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कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा में पेपर लीक जैसे मुद्दों को मोदी सरकार की नाकामी बताया

Date : 09-Jun-2026

 नई दिल्ली, 09 जून। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण की वर्षगांठ पर उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटाने, महंगाई, अर्थ व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक और किसानों की आत्महत्या जैसे तमाम मुद्दों को लेकर सवाल उठाए । कांग्रेस अनुसंधान विभाग के अध्यक्ष राजीव गौड़ा ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार दावा करती है कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, जबकि हकीकत यह है कि भारत चौथी से खिसककर छठी अर्थव्यवस्था बन गया है। रुपये की कमजोरी सरकार की आर्थिक प्रबंधन की असफलता का प्रमाण है। निवेशक भारत से दूर जा रहे हैं और महंगाई लगातार बढ़ रही है।

गौड़ा ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को दिए जाने वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। दस साल पहले महिलाओं को सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने का वादा किया गया था और प्रति लाभार्थी 12 सिलेंडर देने की घोषणा की गई थी। पिछले वर्ष इसे घटाकर नौ किया गया और अब चार कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के वादे केवल प्रचार तक सीमित हैं और वास्तविकता में जनता को कोई राहत नहीं मिल रही।

कांग्रेस के अनुसंधान एवं निगरानी विभाग के प्रभारी अमिताभ दुबे ने कहा कि साल 2014 से अब तक घरेलू गैस (एलपीजी) की कीमत 123 प्रतिशत, पेट्रोल की कीमत 44 प्रतिशत और डीजल की कीमत 73 प्रतिशत बढ़ चुकी है। दूध और दालों के दाम भी क्रमशः 71 और 84 प्रतिशत बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार, एमएसएमई, किसानों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े‑बड़े वादे किए थे, लेकिन सच्चाई यह है कि चार में से एक स्नातक बेरोजगार है, शहरी युवाओं की बेरोजगारी दर 18.4 प्रतिशत है, पिछले वर्ष 40 हजार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग बंद हो गए और हर घंटे एक किसान आत्महत्या कर रहा है।

उन्होंने दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण के दावे के बावजूद अब तक 89 पेपर लीक और 48 पुनः परीक्षा हो चुकी हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी और रेलवे के दावों के बावजूद देश में लोग गर्मी, प्रदूषण और अव्यवस्थित परिवहन से जूझ रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार रेलवे ट्रैक पर 22,413 लोगों की मौत हुई हैं और 2024‑25 में 31 बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुई हैं। केवल दो प्रतिशत ट्रैक पर ही कवच सुरक्षा प्रणाली लागू है।


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