महसूस कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि फाइबर वज़न कम करने का तरीका है, लेकिन यह ज़्यादा स्टेबल एनर्जी और भूख के पैटर्न में मदद कर सकता है।


यह दिल की सेहत के लिए अच्छा है हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, सही फाइबर लेने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बेहतर हो सकता है, और यह दिल की बीमारियों का खतरा भी कम करता है। क्लीवलैंड क्लिनिक में छपी एक स्टडी में कहा गया है कि घुलनशील फाइबर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) को कम करने में मदद करता है, जिसे अक्सर खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। यह शुगर लेवल को रेगुलेट करने में मदद करता है फाइबर शरीर में कार्बोहाइड्रेट को पचाने और एब्ज़ॉर्ब करने के तरीके को धीमा करने में मदद करता है। यह खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल में तेज़ी से होने वाली बढ़ोतरी को कम कर सकता है। यह फायदा उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है जो अपनी मेटाबोलिक हेल्थ को बेहतर बनाना चाहते हैं। यह लोगों को काफ़ी फ़ाइबर लेने में मदद करता है ज़्यादातर लोगों को अपने रोज़ के फ़ाइबर टारगेट से काफ़ी फ़ाइबर नहीं मिल पाता, यही एक वजह है कि हेल्थ प्रोफ़ेशनल्स और डाइटीशियंस के बीच इस ट्रेंड ने ध्यान खींचा है। 


फ़ाइबरमैक्सिंग के जोखिम हालांकि फ़ाइबरमैक्सिंग से कई हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं, लेकिन ज़्यादा मात्रा में फ़ाइबर लेने से ये समस्याएं हो सकती हैं: ब्लोटिंग फ़ाइबर का सेवन अचानक बढ़ाने से ब्लोटिंग और पेट में तकलीफ़ हो सकती है, खासकर अगर डाइजेस्टिव सिस्टम को हाई-फ़ाइबर डाइट की आदत न हो। कब्ज़ क्योंकि फ़ाइबर हेल्दी और रेगुलर पॉटी के लिए लिया जाता है, इसलिए बिना काफ़ी लिक्विड लिए फ़ाइबर बढ़ाने से कब्ज़ ठीक होने के बजाय और बिगड़ सकता है। पाचन संबंधी तकलीफ़ जिन लोगों को पाचन संबंधी दिक्कतें हैं, अगर वे अपना फ़ाइबर का सेवन बहुत ज़्यादा बढ़ा दें, तो उन्हें पेट में ऐंठन और पॉटी की आदतों में बदलाव महसूस हो सकता है। डिहाइड्रेशन और ब्लॉकेज ओहियो स्टेट मेडिकल के अनुसार, फ़ाइबर पानी सोख लेता है।


 काफ़ी हाइड्रेशन के बिना, यह सीमेंट की तरह काम करता है, जिससे कब्ज़ और बिगड़ जाता है या कभी-कभी आंतों में ब्लॉकेज हो जाते हैं। ज़्यादा हमेशा बेहतर नहीं होता हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ़ाइबरमैक्सिंग कोई कॉम्पिटिशन नहीं है। मुख्य मकसद यह होना चाहिए कि आप अपनी फाइबर की ज़रूरतों को बैलेंस्ड डाइट से पूरा करें, न कि बहुत ज़्यादा खाएं। क्या फाइबरमैक्सिंग हेल्दी है? हालांकि हेल्दी एडल्ट्स के लिए साबुत अनाज से फाइबर लेना फायदेमंद होता है, खासकर अगर वे बहुत कम या बिल्कुल भी फाइबर नहीं लेते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स धीरे-धीरे फाइबर लेना बढ़ाने, खूब पानी पीने और सप्लीमेंट्स या बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड हाई-फाइबर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तरह के फाइबर सोर्स पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।

 </description><guid>53621</guid><pubDate>03-Jun-2026 12:05:29 pm</pubDate></item><item><title>मोमोज गट हेल्थ: क्या स्टीम मोमोज भी नुकसान पहुंचाते हैं?  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53620</link><description>आज के समय में आंतों की सेहत यानी गट हेल्थ को शरीर की पूरी फिटनेस से जोड़ा जाने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गट हेल्थ सिर्फ पाचन को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो सकता है। PubMed पर आधारित कई रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि आंतों में मौजूद बैड बैक्टीरिया शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इसी बीच मैदा से बने फास्ट फूड, खासकर मोमोज, को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा है कि स्टीम किए हुए मोमोज हेल्दी होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है।
 मोमोज का मुख्य घटक मैदा होता है, जो रिफाइंड आटे से बनता है और इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादा मात्रा में मैदा का सेवन पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है। यह आंतों में धीरे-धीरे पचता है और लंबे समय तक पेट भारी महसूस हो सकता है। हालांकि यह कहना कि मैदा सीधे आंतों में चिपक जाता है, एक मिथक है, लेकिन इसका अधिक सेवन पाचन प्रक्रिया को जरूर प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि स्टीम मोमोज भले ही तले हुए स्नैक्स की तुलना में हल्के माने जाते हों, लेकिन इनके साथ अक्सर तीखी चटनी, कम पोषण वाले फिलिंग और प्रोसेस्ड सामग्री का उपयोग होता है, जो गट हेल्थ के लिए आदर्श नहीं माना जाता। 
गट हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को संतुलित रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन, फल, सब्जियां और प्रोबायोटिक फूड्स का सेवन जरूरी है। इसके विपरीत, ज्यादा प्रोसेस्ड और मैदा आधारित फूड्स इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग और डाइजेशन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मोमोज पूरी तरह से नुकसानदायक हैं। अगर इन्हें कभी-कभार और सीमित मात्रा में खाया जाए तो यह गंभीर समस्या नहीं पैदा करते। समस्या तब बढ़ती है जब इन्हें नियमित आहार का हिस्सा बना लिया जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोगों को फास्ट फूड की बजाय बैलेंस्ड डाइट पर ध्यान देना चाहिए और गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए।

 </description><guid>53620</guid><pubDate>03-Jun-2026 11:50:07 am</pubDate></item><item><title>गर्मी में राहत पाने के लिए ट्राई करें ये 3 रायता रेसिपी, शेफ कुणाल कपूर ने शेयर किए फ्रेश और हेल्दी टिप्स</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53554</link><description>गर्मियों में लोग हल्का, ठंडक देने वाला और आसानी से पचने वाला खाना पसंद करते हैं, क्योंकि ज्यादा मसालेदार और भारी खाना शरीर को थका हुआ महसूस करा सकता है. ऐसे मौसम में रायता खाने का टेस्ट बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को ठंडक पहुंचाने का भी काम करता है. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को बेहतर बनाते हैं, जबकि खीरा, पुदीना, टमाटर और मसालों जैसी चीजें इसे और हेल्दी बना देती हैं. मशहूर शेफ Kunal Kapur के अनुसार, रायता गर्मियों के खाने का सबसे जरूरी हिस्सा है, क्योंकि यह मसालेदार खाने को बैलेंस करता है और खाने को हल्का महसूस कराता है. उन्होंने खीरा रायता, बूंदी रायता और टमाटर-नारियल रायता जैसी आसान और टेस्टी रेसिपी शेयर की हैं, जिन्हें घर पर जल्दी बनाकर गर्मी में ताजगी और टेस्ट दोनों का आनंद लिया जा सकता है.
गर्मियों में खीरा सबसे ज्यादा खाया जाता है क्योंकि इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है. खीरे का रायता खाने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है. इसमें कसूरी मेथी और भुना जीरा डालने से इसका टेस्ट और भी बढ़ जाता है.


इसे बनाने के लिए सबसे पहले कसूरी मेथी को पानी में भिगोकर कुछ देर के लिए रख दें, इसके बाद एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें हींग डालें. अब भीगी हुई कसूरी मेथी का पानी निकालकर उसे तेल में हल्का सा भून लें. एक बड़े बर्तन में दही लें और उसमें भुनी हुई मेथी डालें फिर हरी मिर्च, काला नमक, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर और भुना जीरा मिलाएं. अब खीरे को कद्दूकस करके इसमें डाल दें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर कुछ देर ठंडा होने दें. ऊपर से पुदीना और खीरे के टुकड़ों से सजाकर सर्व करें. यह शरीर को ठंडक देता है. पाचन सुधारता है और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है.





अगर घर में जल्दी कुछ टेस्टी बनाना हो, तो बूंदी रायता सबसे आसान ऑप्शन है. यह मसालेदार खाने के साथ बहुत अच्छा लगता है और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है.

इसे बनाने के लिए एक बड़े बाउल में दही लें और उसमें नमक, लाल मिर्च पाउडर और पानी डालकर अच्छी तरह फेंट लें. अब एक छोटे पैन में सरसों का तेल गर्म करें. इसमें जीरा और हींग डालें. जब जीरा चटकने लगे, तब इस तड़के को दही में मिला दें. इसके बाद बूंदी और हरा धनिया डालकर सब कुछ अच्छे से मिक्स करें. कुछ मिनट के लिए रख दें ताकि बूंदी हल्की नरम हो जाए. ठंडा-ठंडा बूंदी रायता खाने के साथ परोसें.



अगर आप रोज एक जैसा रायता खाकर बोर हो गए हैं, तो यह टमाटर और नारियल वाला रायता जरूर ट्राई करें. इसमें दक्षिण भारतीय स्वाद का हल्का टच मिलता है, जो इसे बेहद खास बनाता है.

इसे बनाने के लिए सबसे पहले टमाटर को बारीक काट लें फिर एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें हींग, राई, सूखी लाल मिर्च, उड़द दाल और चना दाल डालें. इसके बाद करी पत्ता डालकर कुछ सेकंड भूनें. अब कटे हुए टमाटर और नमक डालकर उन्हें नरम होने तक पकाएं, दूसरी तरफ मिक्सर में नारियल, जीरा, हरी मिर्च और थोड़ा पानी डालकर चिकना पेस्ट बना लें. एक बड़े बर्तन में दही लें और उसमें टमाटर का मिश्रण और नारियल का पेस्ट डालें. अच्छी तरह मिलाकर ऊपर से हरा धनिया डालें. ठंडा करके सर्व करें. </description><guid>53554</guid><pubDate>02-Jun-2026 11:11:55 am</pubDate></item><item><title>सोल कढ़ी या कोकम शरबत... गर्मियों में कौन रखता है ज्यादा हाइड्रेट?</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53553</link><description>गर्मियों में पारा लगातार बढ़ता जा रहा है. तेज धूप और उमस पसीने के रूप में हमारे शरीर से सारा पानी सोख लेती है. ऐसे में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता. शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स और ठंडक की भी जरूरत होती है. भारत के कुछ इलाकों में गर्मियों से निपटने के लिए दो ड्रिंक्स बहुत मशहूर हैंसोल कढ़ी और कोकम शरबत.
दोनों ही ड्रिंक्स 'कोकम' फल से बनते हैं. लेकिन दोनों को बनाने का तरीका अलग है. आइए जानते हैं कि इस तपती गर्मी में आपके शरीर को सबसे ज्यादा हाइड्रेट और ठंडा कौन रखता है?
कोकम शरबत: भयंकर गर्मी में देता है तुरंत एनर्जी
कोकम शरबत गर्मियों का एक बेहतरीन ड्रिंक है. इसे कोकम के जूस, पानी, चीनी, भुना जीरा और काले नमक से बनाया जाता है.

    भयंकर गर्मी में यह शरीर में पानी की कमी को तुरंत पूरा करता है.
    इसमें मौजूद काला नमक और जीरा शरीर में नमक की कमी नहीं होने देते है.
    यह शरीर के तापमान को तुरंत गिराता है और आपको हीट स्ट्रोक से बचाता है.

सोल कढ़ी: पेट की जलन को मिटाता है
सोल कढ़ी एक स्वादिष्ट ड्रिंक है. इसे कोकम के अर्क के साथ ताजे नारियल के दूध, हरी मिर्च, लहसुन और राई के तड़के से तैयार किया जाता है.

    नारियल का दूध पेट को अंदर से ठंडा रखता है.
    भोजन या मसालेदार खाने के बाद सोल कढ़ी पीने से एसिडिटी और पेट की जलन तुरंत शांत होती है.
    यह सिर्फ हाइड्रेट नहीं करती, बल्कि शरीर को जरूरी फैट्स और विटामिंस भी देती है.

कौन है हाइड्रेशन के लिए सबसे बेस्ट?
अगर मुकाबला सिर्फ ज्यादा और तेज हाइड्रेशन का हो, तो कोकम शरबत बाजी मार लेता है. कोकम शरबत पीने में हल्का होता है. इसे पानी के साथ बनाया जाता है, जिससे शरीर इसे बहुत तेजी से सोख लेता है. यह धूप में खोई हुई ऊर्जा को तुरंत लौटाता है.
वहीं, सोल कढ़ी हाइड्रेशन के साथ-साथ आपके पेट को भारीपन और गर्मी से बचाती है. अगर आप दोपहर के भोजन के बाद कुछ ढूंढ रहे हैं, तो सोल कढ़ी बेस्ट है. लेकिन अगर आप धूप से आए हैं, तो कोकम शरबत सबसे ऊपर है. गर्मियों में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप इन दोनों को अपनी डाइट में बदल-बदल कर शामिल कर सकते हैं. </description><guid>53553</guid><pubDate>02-Jun-2026 11:03:55 am</pubDate></item><item><title>हर स्नैक के साथ सॉस की ज़िद? नोट करें स्वादिष्ट और नेचुरल टोमैटो सॉस की आसान रेसिपी  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53483</link><description>टोमैटो सॉस एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल आज के समय में लगभग सभी घरों में किया जाता है. खासकर अगर आपके घर पर छोटे बच्चे हैं तो यह तय है कि आप उन्हें समोसे, पकोड़े, फ्रेंच फ्राइज, सैंडविच या फिर पराठों के साथ उन्हें टोमैटो सॉस तो जरूर ही देते होंगे. जब आप इन चीजों को टोमैटो सॉस के साथ खाते हैं तो इनका स्वाद और भी कई गुना बढ़ जाता है. वैसे तो हम टोमैटो सॉस को बाजार से खरीदकर लाते हैं जिनमें भारी मात्रा में चीनी और प्रिजर्वेटिव्स पाए जाते हैं. ये सॉस महंगे भी होते हैं और इनके रेगुलर सेवन से बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचने का भी खतरा रहता है. अगर आप अपने बच्चे की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं और घर पर ही आधी से कम कीमत पर ज्यादा टोमैटो सॉस तैयार करना चाहते हैं तो आज की यह आर्टिकल आपके काम ही है. आज हम आपको घर पर ही आसानी से टोमैटो सॉस बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं.

टोमैटो सॉस बनाने के लिए जरूरी सामग्री पके हुए टमाटर  1 किलो चीनी  4 से 5 बड़े चम्मच नमक  1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर  आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर  एक चौथाई छोटा चम्मच विनेगर  2 बड़े चम्मच कॉर्नफ्लोर  1 बड़ा चम्मच, ऑप्शनल पानी  जरूरत के अनुसार टोमैटो सॉस बनाने की आसान रेसिपी टोमैटो सॉस बनाने के लिए सबसे पहले टमाटरों को अच्छी तरह धो लें. अब उन्हें बड़े-बड़े टुकड़ों में काट लें और फिर एक बर्तन में थोड़ा पानी डालकर टमाटरों को 10 से 15 मिनट तक उबालें, ताकि वे पूरी तरह सॉफ्ट हो जाएं.

अब इन उबले हुए टमाटरों को थोड़ा ठंडा होने दें और इसके बाद इन्हें मिक्सर में पीस लें. अब इस प्यूरी को छलनी से छान लें, ताकि टमाटर के बीज और छिलके अलग हो जाएं और सॉस एकदम स्मूद बने. इसके बाद छनी हुई प्यूरी को एक कड़ाही या पैन में डालकर मीडियम आंच पर पकाएं. अब इसमें चीनी, नमक, लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. इस प्यूरी को लगातार चलाते हुए 15 से 20 मिनट तक पकाएं. जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इसमें सिरका डाल दें. अगर आपको ज्यादा गाढ़ी सॉस पसंद है तो थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर पानी में घोलकर मिला सकते हैं.


जब सॉस अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे पूरी तरह ठंडा होने दें. इसके बाद साफ और सूखी कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें. टोमैटो सॉस बनाते समय ध्यान रखने वाली बातें अगर आप घर पर टोमैटो सॉस बनाने की सोच रहे हैं, तो हमेशा लाल और अच्छी तरह पके हुए टमाटरों का इस्तेमाल करें. इसके अलावा सॉस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें विनेगर जरूर डालें.




 </description><guid>53483</guid><pubDate>01-Jun-2026 11:23:33 am</pubDate></item><item><title>टिफिन और नाश्ते की टेंशन खत्म, बच्चों के लिए परफेक्ट है यह हेल्दी रेसिपी </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53482</link><description>आलू चीज़ सैंडविच: अक्सर सुबह के समय ऐसा होता है कि बच्चे पूछते हैं, आज नाश्ते में क्या बना है मम्मी?. जब यह सवाल उठता है तो समझ में नहीं आता कि इतने कम समय में अब क्या बनाया जाए कि बच्चा इसे खाकर खुश हो जाए. अगर आप भी खुद को हर दिन इसी हालात में सोचते हैं तो आपकी यह आर्टिकल आपके काम की है. आज हम आपको आलू चीज़ सैंडविच की सबसे आसान और टेस्टी रेसिपी बता रहे हैं. जब आप इस डिश को घर पर बनाते हैं तो बच्चों को इसका स्वाद इतना ज्यादा पसंद आता है कि वे अपनी प्लेट को मिनटों में ही खाली कर देते हैं और आपसे एक और सैंडविच की मांग करने लग जाते हैं. ये सैंडविच बाहर से काफी ज्यादा क्रिस्पी होते हैं और अंदर से भी उतनी ही चीज भी होते हैं. 
अगर आप सुबह के समय हार्डबड़ी में रहते हैं तो भी आपको एक बार इसे ट्राई करके जरूर देखना चाहिए. भरोसेमंद जानते हैं इसे बनाने की आसान रेसिपी. आलू चीज़ सैंडविच बनाने के लिए ज़रूरी सामग्री 4 ब्रेड स्लाइस 2 स्लाइस हुए आलू 1 कप ब्रेड स्लाइस किया हुआ चीज़ 1 बारीक कटा हुआ प्याज 1 बारीक कटी हरी मिर्च 1 बड़ा चम्मच हरा धनिया आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर आधा छोटा चम्मच चाट मसाला नमक स्वाद के हिसाब से बटर या घी सैंडविच स्टफिंग बनाने का तरीका सबसे पहले स्लाइस हुए आलू को एक बाउल में अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और नमक डालें। अब इन सभी चीज़ों को अच्छी तरह मिलाकर एक स्वादिष्ट मिश्रण तैयार कर लें। इसके बाद इसमें ब्रेड स्लाइस किया हुआ चीज़ दोबारा मिक्स करें। 
आपकी सैंडविच की स्टफिंग तैयार है। आलू चीज़ सैंडविच बनाने का तरीका आलू चीज़ सैंडविच बनाने के लिए सबसे पहले ब्रेड स्लाइस पर हल्का सा बटर लगाएं। इसके बाद एक ब्रेड स्लाइस पर आलू और चीज़ वाला मिश्रण बराबर मात्रा में बैलेंस करें। इसके बाद ऊपर दूसरी ब्रेड स्लाइस करके इसे हल्का सा दबाएं। इसी तरह एक-एक करके बाकी सभी सैंडविच भी तैयार कर लें। इसके बाद सैंडविच मेकर या तवा को गरम करें। अब इस तवे पर थोड़ा मक्खन लगाकर सैंडविच को दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक सेंक लें. जब सैंडविच अच्छी तरह टोस्ट हो जाए तो उसे प्लेट में निकाल लें. गरमागरम आलू चीज सैंडविच को टोमैटो सॉस, हरी चटनी या मेयोनेज़ के साथ सर्व करें. आप अगर कुकीज़ तो इसके साथ एक कप चाय, कॉफी या ताजा जूस भी परोस सकते हैं.
 </description><guid>53482</guid><pubDate>01-Jun-2026 11:13:50 am</pubDate></item><item><title>10 मिनट में तैयार, स्वाद में लाजवाबबच्चों के लिए परफेक्ट शाम का हेल्दी और टेस्टी स्नैक  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53462</link><description>अगर आपके बच्चे हर दिन एक ही तरह के स्नैक्स खाकर चिड़चिड़ा गए हैं और हर दिन उन्हें खाने के लिए कुछ नया चाहिए, तो ऐसे में आपको उनके लिए एक बार जरूर मैगी स्प्रिंग रोल तैयार करना चाहिए. यह एक ऐसी डिश है जिसे देखते ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है. इस डिश को तैयार करने के लिए बच्चों की ही दो सबसे ज्यादा पसंदीदा चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. पहला है मैगी और दूसरा स्प्रिंग रोल. ये दोनों ही चीजें जब एक साथ मिल जाती हैं तो इनका स्वाद और भी जबरदस्त लगने लगता है. बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट ये रोल्स सिर्फ खाने में टेस्टी नहीं लगते हैं, ये मिनटों में बनाकर सर्व करने के लिए तैयार हो जाते हैं. चाहे शाम की भूख मिटानी हो या फिर टिफिन में डालकर भेजना हो, मैगी स्प्रिंग रोल की यह रेसिपी हर मौके पर बेस्ट साबित होती है.
 तो चलिए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान रेसिपी. मैगी स्प्रिंग रोल बनाने के लिए जरूरी सामग्री 1 पैकेट मैगी 6 से 7 स्प्रिंग रोल शीट 1 छोटा प्याज बारीक कटा हुआ 1 छोटा गाजर कद्दूकस किया हुआ 1 छोटी शिमला मिर्च बारीक कटी हुई 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई 1 चम्मच टोमैटो सॉस 1 चम्मच चिली सॉस आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर नमक स्वादानुसार 2 चम्मच तेल रोल सील करने के लिए थोड़ा मैदा और पानी तलने के लिए तेल मैगी स्प्रिंग रोल बनाने की रेसिपी मैगी स्प्रिंग रोल बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें. इसके बाद इसमें प्याज डालकर हल्का भून लें और फिर गाजर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च डालकर 2 मिनट तक पकाएं. इसके बाद थोड़ा पानी डालकर मैगी तैयार करें और उसमें उसका मसाला डाल दें. अब इसमें टोमैटो सॉस, चिली सॉस और काली मिर्च डालकर अच्छे से मिक्स करें. 
इस बात का ख्याल रखें कि मैगी ज्यादा पतली न हो, क्योंकि थोड़ी सूखी स्टफिंग से रोल ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं. इसके बाद तैयार मिश्रण को ठंडा होने दें. अब एक कटोरी में मैदा और पानी मिलाकर पतला पेस्ट बना लें. इसके बाद स्प्रिंग रोल शीट लें और उसके बीच में मैगी की स्टफिंग रखें. इसके बाद किनारों को अंदर की तरफ मोड़ें. इसके बाद रोल को टाइट तरीके से रोल कर दें. लास्ट में मैदे का पेस्ट लगाकर रोल को अच्छी तरह सील कर दें और इसी तरह एक-एक करके सारे रोल तैयार कर लें. अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें और जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब रोल्स को मीडियम आंच पर गोल्डन और क्रिस्पी होने तक तलें. अगर आप हेल्दी ऑप्शन चाहते हैं, तो इन्हें एयर फ्रायर या ओवन में भी बना सकते हैं. मैगी स्प्रिंग रोल को टोमैटो सॉस या मायोनीज के साथ गर्मागर्म सर्व करें और इसे पूरे परिवार के साथ शाम के नाश्ते में एन्जॉय करें.

 </description><guid>53462</guid><pubDate>31-May-2026 1:06:18 pm</pubDate></item><item><title>घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रिस्पी मालाबार पराठा  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53461</link><description>मालाबार पराठा अपने लेयर्ड टेक्सचर, क्रिस्पी परतों और मुलायम स्वाद के कारण देशभर में काफी लोकप्रिय है। आमतौर पर लोग इसे रेस्टोरेंट या ढाबों में खाना पसंद करते हैं, क्योंकि घर पर वैसा स्वाद और लेयर बनाना मुश्किल माना जाता है। लेकिन सही तकनीक और थोड़े धैर्य के साथ इसे घर की रसोई में भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। माना जाता है कि पराठे की परतें ही इसकी सबसे बड़ी खासियत होती हैं। 
सही तरीके से आटा गूंथना, उसे आराम देना और परतों को बनाने की प्रक्रिया इस रेसिपी का सबसे अहम हिस्सा है। अगर इन स्टेप्स को सही ढंग से अपनाया जाए तो बाजार जैसा पराठा घर पर भी बनाया जा सकता है। सबसे पहले मैदा को अच्छे से गूंथकर नरम आटा तैयार किया जाता है। इसमें थोड़ा तेल और नमक मिलाया जाता है ताकि पराठा मुलायम और स्वादिष्ट बने। आटे को कुछ समय के लिए ढककर रख दिया जाता है, जिससे वह सेट हो जाए। इसके बाद आटे की छोटी लोइयां बनाकर उन्हें बेल लिया जाता है। बेलने के बाद उस पर हल्का तेल लगाकर उसे लंबी पट्टी की तरह मोड़ा जाता है और फिर गोल आकार में रोल किया जाता है। यही प्रक्रिया पराठे की परतों को बनाती है। 
तैयार रोल को हल्के हाथ से बेलकर तवे पर सेंका जाता है। धीमी आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकाया जाता है, जिससे इसकी परतें अलग-अलग दिखाई देने लगती हैं। अंत में हल्का सा हाथ से दबाकर पराठे की लेयर्स को खोला जाता है, जिससे इसका असली क्रिस्पी टेक्सचर सामने आता है। इसे सब्जी, चिकन करी या चाय के साथ परोसा जा सकता है। खास बात यह है कि यह पराठा न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि घर पर आसानी से और कम सामग्री में तैयार किया जा सकता है। इस आसान रेसिपी के जरिए आप हर बार रेस्टोरेंट जैसा परफेक्ट मालाबार पराठा बना सकते हैं और अपने परिवार को एक खास स्वाद का अनुभव दे सकते हैं।

 </description><guid>53461</guid><pubDate>31-May-2026 1:02:14 pm</pubDate></item><item><title>अपनी मैच वॉच पार्टी के लिए तैयार करने के लिए 7 आसान और हेल्दी स्नैक्स </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53400</link><description>अगर आप या आपका कोई जानने वाला क्रिकेट का दीवाना है, तो अगले कुछ दिन आपके लिए बहुत मज़ेदार होने वाले हैं। IPL 2026 का फ़ाइनल मैच 31 मई को होना है। इस मौके पर, कई लोग अपने घर पर व्यूइंग पार्टी करते हैं और दोस्तों और परिवार को बुलाते हैं। इससे वीकेंड का पूरा मज़ा लेने, सोशली मिलने-जुलने और साथी क्रिकेट लवर्स के साथ मैच का मज़ा लेने में मदद मिलती है। अगर आप वॉचपार्टी होस्ट कर रहे हैं या किसी में शामिल हो रहे हैं, तो मेन्यू के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है। यहाँ टेस्टी और हेल्दी स्नैक्स की एक लिस्ट दी गई है, जिन्हें आप रविवार को IPL 2026 का फ़ाइनल देखते समय बिना किसी गिल्ट के खा सकते हैं। मसाला मखाना रोस्टेड मखाना हल्का, क्रंची और बहुत ज़्यादा एडिक्टिव होता है। झटपट प्रोटीन से भरपूर स्नैक के लिए मखाने को थोड़े से घी, काली मिर्च, चाट मसाला और मिर्च पाउडर में मिलाएं। 
यह चिप्स से ज़्यादा हेल्दी है और 10 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाता है। एयर-फ्राइड पनीर टिक्का पनीर टिक्का हमेशा लोगों का पसंदीदा होता है। पनीर के क्यूब्स को ग्रिल या एयर-फ्राई करने से पहले दही, हल्दी, मिर्च पाउडर और अदरक-लहसुन के पेस्ट के साथ मैरीनेट करें। प्याज और शिमला मिर्च डालकर रंगीन सीख बनाएं जो पार्टी के लिए तैयार दिखें। स्प्राउट्स चाट अगर आप कुछ रिफ्रेशिंग और पेट भरने वाला चाहते हैं, तो स्प्राउट्स चाट एकदम सही ऑप्शन है। उबले हुए स्प्राउट्स को प्याज, टमाटर, खीरा, धनिया, नींबू का रस और चाट मसाला के साथ मिलाएं। यह हर बाइट में क्रंच, फ्लेवर और न्यूट्रिशन देता है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज़ रेगुलर फ्राइज़ की जगह बेक्ड स्वीट पोटैटो वेजेज लें। वे नैचुरली मीठे होते हैं, फाइबर से भरपूर होते हैं और पुदीने की चटनी या हंग कर्ड डिप के साथ बहुत अच्छे लगते हैं। एक्स्ट्रा फ्लेवर के लिए पैपरिका और हर्ब्स छिड़कें।

मिनी वेज सैंडविच होल व्हीट ब्रेड, खीरा, टमाटर, लेट्यूस और मिंट मेयो का इस्तेमाल करके क्विक मिनी सैंडविच बनाए जा सकते हैं। मैच के रोमांचक पलों में आसानी से स्नैकिंग के लिए इन्हें छोटे-छोटे तिकोने टुकड़ों में काट लें। कॉर्न और पीनट सलाद मसालेदार कॉर्न और पीनट सलाद स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर होता है। उबले हुए स्वीट कॉर्न, भुनी हुई मूंगफली, प्याज़, हरी मिर्च और धनिया को नींबू के रस के साथ मिलाएं। मेहमानों के लिए इसे ज़्यादा मात्रा में बनाना आसान है। योगहर्ट कप मसालेदार स्नैक्स के साथ कुछ ठंडा और रिफ्रेशिंग खाएं। तरबूज या आम की प्यूरी से बने फ्रूट पॉप्सिकल्स गर्मियों की शामों के लिए एकदम सही हैं। आप फलों और नट्स के साथ ठंडे योगहर्ट कप भी बना सकते हैं।
 </description><guid>53400</guid><pubDate>30-May-2026 11:05:18 am</pubDate></item><item><title>बर्गर-पिज्जा से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक.. नौतपा में भूलकर भी न खाएं ये चीजें</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53398</link><description>नौतपा की शुरुआत होते ही गर्मी अपने सबसे खतरनाक रूप में पहुंच जाती है. तेज धूप, गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान शरीर को तेजी से थका देता है. ऐसे मौसम में सिर्फ बाहर की गर्मी ही नहीं, बल्कि खानपान भी आपकी सेहत पर बड़ा असर डालता है. Sahyadrihospital की रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी में कुछ चीजें खाने से शरीर का तापमान और बढ़ सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए नौतपा में खानपान को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।.
तली-भुनी चीजों से दूरी
एक्सपर्ट के मुताबिक, तली-भुनी चीजें जैसे बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और दूसरी ऑयली फूड्स गर्मियों में शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं. इन्हें पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे अंदरूनी गर्मी बढ़ सकती है. इसके अलावा ज्यादा मसालेदार खाना भी नौतपा में परेशानी बढ़ा सकता है. मिर्च में मौजूद तत्व शरीर का तापमान बढ़ा सकते हैं, खासकर उन लोगों में जो ज्यादा मसालेदार भोजन खाने के आदी नहीं हैं. इसके साथ एक्सपर्ट रेड मीट से भी दूरी बनाने की सलाह देते हैं. रेड मीट को पचाने में शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है.
पीने वाली इन चीजों से दूरी
कोल्ड ड्रिंक और सोडा गर्मी में राहत जरूर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इनमें मौजूद ज्यादा शुगर शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है. यही वजह है कि इन्हें ज्यादा मात्रा में पीना नुकसानदायक हो सकता है. इसी तरह चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है और शरीर का तापमान बढ़ा सकता है.
पैकेज्ड स्नैक्स से भी दूरी
हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्यादा नमक वाले पैकेज्ड स्नैक्स जैसे चिप्स और नमकीन भी शरीर का फ्लूइड बैलेंस बिगाड़ सकते हैं. अधिक सोडियम शरीर की सेल्स से पानी खींचता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. वहीं रेड मीट और भारी भोजन को पचाने में शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, जिससे गर्मी और सुस्ती महसूस हो सकती है.
बासी खाने से बचने की सलाह
नौतपा के दौरान बासी खाना और खुले में रखा भोजन खाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. तेज गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग, दस्त और टायफाइड जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. बहुत ज्यादा बर्फ वाली चीजें भी शरीर को अचानक तापमान का झटका दे सकती हैं. वहीं शराब शरीर से तेजी से पानी बाहर निकालती है, जिससे गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है.
किन चीजों का करना चाहिए सेवन
नौतपा में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है. इसके लिए नारियल पानी, छाछ, लस्सी, सत्तू, बेल का शरबत और ताजे फलों का सेवन फायदेमंद माना जाता है. दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और खाली पेट घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए. सही खानपान अपनाकर नौतपा की भीषण गर्मी के असर से काफी हद तक बचा जा सकता है. </description><guid>53398</guid><pubDate>30-May-2026 11:01:04 am</pubDate></item><item><title>गर्मी में ठंडक देने वाला देसी ड्रिंक, घर पर मिनटों में बनाएं हेल्दी गुलकंद मिल्क</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53322</link><description>गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखना और डिहाइड्रेशन से बचना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में लोग ठंडे और हेल्दी ड्रिंक्स की तलाश करते हैं जो न सिर्फ शरीर को राहत दें बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हों. इन्हीं में से एक बहुत ही आसान, टेस्टी और आयुर्वेदिक ड्रिंक गुलकंद मिल्क है. गुलकंद मिल्क एक ऐसा ड्रिंक है जिसमें ठंडा दूध और गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकंद मिलाया जाता है. इसका टेस्ट हल्का मीठा, खुशबूदार और बहुत ही सुकून देने वाला होता है. 
यह शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है और पेट को भी आराम देता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह घर में मौजूद चीजों से आसानी से तैयार हो जाता है. गुलकंद मिल्क सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि एक हेल्दी देसी उपाय भी माना जाता है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ एनर्जी भी देता है.
गुलकंद मिल्क एक ठंडा ड्रिंक है जो दूध और गुलकंद, गुलाब की पंखुड़ियों को नेचुरल मिठास के साथ बनाए मिश्रण से बनाया जाता है. इसका टेस्ट हल्का फूलों जैसा और मीठा होता है, जो गर्मी में शरीर को ठंडक देता है.
दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ताकत देते हैं. जब इसे गुलकंद के साथ मिलाया जाता है तो यह ड्रिंक न सिर्फ टेस्टी बनता है बल्कि पौष्टिक भी हो जाता है. यह हड्डियों को मजबूत रखने में भी मदद करता है.
गुलकंद मिल्क में गुलाब की पंखुड़ियों का नेचुरल गुलकंद होता है. रोज मिल्क में गुलाब सिरप या फ्लेवर डाला जाता है. गुलकंद मिल्क ज्यादा नेचुरल और हल्का होता है.इसमें फाइबर और प्राकृतिक गुण ज्यादा होते हैं. रोज मिल्क सिर्फ मीठा और फ्लेवर वाला पेय होता है.
गुलकंद मिल्क बनाने के लिए ठंडा दूध लें, उसमें 2 चम्मच गुलकंद मिलाएं, अच्छी तरह मिलाएं या ब्लेंड करें. इसके बाद टेस्ट के लिए थोड़ी इलायची डालें, चाहें तो शहद या खजूर से मीठा करें. ऊपर से बर्फ और ड्राई फ्रूट डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें.
यह शरीर की गर्मी कम करता है. पाचन तंत्र को आराम देता है.हल्की एसिडिटी में राहत दे सकता है. दूध से कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है. गुलकंद से प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं. गर्मियों में शरीर को ठंडा और हल्का महसूस कराता है. </description><guid>53322</guid><pubDate>29-May-2026 11:44:03 am</pubDate></item><item><title>नौतपा की भयंकर गर्मी में खूब काम आएंगी ये ड्रिंक, केवल पांच रुपये में हो जाएगी तैयार</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53321</link><description>देश के कई हिस्सों में इन दिनों का नौतपा की भीषण गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. तेज धूप गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान लोगों को परेशान कर रहा है. ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी हो जाता है. गर्मी से राहत पाने के लिए लोग एसी, कूलर और ठंडी चीजों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन खान-पान में कुछ देसी ड्रिंक शामिल करके भी शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाई जा सकती है. गर्मी के मौसम में तरबूज, खरबूजा और खीरे जैसी चीज तो लोग खाते ही है, लेकिन कई पारंपरिक बेसिक ड्रिंक भी है जो सालों से लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इस्तेमाल की जा रही है कि इनमें से कुछ ड्रिंक बहुत कम खर्चे में घर पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और शरीर को तुरंत राहत देते हैं.
सत्तू का शरबत देगा इंस्टेंट राहत
नौतपा की गर्मी में सत्तू का शरबत सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले देसी ड्रिंक्स में शामिल है. सत्तू शरीर को ठंडक देने के साथ एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है. यही वजह है कि उत्तर भारत में कई लोग रोजाना इसका सेवन करते हैं. इसे बनाने के लिए एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच सत्तू डालकर अच्छी तरह गोल लें. इसके बाद इसमें काला नमक, भुना जीरा और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर कम खर्चे में तैयार होने वाला यह ड्रिंक शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है.
बेल का शरबत भी है फायदेमंद
गर्मी में बेल का शरबत काफी राहत देता है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ पेट को भी आराम देता है. इसे बनाने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकाल कर उसे पानी में अच्छी तरह मिलाए और फिर छान लें. इसके बाद इसमें गुड़ और मिश्री मिलाकर ठंडा पी सकते हैं. यह ड्रिंक गर्मियों में पाचन बेहतर बनाता है और शरीर को तरोताजा रखने में मददगार माना जाता है.
सौंफ का शरबत रखेगा शरीर ठंडा
सौंफ की तासीर ठंडी मानी जाती है. इसलिए इसका शरबत्त भी नौतपा की गर्मी में राहत देने का काम करता है. इसे बनाने के लिए सौंफ को हल्का भूनकर पीस लें. इसलिए अब एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ पाउडर, काला नमक और भुना जीरा मिलाकर अच्छी तरह तैयार करें. चाहे तो इसमें बर्फ डाल सकते हैं.
छाछ भी है बेहतरीन ऑप्शन
गर्मी के मौसम में छाछ पीना काफी फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर को ठंडा रखने के साथ डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करती है. घर पर छाछ बनाने के लिए दही में पानी मिलाकर उसे पतला कर ले और फिर उसमें काला नमक और भुना जीरा डाल दें. कई लोग इसमें पुदीना और धनिया भी मिलाकर पीना पसंद करते हैं.
नारियल पानी और आम पत्ता भी दे रहा राहत
अगर ज्यादा झंझट नहीं करना चाहते हैं तो नारियल पानी भी गर्मी में अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इसमें नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो शरीर को तुरंत एनर्जी देने में मदद करते हैं. इसके अलावा आम पन्ना भी गर्मियों का लोकप्रिय देसी ड्रिंक है, जो कच्चे आम से तैयार किया जाता है और लू से बचाने में मदद करता है. </description><guid>53321</guid><pubDate>29-May-2026 11:40:03 am</pubDate></item><item><title>जाफरान डालकर ऐसे बनाएं मखाने की खीर, सेहत के साथ मिलेगा जन्नत वाला स्वाद</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53235</link><description>मखाने की खीर लगभग सभी को पसंद आती ही है. दूध के अंदर डूबे हुए मखाने जितने देखने में सुंदर लगते हैं उतने ही खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं. जाफरान जिसे आम भाषा में केसर के नाम से जाना जाता है अगर इसे इस खीर में मिला दिया जाए तो इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों ही बढ़ जाती है, आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह स्वादिष्ट खीर?
लाजवाब खीर की रेसिपी
केसर डालकर मखाने की खीर बनाना बहुत आसान है, लेकिन इसे सावधानी से बनाना पड़ता है क्योंकि थोड़ी सी भी गलती से यह खराब हो सकती है.
बनाने की विधि

    सबसे पहले मखाने के ⅔ भाग को 1 चम्मच घी में भून लें, फिर इसका पीसकर पाउडर बना लीजिए और ⅓ भाग को साबुत रखिए. आप चाहें तो इन्हें बारीक काट भी सकते हैं. पीसने से खीर में एक चिकनी और मुलायम बनावट आती है.
    एक सॉस पैन या मोटे तले वाले बर्तन में 2 कप दूध (500 मिली) गरम करें. आंच को धीमा रखें. दूध को बीच-बीच में चलाते रहें ताकि वह नीचे से  जले नहीं.
    साथ ही, चार हरी इलायची की फलियों से इलायची के बीज और एक चुटकी केसर के धागे भी उसमें डालें.
    दूध पक जाने के बाद उसमें इलायची की फली के बजाय लगभग आधा चम्मच इलायची पाउडर मिला सकते हैं.
    जब दूध उबलने लगे तो उसमें 3 से 4 बड़े चम्मच या अपने स्वादानुसार चीनी डालें.
    अब पिसा हुआ मखाना डालें. फिर बचा हुआ ⅓ कप मखाना डालें.
    मखाना नरम होने और दूध थोड़ा गाढ़ा होने तक, धीमी से मीडियम आंच पर 9 से 10 मिनट तक इसे पकाएं. बीच-बीच में इसे चलाते रहें. किनारों पर जमे हुए दूध के मलाई को खुरचकर खीर में मिला दें.
    अंत में सुनहरे काजू और किशमिश से इसे गार्निश करें. अब तैयार है आपकी स्वादिष्ट खीर.

इस खीर के फायदे

    दूध में कैल्शियम होता है और मखाना मैग्नीशियम और फास्फोरस का अच्छा स्रोत है. इसमें केसर का मिश्रण जोड़ों के दर्द और गठिया में आराम  देता है.
    यह खीर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देती है, जिससे दिनभर की थकान और कमजोरी मिट जाती है. व्रत में भी यह खाई जाती है.
    कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण, यह पेट को देर तक भरा रखता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है और वजन भी नहीं बढ़ता.


 </description><guid>53235</guid><pubDate>28-May-2026 11:20:23 am</pubDate></item><item><title>प्रोटीन रिच दही पराठा के साथ ब्रेकफास्ट को बनाएं हेल्दी</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53234</link><description>ब्रेकफास्ट दिन की सबसे जरूरी मील होती है. अगर यह पोषण से भरपूर और टेस्टी हो, तो पूरा दिन एनर्जी से भरा रहता है. आमतौर पर लोग ब्रेकफास्ट में पराठा, ब्रेड, सैंडविच या कॉर्नफ्लेक्स जैसी चीजें लेते हैं, लेकिन ज्यादातर में प्रोटीन की कमी और प्रोबायोटिक फायदा नहीं होता है. ऐसे में प्रोटीन रिच दही पराठा एक शानदार ऑप्शन है. इसमें दही (curd) और साबुत आटे (whole wheat flour) के साथ कुछ हेल्दी बीज और हर्ब्स मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है. यह न सिर्फ एनर्जी देता है बल्कि पेट के लिए हल्का और पाचन में अच्छा भी होता है. तो आइए जानते हैं कि प्रोटीन रिच दही पराठा की रेसिपी क्या है और ये क्या हेल्दी है.
दही पराठा क्यों हेल्दी है?
दही और बीजों की मदद से यह पराठा प्रोटीन में बहुत अच्छा है. प्रोटीन से मसल्स मजबूत रहते हैं और लंबे समय तक पेट भरा रहता है. दही में प्राकृतिक प्रोबायोटिक होते हैं जो डाइजेशन और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद हैं. साबुत आटे की वजह से यह पराठा पेट के लिए हल्का और फाइबर से भरपूर होता है. इसलिए यह पराठा हल्का, सॉफ्ट और थोड़ा खट्टी-मीठी फ्लेवर वाला होता है.
प्रोटीन रिच दही पराठा की रेसिपी क्या है?
1. प्रोटीन रिच दही पराठा बनाने के लिए एक बड़े बाउल में आटा, तिल, हरा धनिया, हरी मिर्च, जीरा पाउडर और नमक डालकर अच्छे से मिलाएं.
2. इसके बाद धीरे-धीरे दही डालते हुए आटा गूंधें. दही से पराठा नरम और हल्का खट्टा बनेगा.
3. अगर आटा सख्त लगे, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी डालकर नरम आटा तैयार करें.
4. अब आटे को बराबर हिस्सों में बांटे, हल्का सूखा आटा छिड़ककर पराठा बेलें.
5. इसके बाद गर्म तवे पर पराठा सेंकें. दोनों तरफ हल्के सुनहरे धब्बे आने तक मीडियम आंच पर पकाएं.
6. लास्ट में गरम पराठा दही, चटनी या अचार के साथ परोसें. </description><guid>53234</guid><pubDate>28-May-2026 11:14:03 am</pubDate></item><item><title>रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला के नए स्ट्रेन के लिए टीका विकसित किया: मॉस्को</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53170</link><description>रूस ने घोषणा की है कि उसके वैज्ञानिकों ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में चल रहे प्रकोप से जुड़े इबोला वायरस के एक नए प्रकार के खिलाफ टीका विकसित कर लिया है।
दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला के एक नए स्ट्रेन के खिलाफ टीका विकसित किया है, स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने इसकी घोषणा की है। रूसी वैज्ञानिकों के अनुसार, यह टीका डीआरसी में फैले प्रकोप से जुड़े दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से भी सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
दक्षिण कैरोलिना गणराज्य में तेजी से फैल रहे इबोला के प्रकोप को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह घोषणा की गई है। 25 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि इस प्रकोप के कारण कम से कम 220 संदिग्ध मौतें हुई हैं, और स्वास्थ्य अधिकारी महामारी को नियंत्रित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
हालांकि आधिकारिक तौर पर 101 पुष्ट मामले और 10 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि प्रकोप का वास्तविक पैमाना संभवतः कहीं अधिक बड़ा है।
अब तक 900 से अधिक संदिग्ध मामले और 220 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं, टेड्रोस ने सोमवार को बुंडिबुग्यो में फैले इबोला के प्रकोप पर एक वर्चुअल मंत्रिस्तरीय ब्रीफिंग के दौरान कहा।
इस बीमारी का प्रकोप, जिसे 17 मई को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था, पड़ोसी देश युगांडा में भी फैल गया है, जहां पांच पुष्ट मामले और एक मौत की सूचना मिली है।
मंगलवार को डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने कहा कि इबोला का प्रकोप अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन संक्रमण और मौतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, कंबा ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 1,000 संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जिनमें से 101 की जांच में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
वर्तमान प्रकोप बुंडीबुग्यो इबोला स्ट्रेन के कारण हो रहा है, जिसे कंबा ने ज़ैरे स्ट्रेन की तुलना में कम घातक बताया है, लेकिन संक्रमण बढ़ने की स्थिति में यह अभी भी खतरनाक है। फिलहाल, बुंडीबुग्यो इबोला के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है जो मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है।
यह वायरस प्रारंभ में संक्रमित जंगली जानवरों जैसे फल खाने वाले चमगादड़, साही और गैर-मानव प्राइमेट के संपर्क से मनुष्यों में फैलता है। बाद में यह संक्रमित व्यक्तियों के रक्त, शारीरिक तरल पदार्थ, स्राव या अंगों के सीधे संपर्क के साथ-साथ दूषित सतहों और बिस्तर और कपड़ों जैसी सामग्रियों के माध्यम से मनुष्यों के बीच फैलता है।
इबोला की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है, हालांकि पहले के प्रकोपों ​​में मृत्यु दर 25 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।
इबोला के पहले मामले मध्य अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के निकट स्थित दूरदराज के गांवों में सामने आए थे।
पश्चिम अफ्रीका में 2014-2016 का इबोला प्रकोप 1976 में वायरस की पहली पहचान के बाद से सबसे बड़ा और सबसे जटिल प्रकोप बना हुआ है। यह महामारी, जो गिनी में शुरू हुई और फिर सिएरा लियोन और लाइबेरिया में फैल गई, ने पिछले सभी इबोला प्रकोपों ​​की तुलना में कहीं अधिक मौतें और संक्रमण फैलाए। </description><guid>53170</guid><pubDate>27-May-2026 11:32:00 am</pubDate></item><item><title>ब्रिटिश डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए धूम्रपान जितना ही हानिकारक है।</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53163</link><description>वरिष्ठ ब्रिटिश डॉक्टरों ने मंगलवार को कहा कि बच्चों के लिए खतरा के मामले में सोशल मीडिया धूम्रपान के बराबर है, और उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे उस नुकसान से निपटें जो उनके अनुसार अत्यधिक स्क्रीन टाइम युवाओं को पहुंचा रहा है।
एकेडमी ऑफ मेडिकल रॉयल कॉलेजेस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार के परामर्श के लिए एक प्रस्तुति में बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया है, जिसकी समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है।
यह धूम्रपान करने और कारों में सीट बेल्ट पहनने के साथ-साथ चिकित्सा पेशे के लिए एक एकजुट करने वाली शक्ति के रूप में कार्य करता है।
ब्रिटेन और आयरलैंड के 23 शाही मेडिकल कॉलेजों और संकायों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ने कहा, हाल के वर्षों में ऐसे कुछ ही मुद्दे हो सकते हैं जिन्होंने चिकित्सकों को इतनी जोरदार तरीके से एकजुट किया हो जितना कि तकनीक और उपकरणों के अनियंत्रित उपयोग का बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रभाव।
सर्वेक्षण में शामिल 132 डॉक्टरों में से आधे से अधिक ने हर हफ्ते कम से कम एक ऐसा मामला देखा जिसमें तकनीक और उपकरणों से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी नुकसान हो सकता है, और एक तिहाई से अधिक ने सप्ताह में कई बार नुकसान के सबूत देखे।
नुकसान में शारीरिक चोटें शामिल थीं, उदाहरण के लिए अत्यधिक अश्लील सामग्री की नकल करने से होने वाली चोटें, और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, जैसे कि ऑनलाइन हिंसा देखने से होने वाला आघात।
ब्रिटेन बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को प्रतिबंधित करने पर विचार-विमर्श कर रहा है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर संभावित प्रतिबंध के साथ-साथ कर्फ्यू, ऐप के लिए समय सीमा और उन डिजाइन सुविधाओं पर अंकुश लगाना शामिल है जिन्हें उसने व्यसनकारी बताया है।
पिछले साल ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया, और यूरोपीय देश भी इसी तरह के उपायों पर विचार कर रहे हैं।
ब्रिटेन के ऑनलाइन सुरक्षा कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों को अवैध और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने के लिए उपाय करने की आवश्यकता है, लेकिन सरकार ने इससे भी आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई है।
सवाल यह नहीं है कि हम कार्रवाई करेंगे या नहीं; हम करेंगे, चाहे वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हो या प्रमुख सुविधाओं और कार्यों पर प्रतिबंध, प्रौद्योगिकी सचिव लिज़ केंडल ने बीबीसी न्यूज़ को बताया।
सैकड़ों ब्रिटिश परिवार सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, कर्फ्यू और ऐप के इस्तेमाल की समय सीमा का परीक्षण कर रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि इनका बच्चों की नींद, पारिवारिक जीवन और स्कूल के काम पर क्या प्रभाव पड़ता है। </description><guid>53163</guid><pubDate>27-May-2026 11:19:23 am</pubDate></item><item><title>जंक फूड से बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ सकता है लंबे समय का असर</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53086</link><description>बचपन में जंक फूड का अधिक सेवन जीवनभर के लिए मस्तिष्क में बदलाव ला सकता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अधिक वसा और चीनी वाले खाद्य पदार्थ खाने से खाने की आदतों और भूख नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्सों पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
University College Cork के शोधकर्ताओं ने पाया कि बचपन में अस्वास्थ्यकर भोजन करने से मस्तिष्क के उन हिस्सों में बदलाव हो सकते हैं जो भूख और भोजन की आदतों को नियंत्रित करते हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बाद में स्वस्थ भोजन अपनाने के बावजूद इन प्रभावों का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि आज बच्चों के आसपास अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं और उनका लगातार प्रचार भी किया जाता है। जन्मदिन पार्टियों, स्कूल कार्यक्रमों और खेल गतिविधियों में मीठे और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग आम हो गया है।
अध्ययन में पाया गया कि शुरुआती उम्र में अधिक कैलोरी और कम पोषण वाले भोजन का सेवन वयस्क होने तक खाने की आदतों को प्रभावित कर सकता है।
शोध के दौरान चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि जिन चूहों को बचपन में अधिक वसा और चीनी वाला भोजन दिया गया, उनमें बड़े होने पर भी खाने के व्यवहार में बदलाव दिखाई दिए।
शोधकर्ताओं ने इन बदलावों को मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस क्षेत्र से जोड़ा, जो भूख और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित करता है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ लाभकारी बैक्टीरिया और प्रीबायोटिक फाइबर इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, Bifidobacterium longum APC1472 नामक बैक्टीरिया और कुछ प्रीबायोटिक फाइबर जैसे प्याज, लहसुन, शतावरी और केले में पाए जाने वाले तत्व खाने के व्यवहार को सुधारने में मददगार साबित हो सकते हैं।
हालांकि यह अध्ययन मुख्य रूप से पशु मॉडल पर आधारित है, इसलिए इसके निष्कर्षों को सीधे मनुष्यों पर लागू करने के लिए आगे और शोध की आवश्यकता होगी। </description><guid>53086</guid><pubDate>26-May-2026 11:42:29 am</pubDate></item><item><title>लू और डिहाइड्रेशन से बचाएगा इमली पना, स्वाद के साथ सेहत भी रखे दुरुस्त  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53085</link><description>देशभर में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच लोग शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले पारंपरिक पेयों की ओर रुख कर रहे हैं। राजस्थान का मशहूर इमली पना भी ऐसा ही एक देसी ड्रिंक है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। खट्टी इमली, गुड़, पुदीना और मसालों से तैयार यह पेय शरीर को तुरंत ठंडक देता है और लू से बचाने में मदद करता है। राजस्थान में वर्षों से गर्मियों के मौसम में इमली का पना बनाया जाता रहा है। 
आयुर्वेद में भी इसे शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला पेय माना जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक तत्व शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इमली में मौजूद पोषक तत्व शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं। वहीं, काला नमक और भुना जीरा पाचन को दुरुस्त रखते हैं। पुदीना शरीर को ताजगी देता है और गुड़ ऊर्जा बढ़ाने का काम करता है। यही वजह है कि भीषण गर्मी में यह पारंपरिक ड्रिंक लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इमली का पना बनाना भी बेहद आसान है। इसे तैयार करने के लिए दो बड़े चम्मच इमली को गर्म पानी में कुछ देर भिगोया जाता है ताकि वह नरम हो जाए।
 इसके बाद इमली को मसलकर उसका रस निकाल लिया जाता है। फिर इसमें गुड़ या मिश्री, काला नमक, भुना जीरा पाउडर और थोड़ा काली मिर्च पाउडर मिलाया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें ठंडा पानी और बर्फ डाली जाती है। ऊपर से ताजी पुदीने की पत्तियां डालकर इसे परोसा जाता है। गर्मियों में लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। ऐसे में इमली का पानक शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। यह न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि थकान और कमजोरी को भी दूर करता है।
 </description><guid>53085</guid><pubDate>26-May-2026 11:37:55 am</pubDate></item><item><title>गर्मियों में घर पर बनाएं हेल्दी रुहअफजा जैसा शरबत, स्वाद रहेगा बिल्कुल देसी</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53005</link><description>गर्मियों का मौसम आते ही ठंडे और ताजगी भरे शरबत की याद सबसे पहले आती है. उत्तर भारत में रुहअफजा सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि बचपन की गर्मियों और घर की रसोई से जुड़ी यादों का हिस्सा रहा है. पहले हर घर में ठंडाई, आम पन्ना और गुलाब के शरबत का अलग ही स्वाद हुआ करता था. आज भले ही बाजार में कई तरह के कोल्ड ड्रिंक्स मौजूद हों, लेकिन घर पर बने देसी शरबत की बात अब भी सबसे अलग लगती है.








अगर आप इस बार गर्मी में कुछ हेल्दी और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो घर पर रुहअफजा जैसा शरबत आसानी से तैयार कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसमें चीनी कम रखी जा सकती है और सही तरीके से स्टोर करने पर यह कई दिनों तक खराब भी नहीं होता.
घर पर कैसे बनाएं हेल्दी शरबत?
इस देसी ड्रिंक को बनाने के लिए गुलाब का अर्क, शहद या खजूर का सिरप, ठंडा पानी और कुछ घरेलू चीजों की जरूरत होती है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस या तुलसी के बीज भी मिलाए जा सकते हैं. गुलाब की खुशबू और ठंडक से भरपूर यह शरबत गर्मी में शरीर को राहत देने का काम करता है.
मिठास अपने स्वाद के हिसाब से रखें
घर पर शरबत बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मिठास आप अपनी पसंद के अनुसार तय कर सकते हैं. ज्यादा मीठा पसंद हो तो सिरप की मात्रा बढ़ा सकते हैं, जबकि हल्का स्वाद चाहिए तो पानी ज्यादा मिलाएं. इसे ठंडे पानी या दूध के साथ परोसा जा सकता है. कई लोग इसमें वनीला आइसक्रीम डालकर इसे खास डेजर्ट ड्रिंक का रूप भी देते हैं.
शरबत बनाते समय रखें ये बातें ध्यान में
शरबत तैयार करते समय हमेशा ठंडे पानी का इस्तेमाल करें और बर्फ सर्व करने से ठीक पहले डालें. सिरप को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है ताकि हर घूंट में एक जैसा स्वाद मिले. अगर ज्यादा मात्रा में शरबत बनाकर रखना हो, तो इसे एयरटाइट बोतल में भरकर फ्रिज में स्टोर करें. सही तरीके से रखने पर इसका स्वाद और खुशबू लंबे समय तक बरकरार रहती है.
आज भी कई लोग शाम की चाय की जगह इस देसी ड्रिंक को पीना पसंद करते हैं. घर पर बना यह पारंपरिक शरबत न सिर्फ गर्मी से राहत देता है, बल्कि पुराने दिनों की यादों को भी ताजा कर देता है।









 </description><guid>53005</guid><pubDate>25-May-2026 11:30:24 am</pubDate></item><item><title>मूंग दाल कढ़ी का स्वाद बढ़ा सकता है आपके खाने का अनुभव</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=53003</link><description>कढ़ी-चावल का नाम सुनते ही भारतीय खाने के शौकीनों के चेहरे पर खुशी आ जाती है। आमतौर पर घरों में कढ़ी बेसन और खट्टे दही से बनाई जाती है, लेकिन अब इसका एक नया और स्वादिष्ट रूप भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें बेसन की जगह मूंग दाल का इस्तेमाल किया जाता है। मूंग दाल से बनी कढ़ी न केवल स्वाद में अलग होती है, बल्कि यह हल्की और आसानी से पचने वाली भी मानी जाती है। 
इसे खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है जो पारंपरिक कढ़ी के स्वाद के साथ कुछ नया और सेहतमंद विकल्प चाहते हैं। जानकारों के अनुसार, मूंग दाल कढ़ी बनाने के लिए पहले मूंग दाल को भिगोकर पीसा जाता है और फिर इसे दही के साथ मिलाकर पकाया जाता है। इसमें हल्दी, नमक, हींग और अन्य पारंपरिक मसालों का उपयोग किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। तड़के में सरसों के बीज, करी पत्ते और लाल मिर्च डालने से इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है। इसे गरमा-गरम चावल के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। 
लोगों का कहना है कि मूंग दाल कढ़ी पारंपरिक कढ़ी की तुलना में अधिक क्रीमी और हल्की होती है, जिससे यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आती है। यह खासतौर पर वीकेंड पर घर में कुछ नया और स्वादिष्ट बनाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है, जो शरीर के लिए फायदेमंद है। ऐसे में यह कढ़ी स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखती है। अगर आप अपने किचन में कुछ नया प्रयोग करना चाहते हैं, तो इस वीकेंड मूंग दाल कढ़ी जरूर ट्राई करें। इसका अनोखा स्वाद आपके परिवार और मेहमानों दोनों को पसंद आ सकता है।
 </description><guid>53003</guid><pubDate>25-May-2026 11:09:51 am</pubDate></item><item><title>गर्मी में अंजीर खाने का ये है सही तरीका...</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=52965</link><description>अंजीर में ऐसे एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं जो फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। गर्म तासीर की वजह से लोग अंजीर का सेवन नहीं करते हैं। गर्मी में ज्यादा अंजीर खाने से पेट दर्द और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। आज हम आपको गर्मियों में अंजीर खाने के 3 तरीके बता रहे हैं। इससे आपको भरपूर फायदा मिलेगा।
दूध में भिगोकर खाएं अंजीर
अंजीर का भरपूर फायदा लेना है तो इसे दूध में भिगोकर खाएं। इससे अंजीर के पोषक तत्व कई गुना बढ़ जाते हैं। दूध में भिगोकर खाने से अंजीर की तासीर भी ठंडी हो जाती है। ये अंजीर खाने का सबसे हेल्दी और पौष्टिक तरीका है। इस तरह दूध में भीगा अंजीर खाने से इम्युनिटी बढ़ती है। इसे मिलाकर मिल्क शेक भी बनाकर पी सकते हैं।
अंजीर से बनाए स्मूदी
गर्मियों में अंजीर खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप स्मूदी बनाकर अंजीर का सेवन करें। आप 2-3 टुकड़े अंजीर लेकर स्मूदी में डाल लें। इसे 2-3 घंटे के लिए अंजीर डालकर ऐसे ही रख दें। उसके बाद अंजीर को स्मूदी के साथ ब्लैंड कर लें। इस तरह अंजीर काफी फायदा भी करेगी। </description><guid>52965</guid><pubDate>24-May-2026 11:47:28 am</pubDate></item><item><title>चुकंदर से कम होता है हाई ब्लड प्रेशर</title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=52964</link><description>आजकल हाई ब्लड प्रेशर की समास्या काफी देखने को मिल रही है। काम में व्यस्त व्यक्ति अपना ख्याल ढंग से नहीं रख पाता है। तनाव की वजह से कई सारी बिमारियां होने लगती है। हाई बलड प्रेशर को शरीर में कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। इस वजह से सबसे ज्यादा नुकसान ह्रदय पर ही पड़ता है। स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक, जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर बढ़ा रहता है उनमें हार्ट के अलवा आंखों, लिवर और किडनी से संबंधित गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसे कंट्रोल में रखने के लिए सभी लोगों को विशेष रुप से ध्यान रखना चाहिए। स्वास्थ्य एक्सपर्ट कहते है कि, आहार और लाइफस्टाइल को अच्छा रखकर ब्लड प्रेशर रोगियों की समास्या काफी कम हो सकती है। लाल रंग के चुकंदर का सेवन करना भी आपके लिए काफी फायदेमंद है।
चुकंदर से कम होता है हाई ब्लड प्रेशर
अध्ययन में पता चला है कि अधिकतर लोगों ने दिन में एक गिलास चुकंदर का जूस पीकर रक्तचाप को काफी कम किया है। हाई ब्लड प्रेशर की समास्या दिल का दौरा, स्ट्रोक और लंबी ह्रदय विफलता जैसी खतरनाक स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर से किडनी और लिवर से संबंधित रोगों का भी कारक माना जाता है।
चुकंदर इतना फायदेमंद क्यों है?
चुकंदर में डाइट्री नाइट्रेट (NO3) होता है जिसे जैविक रुप से एक्टिव नाइट्राइट (NO2) और नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) परिवर्तित कर देता है। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं के आराम देने और उन्हें चौड़ा करके रक्त के संचार को ठीक बनाए रखने में मदद करता है।
चुकंदर के फायदे और सावधानियां
आहार के एक्सपर्ट कहते हैं, चुकंदर खाने से शरीर को काभी लाभ प्रदान होता है, जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की समास्या रहती है उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ये ब्लड प्रेशर को और कम कर सकती है। आयरन की कमी दूर करने में, कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकने, लिवर में फैट का एकत्रित होने से रोकने में इसका सेवन करने में काफी लाभ होता है। </description><guid>52964</guid><pubDate>24-May-2026 11:43:05 am</pubDate></item><item><title>आयुर्वेदिक चीज़ें सेहत के लिए कई फ़ायदे : जानें मेथी के बीज इसका एक बेहतरीन उदाहरण  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=52889</link><description>आसान आयुर्वेदिक चीज़ें सेहत के लिए कई फ़ायदे दे सकती हैं, और मेथी के बीज इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। हालाँकि इनका कड़वा स्वाद कुछ लोगों को पसंद नहीं आता, लेकिन यह जड़ी-बूटी और मसाला सेहत से जुड़ी कई समस्याओं में मदद कर सकता है और खाने में एक अनोखा स्वाद ला सकता है। पतंजलि आयुर्वेद के को-फ़ाउंडर आचार्य बालकृष्णजी, मेथी के बीज खाने के फ़ायदों के बारे में बताते हैं और इससे जुड़े पतंजलि प्रोडक्ट्स के बारे में बताते हैं। मेथी के बीजों की जानकारी मेथी के बीज एक कड़वा, गर्म मसाला और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसका इस्तेमाल दवा और खाना पकाने दोनों के लिए किया जाता है। इनकी खेती पुराने समय से की जाती रही है, जिसके रिकॉर्ड मेसोपोटामिया और नियर ईस्ट में लगभग 4,000 से 6,000 BCE के हैं। 
पहले के मिस्र, रोमन और ग्रीक कल्चर में दवा, खाने और बचाव के लिए बीजों के इस्तेमाल का डेटा मौजूद है। भारतीय (आयुर्वेदिक) और चीनी दवा में, इनका इस्तेमाल पाचन, सांस की सेहत, डायबिटीज़, दूध पिलाने की क्षमता, पेट दर्द और कमज़ोरी से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद में, इसे कफ और वात दोषों को बैलेंस करने के लिए जाना जाता है, जबकि इसकी गर्म तासीर पाचन शक्ति को बढ़ाती है और पेट फूलने जैसी समस्याओं को रोकने में मदद करती है। इसकी गर्म एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी आर्थराइटिस जैसे जोड़ों के दर्द को कम करती है। जबकि मेथी के बीज हार्मोन को मैनेज करते हैं और रिप्रोडक्टिव सिस्टम और लैक्टेशन को बढ़ावा देते हैं, वे एनर्जी लेवल भी बढ़ाते हैं। इसके घुलनशील फाइबर के साथ मेटाबॉलिज्म को मैनेज करने की इसकी क्षमता ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करती है। यह बालों और स्किन के लिए फायदेमंद है। आचार्य बालकृष्णजी द्वारा बताए गए मेथी के बीजों का इस्तेमाल करने के आयुर्वेदिक टिप्स आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होंगे। इन्हें पतंजलि प्रोडक्ट्स के साथ जानें।

मेथी के बीजों का इस्तेमाल करने के कई आयुर्वेदिक तरीके शुरुआत के लिए, आचार्य बालकृष्णजी डायबिटीज से जुड़ी दिक्कतों, दिल की परेशानियों और जोड़ों के दर्द जैसी सूजन वाली समस्याओं के इलाज के लिए मेथी के बीजों का एक साधारण काढ़ा पीने का सुझाव देते हैं। अगर आप रात में एक कप पानी में एक चम्मच मेथी के बीज भिगोकर सुबह पीते हैं, तो यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत अच्छा होता है। या उस पानी को पीकर मेथी के बीज चबाकर खा लें। मेथी का पानी वज़न कम करने और सिस्टम को साफ़ करने में भी मदद करता है। खाली पेट भीगे हुए मेथी के दाने खाने से ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल रहता है और पाचन और मेटाबॉलिज़्म भी अच्छा रहता है। कुछ लोगों को कड़वे दाने खाना पसंद नहीं होता। इसलिए, वह एक और तरीका बताते हैं जिससे बच्चों को भी मदद मिलेगी। मेथी के दानों को एक सूती कपड़े में भिगो दें। उसमें लपेटकर पूरे दिन लटका दें। अगर दिन में गर्मी हो, तो इसे एक या दो बार पानी से गीला करते रहें। अगले दिन, आपको बड़े-बड़े अंकुर निकलते हुए दिखेंगे। 
कभी-कभी अंकुरित होने में समय लगता है। ऐसे में, इसे दो दिन के लिए रख दें। अंकुर तैयार हो जाएगा। थोड़ा नींबू निचोड़ें और थोड़ा नमक छिड़कें, और आप अंकुरित दानों को सलाद की तरह खा सकते हैं। एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को 2/3 कप पानी में उबालकर चाय पिएं। पानी कम करके छान लें। यह पाचन स्वास्थ्य में मदद करता है और नई मांओं के लिए दूध का प्रोडक्शन बढ़ाता है। नई माँएँ डिलीवरी के बाद की हेल्थ और इम्यूनिटी को वापस पाने के लिए मेथी के लड्डू भी खा सकती हैं, साथ ही लैक्टेशन भी बढ़ा सकती हैं। डैंड्रफ कम करने और बालों की जड़ों को मज़बूत बनाने के लिए, बीजों को चार से पाँच घंटे पानी में भिगोएँ, फिर उन्हें पीसकर पेस्ट बना लें और स्कैल्प पर मलें। पतंजलि कई तरह के मेथी प्रोडक्ट्स देता है। अपने खाने में पतंजलि मेथी साबुत (200 Gms) शामिल करें। या मेडिकल ज़रूरतों के लिए ऊपर बताए गए तरीके से इसका इस्तेमाल करें। या पतंजलि मेथी आटा (1 Lg) का इस्तेमाल करें, जो मेथी के दानों और कई अनाजों (गेहूँ, चना और जौ) से बना एक पौष्टिक आटा है। जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से जुड़ी समस्याओं के लिए, पतंजलि दिव्य पीड़ांतक वटी (40 Gms और 43 Gms) चुनें जिसमें मीठी के साथ गुग्गुल शुद्ध, अश्वगंधा, शिलाजीत शुद्ध, नागरमोथा, हल्दी, अजवाइन और दूसरी जड़ी-बूटियाँ होती हैं।
 </description><guid>52889</guid><pubDate>23-May-2026 11:06:21 am</pubDate></item><item><title>बादाम-किशमिश खाने का सही तरीका और मात्रा: भरपूर लाभ पाने के टिप्स  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=52888</link><description>ड्राई फ्रूट्स में बादाम और किशमिश का सेवन लोग खूब करते हैं. इनका इस्तेमाल भी कई तरह के मीठे, नमकीन व्यंजनों में भी होता है. कुछ लोग तो मुट्ठी भर-भर कर बादाम और किशमिश खा लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी बादाम और किशमिश के सेवन की सलाह देते हैं. इनमें ढेरों पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं. हालांकि, इनके पोषण गुण अलग-अलग होते हैं. ये फायदे दो ढेरों पहुंचाते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से नुकसान भी हो सकता है. ऐसे में ये जरूर जान लेना चाहिए कि एक दिन में कितने बादाम और किशमिश का सेवन आमतौर पर करना फायदेमंद है.

बादाम में मुख्य पोषक तत्व बादाम में प्रोटीन, हेल्दी फैट (मोनोअनसैचुरेटेड फैट), फाइबर, विटामिन E, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन आदि मौजूद होते हैं. बात करें 100 ग्राम बादाम की तो इसमें औसतन प्रोटीन 21 ग्राम, फैट 49 ग्राम, फाइबर 12 ग्राम तक मौजूद हो सकता है. किशमिश में मुख्य पोषक तत्व किशमिश में नेचुरल ग्लूकोज और फ्रक्टोज होता है. यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है. आयरन, पोटैशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, कॉपर और मैंगनीज आदि होते हैं. औसतन 100 ग्राम किशमिश में एनर्जी 300 कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट 79 ग्राम, फाइबर 34 ग्राम, आयरन 1.52 मि.ग्रा. मौजूद हो सकते हैं. बादाम-किशमिश साथ खाने के फायदे -जब आप बादाम और किशमिश को एक साथ खाते हैं तो ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाने में मदद मिलती है. -कमजोरी और थकान कम करने में सहायक होते हैं. ऐसे में आप इन्हें साथ में जरूर खा सकते हैं. -हड्डियों और दिल की सेहत को लाभ पहुंचाते हैं. यदि आपको हड्डियों में दर्द रहता है तो आप बादाम और किशमिश का सेवन साथ कर सकते हैं. -वजन बढ़ाने या स्वस्थ स्नैक के रूप में उपयोगी हैं. बादाम और किशमिश के सेवन का सही तरीका

हेल्थ डाइट एंड न्यूट्रिशन क्लिनिक की आहार विशेषज्ञ डॉ. सुगिता मुत्रेजा के अनुसार, आप एक दिन में 5 से 10 बादाम खा सकते हैं. इससे अधिक नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, किशमिश आप 10-15 खाएं. किशमिश और बादाम को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना भी अच्छा माना जाता है. आप बादाम को छिलका उतार कर भी खा सकते हैं. इन दोनों सूखे मेवों को जब आप पानी में भिगोकर खाते हैं तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है. हार्ट हेल्दी रहता है. शरीर को ताकत और मजबूती मिलती है. बादाम और किशमिश कब खाने चाहिए? बादाम और किशमिश खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है. सुबह उठक आप चाय पीने की बजाय खाली पेट भीगे हुए बादाम और किशमिश कुछ दिनों तक खाकर देखें. आपको दिन भर भरपूर एनर्जी मिलेगी. मेटाबॉलिज्म बूस्ट होगा. जो लोग वर्कआउट करते हैं, वे व्यायाम से पहले बादाम और किशमिश खा सकते हैं. इसे आप ब्रेकफास्ट में भी कई तरीके से शामिल कर सकते हैं. इनके सेवन से हार्ट हेल्दी रहता है. आयरन की कमी नहीं होती है. बादाम स्किन और बालों को भी पोषण देता है. बादाम दिमाग को हेल्दी रखता है, याद्दाश्त मजबूत होती है. बादाम बच्चों को जरूर खिलाएं.
 </description><guid>52888</guid><pubDate>23-May-2026 10:55:09 am</pubDate></item><item><title>भीषण गर्मी में आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स कितनी असरदार? विशेषज्ञों की राय  </title><link>https://thevoicetv.in/health.php?articleid=52810</link><description>उत्तर भारत में गर्मी ने एक बार फिर अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। तेज धूप और लू के बीच लोग राहत पाने के लिए ठंडे पेय पदार्थों और खाद्य विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और रंग-बिरंगे बर्फ के गोले का खूब सेवन कर रहे हैं।
 ये चीजें न सिर्फ स्वाद में अच्छी लगती हैं, बल्कि इन्हें खाने के तुरंत बाद शरीर को ठंडक महसूस भी होती है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इनकी मांग काफी बढ़ जाती है। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या ये ठंडे उत्पाद वास्तव में शरीर के तापमान को कम करते हैं या यह केवल एक अस्थायी अनुभव होता है? विशेषज्ञों के अनुसार, इन चीजों का असर ज्यादातर समय के लिए होता है और यह शरीर के आंतरिक तापमान को स्थायी रूप से कम नहीं करते। इन उत्पादों में मौजूद अत्यधिक चीनी और कृत्रिम तत्व कभी-कभी शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं, खासकर जब इनका सेवन अधिक मात्रा में किया जाए। 
कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे बर्फ के गोले शरीर को कुछ समय के लिए ठंडक का एहसास जरूर देते हैं, लेकिन यह प्रभाव बहुत जल्दी खत्म हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि असली राहत पाने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। पानी, नारियल पानी और प्राकृतिक फलों के रस जैसे विकल्प शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अधिक प्रभावी होते हैं। इसके अलावा हल्के और सूती कपड़े पहनना, धूप से बचाव करना और पर्याप्त आराम लेना भी जरूरी है। आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स का सीमित सेवन ही बेहतर माना जाता है, क्योंकि इनका अत्यधिक उपयोग पाचन तंत्र और गले पर भी असर डाल सकता है। गर्मी के दौरान शरीर पहले से ही तनाव में रहता है, ऐसे में अनियमित खानपान स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि ठंडे पेय पदार्थों का असर मुख्य रूप से मानसिक संतुष्टि और अस्थायी राहत तक सीमित होता है, जबकि शरीर को वास्तविक ठंडक सही हाइड्रेशन और संतुलित आहार से ही मिलती है। कुल मिलाकर, गर्मी में आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स भले ही तुरंत राहत देते हों, लेकिन यह केवल एक अस्थायी अनुभव है। असली सुरक्षा और ठंडक के लिए स्वस्थ जीवनशैली और पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन ही सबसे जरूरी उपाय है।
 </description><guid>52810</guid><pubDate>22-May-2026 11:05:22 am</pubDate></item></channel></rss>