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केंद्र का पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलएनजी, हाइड्रोजन के डिस्पेंसर की जांच और पुनः सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला, जीएसटी के दायरे में लाया गया

Date : 24-May-2026

 नई दिल्ली, 24 मई । केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर (ईंधन भरने की मशीनें) की जांच और पुनः सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन कर इन ईंधन डिस्पेंसर को सरकार से अनुमोदित परीक्षण केंद्र (जीएटीसी) व्यवस्था के दायरे में शामिल किया है। इससे ईंधन माप प्रणाली की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत उपभोक्ता मामले विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार से अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार, संशोधन के तहत अब पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसरों की जांच तथा पुनः सत्यापन भी जीएटीसी के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके साथ ही जीएटीसी के तहत सत्यापन योग्य उपकरणों की कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

सरकार ने कहा कि देश में स्वच्छ ईंधनों के उपयोग में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर को इस ढांचे में शामिल करने से ईंधन आपूर्ति में सटीकता सुनिश्चित होगी और उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। इससे स्वच्छ ईंधन अवसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।

मंत्रालय के अनुसार, सरकार से अनुमोदित परीक्षण केंद्र ऐसे संस्थान हैं, जिनके पास माप एवं तौल उपकरणों की जांच और पुनः सत्यापन के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और आधारभूत संरचना उपलब्ध होती है। निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी से देश की सत्यापन क्षमता बढ़ेगी और सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

संशोधित नियमों के तहत राज्य सरकारों को भी अपने यहां अतिरिक्त श्रेणी के माप एवं तौल उपकरणों को जीएटीसी व्यवस्था के तहत अधिसूचित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों को नियमों के तहत अनुमोदन संबंधी मामलों में अधिकार दिए गए हैं, ताकि प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा सके।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन शुल्क को 5 हजार रुपये प्रति नोजल तय किया है, जबकि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसरो के लिए यह शुल्क 10 हजार रुपये प्रति नोजल निर्धारित किया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, इन सुधारों से राज्य लीगल मेट्रोलॉजी विभाग निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह पहल तकनीक आधारित प्रशासन, व्यापारिक पारदर्शिता और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ भारत की मेट्रोलॉजी प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


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