<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>The Voice TV Feed</title><link>https://thevoicetv.in</link><description>The Voice TV Feed Description</description><item><title>नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को भारत भ्रमण का निमंत्रण</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50299</link><description>काठमांडू, 12 अप्रैल । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को भारत भ्रमण काे निमंत्रण मिला है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण को शाह ने स्वीकार कर लिया है। हिन्द महासागर सम्मेलन में सहभागी होने के लिए इस समय मॉरिशस में मौजूद विदेश मंत्री खनाल और भारत के विदेशमंत्री के डॉ. एस जयशंकर के बीच हुई साइडलाइन मुलाकात में भी शाह की होने वाली भारत यात्रा पर चर्चा हुई।

मॉरीशस से नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने फोन पर बताया कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने शाह को भेजे शुभकामना संदेश में भारत भ्रमण पर आने का निमंत्रण। नेपाल सरकार ने उसे स्वीकार कर लिया है लेकिन भ्रमण की तिथि अभी तय नहीं हुई है।

इस समय दोनों देशों के विदेश मंत्रालय बालेन्द्र शाह के भ्रमण को लेकर तैयारी कर रहे हैं। नेपाल के विदेश सचिव अमृत राई ने कहा कि भारत और नेपाल सरकार के बीच भ्रमण के एजेंडा को लेकर बातचीत जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर भ्रमण के दौरान होने वाले समझौते को लेकर सहमति बनाने का प्रयास चल रहा है। </description><guid>50299</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:49:03 am</pubDate></item><item><title> इस्लामाबाद वार्ता विफल, ईरान से अमेरिका का नहीं हो सका समझौता, उपराष्ट्रपति वेंस स्वदेश रवाना</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50298</link><description>इस्लामाबाद, 12 अप्रैल । अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल हो गई। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से स्वदेश रवाना हो गए हैं। पहले यह कहा गया था कि आज भी बातचीत होगी। अमेरिका रवाना होने से पहले वेंस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए। उनकी नजर में यह अमेरिका के मुकाबले ईरान के लिए कहीं ज्यादा बुरी खबर है। इसलिए, वह बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट रहे हैं।

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वैंस रविवार को स्थानीय समय अनुसार सुबह 7:09 बजे एयर फोर्स टू में सवार होकर पाकिस्तान से अमेरिका के लिए रवाना हो गए। उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ 21 घंटे तक चली बातचीत पूरी करने के बाद यह कदम उठाया। यह बातचीत बिना किसी समझौते पर पहुंचे ही समाप्त हो गई। जेंस ने रविवार सुबह संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि ईरान ने शर्तें स्वीकार न करने का फ़ैसला किया है। अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी' शुरू किए जाने के एक महीने से भी अधिक समय बाद उपराष्ट्रपति शनिवार सुबह ईरान के साथ बातचीत का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे।

डॉन अखबार के अनुसार, वेंस ने दोनों देशों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। वेंस ने कहा, हम पिछले 21 घंटों से इस पर काम कर रहे हैं और हमने गंभीर चर्चा की हैं। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, हमने यह साफ कर दिया है कि हमारे लक्ष्य क्या हैं। हमने यह भी साफ कर दिया कि ईरान की किन बातों को हम मानने को तैयार हैं। मगर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है। वेंस संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ की उन्होंने बेहतरीन मेजबान बताया।

उन्होंने यह भी साफ किया कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान ने बढ़िया काम किया और सचमुच मदद करने की कोशिश की, ताकि हमारे बीच की खाई पट सके और कोई समझौता हो सके। जब वेंस से पूछा गया कि ईरान ने किन बातों को अस्वीकार किया, तो उन्होंने में कहा, मैं सभी बातों पर नहीं जाऊंगा, क्योंकि मैं 21 घंटे तक निजी तौर पर बातचीत करने के बाद अब सार्वजनिक रूप से बातचीत नहीं करना चाहता। लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें एक पक्का आश्वासन चाहिए कि वे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही वे ऐसे साधन जुटाने की कोशिश करेंगे जिनसे वे तेजी से परमाणु हथियार हासिल कर सकें।

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने एक्स पर लिखा, इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल के लिए यह व्यस्त और लंबा दिन रहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। बातचीत में मुख्य विषय होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध हर्जाना, प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध की पूर्ण समाप्ति रहा। </description><guid>50298</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:48:22 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका का ईरान से नहीं हो पाया समझौता, वेंस ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से कहा-21 घंटे की गंभीर चर्चा नहीं आई काम, यह बुरी खबर</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50297</link><description>इस्लामाबाद, 12 अप्रैल । अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आज (रविवार) सुबह कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह बात शनिवार दोपहर शुरू हुई इस्लामाबाद वार्ता के तहत 21 घंटे की गंभीर चर्चा के बाद कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। वेंस ने कहा, हम पिछले 21 घंटे तक शांति वार्ता पर काम किया और गंभीर चर्चा की है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं।

पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने कहा, हमने यह साफ कर दिया है कि हमारे लक्ष्य क्या हैं। हमने यह भी साफ कर दिया कि ईरान की किन बातों को हम मानने को तैयार हैं। मगर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है। वेंस ने संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ की और उन्होंने बेहतरीन मेजबान बताया।

उन्होंने यह भी साफ किया कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान ने बढ़िया काम किया और सचमुच मदद करने की कोशिश की, ताकि हमारे बीच की खाई पट सके और कोई समझौता हो सके। जब वेंस से पूछा गया कि ईरान ने किन बातों को अस्वीकार किया, तो उन्होंने में कहा, मैं सभी बातों पर नहीं जाऊंगा, क्योंकि मैं 21 घंटे तक निजी तौर पर बातचीत करने के बाद अब सार्वजनिक रूप से बातचीत नहीं करना चाहता। लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें एक पक्का आश्वासन चाहिए कि वे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही वे ऐसे साधन जुटाने की कोशिश करेंगे जिनसे वे तेजी से परमाणु हथियार हासिल कर सकें।

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने एक्स पर लिखा, इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल के लिए यह व्यस्त और लंबा दिन रहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। बातचीत में मुख्य विषय होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध हर्जाना, प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध की पूर्ण समाप्ति रहा। </description><guid>50297</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:46:05 am</pubDate></item><item><title>बांग्लादेश के कृषि वैज्ञानिक अब्दुर रज्जाक का निधन</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50296</link><description>ढाका, 12 अप्रैल । बांग्लादेश कृषि अनुसंधान परिषद (बीएआरसी) के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. मो. अब्दुर रज्जाक का शनिवार देररात ढाका के बांग्लादेश स्पेशलाइज़्ड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान निधन हो गया। बीएआरसी ने डॉ. मो. अब्दुर रज्जाक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की हैं।

ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश कृषि अनुसंधान परिषद ने कहा कि देश ने एक ऐसे विशिष्ट कृषि वैज्ञानिक और दूरदर्शी नेता को खो दिया है, जिनके योगदान ने देश के कृषि अनुसंधान क्षेत्र को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाया।परिषद ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए और उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति का सामना करने की शक्ति मिले, इसके लिए प्रार्थना की है।

उन्हें बांग्लादेश में फार्मिंग सिस्टम रिसर्च और स्थायी ग्रामीण कृषि विकास के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। उन्हें 2013 में अमेरिका की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी ने प्रतिष्ठित कृषि पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया था। </description><guid>50296</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:44:50 am</pubDate></item><item><title>इस्लामाबाद में 15 घंटे की वार्ता में अमेरिका, ईरान अटके रहे लेबनान और होर्मुज पर, आज फिर होगी बातचीत</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50295</link><description>इस्लामाबाद, 12 अप्रैल । पाकिस्तान के मध्य पूर्व में शांति स्थापना के साथ ईरान और अमेरिका-इजराइल के मध्य छिड़े युद्ध को खत्म कराने की कोशिश का क्या निष्कर्ष निकलता है, यह देखने के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार दोपहर से चली लगभग 15 घंटे की लंबी बातचीत में घुमा फिराकर लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोनों पक्ष अटके रहे। ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता में मध्यस्थता कर रहे मेजबान पाकिस्तान के अधिकारियों ने फिलहाल इस वार्ता पर किसी भी टिप्पणी से इनकार कर दिया है। इस बीतचीत के बीच अच्छी खबर यह है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आखिरकार लेबनान से सीधी बातचीत को सहमत हो गए हैं।

ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी, अल जजीरा चैनल, पाकिस्तान के दुनिया न्यूज और अमेरिका के सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी और अमेरिकी वार्ताकारों के बीच लंबी बातचीत लगभग 15 घंटे बाद रविवार सुबह समाप्त हो गई। ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 13:00 (एक बजे) बजे पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित सेरेना होटल में बातचीत शुरू की। उन्होंने पहले पाकिस्तानी अधिकारियों से बात की और फिर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से। बातचीत का यह लंबा दौर रविवार को स्थानीय समय अनुसार सुबह 3:40 बजे तक जारी रहा। दोनों पक्षों के बीच आज भी बातचीत करने का कार्यक्रम है।

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी पक्ष ने अनुचित मांगों को रखा। वह (ईरान) अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने पर अडिग है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव और दोनों पक्षों की सहमति से रविवार को बातचीत का एक और दौर चलेगा। कहा जा रहा है कि 1979 की क्रांति के बाद ईरानियों और अमेरिकियों के बीच यह अब तक की सबसे उच्चस्तरीय बातचीत है। इससे पहले 2015 में दोनों देशों के तत्कालीन विदेशमंत्रियों के बीच बैठक हुई थी। ताजा बैठक में अमेरिका का नेतृत्व उपराष्ट्रपति और ईरान का नेतृत्व संसद के स्पीकर कर रहे हैं।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला जाता, तब तक बातचीत में कोई भी ठोस प्रगति कर पाना बेहद मुश्किल होगा। 15 घंटे की बातचीत के पांचवें दौर में दोनों पक्षों ने कई बार मसौदों का आदान-प्रदान किया है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात की है। इस दौरान ईरान से और भी विमान इस्लामाबाद पहुंचे हैं। पाकिस्तान के सभी अधिकारियों को एक तरह का चुप्पी का आदेश है। मेजबान देश होने के नाते वह इस बातचीत पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।

इस वार्ता का उद्देश्य

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए स्थायी शांति समझौते पर पहुंचना है। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को पंगु बना दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह शांति वार्ता ईरान और अमेरिका के दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को शुरू हुई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने उम्मीद जताई कि इस वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर इस वार्ता के बाद शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करेगा। ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना रखी है। इसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांगें शामिल हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौनः इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामादा जेरेड कुशनर भी हैं।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौनः अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने पाकिस्तान पहुंचे ईरानी टीम का नेतृत्व ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल के अन्य मुख्य सदस्यों में विदेशमंत्री अब्बास अराघची, वार्ताकार अली बाघेरी हैं। ईरानी मीडिया ने बताया कि इस्लामाबाद गए प्रतिनिधिमंडल में वार्ताकारों, विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों समेत 71 लोग शामिल हैं।

मध्यस्थ पाकिस्तान में कौन-कौनः पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों को बातचीत के लिए मनाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और उप विदेशमंत्री इशाक डार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

लेबनान से शांति समझौते को इजराइल तैयार

इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइल लेबनान के साथ स्थायी शांति समझौता करने के लिए तैयार है। उन्होंने ईरान और उसके सहयोगियों की आलोचना भी की है। नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल का सैन्य अभियान आतंकवादी शासन के खिलाफ जारी रहेगा। नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल लेबनान के साथ एक स्थायी शांति व्यवस्था चाहता है और साथ ही यह भी कहा कि ऐसे समझौते में दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए। एक वीडियो संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल लेबनान के साथ शांति समझौते के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब यह लंबे समय तक चलने वाला हो और हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने की शर्त पर आधारित हो। ईरान के सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, इस बीच, इजराइली सेना ने दावा किया कि उसकी सेनाओं ने पिछले 24 घंटों में लेबनान भर में हिजबुल्लाह के 200 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने शनिवार को दावा किया कि लेबनान में संघर्ष-विराम अमेरिका के साथ बातचीत में हुए एक समझौते का हिस्सा था। </description><guid>50295</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:44:17 am</pubDate></item><item><title>ईरान का आरोप- अमेरिकी मीडिया अपना रहा दोहरा रवैया, बयानबाजी पर उठाए सवाल</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50294</link><description>तेहरान, 11 अप्रैल । ईरान ने अमेरिकी मीडिया पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि एक ओर अमेरिका ईरान पर ईमानदारी की कमी का आरोप लगाता है, दूसरी ओर कुछ अमेरिकी मंचों पर ईरानी प्रतिनिधियों के खिलाफ हिंसक बयान सामने आ रहे हैं।

बघाई ने अपने बयान में द वॉशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए कहा कि उसमें यह संकेत दिया गया था कि ईरानी नेताओं की सुरक्षा किसी समझौते पर निर्भर हो सकती है। उन्होंने इस तरह की टिप्पणी को गंभीर बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यह दबाव बनाने या धमकी देने का प्रयास नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी कूटनीतिक वार्ताओं के माहौल को प्रभावित करती है और यह संवाद की प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है। बघाई के अनुसार, हिंसा या भय का संकेत देकर बातचीत को प्रभावित करना अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है।

ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं को लेकर वैश्विक स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं। </description><guid>50294</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:41:57 am</pubDate></item><item><title>वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरीः शिशिर खनाल</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50286</link><description>पोर्ट लुइस (मॉरीशस), 11 अप्रैल । नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा चुनौतियां, आपूर्ति शृंखला में अवरोध और बढ़ती असमानताएं अब केवल सहयोग ही नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की मांग कर रही हैं।

विदेश मंत्री खनाल मॉरीशस के पोर्ट लुइस में 10 से 12 अप्रैल तक आयोजित 9वें हिंद महासारग सम्मेलन के दूसरे दिन एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक नेतृत्व विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एकसाथ लाना है ताकि साझा जिम्मेदारियों, सहकारी ढांचों और क्षेत्रीय शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श किया जा सके।

सम्मेलन का आयोजन इंडिया फाउंडेशन और भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में मॉरीशस सरकार के सहयोग से किया गया है। सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री डॉ. इस जयशंकर सहित दक्षिण और दक्षिण पूर्व के कई देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधियों की सहभागिता है।

नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि मध्यपूर्व में जारी संघर्षों का प्रभाव नेपाल सहित पूरे विश्व पर पड़ रहा है। इन संघर्षों का प्रभाव क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर फैल रहा है, जिससे ईंधन की कीमतें, आपूर्ति शृंखला और आजीविका पर असर पड़ रहा है। हिंद महासागर की स्थिरता वैश्विक शांति से सीधे जुड़ी हुई है।

हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक संरक्षकत्व विषय पर उन्होंने कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी की शुरुआत इस सरल सत्य से होती है कि हिमालय और महासागर का भविष्य एक-दूसरे से अविच्छिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, नेपाल सरकार के दृष्टिकोण में संरक्षकत्व का अर्थ संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर साझा जिम्मेदारी निभाना है। इसके लिए समावेशी, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली आवश्यक है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों पर आधारित हो।

खनाल ने कहा कि नेपाल संवाद का साझेदार, लैंड लॉक्ड देशों की आवाज और पर्वत तथा महासागर के बीच सेतु बनने के लिए तैयार है। उन्होंने उल्लेख किया कि भले ही नेपाल लैंड लॉक्ड देश है, लेकिन उसका हिंद महासागर से संबंध प्राचीन, स्वाभाविक और अविभाज्य रहा है। इतिहास में नेपाली व्यापारी, तीर्थयात्री और विद्वान हिमालय से महासागर तक जाने वाले मार्गों का उपयोग करते थे, जिनसे न केवल व्यापार बल्कि विचार और दर्शन भी फैलते थे। विशेष रूप से गौतम बुद्ध की शिक्षाएं भी इन्हीं मार्गों से व्यापक रूप से फैलीं।

खनाल ने कहा, जलवायु परिवर्तन ने इस संबंध को और अधिक स्पष्ट तथा चिंताजनक बना दिया है। नेपाल में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर हिंद महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है और द्वीपीय देशों के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है।

उन्होंने कहा कि नेपाल इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और कॉप सम्मेलनों में उठाता रहा है तथा इसी संदर्भ में सागरमाथा संवाद नामक अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थापना की गई है।

खनाल ने हिंद महासागर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र बताते हुए उन्होंने समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, हम विवादों के समाधान के लिए संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हैं। हम केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी के माध्यम से भी जुड़े हुए हैं। </description><guid>50286</guid><pubDate>11-Apr-2026 6:35:29 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत, नतीजों पर दुनिया भर की निगाहें</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50285</link><description>इस्लामाबाद, १1 अप्रैल। पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष को स्थायी रूप से विराम देने के मकसद से पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित सेरेना होटल में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को बातचीत शुरू हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ कर रहे हैं। इस बातचीत पर दुनिया भर की निगाहें हैं।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद अमेरिका-ईरान के बीच आज इस्लामाबाद के सेरेना होटल में युद्धविराम समझौते पर बातचीत हो रही है। अमेरिका की ओर से बातचीत की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं और उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कालीबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराकची भी हैं।

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त रूप से बड़ा सैन्य हमला किया था, जिसमें परमाणु साइटों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजराइल के साथ उन तमाम खाड़ी देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य बेस थे। अमेरिका ने नाटो देशों से मदद मांगी लेकिन नाटो के सदस्यों ने इसमें कोई रुचि नहीं ली।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित कर अमेरिका-इजराइल को बातचीत के लिए मजबूर कर दिया। ईरान के रूख से पूरी दुनिया में गैस और तेल का संकट पैदा हो गया। इसके बाद अमेरिका की तरफ से 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की गई। युद्ध विराम समझौते पर इस्लामाबाद में बातचीत हो रही है, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है।

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता विफल रहती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है। ट्रंप की प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना है। जबकि ईरान ने वार्ता शुरू करने के लिए लेबनान में युद्धविराम के साथ ईरान की संपत्तियों को अनब्लॉक करने और प्रतिबंधों में ढील देने जैसी शर्तें रखी हैं।---- </description><guid>50285</guid><pubDate>11-Apr-2026 6:33:22 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के सभी हवाईअड्डे पर २४ घंटे के भीतर स्तनपान कक्ष स्थापित करने के निर्देश</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50272</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल । नेपाल सरकार ने राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल सहित देशभर के सभी हवाई अड्डों पर 24 घंटे के भीतर सुरक्षित स्तनपान एवं शिशु देखभाल कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया है।

नेपाल के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शनिवार को यह निर्देश दिया है कि हवाई अड्डों पर स्वच्छ, सुरक्षित और गोपनीयता सुनिश्चित करने वाले स्तनपान एवं शिशु देखभाल कक्षों का संचालन किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार उनका उन्नयन किया जाए।

मंत्रालय के सचिव मुकुंद प्रसाद निरौला द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक बीमार और विशेष आवश्यकता वाले यात्रियों के लिए प्राथमिक देखभाल कक्ष भी संचालित करने को कहा गया है।

हवाई अड्डों की सफाई को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने, दैनिक सफाई के लिए लॉगबुक प्रणाली लागू करने तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य मानकों का पालन करने का भी निर्देश दिया गया है।

इसी तरह शौचालयों में महिला यात्रियों के लिए निःशुल्क सैनिटरी पैड की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। मंत्रालय ने इन सभी निर्देशों को लागू कर इसकी जानकारी मंत्रालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

साथ ही आम नागरिकों और यात्रियों से भी अपील की गई है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा हो, तो वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सूचना अधिकारी को इसकी जानकारी दें। </description><guid>50272</guid><pubDate>11-Apr-2026 3:46:32 pm</pubDate></item><item><title>रविवार को अस्पतालों में ओपीडी संचालन संभव नहीं : नेपाल चिकित्सक संघ</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50269</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल| नेपाल चिकित्सक संघ (एनएमए) ने देश के सभी अस्पतालों में रविवार को बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) के संचालन में असमर्थता जताई है।

नेपाल सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन सार्वजनिक अवकाश देने के साथ ही देशभर के अस्पतालों में रविवार के दिन मरीजों की सहूलियत के लिए ओपीडी सेवा चलने का निर्देश दिया था। लेकिन एनएमए ने जनशक्ति अपर्याप्त होने का हवाला देते हुए सरकार के निर्देश को लागू करने में असमर्थता व्यक्त की है। संघ ने स्वास्थ्य विभाग में कार्मिक सुविधाओं में आमूलचूल सुधार करने की भी मांग की है।

नेपाल चिकित्सक संघ ( एनएमए) ने स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी निर्देश के संदर्भ में शनिवार को एक बयान जारी कर कहा है कि रविवार को ओपीडी सेवा देना संभव नहीं होगा। बयान में संघ के महासचिव डॉ. संजीव तिवारी ने कहा कि सरकार ने सप्ताह में दो दिनशनिवार और रविवारसार्वजनिक अवकाश देने का निर्णय लिया है। हालांकि, मंत्रालय ने अस्पतालों से अपनी जनशक्ति के आधार पर रविवार को भी ओपीडी सेवा जारी रखने का अनुरोध किया था, लेकिन अतिरिक्त जनशक्ति उपलब्ध न होने के कारण यह संभव नहीं है।

संघ ने बताया कि चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी 9 से 5 की ड्यूटी के अलावा ऑन डिमांड, ऑलराउंड और इमरजेंसी जैसी सेवाएं 24 घंटे प्रदान करते हैं, लेकिन इन कार्यों का उचित समय-गणना नहीं की जाती है, जो अन्यायपूर्ण है। जब तक स्वास्थ्य संस्थानों में जनशक्ति का सुनियाेजित प्रबंधन नहीं किया जाता, तब तक मंत्रालय का रविवार को सेवा देने का अनुरोध लागू नहीं किया जा सकता।

संघ ने यह भी कहा कि अस्पताल कर्मचारियों को शनिवार के अलावा सप्ताह में एक और दिन अवकाश देने या अवकाश न दे पाने की स्थिति में बदले में छुट्टी (समायाेजित अवकाश) देने का प्रावधान है, लेकिन अतीत में कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया है। संघ के अनुसार, ईंधन की कमी के कारण सप्ताह में दो दिन अवकाश देने का निर्णय लिया गया है, ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों में ओपीडी समय बढ़ाकर ईंधन की अतिरिक्त खपत करना पूर्णत: अव्यावहारिक है।

संघ ने आगाह किया है कि यदि शनिवार और रविवार दोनों दिन अवकाश देने का निर्णय स्पष्ट रूप से लागू नहीं किया गया, तो स्वास्थ्य संस्थानों में और अधिक भ्रम की स्थिति पैदा होगी। इसलिए उसने स्वास्थ्य मंत्रालय से अपना निर्देश वापस लेने को कहा है। संघ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि न्यूनतम सुविधाएं देकर जबरन काम कराने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं की गई, तो चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के अस्पतालों को रविवार को भी ओपीडी सेवा संचालित करने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। सरकार द्वारा शनिवार और रविवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने के बाद कई अस्पतालों ने रविवार को ओपीडी सेवा बंद कर दी थी, जिसके बाद मंत्रालय ने यह निर्देश जारी किया था। </description><guid>50269</guid><pubDate>11-Apr-2026 3:41:54 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के सरकारी दफ्तरों में जीरो पेंडिंग फाइल अभियान चलाने के निर्देश</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50262</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल। नेपाल सरकार ने देशभर के सरकारी दफ्तरों में जीरो पेंडिंग फाइल अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जीरो पेंडिंग फाइल अभियान की शुरुआत अपने कार्यालय से की है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने टेबल पर एक भी लंबित फाइल न रखने का निर्देश दिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी मंत्रालयों, आयोगों, सचिवालयों, सभी प्रांतों के मुख्यमंत्री कार्यालयों तथा स्थानीय कार्यालयों को परिपत्र जारी कर दिशानिर्देश लागू करने और इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा है। इसमें कहा गया है कि अनावश्यक रूप से फाइलों को ऊपरी स्तर पर भेजने जैसी प्रवृत्तियों के कारण विभिन्न सेवाओं का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय की प्रभारी सुसना शर्मा के अनुसार सरकारी कार्यालयों में दर्ज फाइलें और अन्य दस्तावेज विभिन्न स्तरों और टेबलों पर अनावश्यक रूप से लंबित रहने तथा निर्णय में देरी होने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। </description><guid>50262</guid><pubDate>11-Apr-2026 2:34:05 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल में बालेन्द्र शाह मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या 40 प्रतिशत पहुंची</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50261</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल। नेपाल में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत तक बढ़ाकर समावेशी शासन पर जोर दिया है।

बालेन्द्र शाह के मंत्रिमंडल में शामिल कुल 15 मंत्रियों में 6 महिलाओं को शामिल किया गया है, जो कुल 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है।

बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में बने नए मंत्रिमंडल में सोविता गौतम को कानून, न्याय और संसदीय मामलों की मंत्री, गीता चौधरी को कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्री, सीता बादी को महिला, बालबालिका एवं ज्येष्ठ नागरिक मंत्री और निशा मेहता को स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री नियुक्त किया गया।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सिफारिश पर बाद में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने शुक्रवार को ही गौरी यादव को उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री नियुक्त किया।

प्रधानमंत्री शाह की प्रेस विशेषज्ञ दीपा दाहाल ने कहा कि यह नेपाल में कैबिनेट स्तर पर महिलाओं की भागीदारी के लिए एक नया मानक स्थापित करता है।

उन्होंने कहा, वर्तमान सरकार समावेशी और समानतापूर्ण शासन के लिए प्रतिबद्ध है। 40 प्रतिशत महिला मंत्रियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि परिवर्तनकारी राजनीति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता व्यवहार में लागू हो रही है।

नेपाल के संविधान में राज्य निकायों में कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है, लेकिन पिछली सरकारें अक्सर इस सीमा को पूरा नहीं कर पाई थीं। वर्तमान मंत्रिपरिषद ने इस आवश्यकता को पार कर लिया है।

नेपाल की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पूर्व सदस्य मोहना अंसारी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि नेपाल में मंत्रिपरिषद में महिलाओं की इतनी अधिक भागीदारी पहले कभी नहीं रही।

उन्होंने कहा, संख्यात्मक रूप से यह अब तक मंत्रिपरिषद में महिलाओं की सबसे अधिक भागीदारी है। 15 सदस्यीय कैबिनेट में 6 महिलाओं का होना समावेशी नेतृत्व की दिशा में एक उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि रूबी ठाकुर का डिप्टी स्पीकर चुना जाना व्यापक समावेशी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नेपाल की वरिष्ठ अधिवक्ता मीरा ढुंगाना ने कहा कि महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी न केवल अपेक्षाओं को पूरा करती है, बल्कि नीति निर्माण को महिलाओं के मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने का अवसर भी देती है। उन्होंने भविष्य में इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव दिया।

अधिवक्ता भावना दहाल ने कहा कि प्रतिनिधित्व के साथ-साथ विविधता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और वर्तमान मंत्रिपरिषद महिलाओं के नेतृत्व में संख्यात्मक और समावेशी विविधता को बढ़ावा देकर सकारात्मक संदेश दे रही है। </description><guid>50261</guid><pubDate>11-Apr-2026 2:31:12 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के प्रधानमंत्री के बिना बोले ही संसद के पहले अधिवेशन का अंत</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50250</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल । नेपाल में हुए आम निर्वाचन के बाद संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कोई भाषण नहीं दिया। नेपाल की संसद का पहला अधिवेशन बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही शनिवार से समाप्त हो गया है।

बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में जेनजी आंदोलन के बल पर हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद करीब दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनी। ऐसे में यह जानने को लेकर व्यापक उत्सुकता थी कि प्रधानमंत्री शाह संसद के पहले अधिवेशन में क्या बोलेंगे।

आमतौर पर चुनाव के बाद बनने वाले प्रधानमंत्री संसद को संबोधित करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं, मूल्यों और नीतियों की जानकारी देते हैं। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है, फिर भी अतीत में यह एक स्थापित परंपरा रही है।

नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने शनिवार को समाप्त हुए संसद के पहले अधिवेशन के दौरान अपने ही जैसे देशभर से चुने गए सांसदों के सामने सरकार की नीति और मूल्यों को प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं समझा।

27 मार्च को प्रधानमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद बालेन्द्र शाह ने आगामी 100 दिनों में लागू किए जाने वाले प्रशासनिक सुधारों के 100 बिंदुओं वाला कार्यसूची पारित कर सार्वजनिक कर दी है। इस कार्यसूची में नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में संशोधन जैसे कई कार्य शामिल हैं, जिनके लिए संसद का सहयोग आवश्यक होगा।

इसके बावजूद, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पारित इस कार्यसूची को संसद में पेश तक नहीं किया। इसे औपचारिक रूप से संसद के संज्ञान में भी नहीं लाया गया। परिणामस्वरूप, अन्य निर्वाचित सांसदों को भी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही सरकार की 100-दिवसीय योजना और उसकी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करनी पड़ी।

संसदीय व्यवस्था के जानकार प्रधानमंत्री के इस तरह संसद में न बोलने को असामान्य मानते हैं। संघीय संसद सचिवालय के पूर्व महासचिव मनोहर प्रसाद भट्टराई के अनुसार, आम चुनाव के बाद संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री द्वारा संबोधन करने की परंपरा रही है। इस परंपरा के विपरीत पूरे अधिवेशन के दौरान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के मौन रहने पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया। </description><guid>50250</guid><pubDate>11-Apr-2026 10:16:54 am</pubDate></item><item><title>गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद विदेश से ही कानूनी परामर्श ले रहे नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री देउवा</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50248</link><description>काठमांडू, 11 अप्रैल । आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा और उनकी पत्नी, पूर्व विदेश मंत्री डा आरजू देउवा ने विदेश से ही कानूनी परामर्श शुरू कर दिया है। देउवा दंपत्ति इस समय स्वास्थ्य उपचार के लिए हांगकांग में हैं।

विदेश में रह रही आरजू व्हाट्सऐप के माध्यम से वकीलों से गिरफ्तारी वारंट को लेकर परामर्श ले रही हैं। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय सभा सदस्य तथा वरिष्ठ अधिवक्ता खम्म बहादुर खाती, वरिष्ठ अधिवक्ता शेरबहादुर केसी समेत अन्य कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत की है।

अपने खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू होने के बाद आरजू कांग्रेस नेताओं और अपने निकटस्थ वकीलों के साथ लगातार संपर्क में हैं। उनसे बातचीत करने वाले कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि वह नेपाल की स्थिति और घटनाक्रम के बारे में जानकारी ले रही हैं तथा वीडियो और टेक्स्ट संदेश भी भेज रही हैं।

गिरफ्तारी वारंट के बाद नेपाल लौटने या न लौटने के बारे में उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं किया है। वारंट जारी होने के बाद देउवा दंपत्ति को फरार सूची में रखा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता खाती ने भी पुष्टि की कि वारंट जारी होने के बाद आरजु से उनकी बातचीत हुई है।

यदि वे नेपाल नहीं लौटते हैं, तो सरकार इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कांग्रेस के महासचिव प्रदीप पौडेल ने कहा कि देउवा दंपत्ति को नेपाल आकर जांच में सहयोग करना उपयुक्त होगा। उनके अनुसार, रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने से पहले ही स्वदेश लौटकर जांच में सहयोग करने से अच्छा संदेश जाएगा।

फरवरी महीने में विदेश गए देउवा दंपत्ति के नेपाल लौटने की कोई निश्चित तिथि नहीं है। 25 फरवरी को पूर्व प्रधानमंत्री देउवा इलाज के नाम पर सिंगापुर गए थे, जबकि आरजू देउवा 22 फरवरी को भारत गई थीं और वहीं से सिंगापुर पहुंची थीं। बाद में देउवा परिवार सिंगापुर से हांगकांग भी गए थे।

देउवा ने बताया है कि वे स्वास्थ्य उपचार के लिए विदेश में हैं और इलाज अभी जारी है। गिरफ्तारी वारंट की खबर आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी और उनके परिवार की संपत्ति को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, नेपाल के कानून के अनुसार, हमने सार्वजनिक पद पर रहते हुए अपनी संपत्ति का वास्तविक विवरण संबंधित सरकारी निकायों में प्रस्तुत किया है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, विधि का शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शिता के लिए मैंने अपना पूरा जीवन संघर्ष में बिताया है। मेरा जीवन एक खुली किताब की तरह है।

उन्होंने अपील की कि अतिरंजित और भ्रामक सूचनाओं से लोग भ्रमित न हों और समय के साथ सच्चाई सामने आएगी। देउवा ने यह भी बताया कि उनका इलाज जारी है, हालांकि नेपाल लौटने की समयसीमा के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। </description><guid>50248</guid><pubDate>11-Apr-2026 10:15:28 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका-ईरान के बीच शांतिवार्ता आज, इस्लामाबाद में दोनों देशों का प्रतिनिधिमंडल</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50247</link><description>तेहरान, 11 अप्रैल । पश्चिम एशिया मेंं करीब छह सप्ताह तक चले भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के बाद शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांतिवार्ता पर सभी की निगाहें हैं। ग्यारह साल बाद यह पहला अवसर है जब ईरान और अमेरिका सीधे बातचीत की मेज पर होंगे। इस बातचीत के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।

पश्चिम एशिया में भारी तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और इजराइल-हिज्बुल्ला संघर्ष के बीच आज इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होगी। इसके लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में शामिल अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।

मीडिया संस्थान ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालीबाफ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचा है। इसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियन और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेममती शामिल हैं। संसद के कई सदस्य प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत शुरू होने से ठीक पहले धमकी देते हुए कहा है कि समझौता न होने पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है, जबकि ईरान ने भी कई शर्तें रखी हैं। </description><guid>50247</guid><pubDate>11-Apr-2026 10:13:38 am</pubDate></item><item><title>नासा का मिशन आर्टेमिस-2 पूरा, दस दिनों बाद चांद के पास जाकर लौटे चारों अंतरिक्ष यात्री</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50246</link><description>वॉशिंगटन, 11 अप्रैल। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्रमा यात्रा के बाद सुरक्षित धरती पर वापस लौट चुके हैं। मिशन में उन्होंने पृथ्वी से सबसे दूर रिकॉर्ड दूरी तय की।

नासा ने एक्स पर दी गई जानकारी में बताया कि चंद्र मिशन आर्टेमिस-2 के चारों अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए हैं। उनका ओरियन अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में उतरा। कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास हुई यह लैंडिंग स्थानीय समय अनुसार रात 8:07 बजे ( भारतीय समयानुसार 11 अप्रैल की सुबह 5:37 बजे) हुई। यह मिशन 1 अप्रैल को फ्लोरिडा से प्रक्षेपित किया गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सफलता पर बधाई दी है।

नासा ने अंतरिक्ष यान की लैंडिंग का वीडियो शेयर कर एक्स पर लिखा, रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी, आपका घर में स्वागत है! आर्टेमिस II एस्ट्रोनॉट्स 11 अप्रैल को रात 8:07 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) उतर गए हैं, जिससे उनका ऐतिहासिक 10 दिनों का मिशन खत्म हो गया है।

1972 के बाद यह पहला मौका है, जब इस तरह चंद्र मिशन से वापसी हुई है। स्पेस एजेंसी के मुताबिक इस मिशन में शामिल लोगों ने 690,000 मील से ज्यादा सफर किया। 10 दिन के इस मिशन की सफलता के बाद नासा आर्मेटिस-3 की तैयारी में जुट गया है। मौजूदा मिशन में अंतरिक्ष यात्री सिर्फ चंद्रमा के पास से गुजरे लेकिन अगले मिशन में यात्री चांद पर उतरेंगे। </description><guid>50246</guid><pubDate>11-Apr-2026 10:12:12 am</pubDate></item><item><title>नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय का निर्देश -रविवार काे ओपीडी का करे संचालन</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50198</link><description>काठमांडू, 10 अप्रैल । नेपाल सरकार ने देशभर के अस्पतालों में रविवार को भी बाह्य राेगी विभाग (ओपीडी) सेवा संचालित करने का निर्देश दिया है।

सप्ताह में दो दिन अवकाश देने के सरकारी निर्णय के बाद रविवार को अस्पताल सुनसान होने लगे थे, जिसके बाद मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।

दाे दिन के साप्ताहिक अवकाश के निर्णय के लागू होने के बाद सरकारी अस्पतालों ने रविवार को ओपीडी सेवाएं बंद कर दी थीं। लेकिन दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को रविवार को अस्पताल पहुंचकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा था। जनस्तर पर तीखी आलोचना होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीच का रास्ता अपनाया है।

मंत्रालय के सह-प्रवक्ता डॉ. समीर कुमार अधिकारी ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा, कार्यभार और उपलब्ध जनशक्ति का प्रबंधन करते हुए रविवार को भी अनिवार्य रूप से ओपीडी सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्रालय ने अस्पताल प्रशासन को कुछ विकल्प भी दिए हैं, जिनमें रविवार को ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों या चिकित्सकों को शनिवार के अलावा सप्ताह के किसी अन्य दिन बदले में छुट्टी देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए शिफ्ट के अनुसार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती करने का भी निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था केवल संघीय अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी सातों प्रदेशों के प्रादेशिक अस्पतालों में भी अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। </description><guid>50198</guid><pubDate>10-Apr-2026 12:11:38 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल में डिप्टी स्पीकर का चुनाव आज, दो प्रतिस्पर्धी मैदान में</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50196</link><description>काठमांडू, 10 अप्रैल । नेपाल के संसद की प्रतिनिधि सभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए आज मतदान होने जा रहा है।

संघीय संसद सचिवालय के अनुसार, आज अपराह्न 4 बजे होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक में डिप्टी स्पीकर के चयन के लिए मतदान कराया जाएगा।

इस पद के लिए श्रम संस्कृति पार्टी की सांसद रूबी कुमारी ठाकुर और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सांसद सरस्वती लामा उम्मीदवार हैं। प्रतिनिधि सभा में दोनों ही समानुपातिक सांसद हैं।

25 वर्षीय ठाकुर को सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का समर्थन प्राप्त है। प्रतिनिधि सभा में सत्तारूढ़ दल लगभग दो-तिहाई बहुमत में होने के कारण, उसके समर्थन से ठाकुर का डिप्टी स्पीकर निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है।

नेपाल के संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का पद अलग दल और अलग लिंग से होना अनिवार्य है। स्पीकर पद पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के संसद डीपी अर्याल के निर्वाचित होने के बाद डिप्टी स्पीकर का पद किसी अन्य दल और महिला को ही दिया जा सकता है। इस कारण से संसद के पहली बार चुन कर आई श्रम संस्कृति पार्टी को यह पद दिया गया है।

श्रम संस्कृति पार्टी ने अपने तरफ से २५ वर्षीय रूबी ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है जो खुद पहली बार संसद में चुन कर आई हैं। ठाकुर के पिता विदेश में मजदूरी का काम करते हैं जबकि उनकी माता खेतों में काम करती है। रूबी ठाकुर ने डिप्लोमा इंजीनियरिंग का कोर्स किया है। </description><guid>50196</guid><pubDate>10-Apr-2026 12:09:32 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल में मुक्तिनाथ दर्शन कर लौट रहे भारतीय तीर्थयात्रियों का वाहन दुर्घटनाग्रस्त, 6 घायल</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50195</link><description>काठमांडू, 10 अप्रैल। नेपाल के प्रसिद्ध मुक्तिनाथ धाम की यात्रा कर वापस लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की एक गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से ६ यात्री घायल हो गए हैं।

नेपाल के म्याग्दी जिले के बेनी नगरपालिका स्थित जलेश्वर के पास शुक्रवार सुबह माइक्रोबस दुर्घटना में ६ भारतीय तीर्थयात्रियों घायल हो गए हैं।

जिला पुलिस कार्यालय म्याग्दी के अनुसार, मुस्तांग के मुक्तिनाथ दर्शन से दर्शन कर लौट रहे भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जा रही 8436 नंबर की ईवी माइक्रोबस बेनीजोमसोमकोरला सड़क खंड के जलेश्वर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

अस्पताल की सूचना अधिकारी झरना श्रेष्ठ के अनुसार, एक घायल को आगे के उपचार के लिए पोखरा भेजा गया है, जबकि पांच लोगों का उपचार प्रदेश अस्पताल बेनी में किया जा रहा है।

दुर्घटना में उत्तरप्रदेश के 26 वर्षीय दीना मादी, 36 वर्षीय त्रिवेणी भारत, 50 वर्षीय प्रमोद शंकर यादव, 28 वर्षीय कैलाश देयानी, 70 वर्षीय निरंजन दास खन्ना और 22 वर्षीय सन्तोष घायल हुए हैं।

इसी स्थान जलेश्वर में बुधवार अपराह्न भी ट्रक और बस की टक्कर में मुक्तिनाथ से लौट रहे 15 भारतीय तीर्थयात्री घायल हुए थे।

बेनी के पुलिस निरीक्षक सागर तिमिल्सिना ने बताया कि 15 यात्रियों को लेकर जा रहा वाहन चलते-चलते अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे टकरा गया, जिससे दुर्घटना होने से उसमें सवार १५ भारतीय तीर्थयात्री घायल हो गए थे। </description><guid>50195</guid><pubDate>10-Apr-2026 12:07:54 pm</pubDate></item><item><title>भारतीय विदेश सचिव ने अमेरिकी विदेश मंत्री से की मुलाकात, अगले माह भारत आने वाले हैं रूबियो</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50194</link><description>वॉशिंगटन, 10 अप्रैल । भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की।इस मुलाकात के दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे। रूबियो अगले माह भारत के दौरे पर आने वाले हैं।

तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर पहुंचे विक्रम मिसरी ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। इस मुलाकात को लेकर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने विक्रम मिसरी को टैग करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- मार्को रूबियो के साथ सार्थक बैठक हुई जिसमें विशेषकर ट्रेड, क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस और क्वाड को लेकर बात हुई। रुबियो अगले महीने भारत आने के लिए उत्साहित हैं।

इससे पहले विक्रम मिसरी ने अमेरिका के विदेश उप सचिव क्रिस्टोफर लैंडाउ से भी मुलाकात कर फारस की खाड़ी की स्थिति, अन्य वैश्विक और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के बारे में बातचीत की। </description><guid>50194</guid><pubDate>10-Apr-2026 12:05:09 pm</pubDate></item><item><title>पाकिस्तानी रक्षामंत्री के बयान पर इजराइल की तीखी प्रतिक्रिया- आतंकियों से देश की रक्षा करते रहेंगे</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50184</link><description>तेल अवीव, 10 अप्रैल। अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक से पहले इजराइल और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के रक्षामंत्री की टिप्पणी ने इजराइल को असहज कर दिया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने लेबनान पर हमले के संदर्भ में इसराइल को 'कैंसर राष्ट्र' कहा, जिसे इजराइल ने 'शर्मनाक और निंदनीय' कहा है। खास बात यह है कि पाकिस्तान ने अभीतक इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं।

तेल अवीव और इस्लामाबाद के बीच बयानों की कड़वाहट नये सिरे से उस समय बढ़ी जब गुरुवार को पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में इजराइल को शैतान और मानवता पर धब्बा बताते हुए लिखा- जहां इस्लामाबाद में शांति की बातें हो रही हैं वहां वो लेबनान में जनसंहार कर रहा है। पहले गाजा में निर्दोष लोगों को मार रहा था और अब लेबनान में यही कर रहा है। जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनियों की जमीन पर इस कैंसरनुमा देश को बनाया है वो जहन्नुम में जलें।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कार्यालय ने एक्स पोस्ट कर पाकिस्तानी रक्षामंत्री के बयान की निंदा करते हुए कहा कि इसराइल के खात्मे की कामना बेहद आपत्तिजनक है। खासकर उस सरकार से जो खुद को शांति का मध्यस्थ बताती हो, उससे ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती।

इजराइल के विदेश मंत्री डिगियन सार ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इजराइल शांति की मध्यस्थता करने का दावा करने वाली सरकार की यहूदी विरोधी खूनी आरोपों को बहुत गंभीरता से देखता है। यहूदी राज्य को कैंसरग्रस्त कहना प्रभावी रूप से विनाश का आह्वान है। इजराइल उन आतंकवादियों के खिलाफ अपनी रक्षा करेगा जो इसे नष्ट करने का संकल्प लेते हैं।

इससे पहले इजराइल ने बुधवार रात लेबनान में ताबड़तोड़ हवाई हमले करते हुए 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए। हमले में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इजराइल का कहना है कि ईरान में युद्धविराम के बावजूद लेबनान के हथियारबंद गुट हिज्बुल्लाह के खिलाफ युद्ध जारी है। इजराइल ने इस हवाई हमले को अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया है।

हालांकि इजराइल ने लेबनान के साथ सीधी बातचीत के लिए रजामंदी दी है। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक नेतन्याहू ने गुरुवार शाम कहा कि इजराइल लेबनान के साथ जल्द से जल्द बातचीत शुरू करेगा, जिसका उद्देश्य हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करना और देशों के बीच एक पूर्ण शांति समझौते पर पहुंचना है।

लेबनान पर अबतक के सबसे बड़े हवाई हमले के एक दिन बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, इजराइल के साथ सीधी बातचीत शुरू करने के लिए लेबनान की बार-बार की गई अपीलों को देखते हुए मैंने कल कैबिनेट को लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधी बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया। वार्ता हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने और इजराइल और लेबनान के बीच शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने पर केंद्रित होगी।

लेबनान पर इजराइल का ताजा हमला, ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता के दौरान भी मुद्दा बन सकता है।ईरान और पाकिस्तान मानते हैं कि लेबनान भी इस बातचीत के दायरे में है जबकि अमेरिका एवं इजराइल, लेबनान के मसले को ईरान से अलग हटकर देखता है। </description><guid>50184</guid><pubDate>10-Apr-2026 10:33:24 am</pubDate></item><item><title>नेपालः राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50183</link><description>काठमांडू, 10 अप्रैल । नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल शुक्रवार दोपहर 3 बजे देश के संघीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने वाले हैं।

राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से संसद सचिवालय को पत्र भेजकर इस संबोधन के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।

राष्ट्रपति भवन के सचिव महादेव पन्थ द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह संबोधन मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर दिया जाएगा। संयुक्त बैठक में प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा- दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे।

नेपाल के संविधान की धारा 95 में राष्ट्रपति के संबोधन संबंधी प्रावधान किया गया है। इस धारा में राष्ट्रपति द्वारा संबोधन शीर्षक के तहत लिखा है, राष्ट्रपति संघीय संसद के किसी एक सदन की बैठक या दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर सकते हैं और इसके लिए सदस्यों की उपस्थिति आह्वान कर सकते हैं।

संसद सचिवालय ने बताया कि आज रात से ही संघीय संसद के दोनों सदनों के चालू अधिवेशन को समाप्त करने की तैयारी है। उपसभामुख के चयन के बाद संसद के दोनों सदनों का अधिवेशन समाप्त किया जाएगा।

सरकार ने संसद के शीतकालीन अधिवेशन को समाप्त कर बजट अधिवेशन की तैयारी शुरू कर दी है। </description><guid>50183</guid><pubDate>10-Apr-2026 10:31:22 am</pubDate></item><item><title>नेपाल में एक महीने के दौरान तेल की कीमते चौथी बार बढ़ाने का फैसला</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50182</link><description>काठमांडू, 10 अप्रैल । नेपाल में एक महीने के भीतर चौथी बार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में भारी वृद्धि की गई है। नेपाल आयल निगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ा दिए हैं।

निगम के निदेशक मंडल के निर्णय के बाद नई दरें आज शुक्रवार से लागू हो गई हैं। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, खाना पकाने वाला एलपीजी गैस और विमान ईंधनसभी के दाम बढ़ाए गए हैं।

संशोधित दरों के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि हुई है, जबकि डीजल और केरोसिन में प्रति लीटर 25-25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। खाना पकाने वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 100 रुपये की वृद्धि हुई है और घरेलू विमान ईंधन 6 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है।

नई कीमतों के अनुसार, नेपाल में अब पेट्रोल 219 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल और केरोसिन 207 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,010 रुपये और घरेलू विमान ईंधन 257 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है।

सरकार ने कहा है कि सीमा शुल्क और अवसंरचना विकास कर में 50 प्रतिशत की कटौती के बावजूद लगातार हो रहे नुकसान के कारण कीमत बढ़ाना आवश्यक हो गया था। निगम के द्वारा जारी बयान के अनुसार, ताजा मूल्य वृद्धि के बाद भी हर पखवाड़े लगभग 7.81 अरब रुपये का घाटा होने का अनुमान है।

पिछले एक महीने में यह चौथी बार है जब नेपाल आयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के भारी वृद्धि की है। ईरान अमेरिका युद्ध के कारण तेल आयात में आई कमी को देखते हुए लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है।

हालांकि सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थ पर लगने वाले सरकारी टैक्स में ५० प्रतिशत कम करने का फैसला भी लिया लेकिन इससे इसकी कीमतों में कोई कमी नहीं आई और जनता को उससे राहत नहीं मिल पाई है। पहले ही नेपाल आयल निगम घाटे में रह कर तेल की कीमतें तय कर रही हैं। सरकार के द्वारा टैक्स कम करने से घाटा को कुछ कम किया जा सका है पर उससे तेल की कीमतों के कोई कमी नहीं आई है। </description><guid>50182</guid><pubDate>10-Apr-2026 10:29:51 am</pubDate></item><item><title>नेपाल के पूर्व स्पीकर महरा पर सोना तस्करी करने का मुकदमा दर्ज</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50167</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । नेपाल के पूर्व स्पीकर तथा माओवादी के नेता कृष्ण बहादुर महरा और नेपाल सरकार के संयुक्त सचिव अरुण पोखरेल सहित अन्य के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट) में छिपाकर सोना तस्करी करने के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने गुरुवार को महरा, पोखरेल और महरा के पुत्र राहुल महरा समेत अन्य के खिलाफ मामला दायर किया। इन सभी पर चीनी तस्करों के साथ मिलकर ई-सिगरेट के पैकेजिंग में छिपाकर अवैध रूप से सोना लाने का आरोप है। अदालत ने लगभग 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी निर्धारित किया है।

आरोपपत्र के अनुसार महरा और उनके सहयोगी 25 दिसंबर, 2022 को एक चीनी गिरोह के साथ सोने की तस्करी में शामिल थे, जिसमें ई-सिगरेट के पैकेज को आवरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इस खेप में 73 बॉक्स में 730 वेप पेन शामिल थे। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंचने के बाद इस खेप को बिना जांच के कस्टम से पार कराने की योजना थी। बाद में पता चला कि इसमें करीब 9 किलोग्राम सोना था, लेकिन मामला तब और जटिल हो गया, जब बाद में यह सोना गायब हो गया।

चीनी नागरिक ली हानसोंग (पासपोर्ट EJ 6350030) दुबई से फ्लाइट FZ 0587 के जरिए काठमांडू पहुंचे थे। उनके पास दो सूटकेस में छिपाकर 73 बॉक्स वेप पेन लाए गए थे। हानसोंग को यह सोना गिरोह के सरगना वांग को सौंपना था, जिसके पूर्व स्पीकर महरा से संबंध थे।

हालांकि, कस्टम अधिकारियों ने उसी दिन खेप को संदिग्ध मानते हुए जब्त कर लिया, लेकिन कुछ दिनों बाद हानसोंग फरार हो गया। आरोप है कि उसने जब्त सोना छुड़ाने के लिए महरा और उनके बेटे राहुल की मदद मांगी। इस दौरान महरा और उनके बेटे ने कस्टम अधिकारियों और चीनी संपर्कों सहित विभिन्न लोगों से कथित तौर पर 256 बार संपर्क किया, ताकि जब्त सोना छुड़ाया जा सके। </description><guid>50167</guid><pubDate>09-Apr-2026 6:43:04 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के पीएम बालेन्द्र शाह ने 15 दिन में ही एक मंत्री को बर्खास्त किया</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50166</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने कार्यकाल की शुरुआत के महज पंद्रह दिन के भीतर ही एक मंत्री को पद से हटा दिया है।

दरअसल, श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह ने अपनी पत्नी जुनु श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड का सदस्य पुनः नियुक्त करने का विवादित फैसला लिया था। इसके अलावा उनकी पृष्ठभूमि भी विवादों में रही है।

इसके बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने ने मंत्री साह पर पद की मर्यादा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। इस पर प्रधानमंत्री शाह ने उन्हें आज पदमुक्त कर दिया। साह को केवल 13 दिन पहले ही मंत्री बनाया गया था।

इसी मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाने के आरोप में रास्वपा प्रमुख लामिछाने ने स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्री निशा मेहता को भी चेतावनी देने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के आधार पर प्रधानमंत्री शाह ने मंत्री मेहता को भी सचेत कर दिया है। </description><guid>50166</guid><pubDate>09-Apr-2026 6:37:28 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के डिप्टी स्पीकर पद के लिए दो उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50149</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल। नेपाल के प्रतिनिधि सभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए दो उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी की सरस्वती लामा और श्रम संस्कृति पार्टी की रुबी कुमारी ठाकुर इस पद के लिए उम्मीदवार बनी हैं।

प्रतिनिधि सभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए श्रम संस्कृति पार्टी की ओर से 25 वर्षीय रुबी कुमारी ठाकुर उम्मीदवार बनी हैं। पार्टी के महासचिव कविन्द्र बुर्लाकोटी ने बताया कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने डिप्टी स्पीकर पद के लिए श्रम संस्कृति पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देने का निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी ने सरस्वती लामा को उम्मीदवार बनाया है। उनके प्रस्तावक राप्रपा के नेता ज्ञानेन्द्र शाही हैं, जबकि समर्थकों में ताहिर अली, खुश्बु ओली और भरत गिरी हैं। </description><guid>50149</guid><pubDate>09-Apr-2026 3:23:33 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृहमंत्री लेखक को जमानत पर रिहा किया गया</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50148</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया है।

काठमांडू पुलिस एसएसपी रमेश थापा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जमानत पर रिहा करके ओली को उनकी पत्नी राधिका शाक्य और लेखक को उनकी पत्नी यशोदा लेखक के जिम्मे सौंप दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि ओली की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा करना उचित होगा। दोनों नेताओं को पुलिस ने 28 मार्च को गिरफ्तार किया था।

ओली और लेखक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सोमवार को काठमांडू अदालत से बढ़ाई गई 5 दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। न्यायाधीश विनोद शर्मा और सुनिलकुमार पोखरेल की पीठ ने हिरासत को कानून के विपरीत नहीं माना, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर यह निर्णय लेने का निर्देश दिया कि मामला चलाया जाए या नहीं।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि उस अवधि में निर्णय नहीं हो पाता है, तो तीसरी बार बढ़ाई गई अवधि के बाद मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा 15 की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें रिहा कर आगे की जांच जारी रखी जाए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ओली और लेखक के बयान तथा अन्य जांच प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। साथ ही, जांच आयोग द्वारा सिफारिश किए गए तत्कालीन काठमांडू प्रमुख जिला अधिकारी छविलाल रिजाल को भी आवश्यकता पड़ने पर उपस्थित होने की शर्त पर छोड़ा गया है।

बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद मंत्रिपरिषद् ने गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने का निर्णय लिया था, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 8 सितंबर 2025 को गोलीबारी से लोगों की मौत होने के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली सहित संबंधित पदाधिकारियों ने गोली रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए और लापरवाही दिखाई।

इसी आधार पर ओली और लेखक के खिलाफ मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा 181 और 182 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इन धाराओं के अनुसार लापरवाही या असावधानी से किसी की मृत्यु होने पर 3 से 10 वर्ष तक की कैद और 30 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। </description><guid>50148</guid><pubDate>09-Apr-2026 3:21:17 pm</pubDate></item><item><title>आखिर युद्ध से मिला क्या?</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50147</link><description>दुनिया एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है, जहाँ शक्ति प्रदर्शन, धमकियों और सैन्य गतिविधियों के बीच मानवता की आवाज़ कहीं दब-सी जाती है। हालिया घटनाओं ने यह प्रश्न फिर से प्रासंगिक बना दिया है कि आखिर युद्ध से किसी को वास्तव में क्या मिलता है। क्या यह केवल ताकत का प्रदर्शन भर है, या इसके पीछे कोई स्थायी समाधान भी निहित होता है? इतिहास और अनुभव दोनों इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि युद्ध किसी समस्या का अंत नहीं करता, बल्कि वह नई समस्याओं की एक अंतहीन श्रृंखला को जन्म देता है। आज जब वैश्विक परिदृश्य में अस्थिरता बढ़ती जा रही है, तब यह प्रश्न और भी अधिक गंभीर हो उठता है।

युद्ध की शुरुआत प्रायः राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मरक्षा या सम्मान की रक्षा के नाम पर होती है, लेकिन इसका परिणाम कहीं अधिक व्यापक और विनाशकारी होता है। युद्ध के बाद जिन्हें विजेता कहा जाता है, वे भी भीतर से कमजोर हो जाते हैं। उनकी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है, संसाधनों की बर्बादी होती है, और सामाजिक ढांचा चरमराने लगता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे क्षेत्रों पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर, पराजित देश तो पहले से ही विनाश के मलबे तले दब जाते हैं, जहाँ पुनर्निर्माण की प्रक्रिया वर्षों तक चलती है और पीढ़ियाँ उसकी कीमत चुकाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक क्षति आम नागरिकों को उठानी पड़ती है, जिनका न तो युद्ध में कोई प्रत्यक्ष योगदान होता है और न ही निर्णय प्रक्रिया में कोई प्रभाव।

युद्ध केवल भौतिक विनाश ही नहीं लाता, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी गहरे घाव छोड़ता है। विस्थापन, भय, असुरक्षा और मानसिक आघात ऐसी स्थितियाँ हैं, जो युद्ध के बाद लंबे समय तक समाज को प्रभावित करती हैं। बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके जीवन की सामान्य धारा बाधित हो जाती है, और वे एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिए जाते हैं। सभ्यता, जो हजारों वर्षों में विकसित होती है, वह कुछ ही दिनों या महीनों में बिखर सकती है।

हाल के घटनाक्रम यह भी दर्शाते हैं कि बाहरी हमले और दबाव किसी देश को कमजोर करने के बजाय उसे और अधिक संगठित तथा आक्रामक बना सकते हैं। जब किसी राष्ट्र पर लगातार दबाव डाला जाता है, तो वहाँ राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हो जाती है। लोग अपने आंतरिक मतभेद भुलाकर बाहरी खतरे के विरुद्ध एकजुट हो जाते हैं। इस प्रकार, जो रणनीति किसी देश को झुकाने के लिए अपनाई जाती है, वही उसे और अधिक सशक्त बना सकती है। यह युद्ध की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है कि वह अपने घोषित उद्देश्यों को भी कई बार पूरा नहीं कर पाता।

युद्ध का प्रभाव केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र इससे सीधे प्रभावित होते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर उत्पन्न संकट पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाएँ और निवेश में अनिश्चितता जैसे परिणाम वैश्विक स्तर पर दिखाई देते हैं। विकासशील देशों पर इसका प्रभाव और अधिक गंभीर होता है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही सीमित संसाधनों पर निर्भर होती है।

जब महाशक्तियाँ किसी संघर्ष में शामिल होती हैं, तो स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। उनका हस्तक्षेप केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक आयाम भी ग्रहण कर लेता है। इससे छोटे और मध्यम देशों के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट करना कठिन हो जाता है। वे अक्सर ऐसे संतुलन की तलाश में रहते हैं, जिसमें उनके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें और वे किसी बड़े टकराव का हिस्सा भी न बनें। लेकिन यह संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता, क्योंकि हर निर्णय के दूरगामी परिणाम होते हैं।

पश्चिम एशिया इस प्रकार के जटिल संघर्षों का एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ राजनीतिक, धार्मिक और सामरिक कारणों से तनाव लगातार बना रहता है। यहाँ की परिस्थितियाँ यह संकेत देती हैं कि एक छोटी-सी चिंगारी भी व्यापक संघर्ष का रूप ले सकती है। विभिन्न देशों और संगठनों की सक्रियता ने इस क्षेत्र को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यहाँ होने वाले किसी भी घटनाक्रम का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है।

ऐसे परिदृश्य में कुछ देशों ने संतुलित और परिपक्व कूटनीति का परिचय देने का प्रयास किया है। उन्होंने न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता को भी ध्यान में रखा। यह इस बात का प्रमाण है कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से भी जटिल परिस्थितियों का समाधान खोजा जा सकता है। भले ही यह प्रक्रिया धीमी और चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन यही स्थायी शांति की दिशा में सबसे विश्वसनीय मार्ग है।

वर्तमान समय में युद्ध का एक और महत्वपूर्ण आयाम सूचना और प्रचार का है। अब युद्ध केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मीडिया और डिजिटल मंचों पर भी लड़ा जा रहा है। सूचनाओं का नियंत्रण, अफवाहों का प्रसार और जनमत को प्रभावित करने के प्रयास इस संघर्ष का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इससे सत्य और असत्य के बीच अंतर करना और भी कठिन हो गया है। सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी-सी भ्रामक सूचना भी बड़े स्तर पर भ्रम और तनाव उत्पन्न कर सकती है।

इसके अतिरिक्त, युद्ध पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। बमबारी, रासायनिक हथियारों का उपयोग, और औद्योगिक ढाँचों का विनाश पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाता है। जल, वायु और भूमि प्रदूषण के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। जैव विविधता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और कई बार यह नुकसान अपरिवर्तनीय होता है। इस प्रकार, युद्ध केवल वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करता है।

अंततः यह स्पष्ट है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यह केवल अस्थायी जीत और स्थायी घाव छोड़ता है। मानवता, विकास और शांति के पथ पर अग्रसर होने के लिए आवश्यक है कि राष्ट्र संवाद, सहयोग और पारस्परिक समझ को प्राथमिकता दें। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि वे संघर्षों को रोकने और समाधान खोजने में अधिक प्रभावी हो सकें।

आज की दुनिया को यह समझना होगा कि असली शक्ति विनाश में नहीं, बल्कि सृजन में निहित है। जो देश और समाज इस सत्य को स्वीकार कर लेंगे, वही भविष्य में स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर पाएंगे। युद्ध के धुएँ में भले ही क्षणिक विजय का भ्रम दिखाई दे, लेकिन जब वह धुआँ छंटता है, तो पीछे केवल विनाश, पछतावा और अनिश्चितता ही शेष रह जाती है। यही युद्ध की सबसे बड़ी सच्चाई हैएक ऐसी सच्चाई, जिसे समझना और स्वीकार करना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। </description><guid>50147</guid><pubDate>09-Apr-2026 3:16:24 pm</pubDate></item><item><title>बर्फबारी और तेज बारिश से नेपाल का जनजीवन प्रभावित, किसानों की चिंता बढ़ी</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50146</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । नेपाल के ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में सर्दियों की बारिश होने से कहीं उत्साह है, तो कहीं इससे जनजीवन और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।

बुधवार दोपहर से मौसम में बदलाव के बाद देश के उच्च हिमालयी इलाकों में बर्फबारी हुई। इसी तरह राजधानी काठमांडू सहित पहाड़ी और मैदानी इलाके में पूरी रात भारी बारिश के कारण आमतौर पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। पर्यटकीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण उन क्षेत्रों के होटल व्यापारी खुश हैं और पर्यटकों की काफी भीड़ दिखाई दे रही है, जबकि कृषकों के लिए भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है।

बुधवार की शाम से तेज आंधी के साथ ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात हुआ था। लगातार एक-दो दिन के अंतराल पर हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण ऊपरी क्षेत्रों में चराई के लिए गए याक जैसे पशु के बाड़े प्रभावित हुए हैं। अप्रैल महीने के दूसरे सप्ताह तक बर्फबारी जारी रहने से ठंड बढ़ गई है। निचले क्षेत्रों में आलू की गुड़ाई के समय हो रही ओलावृष्टि सहित नियमित बारिश के कारण किसान फसल खराब होने की चिंता में हैं। हालांकि, मक्का बो चुके किसान खेत में नमी होने से अंकुरण अच्छा होने की उम्मीद में खुश नजर आ रहे हैं।

बर्फबारी के बाद होटल व्यवसायी आंतरिक पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद से उत्साहित हैं। इन स्थानों पर घूमने और दर्शन के लिए गए पर्यटकों के वाहन बर्फबारी के कारण रास्ते में फंस गए हैं। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटक गांव बेदिङ और नामा में भारी हिमपात के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। बर्फबारी के कारण लुम्नाङ से याक और चौरी लेकर लप्ची पहुंचे बिगु गांवपालिका-1, लप्ची के स्थानीय निवासी भी प्रभावित हुए हैं।

ठंड से बचने के लिए लुम्नाङ में रहने वाले लप्ची के अप्रैल लगते ही याक और चौरी लेकर लप्ची की ओर लौटते हैं। इस वर्ष देर से लप्ची लौटने के बावजूद लगातार बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ गई है और घर से बाहर निकलना भी कठिन हो गया है। </description><guid>50146</guid><pubDate>09-Apr-2026 3:14:28 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल का सबसे व्यस्त पूर्व-पश्चिम राजमार्ग अवरुद्ध, लगा कई किमी. लंबा जाम</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50145</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । नेपाल के सबसे व्यस्त राजमार्गो में से एक पूर्वपश्चिम राजमार्ग हरिवन स्थित चापिनी नदी में बना डाइवर्जन बह जाने के बाद अवरुद्ध है, जिसके कारण इस राजमार्ग के सर्लाही के हरिवन में गुरुवार सुबह 4 बजे से कई किलोमीटर लंबा जाम लगा है।

राजमार्ग ट्राफिक प्रहरी के एसपी एकनारायण कोइराला ने बताया कि रात में हुई भारी बारिश के बाद आई बाढ़ से हरिवन के तीनघरे और बासाटोल के बीच स्थित चापिनी नदी का डाइवर्जन बह गया, जिससे राजमार्ग बंद हो गया। इस राजमार्ग को चार लेन में अपग्रेड करने का कार्य चल रहा है। पुराने पुल की मरम्मत और उसके पास नए पुल के निर्माण के कारण वाहनों की आवाजाही डाइवर्जन के जरिए हो रही थी। डाइवर्जन बह जाने के बाद अब पुराने पुल की मरम्मत का काम रोककर उसी पुल से यातायात संचालन के लिए मिट्टी भरने का काम किया जा रहा है।

घंटों लंबे जाम में फंसने से नाइट बस के यात्री और चालक काफी परेशान हैं। हालांकि, छोटे वाहन चापिनी होकर गांव के अंदरूनी रास्तों से आवागमन कर रहे हैं। बह गए डाइवर्जन को दोबारा बनाने में समय लगने की संभावना है। सर्लाही में इस समय पूर्वपश्चिम राजमार्ग के कई स्थानों पर डाइवर्जन के जरिए यातायात चलाते हुए बॉक्स कल्वर्ट और पुल निर्माण का कार्य जारी है। बारिश के कारण पानी जमा होने और कीचड़ बनने से अन्य स्थानों के डाइवर्जन पर भी वाहनों का संचालन कठिन हो गया है। </description><guid>50145</guid><pubDate>09-Apr-2026 3:12:34 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल में डिप्टी स्पीकर पद के चुनाव के लिए नामांकन आज</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50131</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल । नेपाल के प्रतिनिधि सभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए आज उम्मीदवारों का नामांकन हो रहा है। संसद सचिवालय ने नामांकन का समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया है।

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवारों की सूची दोपहर 2:30 बजे प्रकाशित की जाएगी, जबकि शुक्रवार शाम 4:00 बजे प्रतिनिधि सभा की बैठक के दौरान मतदान होगा।

इस पद के लिए मुख्य दावेदार श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के समर्थन वाले उम्मीदवार के डिप्टी स्पीकर बनने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के 182, नेपाली कांग्रेस के 38, नेकपा एमाले के 25, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के 17, श्रम संस्कृति पार्टी के 7, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के 5 और 1 स्वतंत्र सांसद हैं। </description><guid>50131</guid><pubDate>09-Apr-2026 12:20:54 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृहमंत्री लेखक को रिहा करने की तैयारी</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50130</link><description>काठमांडू, 09 अप्रैल। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक की रिहाई के लिए जिला सरकारी वकील कार्यालय का पत्र पुलिस को प्राप्त हुआ है।

काठमांडू के पुलिस प्रमुख रमेश थापा ने बताया कि अभी-अभी जिला सरकारी वकील कार्यालय का पत्र मिला है। उनके अनुसार अब जमानत देने वाले व्यक्ति को बुलाकर दोनों को रिहा किया जाएगा।

जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर दोनों को हत्या से संबंधित आरोप में 28 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, मुकदमा दायर करने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत नहीं मिलने के कारण अब उन्हें रिहा किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने या 9 अप्रैल तक रिहा करने का आदेश दिया था। पुलिस और महान्यायाधिवक्ता कार्यालय के बीच मुकदमा दर्ज न करने पर सहमति बनी है।

पुलिस ने उन्हें गत 28 मार्च की सुबह को गिरफ्तार किया था। रमेश लेखक पुलिस हिरासत में हैं, जबकि केपी शर्मा ओली गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण टिचिंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने ओली की पथरी की सर्जरी करने की सलाह दी है। </description><guid>50130</guid><pubDate>09-Apr-2026 12:17:44 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर नया मोर्चा खोलने के संकेत दिए, नाटो को धमकी</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50110</link><description>वॉशिंगटन, 09 अप्रैल। ईरान में युद्धविराम की घोषणा के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जताते हुए उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को धमकी दी है।। ट्रंप ने ईरान युद्ध में साथ नहीं दोने के लिए नाटो की कड़ी आलोचना की है। साथ ही ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी इच्छा को दोहराया है।

ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नाटो के महासचिव मार्क रूटे के साथ बैठक कर ईरान युद्ध के दौरान नाटो से सहयोग ना मिलने को लेकर नाराजगी जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ बंद कमरे में यह बैठक की थी, जिसके बाद उन्होंने नाटो के प्रति अपनी शिकायत दोहराई।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल की एक पोस्ट में लिखा, जब हमें उनकी जरूरत थी, तब नाटो वहां नहीं था और अगर हमें उनकी दोबारा जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे।ग्रीनलैंड को याद करो, वह बड़ा, खराब तरीके से चलाया गया, बर्फ का टुकड़ा!!!

इस बैठक से पहले जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया तो ट्रंप ने संकेत दिया था कि अगर नाटो देशों ने उनके आह्वान को नजरअंदाज किया तो अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है। ट्रंपं के बार-बार आह्वान पर भी यूरोपीय देश इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ नहीं हैं, बल्कि कई नाटो देशों ने अमेरिकी हमलों का विरोध भी किया। जिसके बाद से ट्रंप नाटो पर हमलावर हैं।

ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इस साल की शुरुआत में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी लेकिन बाद में नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ बातचीत के बाद पीछे हट गए थे।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पास किया था, जिसमें किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी कर दी गई है। लंबे समय से नाटो के आलोचक रहे ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में कहा था कि उनके पास अकेले ही नाटो से बाहर निकलने का अधिकार है।

नाटो की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा के लिए की गई थी। नाटो के 32 सदस्य देशों का मुख्य वादा आपसी रक्षा समझौता है, जिसमें एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। </description><guid>50110</guid><pubDate>09-Apr-2026 10:20:24 am</pubDate></item><item><title>ईरान का सख्त संदेश- अमेरिका सीजफायर या युद्ध में से एक चुने</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50109</link><description>तेहरान, 08 अप्रैल । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका को अब सीजफायर और युद्ध में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा।

अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका वास्तव में संघर्ष विराम चाहता है, तो उसे इसे पूरी तरह लागू करना होगा। वहीं, अगर इजराइल के जरिए सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसे सीजफायर नहीं माना जा सकता।

उन्होंने लेबनान में जारी हिंसा का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचा। अराघची ने कहा कि पूरी दुनिया इस स्थिति को देख रही है और अब फैसला अमेरिका को करना है। उनके अनुसार, यह समय है जब अमेरिका को अपने वादों पर खरा उतरना होगा और स्पष्ट रुख अपनाना होगा।

ईरान के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्ष विराम है, दूसरी ओर लेबनान और आसपास के इलाकों में हमले जारी हैं। इससे शांति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

माना जा रहा है कि ईरान का यह बयान अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। साथ ही, यह संदेश भी देने की कोशिश है कि अगर क्षेत्र में हिंसा नहीं रुकी, तो ईरान भी कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि वाशिंगटन इस चेतावनी के बाद क्या रुख अपनाता है और क्या इससे क्षेत्र में शांति बहाल हो पाएगी या नहीं। </description><guid>50109</guid><pubDate>09-Apr-2026 10:18:29 am</pubDate></item><item><title>नेपाल सरकार ने सार्वजनिक यातायात का किराया 17 से 22 प्रतिशत तक बढ़ाया</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50072</link><description>काठमांडू, 08 अप्रैल । नेपाल सरकार ने सार्वजनिक परिवहन का किराया 17 से 22 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसी तरह विभाग ने माल ढुलाई के किराए में भी बढ़ोतरी की है। नई दरें बुधवार से लागू हो गई हैं।

पेट्रोलियम पदार्थ की कीमतों भारी वृद्धि के बाद सार्वजनिक यातायात में 16.71 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। तराई क्षेत्र में ढुलाई किराया 15.75 प्रतिशत और पहाड़ी क्षेत्र में 21.68 प्रतिशत बढ़ाया गया है। भौतिक पूर्वाधार तथा परिवहन मंत्री सुनिल लम्साल ने मंगलवार को किराया समायोजन को स्वीकृति देने के बाद बुधवार को विभाग ने यह निर्णय लिया।

नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरोज सिटौला के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि और अन्य तकनीकी कारणों से भाड़ा में बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवसायी लंबे समय से किराया समायोजन की मांग कर रहे थे। नए किराया दर लागू होने के साथ ही आम जनता की दैनिक यात्रा और उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

वैज्ञानिक किराया समायोजन कार्यविधि के अनुसार वाहन किराए में पेट्रोलियम पदार्थों का 35 प्रतिशत और बीमा, वाहन, बैंक ब्याज, स्पेयर पार्ट्स, टायर, लुब्रिकेंट सहित 13 मदों में हुई मूल्य वृद्धि का 65 प्रतिशत योगदान निर्धारित किया जाता है। इसमें यह भी उल्लेख है कि ईंधन की कीमत में 5 प्रतिशत की वृद्धि या कमी होने पर किराया दर स्वतः समायोजित हो जाएगी। </description><guid>50072</guid><pubDate>08-Apr-2026 2:54:34 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल ने ग्रेटर लुम्बिनी परियोजना के लिए विश्व बैंक से 85 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण स्वीकार किया</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50066</link><description>काठमांडू, 08 अप्रैल । नेपाल सरकार ने ग्रेटर लुम्बिनी परियोजना के निर्माण के लिए विश्व बैंक से 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर रियायती ऋण स्वीकार करने का निर्णय लिया है। संघीय मामलों एवं सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णय की आज जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब परियोजना का काम आगे बढ़ेगा।

यह परियोजना बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुम्बिनी को केंद्र में रखकर कपिलवस्तु, रूपन्देही और पश्चिम नवलपरासी जिलों को विकसित करने के लिए तैयार की गई है। ऋण के लिए पूर्व वित्तमंत्री विष्णु पौडेल की पहल पर पिछले वर्ष ही विश्व बैंक के समक्ष लगभग 12.5 अरब रुपये के बराबर का प्रस्ताव पेश किया गया था।

अब परियोजना कार्यान्वयन के लिए समझौता किया जाएगा। समझौते के बाद यह राशि कपिलवस्तु, रूपन्देही और नवलपरासी के बुद्ध से संबंधित क्षेत्रों के विकास में खर्च की जाएगी। लुम्बिनी विकास कोष के अनुसार, इस परियोजना के तहत तीनों जिलों में स्थित बुद्ध से जुड़े स्थलों पर पर्यटकों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। परियोजना का कार्यान्वयन शहरी विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से होगा। इसमें लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका, देवदह, रामग्राम और कपिलवस्तु नगरपालिका सहित चार स्थानीय निकायों के साथ पुरातत्व विभाग, लुम्बिनी विकास कोष और नेपाल पर्यटन बोर्ड की भागीदारी रहेगी।

इस परियोजना के अंतर्गत सड़कों, नालियों, बस पार्क, विद्युतीकरण, बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए ध्यान केंद्र, विश्राम स्थल, कैफे, सूचना केंद्र और स्थानीय उत्पादों के बिक्री केंद्र सहित विभिन्न पर्यटकीय संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। लुम्बिनी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां स्थित मायादेवी मंदिर, बुद्ध जन्मस्थल, पवित्र पुष्करिणी पोखरी और अशोक स्तंभ ऐतिहासिक महत्व के प्रमुख स्थल हैं। देवदह में भी बुद्ध से जुड़े कई ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं।

कपिलवस्तु का तिलौराकोट प्राचीन शाक्य राज्य की राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां राजकुमार सिद्धार्थ ने अपना बाल्यकाल बिताया था। पश्चिम नवलपरासी का रामग्राम स्तूप बुद्ध के मूल अवशेष सुरक्षित होने वाला एकमात्र स्तूप माना जाता है, जिसके लिए विस्तृत योजना तैयार हो चुकी है। परियोजना के पहले चरण में इन्हीं प्रमुख बौद्ध स्थलों पर काम किया जाएगा। इससे पहले, परियोजना कार्यान्वयन के लिए बुद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाली चारों नगरपालिकाओं ने प्रत्येक के लिए आठ मिलियन अमेरिकी डॉलर बजट सुनिश्चित करने हेतु विश्व बैंक को संयुक्त ज्ञापन पत्र भी सौंपा था।

परियोजना का उद्देश्य निवेश के स्रोत तलाशना, नए पर्यटन स्थलों की पहचान, विकास और प्रवर्द्धन करना है। इसके लिए विशेषज्ञ स्तर पर लगातार अध्ययन और विचार-विमर्श होते रहे हैं, जिसमें विश्व बैंक के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। इस परियोजना के माध्यम से लुम्बिनी को एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे का विकास, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार, रोजगार सृजन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, धरोहर संरक्षण, सुशासन और स्थानीय समुदाय की आजीविका को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

पूर्व मंत्री विष्णु पौडेल के अनुसार, बहु-क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए लुम्बिनी को केंद्र में रखकर धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत आर्थिक समृद्धि का एक मॉडल क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई है। परियोजना का लक्ष्य पर्यटकीय ढांचे को मजबूत करना, सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना और धार्मिक सहिष्णुता व सांस्कृतिक विविधता के आधार पर लुम्बिनी को विश्व शांति और सतत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाना है। </description><guid>50066</guid><pubDate>08-Apr-2026 1:50:55 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र करेंगे विदेशी राजदूतों से सामूहिक संवाद</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50048</link><description>काठमांडू, 08 अप्रैल । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह आज काठमांडू में पदस्थ रहे करीब २० देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक संवाद करेंगे। सरकार गठन के बाद यह पहली बार है जब विभिन्न देशों के राजदूत सामूहिक रूप से बालेन्द्र सरकार के साथ बैठक करने जा रहे हैं।

इस समूह चर्चा में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भी सहभागी होने वाले हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य नेपाल की ताजा राजनीतिक स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जानकारी देना है।

प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, इस चर्चा के लिए भारत, चीन, अमेरिका, जापान और ब्रिटेन सहित एक दर्जन से अधिक देशों के राजदूतों को प्रधानमंत्री कार्यालय में आमंत्रित किया गया है।

पदभार संभालने के बाद से प्रधानमंत्री शाह ने विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की है, जबकि पारंपरिक शिष्टाचार भेंट के लिए बार-बार अनुरोध किए गए थे। आमतौर पर, नए प्रधानमंत्री पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों के भीतर ही राजदूतों को अलग-अलग अपने कार्यालय या निवास पर आमंत्रित करते हैंजिसे अकसर अत्यधिक औपचारिकता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है।

प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह ने कहा, पहले राजदूतों की अत्यधिक आवाजाही और सामान्य कूटनीतिक मर्यादा से परे आसान पहुंच की एक संस्कृति थी। इस बार उस परंपरा को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल की उपस्थिति में यह समूह संवाद कूटनीतिक सहभागिता के लिए एक नया मानक स्थापित करने का प्रयास है। </description><guid>50048</guid><pubDate>08-Apr-2026 10:37:33 am</pubDate></item><item><title>इजरायल में नेपाली दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए जारी किया हाई अलर्ट</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50038</link><description>काठमांडू, 08 अप्रैल। इज़राइल स्थित नेपाली दूतावास ने इज़राइल के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे नेपाली नागरिकों के लिए एक हाई अलर्ट संदेश जारी करते हुए उनसे संयमित, सतर्क और सुरक्षित तरीके से रहने की अपील की है।

नेपाली दूतावास ने बुधवार आठ बिंदुओं वाला एक अत्यावश्यक परामर्श जारी कर यह आग्रह किया है। आपातकालीन स्थिति में सहायता के लिए दूतावास ने द्वितीय सचिव कुमार बहादुर श्रेष्ठ और तृतीय सचिव संज कुमार शाह से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करने को कहा है।

दूतावास के द्वारा जारी बयान के अनुसार, द्वितीय सचिव कुमार बहादुर श्रेष्ठ का संपर्क नंबर +972-535360748 और तृतीय सचिव संज कुमार शाह का संपर्क नंबर +972-545582077 है।

दूतावास ने होम फ्रंट कमांड सहित इज़राइल सरकार और उसके आधिकारिक निकायों द्वारा जारी निर्देशों और सूचनाओं का पालन करने का भी अनुरोध किया है।

साथ ही, अलर्ट एसएमएस प्राप्त होने या खतरे का संकेत देने वाले सायरन बजने पर लापरवाही न करते हुए तुरंत अपने निकटतम बम शेल्टर में जाने की सलाह दी गई है।

इज़राइल में रह रहे नेपाली नागरिकों से अपने पासपोर्ट, पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक कार्ड आदि महत्वपूर्ण दस्तावेज हमेशा अपने साथ रखने और ताज़ा घटनाक्रम की नियमित जानकारी लेते रहने को भी कहा गया है।

इसके अलावा, सोशल मीडिया पर प्रसारित युद्ध संबंधी वीडियो को अनावश्यक रूप से साझा न करने तथा अपने दोस्तों, परिवार और रिश्तेदारों के साथ नियमित संपर्क में रहने की भी अपील की गई है। </description><guid>50038</guid><pubDate>08-Apr-2026 10:11:39 am</pubDate></item><item><title>ईरान की घोषणा, अमेरिका से शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होगी बातचीत</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50037</link><description>तेहरान, 08 अप्रैल । अमेरिका-इजराइल के दो हफ्ते के संघर्ष विराम पर सहमत होने के बाद ईरान के लोग और वहां की हुकूमत खुश है। ईरान ने घोषणा की है कि अमेरिका से शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होगी। तेहरान का कहना है कि ये बातचीत उसके 10 सूत्री प्रस्ताव पर केंद्रित होगी। इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और सभी प्रतिबंधों को हटाने की मांग की गई है।

अल जजीरा चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने भी अमेरिका के साथ दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति जताई है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि वाशिंगटन के साथ बातचीत शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होगी। बातचीत सिर्फ और सिर्फ प्रस्ताव के दायरे में होगी। ईरान का यह बयान बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आया है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर बमबारी की धमकी वापस लेने और दो हफ्ते तक हमला न करने पर सहमत हो गए हैं।

ट्रंप ने कहा कि यह समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगा। ईरान को उसे तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना होगा। उल्लेखनीय है कि यह एक संकरा जलमार्ग है। यह मार्ग खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते से दुनिया की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा गुजरता है। 28 फरवरी के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज की नाकाबंदी कर दी। इससे वैश्विक तेल व्यापार बाधित हो गया। इससे तेल की कीमतें बढ़ गईं और दुनिया भर में ईंधन की कमी हो गई। ईरान के जवाबी हमलों की गूंज पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुनाई दी। इस जंग में ईरान के साथ आतंकी समूह हिजबुल्लाह और हूती भी खुलकर सामने आ गए। </description><guid>50037</guid><pubDate>08-Apr-2026 10:09:41 am</pubDate></item><item><title>(लीड) अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले रोके, होर्मुज खुलेगा, दो हफ्ते का संघर्ष विराम प्रभावी</title><link>https://thevoicetv.in/international.php?articleid=50036</link><description>वाशिंगटन/तेल अवीव/ तेहरान, 08 अप्रैल । अमेरिका आखिरकार दो सप्ताह के संघर्ष विराम (सीज फायर/ युद्ध विराम) पर सहमत हो गया। इस पर इजराइल ने भी हां कर दी है। दोनों ने मध्यस्थ देशों का मान रख लिया और अब ईरान के साथ आमने-सामने की बातचीत की तैयारी की जा रही है। 28 फरवरी से ईरान के साथ छिड़े युद्ध की लपटों में अमेरिका और इजराइल के मददगार देश भी झुलस चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल ट्रुथ पर दो हफ्ते के युद्ध विराम के ऐलान से दुनिया ने बड़ी राहत महसूस की है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले रोक दिए हैं।

सीएनएन, सीबीएस न्यूज, अल जजीरा, दुनिया न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अब ईरान के साथ सीधी (आमने-सामने की) बातचीत की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संभवतः उप राष्ट्रपति जेडी वैंस करेंगे। इसका मकसद दीर्घकालिक समझौते का प्रारूप तैयार करना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने माना कि इस समय आमने-सामने की बातचीत की चर्चा चल रही है। उन्होंने साफ किया कि इसकी अंतिम घोषणा राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस करेंगे।

कुछ अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक संभवतः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी। इन अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, दामाद जेरेड कुशनर और उप राष्ट्रपति जेडी वैंस के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि वैंस इस समय हंगरी के दौरे पर हैं। उधर, ईरान के खिलाफ शुरू किए सैन्य अभियान में अमेरिका के सहयोगी इजराइल के अधिकारी ट्रंप के रुख में अचानक आए बदलाव से आश्चर्यचकित हैं। हालांकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की सहमति पर अपनी हां कर दी है। इससे साफ हो गया है कि इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अनुसरण करते हुए इस संघर्ष विराम का पालन करेगा।

इस बीच एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर हमले रोक दिए हैं। ईरान ने कहा है कि संघर्ष विराम के दौरान उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करेगी। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ईरान की 10 सूत्री योजना को स्वीकार कर लिया गया है। यह योजना कुछ बुनियादी मामलों पर जोर देती है, जैसे कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं के समन्वय के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का नियंत्रित आवागमन। बयान में कहा गया है कि इससे ईरान को एक विशिष्ट आर्थिक और भू-राजनीतिक दर्जा प्राप्त होगा।

ईरान के विदेशमंत्री सैयद अब्बास अरागाची ने कहा कि इन दो हफ्तों के दौरान, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही संभव हो पाएगा। उन्होंने इस संघर्ष विराम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका की तारीफ की है।

इससे पहले आज तड़के करीब तीन बजे खाड़ी के कई देशों ने कहा था कि वह पिछले एक घंटे से मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। यहां यह महत्वपूर्ण है कि यह अल्पकालिक युद्ध विराम ट्रंप की हमले शुरू करने की समय सीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले हुआ। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान होर्मुज को नहीं खोलता तो उसे रातों रात तबाह कर एक सभ्यता का अंत कर दिया जाएगा।

ट्रंप की धमकी से दुनिया भर में खलबली मच गई। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने एक्स पर कहा, ऐसा कोई भी सैन्य उद्देश्य नहीं है जो किसी समाज के इंफ्रास्ट्रक्चर के पूर्ण विनाश या आम नागरिकों को जानबूझकर कष्ट पहुंचाने को सही ठहरा सके। पोप लियो ने कहा कि ये धमकियां वास्तव में अस्वीकार्य हैं। इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने कहा है कि ईरान पर हमला रोक दिया गया है। </description><guid>50036</guid><pubDate>08-Apr-2026 10:08:02 am</pubDate></item></channel></rss>