जगदलपुर, 17 मई । विशाखापटनम-किरंदुल रेल मार्ग पर लाइन दोहरीकरण और मानसून पूर्व मेंटेनेंस कार्य के कारण यात्री ट्रेनों के संचालन में अस्थायी बदलाव किया गया है।
रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार मई के अंत तक इस रूट की ट्रेनें रोजाना न चलकर एक दिन छोड़कर चलेंगी। गाड़ी संख्या 58501 विशाखापटनम से किरंदुल के लिए मई में केवल , 19, 21, 23, 25, 27, 29 और 31 तारीख को रवाना होगी।
रायपुर, 17 मई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व और त्वरित प्रशासनिक कार्यशैली के परिणामस्वरूप जशपुर जिले के ग्राम पंचायत सेंदरीमुंडा के वार्ड क्रमांक 7 बैशाखूपारा की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। हैंडपंप खनन के बाद अब ग्रामीणों को घर के समीप ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
बैशाखूपारा के निवासियों को लंबे समय से पेयजल के लिए दूरस्थ जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को गर्मी के मौसम में पानी लाने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए उमेश यादव, संतोष देहरी एवं अन्य ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर हैंडपंप खनन की मांग की थी। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर संबंधित विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैशाखूपारा में हैंडपंप खनन कार्य पूर्ण कराया।
हैंडपंप से पानी निकलते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी झलक उठी। अब वार्ड क्रमांक 7 के परिवारों को स्वच्छ पेयजल के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की संवेदनशील और जनहितैषी सोच के कारण उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान संभव हो सका। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
मालदा, 17 मई। पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देश के बाद मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा पर कंटीले तार लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शनिवार को हबीबपुर ब्लॉक के भवानीपुर और आग्रा हरिश्चंद्रपुर इलाके में भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में जमीन के दस्तावेजों की जांच कर मापने का काम शुरू किया।
अधिकारियों ने बताया कि मालदा जिले के छह थाना क्षेत्रों में भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई लगभग 172 किलोमीटर है। इनमें से करीब 33 किलोमीटर सीमा अब भी खुली है। सबसे अधिक खुली सीमा हबीबपुर ब्लॉक में है, जहां 20 से 25 किलोमीटर क्षेत्र में अभी तक कंटीले तार नहीं लगाए गए हैं।
जिले में सीमा सुरक्षा के लिए कंटीले तार लगाने हेतु लगभग 260 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अब तक 10 एकड़ जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। शुक्रवार को मालदा जिलाधिकारी कार्यालय में सीमा सुरक्षा बल और जिला प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर एक आपात बैठक भी हुई थी। उसी बैठक के बाद भूमि एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी।
सीमावर्ती किसानों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि पूर्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय कई बार जमीन अधिग्रहण के नाम पर मापजोख की गई, लेकिन वास्तविक काम आगे नहीं बढ़ा। किसानों का आरोप है कि सीमा खुली रहने के कारण बांग्लादेशी अपराधियों द्वारा फसलों की लूटपाट की घटनाएं होती रही हैं। उनका मानना है कि कंटीले तार लगने के बाद ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
हबीबपुर ब्लॉक के भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी स्वपन तरफदार ने कहा कि विभागीय कर्मचारी किसानों से जमीन से संबंधित दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं और जमीन की मापजोक शुरू हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इस मुद्दे पर जुएल मुर्मू ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार के कार्यकाल में सीमा पर कंटीले तार लगाने में बाधाएं खड़ी की गई थीं। उन्होंने कहा कि वोटबैंक की राजनीति के कारण उस समय परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अब पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हुआ है।
नागपुर, 17 मई । नागपुर में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (नागपुर मेट्रो) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल शुरू की है। आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का माध्यम मानी जाने वाली नागपुर मेट्रो अब “चलता-फिरता पावर हाउस” बन गई है। मेट्रो ट्रैक के बीच की जगह और पिलर्स पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन करने वाली यह महाराष्ट्र की पहली मेट्रो प्रणाली बन गई है।
नागपुर मेट्रो के वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक (कॉर्पोरेट संचार) अखिलेश हलवे के अनुसार, इस परियोजना से पर्यावरण संरक्षण को बड़ा लाभ मिलेगा। केवल 50 किलोवॉट पीक (केडब्ल्यूपी) क्षमता वाले सौर प्रकल्प से हर साल लगभग 64 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह लगभग 2961 पूर्ण विकसित पेड़ों के बराबर माना जा रहा है।
भारत के अन्य मेट्रो प्रोजेक्ट्स में जहां स्टेशनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, वहीं रेल ट्रैक के बीच की जगह का प्रभावी उपयोग करने वाली नागपुर मेट्रो देश की पहली परियोजना बन गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भले ही स्टेशनों और डिपो पर सौर ऊर्जा प्रकल्प स्थापित किए हों, लेकिन “ट्रैक-माउंटेड सोलर सिस्टम” को सफलतापूर्वक लागू करने में नागपुर ने अग्रणी भूमिका निभाई है।
प्रबंधन के दावे के अनुसार, ट्रैक के बीच सोलर पैनल लगाकर मेट्रो संचालन करने वाली यह दुनिया की पहली प्रणाली है।
इस परियोजना को “इंडो-जर्मन सोलर को-ऑपरेशन” के तहत जर्मनी से लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है। इसके कारण नागपुर मेट्रो को अपनी ओर से कोई पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ी। “ज़ीरो इन्वेस्टमेंट मॉडल” के रूप में यह परियोजना विशेष चर्चा में है।
मेट्रो की कुल बिजली आवश्यकता का 50 से 65 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। खापरी, न्यू एयरपोर्ट और एयरपोर्ट साउथ मेट्रो स्टेशनों पर उत्पन्न अतिरिक्त बिजली महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रीसिटी डिस्ट्रीब्युशन कंपनी लिमिटेड (महावितरण) को दी जा रही है, जिससे मेट्रो की आय में भी वृद्धि हो रही है।
इस परियोजना से मेट्रो के परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलने की संभावना है। भविष्य में किराए में बढ़ोतरी को नियंत्रित रखने में भी यह मददगार साबित हो सकती है। “आत्मनिर्भर भारत” और “सतत विकास” की अवधारणाओं को मजबूत करने वाला यह प्रकल्प भारतीय इंजीनियरिंग और विदेशी निवेश का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
नागपुर मेट्रो के इस सफल प्रयोग के बाद अब पुने मेट्रो में भी ट्रैक पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। नागपुर का यह “ग्रीन मेट्रो” मॉडल अब देश के अन्य शहरों के लिए भी सतत विकास का नया उदाहरण बनता जा रहा है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
वार्षिक बिजली उत्पादन : लगभग 70 हजार यूनिट
परियोजना क्षमता : 50 केडब्ल्यूपी
अनुमानित परियोजना लागत : 1 करोड़ रुपये
पेबैक अवधि : 4 वर्ष
रखरखाव : महीने में दो बार
कार्बन उत्सर्जन में कमी : 64 टन प्रति वर्ष
नई दिल्ली, 17 मई । कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने इसमें कहा कि इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उचित ठहराने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इसके मौजूदा स्वरूप से बड़े स्तर पर पारिस्थितिक क्षति होने की आशंका है। पत्र में कहा गया कि उन्होंने इससे पहले 10 मई को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को तथा 13 मई को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को भी पत्र लिखकर परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और वन अधिकार अधिनियम संबंधी मुद्दे उठाए थे।
उन्होंने कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और भारत की सामरिक शक्ति को विश्वसनीय रूप से प्रदर्शित करने की आवश्यकता पर कोई मतभेद नहीं हो सकता, लेकिन इसके नाम पर ऐसी परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है, जिससे व्यापक पर्यावरणीय नुकसान हो।
पत्र में जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल बे में स्थित आईएनएस बाज को जुलाई 2012 में कमीशन किया गया था, लेकिन मौजूदा रनवे की लंबाई को तीन गुना बढ़ाने और नौसैनिक जेट्टी बनाने की योजनाएं पिछले लगभग पांच वर्षों से मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन योजनाओं का पर्यावरण पर प्रभाव भी मौजूदा ग्रेट निकोबार परियोजना की तुलना में काफी कम होगा।
उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार कमांड की कई मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों का विस्तार भी अपेक्षाकृत कम पर्यावरणीय क्षति के साथ किया जा सकता है। इनमें आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन शामिल हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह और टाउनशिप देश की सैन्य क्षमता को किसी प्रकार नहीं बढ़ाते, लेकिन अब इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उचित ठहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना अपने वर्तमान स्वरूप में पारिस्थितिक तबाही का नुस्खा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वे उन वैकल्पिक प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करें, जिनका सुझाव कुछ प्रतिष्ठित नौसेना अधिकारियों ने भी अपने लेखों और विश्लेषणों में दिया है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, हवाई अड्डा, ऊर्जा संयंत्र और टाउनशिप सहित कई बड़े आधारभूत ढांचा विकास कार्य प्रस्तावित हैं। परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से लगातार आपत्तियां जताई जा रही हैं।
नई दिल्ली, 17 मई। देशव्यापी जनगणना 2027 की दिशा के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का फील्ड कार्य पांच प्रमुख राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू हो गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार इसमें दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र, राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र और झारखंड शामिल हैं। दूसरी ओर, डिजिटल जनगणना के तहत शुरू की गई स्व-गणना सुविधा को जनता की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही हैं और अब तक 25 राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार अपनी स्व-गणना पूरी कर चुके हैं।
आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव मे घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। आज से गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में भी स्व-गणना की सुविधा शुरू हो गई है। इन क्षेत्रों के निवासी 31 मई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। इसके बाद, यहां 1 जून से 30 जून 2026 तक फील्ड कार्य चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी स्व-गणना की प्रक्रिया चालू है जो 21 मई तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक जमीनी स्तर पर मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा।
इससे पहले, 16 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम के साथ-साथ दिल्ली के एनडीएमसी (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) तथा दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्रों में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इतिहास में पहली बार यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों और मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग से की जा रही है। इस चरण में प्रगणक एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान एक अधिसूचित प्रश्नावली के माध्यम से कुल 33 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से परिवार की आवासीय स्थिति, परिवार का विवरण, घर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं और संपत्तियों से संबंधित जानकारी शामिल है। यह डेटा देश के विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। जिन परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम से स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें एक विशिष्ट 'स्व-गणना आईडी' प्राप्त हुई है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे इसे सुरक्षित रखें और जब गणनाकर्ता, उनके घर आएं, तो यह आईडी उनके साथ साझा करें।
जिन परिवारों ने किसी कारणवश स्व-गणना नहीं की है उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। गणनाकर्ता स्वयं घर-घर जाकर उनका विवरण दर्ज करेंगे।
जनगणना अधिनियम, 1948 के कड़े प्रावधानों के तहत नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी। इसका उपयोग किसी अन्य काम के लिए नहीं बल्कि केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास योजनाओं को तैयार करने के लिए किया जाएगा। सरकार ने सभी देशवासियों से इस राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग देने की अपील की है।
नई दिल्ली, 17 मई । विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के आंध्र प्रदेश के दक्षिणी प्रांत के अध्यक्ष नंदीरेड्डी सैरेड्डी के आकस्मिक निधन से पूरे वीएचपी परिवार और हिंदू संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।
सैरेड्डी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने रविवार को कहा कि उनका जाना पूरे संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा, "कुरनूल को अपना मुख्य केंद्र बनाकर कार्य करने वाले सैरेड्डी दोनों तेलुगु राज्यों (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में अनगिनत हिंदुत्व कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा के स्रोत थे। सामाजिक सेवा और धर्म की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हमेशा अनुकरणीय रहेगी।"
वीएचपी ने कहा कि उनका निधन हिंदू संगठनों और पूरे वीएचपी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करें और उनके परिवार और कार्यकर्ताओं को इस अपार क्षति को सहन करने की शक्ति और साहस प्रदान करें।
संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल द्वारा जारी सूचना के अनुसार दिवंगत नंदीरेड्डी का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह (18 मई) करीब 9:00 बजे कुरनूल शहर में किया जाएगा। अंतिम संस्कार में संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
हैदराबाद, 17 मई । यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) मामले में आरोपित बंदी साई भगीरथ को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद उन्हें चेरलापल्ली सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया। इससे पहले आरोपी ने पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे अदालत में पेश किया।
साइबराबाद पुलिस के अनुसार, बंदी साई भगीरथ को तेलंगाना राज्य पुलिस अकादमी (टीएसपीए) जंक्शन के पास से हिरासत में लिया गया और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच वाहन काफिले के जरिए पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन लाया गया। मामले की निगरानी कर रहीं कुकटपल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रीतिराज भी इस दौरान पुलिस स्टेशन पहुंचीं और जांच की प्रगति की समीक्षा की।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपित को मेडिकल जांच के लिए मेडचल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। मेडिकल परीक्षण के बाद उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने आरोपी को 29 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपित के कानूनी सलाहकार और अधिवक्ता करुणा सागर ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के निर्देश पर वह साई भगीरथ के साथ अप्पा जंक्शन पहुंचे थे। वहां उन्होंने आरोपित को साइबराबाद पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस टीम (एसओटी) के हवाले किया। अधिवक्ता के अनुसार, इसके बाद पुलिस आरोपित को पेटबशीराबाद थाने ले गई।
करुणा सागर ने कहा कि बचाव पक्ष अगले कार्य दिवस पर अदालत में जमानत याचिका दाखिल करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और उनका मुवक्किल इस मामले में निर्दोष साबित होगा।
दूसरी ओर, साइबराबाद पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद एसओटी टीम ने नरसिंगी थाना क्षेत्र के मंचीरेवुला स्थित टेक पार्क के पास नाकाबंदी के दौरान आरोपित को पकड़ा। पुलिस के अनुसार, साई भगीरथ को 16 मई की रात करीब 8:15 बजे हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उसे पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया गया।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
कोलकाता, 17 मई ।दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके और ममता बनर्जी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके गियासुद्दीन मोल्ला ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी तथा एक पुलिस अधिकारी मिथुन कुमार डे के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत दर्ज होने की पुष्टि करते हुए गियासुद्दीन मोल्ला ने रविवार को कहा कि वे लंबे समय तक भय के कारण चुप रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक कार्रवाई से डर था। अब उन्हें नई प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार पर भरोसा है, इसलिए उन्होंने शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
गियासुद्दीन मोल्ला मगराहाट पश्चिम सीट से 2011 से 2026 तक लगातार विधायक रहे हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद उनकी जगह शमीम अहमद मोल्ला को टिकट दिया गया, जो वर्तमान विधानसभा के विधायकों में शामिल हैं।
मोल्ला के अनुसार, तत्कालीन उपमंडल पुलिस अधिकारी मिथुन कुमार डे पर आरोप है कि वे क्षेत्र के कुछ तृणमूल कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुचित दंडात्मक कार्रवाई करते थे। मोल्ला ने दावा किया कि एक पार्टी कार्यकर्ता की पुलिस थाने के अंदर पिटाई की गई और मानसिक तथा शारीरिक उत्पीड़न किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मामले का विरोध किया तो पुलिस अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और लाठी लेकर उन पर हमला करने के लिए दौड़े। मोल्ला का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों को दी थी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
मोल्ला ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को इन घटनाओं की पूरी जानकारी थी और पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर उनके निर्देश पर काम किया।
गौरतलब है कि मिथुन कुमार डे को हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव संबंधी ड्यूटी से पहले ही हटा दिया गया था।
इस बीच, हाल ही में कोलकाता के विधाननगर साइबर अपराध थाने में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कथित तौर पर धमकी देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।
तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और कहा है कि बदले हुए राजनीतिक हालात में उनके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
कोलकाता, 17 मई । राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम ने शनिवार रात को कोलकाता के कई सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। अस्पतालों की साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए यह दौरा किया गया।
सूत्रों के अनुसार, गत गुरुवार को स्वास्थ्य सचिव ने कोलकाता के पांच मेडिकल कॉलेजों और चार शिक्षण संस्थान अस्पतालों के प्राचार्यों तथा उप-प्राचार्यों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की थी। बैठक में अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर कई सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बाद शनिवार रात को उन्होंने स्वयं अस्पतालों का निरीक्षण किया।
सबसे पहले स्वास्थ्य सचिव नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नीलरतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और एसएसकेएम अस्पताल का दौरा किया।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सचिव ने उप-प्राचार्य सप्तर्षि चट्टोपाध्याय सहित अन्य चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ बैठक भी की। बैठक में अस्पताल की स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर चर्चा की गई।
बताया जा रहा है कि इस सप्ताह राज्य की नगर विकास तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पाल ने अस्पतालों का दौरा कर वहां की अव्यवस्था और गंदगी को लेकर गहरा असंतोष जताया था। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ।
स्वास्थ्य भवन के सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल परिसरों में अस्वास्थ्यकर वातावरण, गंदे शौचालय और निगरानी व्यवस्था की कमी को लेकर अस्पताल प्रशासन को कड़ा संदेश दिया गया है। निर्देश दिया गया है कि केवल शौचालय ही नहीं, बल्कि वार्ड और कॉरिडोर भी साफ-सुथरे रखे जाएं।
सूत्रों का दावा है कि अस्पताल के विभिन्न हिस्सों की दिन में कम से कम तीन बार सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि सफाई कार्य नियमित रूप से हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी की जाएगी।
खड़गपुर, मई 17 । पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद से अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू चुकी हैं। अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है। इस बीच, राज्य के ग्रामोन्नयन एवं प्राणी संरक्षण मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रविवार सुबह खड़गपुर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि हम सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे।जहां भी अवैध निर्माण होंगे, वहां बुलडोजर चलाए जाएंगे। बंगाल में सत्ता में आई नई सरकार ने पहले दिन से ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी है। मैं अवैध गतिविधियों में शामिल सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे कानून की सीमा के भीतर अपनी गतिविधियों को अंजाम दें। सरकार उनका पूरा सहयोग करेगी।
देहरादून, 17 मई । स्वर्गीय हरबंस कपूर की स्मृति में आयोजित 'पर्यावरण संकल्प साइकिल रैली' का रविवार को कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने केन्द्रीय विद्यालय ओएनजीसी ग्राउंड, देहरादून से फ्लैग ऑफ कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि साइकिल चलाना जहां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, वहीं यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।
कैबिनेट मंत्री ने स्वर्गीय हरबंस कपूर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे केवल उनके राजनीतिक गुरु ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी थे। उन्होंने कहा कि राजनीति के मूल्यों और जनसेवा की भावना उन्होंने कपूर साहब से ही सीखी है। उनका सादा जीवन और उच्च विचार सभी के लिए प्रेरणादायक हैं।
कार्यक्रम के समापन पर मंत्री गणेश जोशी ने साइकिल रैली के विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
स्व. हरबंस कपूर मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में युवाओं, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली केवी ओएनजीसी बैरियर, कोलागढ़ रोड से शुरू होकर होटल सेफ्रन लीफ तक निकाली गई। इस दौरान कैंट विधायक सविता कपूर, पार्षद नंदनी शर्मा, ओपी कुलश्रेष्ठ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रयागराज, 17 मई । भागदौड़ भरी जिंदगी, भीषण गर्मी और ऑफिस का तनाव, इन सबके बीच मन को शांत रखने का सबसे सस्ता और असरदार तरीका स्पर्श ध्यान है। प्रतिदिन सिर्फ 15 मिनट स्पर्श ध्यान करने से शरीर और दिमाग दोनों बदलने लगते हैं।
यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान की ओर से प्रयागराज रेकी सेंटर पर रविवार को जाने-माने स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने स्पर्श ध्यान का निःशुल्क प्रशिक्षण देते हुए कही।
उन्होंने प्रशिक्षण लेने वालों को सम्बोधित करते हुए बताया कि गर्मियों में स्पर्श ध्यान करने से कई फायदे होते हैं।
तनाव और चिंता होती है कम
स्पर्श ध्यान करते समय दिमाग में स्ट्रेस हार्मोन घटता है। कुछ देर कठिन कार्य करने के बाद 10 मिनट आंख बंद करके बैठने से ही सिर हल्का लगने लगता है। स्पर्श - ध्यान तो तनाव घटाने के लिए खास माना जाता है।
फोकस और याददाश्त बढ़ती है
प्रतिदिन स्पर्श ध्यान करने से दिमाग की एकाग्रता बढ़ती है। लेखा-जोखा जैसा बारीक काम करने वालों के लिए गलतियां कम होती हैं। छात्रों की पढ़ाई में भी फर्क दिखता है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है
गर्मी में बीपी बढ़ना आम है। स्पर्श ध्यान से नर्वस सिस्टम शांत होता है, दिल की धड़कन सामान्य रहती है। डॉक्टर भी हाई बीपी के मरीजों को आंख बंद कर ध्यान में बैठने की सलाह देते हैं।
नींद अच्छी आती है
रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे दिमाग चलता रहता है, तो सोने से 10 मिनट पहले श्वास पर ध्यान देने से दिमाग शांत होता है और गहरी नींद आती है।
गुस्सा और चिड़चिड़ापन कम
45° से0 की गर्मी में वैसे ही चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। स्पर्श ध्यान से मन शांत रहता है तो छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं आता। परिवार और ऑफिस का माहौल बेहतर रहता है।
इम्यूनिटी मजबूत होती है
रिसर्च बताती है कि प्रतिदिन स्पर्श ध्यान करने वालों के शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। लू, वायरल और मौसमी बीमारियों का असर कम होता है।
शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है
स्पर्श ध्यान, रेकी या स्पर्श चिकित्सा से शरीर की रुकी हुई ऊर्जा चलने लगती है। इससे थकान कम लगती है और दिन भर स्फूर्ति रहती है।
स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन करें
- सुबह 5 मिनट से शुरू करें - बस शांत जगह बैठकर अपनी सांस आती - जाती महसूस करें।
- मोबाइल साइलेंट रखें, आंखें बंद करें।
- विचार आएं तो उन्हें रोकें नहीं, बस वापस सांस पर आ जाएं।
- गर्मी में शीतली प्राणायाम के साथ ध्यान करें - जीभ को मोड़कर सांस खींचें, शरीर ठंडा रहेगा।
बलिया, 17 मई । उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गड़हांचल की लाइफ लाइन कही जाने वाली मंगई नदी से जुड़े नालों का अवरोध खत्म करने की पहल हुई है। जिससे हजारों एकड़ खेती योग्य भूमि के हर साल जलमग्न रहने की संभावना नगण्य हो गई है।
मंगई नदी से जुड़े नालों में जमी गाद की खुदाई व कई जगहों पर पुलिया के निर्माण के लिए विगत दिनों पूर्व मन्त्री नारद राय ने जलशक्ति मन्त्री स्वतन्त्रदेव सिंह से लखनऊ में मुलाक़ात की थी। उन्होंने जलशक्ति मंत्री से किसानों की इस विकराल समस्या के निराकरण का अनुरोध किया था। जिसके बाद जलशक्ति मन्त्री ने टेलीफोन से अधिशासी अभियन्ता सिंचाई को त्वरित समाधान के निर्देश दिए थे। जिसके बाद बलिया आने के बाद पूर्व मन्त्री नारद राय सिंचाई विभाग के कार्यालय पहुँच कर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता राकेश कुमार से दर्जनों गांवों के किसानों के हजारों एकड़ खेत से जुड़े नाले जो मंगई नदी में गिरते हैं, को मौके पर चलकर देखने को कहा था। अधिशाषी अभियंता अपने साथ सहायक अभियन्ता राम मिलन गोंड़ व अवर अभियन्ता राजकुमार चौरसिया सहित सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम के साथ निरीक्षण करने पहुंचे थे। अधिकारियों ने नरहीं से मंगई नदी तक जाने वाली लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबी करौंटी ड्रेन, शहाबुद्दीन पुर (कारों) से शुरू होने वाले ढाई किलोमीटर के फिरोजपुर ड्रेन, टुटुआरी-बघौना से मंगई नदी तक जाने वाले साढ़े सात किलोमीटर के नरहीं ड्रेन, टाड़ा ब्रम्हबाबा के स्थान को जाने वाली ड्रेन की सफाई व कुछ विशेष जगहों पर पुलिया के निर्माण को लेकर निरीक्षण किया।
अधिशासी अभियन्ता ने बताया कि जलशक्ति मन्त्री द्वारा टेलीफोन पर दिए गए निर्देश पर ड्रेनों की सफाई के लिए टेण्डर कर दिया गया है, बरसात के पूर्व ड्रेन सफाई का कार्य पूर्ण करा दिया जाएगा। करइल क्षेत्र के लोगों की इस विकराल समस्या के समाधान कराए जाने पर नारद राय ने जलशक्ति मन्त्री का आभार व्यक्त किया। नारद राय ने रविवार को बताया कि करईल क्षेत्र के हजारों किसान अपने खेतों के साल भर जलमग्न रहने से परेशान थे। उनकी यह समस्या दूर हो जाएगी। प्रदेश की योगी सरकार किसानों के हित में कार्य करने के लिए प्रत्यत्नशील है।
कानपुर, 16 मई । सिख उद्योग व्यापार संगठन उत्तर प्रदेश द्वारा गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब चौक में ग्रंथी सिंह, रागी सिंह और सेवादारों के पचास बच्चों को नि:शुल्क स्कूल बैग एवं कॉपियां वितरित की गईं। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी शिक्षा के लिए समाज को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। यह बातें शनिवार को हरविंदर सिंह भाटिया बॉबी ने कही।
कार्यक्रम के दौरान संगठन की ओर से बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया गया। पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था पिछले तीन वर्षों से लगातार इस प्रकार की सेवा कर रही है ताकि जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से इस सेवा कार्य को और अधिक व्यापक बनाया जा सकता है।
संगठन की ओर से समाज के लोगों से अपील की गई कि वह इस सेवा अभियान में सहयोग करें, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाई जा सके। कार्यक्रम में हरविंदर सिंह भाटिया बॉबी, कमल भाटिया, अमरजीत सिंह बत्रा, शम्मी सिंह, राजिंदर सिंह, कंवलजीत सिंह और जानी कुमार मौजूद रहे।
17 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देने के लिए 17 अहम समझौतों और दस्तावेजों पर सहमति बनी। इन समझौतों में सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन, हरित ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रवासन जैसे कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
रणनीतिक साझेदारी के लिए रोडमैप तैयार
दोनों देशों ने ‘भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2026-2030’ पर सहमति जताई। यह व्यापक दस्तावेज आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग की दिशा तय करेगा और व्यापार, तकनीक तथा वैश्विक साझेदारी को नई गति देगा।
संस्कृति और प्रवासन से जुड़े समझौते
यात्रा के दौरान चोल राजवंश के ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर सहमति बनी। इसके अलावा भारत और नीदरलैंड के बीच आवाजाही और प्रवासन को सुगम बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा सहयोग
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को सहयोग देने के लिए समझौता ज्ञापन हुआ। इसके साथ ही भारत के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
जल और हरित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वॉटर मैनेजमेंट मंत्रालय के बीच गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग पर आशय पत्र जारी किया गया। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा रूपांतरण परियोजनाओं पर कई संयुक्त समझौते और कार्य समूहों की स्थापना पर सहमति बनी।
कृषि और डेयरी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
पश्चिम त्रिपुरा में फ्लोरीकल्चर के लिए इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी। वहीं, बेंगलुरु स्थित पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र में डेयरी प्रशिक्षण के लिए इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा में भी साझेदारी मजबूत
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और नीदरलैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संस्थान के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी।
विश्वविद्यालयों और एएसआई के बीच समझौते
नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग पर समझौता हुआ। इसके अलावा लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज़ और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
सीमा शुल्क सहयोग पर भी समझौता
भारत और नीदरलैंड के बीच सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर भी समझौता हुआ, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाओं को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
काठमांडू, 17 मई । नेपाल के पर्वतारोही कामिरिता शेरपा ने आज 32वीं बार सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट (सगरमाथा) के शिखर पर चढ़ाई कर विश्व कीर्तिमान बनाया। 56 वर्षीय कामिरिता ने आज सुबह 10:12 बजे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी सगरमाथा का सफल आरोहण किया। सेवेन समिट ट्रेक्स कंपनी ने यह जानकारी दी ।
कामिरिता ‘एवरेस्ट मैन’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। सबसे अधिक बार सगरमाथा पर चढ़ाई करने का विश्व रिकॉर्ड उनके ही नाम दर्ज है। सेवेन समिट ट्रेक्स ने फेसबुक पर लिखा, “32वीं बार सफल आरोहण के बाद कामिरिता और उनकी टीम फिलहाल बेस कैंप की ओर लौट रही है। उनके सुरक्षित अवतरण की कामना करते हुए काठमांडू में भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है।”
सन् 1994 से सगरमाथा आरोहण यात्रा शुरू करने वाले कामिरिता ने 2026 तक पर्वतारोहण के क्षेत्र में अद्वितीय और अतुलनीय सफलता हासिल कर ली है। उन्हें केवल नेपाल का राष्ट्रीय गौरव ही नहीं, बल्कि विश्व पर्वतारोहण समुदाय के एक श्रेष्ठ प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
इसी तरह ‘माउंटेन क्वीन’ के नाम से प्रसिद्ध लाक्पा शेरपाा ने आज सुबह 9:30 बजे 11वीं बार सगरमाथा का आरोहण करते हुए महिला पर्वतारोहियों में सबसे अधिक बार एवरेस्ट फतह करने का विश्व रिकॉर्ड कायम किया। यह जानकारी पर्यटन विभाग के निदेशक हिमाल गौतम ने दी। सन 1973 में संखुवासभा के मकालु–2 में जन्मी लाक्पा ने नेपाल के पर्वतारोहण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।
द हेग (नीदरलैंड), 17 मई । भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के रूप में अपग्रेड (उन्नत) किया है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हेग में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद रणनीतिक साझेदारी रोडमैप (2026-2030) पर मुहर लगी। इसका उद्देश्य व्यापार, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इस ऐतिहासिक संयुक्त वक्तव्य में कई प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है।
आवागमन और प्रवासन समझौता
भारत और नीदरलैंड के बीच पेशेवरों और छात्रों की सुगम आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवासन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
सेमीकंडक्टर और तकनीक
धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब के विकास के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच साझेदारी हुई। इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के आदान-प्रदान के लिए खान मंत्रालय ने भी करार किया है।
हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा
भारत और नीदरलैंड ने 'हरित हाइड्रोजन के विकास के लिए भारत-नीदरलैंड रोडमैप' लॉन्च किया। यह अक्षय ऊर्जा संक्रमण में सहयोग को गति देगा।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कला
नीदरलैंड ने चोल राजवंश के ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को वापस सौंपे। इसके साथ ही समुद्री विरासत के संरक्षण के लिए लोथल (गुजरात) स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स से जुड़ा समझौता भी हुआ।
इस यात्रा के अहम मायने
प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत के लिए कई मायनों में अहम साबित हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नीदरलैंड भारत के शीर्ष पांच निवेशकों में शामिल है और दोनों देशों के रिश्ते पिछले 10 वर्ष में तेजी से मजबूत हुए हैं।
रिश्तों को मिली नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते की दिशा में हो रही प्रगति से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड मिलकर नवाचार, टेक्नोलॉजी और आर्थिक विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।
17 बड़े समझौते
प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 17 बड़े समझौते हुए। इनका सर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक, शिक्षा, ऊर्जा, खेती, सेहत, डेयरी, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दोनों देशों ने कहा कि ये फैसले आने वाले समय में विकास, रोजगार, निवेश और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देंगे। इससे भारत को नई तकनीक, रोजगार और वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। रक्षा, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
वीजा प्रक्रिया आसान बनाने पर सहमति
भारत और नीदरलैंड के बीच वीजा प्रक्रिया आसान बनाने पर सहमति बनी। इससे भारतीय छात्रों, प्रोफेशनल्स और कामगारों को पढ़ाई और नौकरी के बेहतर अवसर मिलेंगे। इंटर्नशिप और लंबी अवधि के वीजा में भी सहूलियत मिलेगी।
उच्च शिक्षा में सहयोग
नालंदा यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगेन साझेदारी भी हुई है। दोनों देशों के विश्वविद्यालय अब संयुक्त रिसर्च और डिग्री कार्यक्रम चला सकेंगे। भारतीय छात्रों और शिक्षकों को डच यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और रिसर्च के नए मौके मिलेंगे।
भारत की औद्योगिक ताकत बढ़ेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग पर हुए अनुबंध से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई मजबूत होगी। इससे भारत की औद्योगिक ताकत बढ़ेगी। यही नहीं, भारत और नीदरलैंड ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात में मिलकर काम करेंगे। इससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार बढ़ेंगे। भारत यूरोप के ग्रीन एनर्जी बाजार में मजबूत जगह बना सकेगा। दोनों देश सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तकनीक और विशेषज्ञता साझा करेंगे।
नीति आयोग और नीदरलैंड
भारत के नीति आयोग के सहयोग से ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा और नई तकनीक पर संयुक्त परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इससे निवेश और उद्योगों को फायदा मिलेगा।नीदरलैंड भारत के गुजरात की बड़ी जल परियोजना में तकनीकी मदद देगा। इससे पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
त्रिपुरा के फूल दुनिया में महकेंगे
फ्लावर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, त्रिपुरा को नीदरलैंड सहयोग करेगा। इससे फूलों की खेती को आधुनिक तकनीक मिलेगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। बेंगलुरु में इंडो-डच डेयरी सेंटर को मदद करने का भी नीदरलैंड ने वादा किया है। इससे डेयरी किसानों और पशुपालन क्षेत्र को नई तकनीक और प्रशिक्षण मिलेगा। इससे दूध उत्पादन और गुणवत्ता सुधरेगी। यही नहीं भारतीय पशुपालन क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, बीमारी नियंत्रण और स्किल ट्रेनिंग का लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
दोनों देश स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग करेंगे। वक्तव्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य, मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया। भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में यह सहयोग मदद करेगा।
सबसे अहम समझौता
व्यापार और आयात-निर्यात प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अहम समझौता हुआ है। इससे उद्यमियों को राहत मिलेगी। दोनों देशों ने निवेश, हरित विकास, खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी बढ़ाने पर सहमति दी।
आतंकवाद पर मजबूत रुख
उल्लेखनीय है कि भारत और नीदरलैंड आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और साझा रुख साझा करते हैं। दोनों देश आतंकवाद के किसी भी रूप का समर्थन न करने, इसके वित्तपोषण (फंडिंग) को रोकने और आतंकवाद से निपटने में किसी भी प्रकार के "दोहरे मापदंड" के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करते हैं। भारत और नीदरलैंड ने सभी देशों से आह्वान किया है कि वे आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करें और आतंकवादी नेटवर्कों तथा उनके वित्तपोषण के चैनलों को बाधित करें।
काठमांडू, 17 मई । भारत से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाली तीर्थयात्रियों का नेपाल आगमन शुरू हो गया है। पिछले चार दिनों में 169 तीर्थयात्रियों ने नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा में जाने के लिए पंजीकरण कराया है। तीर्थयात्री पश्चिमी नेपाल के नेपालगंज से सिमकोट और वहां से हिल्सा तक हवाई मार्ग से पहुंच रहे हैं। हिल्सा को चीन स्थित कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है।
सिमकोट एयरपोर्ट प्रमुख महेन्द्र सिंह के अनुसार, 1४ मई से अब तक 1६९ भारतीय नागरिक और 22 अन्य देशों के नागरिक पहुंचे हैं। खराब मौसम के बावजूद शनिवार को समिट एयर की तीन उड़ानों के जरिए 47 तीर्थयात्री सिमकोट पहुंचे। रविवार को मौसम में सुधार होने के साथ तीर्थयात्रियों को सिमकोट ले जाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आवश्यक अनुमति पत्र (परमिट) न होने के कारण कुछ विदेशी यात्री कैलाश मानसरोवर की आगे की यात्रा जारी नहीं रख सके जिसके कारण इन सबको वापस भेज दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में तीर्थयात्रियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। कोविड-19 प्रतिबंधों के बाद हिल्सा मार्ग दोबारा खुलने से यात्रा को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष चीन द्वारा मार्ग खोले जाने के बाद लगभग 6,500 भारतीय तीर्थयात्रियों ने इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर तक की यात्रा की थी। इस वर्ष 1४ मई से तीर्थयात्रा सीजन की शुरुआत हुई है।
काठमांडू, 17 मई । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का अगले डेढ़ माह तक संसद में संशोधन का कोई कार्यक्रम तय नहीं है। आज सार्वजनिक किए गए संसदीय कैलेंडर में शाह के संसद में बोलने या सांसदों के सवाल का जवाब देने का कोई कार्यक्रम शामिल नहीं है।
संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा का आगामी 30 जून तक का कैलेंडर सार्वजनिक किया गया। संसद सचिवालय के अनुसार प्रतिनिधि सभा नियमावली के अनुसार यह कैलेंडर जारी किया गया है। इस नियमावली में प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह के एक दिन प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित करने का प्रावधान है।
नियमावली के नियम 56 में कहा गया है, “प्रधानमंत्री या उनके कार्यक्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न पूछने के लिए स्पीकर प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह के किसी एक दिन की बैठक के पहले एक घंटे का समय निर्धारित करेंगे।” इस नियम के अनुसार अब तक सभी प्रधानमंत्रियों ने कम से कम एक घंटे तक सांसदों के सवालों के जवाब दिए हैं। लेकिन इस बार प्रतिनिधि सभा द्वारा जारी संसदीय कैलेंडर में प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर कार्यक्रम नहीं रखा गया है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह पर संसद में नहीं बोलने, संसद के प्रति उत्तरदायी न होने का आरोप लग रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण और सरकार की नीति तथा कार्यक्रम पर उठे सवालों का भी जवाब नहीं दिया । उनकी जगह वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने सांसदों के प्रश्नों का उत्तर दिया था।
काठमांडू, 17 मई । भारत द्वारा चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर नेपाल के चीनी उद्योग संघ ने दावा किया है कि नेपाल में चीनी की कमी नहीं होगी। संघ ने आज एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि देश में पर्याप्त मात्रा में चीनी का भंडार मौजूद है। संघ ने अपील की है कि उपभोक्ता चिंता न करें।
चीनी उद्योग संघ के अनुसार, चालू सीजन में संचालित 13 चीनी उद्योगों से करीब 1 लाख 90 हजार 870 टन चीनी का उत्पादन हुआ है। इनमें से 28 वैशाख तक के आंकड़ों के अनुसार उद्योगों के पास अभी भी 1 लाख 8 हजार टन चीनी का भंडार मौजूद है। उद्योगपतियों के भंडार के अलावा बाजार में व्यवसायियों के पास करीब 20 हजार टन तथा चालू आर्थिक वर्ष में आयात की गई लगभग 60 से 70 हजार टन चीनी भी उपलब्ध है।
संघ ने कहा कि खुली सीमा से भी चीनी का आयात जारी है, इसलिए अगले क्रसिंग सीजन तक नेपाल में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त रहने का दावा किया गया है। संघ ने स्पष्ट किया कि चीनी की पर्याप्त उपलब्धता होने के कारण फिलहाल फैक्टरी स्तर पर चीनी की कीमतों में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है, “देश में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध और भंडारित होने के कारण तत्काल फैक्टरी स्तर पर कीमत नहीं बढ़ेगी।”
भारत के निर्यात प्रतिबंध के कारण बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने की आशंका जताते हुए संघ ने संबंधित पक्षों से अनावश्यक रूप से चीनी का भंडारण न करने और न करवाने की भी अपील की है। संघ ने सभी को आश्वस्त किया है कि भारत के फैसले से नेपाली बाजार में चीनी की आपूर्ति और उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
स्टॉकहोम (स्वीडन)/ द हेग (नीदरलैंड), 17 मई । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूरोप और पश्चिम एशिया के पांच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में आज स्वीडन पहुंचेंगे। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, वो स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर में दो दिन रहेंगे। स्वीडन की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस यात्रा का मुख्य फोकस भारत-स्वीडन द्विपक्षीय संबंधों को प्रौद्योगिकी-संचालित आर्थिक साझेदारी में बदलना, ग्रीन-ट्रांजिशन, डिजिटल-इनोवेशन और रक्षा-प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करना है।
स्वीडन के अखबार स्वीडन हेराल्ड के अनुसार, प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 और 18 मई तक गोथेनबर्ग में रहेंगे। उन्होंने कहा दुनिया मची उथल-पुथल को देखते हुए यह उनी यात्रा का बिल्कुल सही समय है। स्वीडिश प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। इस वार्ता में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दे प्राथमिकता के केंद्र में होंगे। स्वीडन की सरकार भारत को स्वीडिश कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजार मानती है।
स्वीडन के प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सबका आधार यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता ही है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी गोथेनबर्ग में नरेन्द्र मोदी से मिलेंगी। 2018 के बाद स्वीडन की यह मोदी की पहली यात्रा है। 19 मई को प्रधानमंत्री मोदी ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड यात्रा की स्मृतियों को शब्द चित्रों के माध्यम से एक्स पर सहेजा है। उन्होंने लिखा, ''भारतीय प्रवासी समुदाय भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी का एक जीवंत सेतु है। सूरीनामी हिंदुस्तानी समुदाय के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता को चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक करने के हमारे निर्णय का, नीदरलैंड्स में रहने वाले प्रवासी समुदाय द्वारा पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया गया है!''
दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, '' प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ मेरी बातचीत काफी विस्तृत रही और इसमें कई विषयों पर चर्चा हुई। इनमें से एक विषय रक्षा और सुरक्षा भी था। मैंने रक्षा उद्योग के लिए जल्द से जल्द एक कार्ययोजना तैयार करने की संभावना पर बात की। हम अंतरिक्ष यात्रा, समुद्री प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग कर सकते हैं।''
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, ''आर्थिक सहयोग भारत और नीदरलैंड के बीच दोस्ती का एक प्रमुख स्तंभ है। भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता असीमित अवसर प्रदान करता है। फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। हमने सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।''
'धन्यवाद, प्रधानमंत्री रॉब जेटेन!'
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, '' धन्यवाद प्रधानमंत्री रॉब जेटेन। मुझे नीदरलैंड्स में यहां आकर बहुत खुशी हो रही है, जिसका उद्देश्य हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। पिछले 10 वर्ष में भारत और नीदरलैंड्स के बीच साझेदारी ने जबरदस्त प्रगति की है और अब समय आ गया है कि हम इसमें और भी अधिक योगदान दें, ताकि हमारे दोनों देशों के लोगों को इसका लाभ मिल सके। ये ठोस और महत्वपूर्ण परिणाम हैं, जो भारत और नीदरलैंड के बीच की मित्रता को अभूतपूर्व गति प्रदान करेंगे। ये परिणाम अनेक क्षेत्रों को समाहित करते हैं और हमारे राष्ट्रों के लिए विकास तथा समृद्धि को बढ़ावा देंगे।
काठमांडू, 16 मई। भारत द्वारा एक मई से लागू नई ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (एसओपी) के बाद नेपाल में चाय उद्योग गंभीर संकट में पड़ गया है। ऐसे में व्यवसायियों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से इस मुद्दे के समाधान की मांग की है।
नई निर्देशिका के अनुसार भारत में प्रवेश करने वाली नेपाली चाय के हर ट्रक और प्रत्येक खेप की अलग-अलग प्रयोगशाला जांच (लैब टेस्ट) अनिवार्य कर दी गई है।
व्यवसायियों के अनुसार नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भारत के वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय चाय बोर्ड के अधिकारियों के साथ लगातार संवाद कर अवरोध हटाने का अनुरोध किया है। चाय व्यवसायियों ने अब मांग की है कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री स्तर पर सीधा हस्तक्षेप होना चाहिए। उनका कहना है कि पहले भी ऐसे मामलों में तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने सीधे भारतीय समकक्ष से बात कर समस्या का समाधान कराया था, इसलिए इस बार भी उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद आवश्यक है।
व्यवसायियों का कहना है कि नेपाल की प्रमुख निर्यात योग्य कृषि ऊपज के बाजार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को तत्काल ठोस और प्रत्यक्ष पहल करनी चाहिए।
नेपाल चाय उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने बताया कि इस कड़े नियम के कारण पिछले आधे महीने से निर्यात लगभग बंद है।उनके अनुसार इस दौरान भारतीय खरीदारों ने अपने जोखिम पर बेहद कम मात्रा में केवल दो ट्रक चाय खरीदी है, जिसमें तराई क्षेत्र की लगभग 10–12 टन और पहाड़ी क्षेत्र की 4–5 टन चाय शामिल है।
उन्होंने कहा कि चाय का सीजन अभी शुरू ही हुआ है, इसलिए फिलहाल बहुत बड़ा व्यावसायिक नुकसान नहीं हुआ है लेकिन अच्छी बारिश के कारण अगले एक सप्ताह में उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। यदि तब तक निर्यात नहीं खुला, तो उद्योगियों और किसानों को भंडारण की कमी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इसी तरह नेपाल टी एसोसिएसन के अध्यक्ष कमल मैनाली ने कहा कि भारत के नए नियमों से व्यापारियों का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि चाय 15 दिनों तक सीमा पर रुकी रहती है, तो उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है। साथ ही यदि चाय लैब टेस्ट में फेल हो जाए, तो उसे नष्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
मैनाली ने कहा कि रिपोर्ट आने से पहले चाय बेच नहीं सकते। अगर लैब टेस्ट में चाय फेल हो गई तो उसे नेपाल वापस लाने की भी अनुमति नहीं है। यदि वापस लानी पड़े तो 40 प्रतिशत कस्टम शुल्क और 13 प्रतिशत वैट देना होगा। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल प्रशासनिक या कूटनीतिक स्तर से हल होती नहीं दिख रही, इसलिए उच्च राजनीतिक हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो गया है।
16 मई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के प्रति उनका धैर्य समाप्त हो रहा है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात पर सहमत हो गए हैं कि तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा, लेकिन चीन ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई संकेत नहीं दिया।
शी जिनपिंग के साथ दो दिनों की बातचीत के बाद शुक्रवार को बीजिंग से लौटते समय ट्रंप ने कहा कि वह ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी तेल कंपनियों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहे हैं। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
उनके बयानों से इस बात पर कोई प्रकाश नहीं पड़ता कि क्या बीजिंग तेहरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल उस संघर्ष को समाप्त करने के लिए कर सकता है, जिसके बारे में उसका कहना है कि यह कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था।
जब विमान में सवार एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि क्या शी जिनपिंग ने ईरानियों पर जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दबाव डालने की कोई ठोस प्रतिबद्धता जताई है, जो तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, तो ट्रंप ने कहा, "मैं किसी से कोई एहसान नहीं मांग रहा हूं क्योंकि जब आप एहसान मांगते हैं, तो आपको बदले में एहसान करना पड़ता है।"
शी जिनपिंग ने ईरान को लेकर ट्रंप के साथ हुई अपनी चर्चा पर कोई टिप्पणी नहीं की, हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय ने एक स्पष्ट बयान जारी कर ईरान युद्ध को लेकर बीजिंग की निराशा को रेखांकित किया।
मंत्रालय ने कहा, "यह संघर्ष, जो कभी होना ही नहीं चाहिए था, जारी रहने का कोई कारण नहीं है।"
'हम चाहते हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहे'
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने प्रभावी रूप से अधिकांश जहाजों के लिए जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अभूतपूर्व व्यवधान उत्पन्न हुआ।
अमेरिका ने पिछले महीने ईरान पर हमले रोक दिए, लेकिन बंदरगाह की नाकाबंदी शुरू कर दी। तेहरान ने कहा कि जब तक अमेरिका नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक वह जलडमरूमध्य नहीं खोलेगा। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है तो वह फिर से उस पर हमला करेगा।
शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में बैठे हुए ट्रंप ने कहा था, "हम नहीं चाहते कि उनके पास परमाणु हथियार हों, हम चाहते हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहे।"
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि तेहरान को अमेरिका से संदेश मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि वाशिंगटन बातचीत जारी रखने को तैयार है।
उन्होंने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "हमें उम्मीद है कि बातचीत में प्रगति के साथ, हम एक अच्छे निष्कर्ष पर पहुंचेंगे ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके और हम जलडमरूमध्य के माध्यम से यातायात के सामान्यीकरण में तेजी ला सकें।"
ईरान, जिसने लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने के अपने इरादे से इनकार किया है, ने परमाणु अनुसंधान को समाप्त करने या समृद्ध यूरेनियम के अपने गुप्त भंडार को छोड़ने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप निराश हैं।
“मैं अब और धैर्य नहीं रखने वाला। उन्हें समझौता कर लेना चाहिए,” ट्रंप ने गुरुवार रात फॉक्स न्यूज के “हैनिटी” कार्यक्रम में प्रसारित एक साक्षात्कार में कहा, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को व्यावहारिक आवश्यकता के बजाय “जनसंपर्क” के लिए समृद्ध यूरेनियम हासिल करने की जरूरत है।
संघर्ष के समाधान में प्रगति की कमी को लेकर चिंताओं के चलते तेल की कीमतों में लगभग 3% की वृद्धि हुई और यह लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई क्योंकि व्यापारियों को आशंका थी कि फेडरल रिजर्व को नाकाबंदी से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करने की आवश्यकता हो सकती है।
गुरुवार को ट्रंप और शी के बीच हुई बातचीत के बाद, व्हाइट हाउस ने कहा कि शी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन जलडमरूमध्य के उपयोग के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलने के ईरानी प्रयास का विरोध करता है।
ट्रम्प ने कहा कि शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण न भेजने का भी वादा किया है। ट्रम्प ने "हैनिटी" कार्यक्रम में कहा, "यह एक बड़ा बयान है।"
ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी तेल रिफाइनरियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बारे में पूछे जाने पर, ट्रम्प ने अपने विमान में पत्रकारों से कहा: "हमने इस बारे में बात की है और मैं अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला लूंगा।"
ईरान को अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है।
चीन ने ईरान को हथियार आपूर्ति करने की योजनाओं की खबरों को "बेबुनियाद आरोप" बताकर खारिज कर दिया है, लेकिन विश्लेषकों को संदेह है कि शी जिनपिंग ईरान पर दबाव डालना या उसकी सेना को समर्थन देना बंद करना चाहेंगे, क्योंकि अमेरिका के रणनीतिक प्रतिसंतुलन के रूप में ईरान का महत्व बहुत अधिक है।
नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनावों से पहले ट्रंप के लिए एक बोझ बन चुके इस युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत पिछले सप्ताह से रुकी हुई है, जब ईरान और अमेरिका दोनों ने एक-दूसरे के नवीनतम प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।
अराकची ने शुक्रवार को कहा कि ईरान चीनी सहयोग का स्वागत करेगा, और साथ ही यह भी कहा कि तेहरान कूटनीति को एक मौका देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है, जिसने हवाई हमले करके वार्ता के पिछले दौर को बाधित किया है।
अराकची ने कहा कि ईरान लड़ाई फिर से शुरू करने के साथ-साथ राजनयिक समाधानों के लिए भी तैयार है, और उन्होंने दोहराया कि जो जहाज उनके देश पर हमला करने वाले राज्यों से जुड़े नहीं हैं, वे ईरान के साथ समन्वय करने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं।
ईरान के सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को कहा कि संघर्ष की स्थिति में देश की रक्षा के लिए सार्वजनिक तत्परता प्रदर्शित करने के अभियान में 31 मिलियन से अधिक ईरानियों ने पंजीकरण कराया है, क्योंकि देश ने सरकार समर्थक स्वयंसेवकों के लिए हथियार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं।
युद्ध से पहले, वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा, साथ ही उर्वरक और अन्य आवश्यक सामग्री इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी। जहाजों पर हुए हमलों ने लगभग सभी यातायात को रोक दिया है।
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य के ठीक बाहर स्थित अपने फुजैराह बंदरगाह तक नई पाइपलाइन के निर्माण में तेजी लाएगा, क्योंकि इस सप्ताह उसकी ओर जा रहे एक जहाज को डुबो दिया गया था और दूसरे जहाज पर सवार होकर उसे ईरान की ओर मोड़ दिया गया था।
अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के दौरान हजारों ईरानी मारे गए, और लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह के बीच नए सिरे से शुरू हुई लड़ाई में हजारों लोग मारे गए हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को घोषणा की कि इजरायल और लेबनान एक नाजुक युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं, जो रविवार को समाप्त होने वाला था।
हिजबुल्लाह इन वार्ताओं का विरोध कर रहा है, जिसमें इजरायल समूह के निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है।
16 मई। इजराइल और लेबनान ने दक्षिणी लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष को कम करने वाले युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई है। वाशिंगटन की मध्यस्थता से हुई दो दिनों की वार्ता शुक्रवार को समाप्त हुई और आगामी हफ्तों में और बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने X कार्यक्रम में कहा, "आगे की प्रगति को संभव बनाने के लिए 16 अप्रैल को हुए युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा।" उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से चल रही वार्ता "अत्यंत फलदायी" रही। युद्धविराम रविवार को समाप्त होने वाला था।
लेबनानी और इजरायली प्रतिनिधिमंडलों ने वार्ता के बारे में सकारात्मक बयान जारी किए। यह वार्ता इजरायल द्वारा लेबनान पर हवाई हमले तेज करने के बाद दोनों देशों के बीच तीसरी बैठक थी। यह घटना 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर मिसाइलें दागने के बाद हुई थी, जो ईरान के साथ अमेरिकी-इजरायल युद्ध के तीन दिन बाद की बात है। इजरायल के बमबारी अभियान और लेबनान के दक्षिणी भाग पर जमीनी आक्रमण के कारण लगभग 12 लाख लोग विस्थापित हो गए थे। इसके बाद पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन में दोनों देशों के राजदूतों के बीच प्रारंभिक वार्ता के बाद युद्धविराम की घोषणा की थी।
हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच झड़पें जारी हैं, और शत्रुता दक्षिणी लेबनान में केंद्रित है, जहां इजरायली सेना ने एक स्व-घोषित सुरक्षा क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है।
लेबनान चाहता है कि शत्रुता समाप्त हो।
अमेरिका के नेतृत्व में लेबनान और इज़राइल के बीच मध्यस्थता, अमेरिका-ईरान संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से की जा रही कूटनीति के समानांतर उभरी है। ईरान ने कहा है कि लेबनान में इज़राइल के युद्ध को समाप्त करना व्यापक संघर्ष पर समझौते के लिए उसकी मांगों में से एक है।
शिया मुस्लिम हिज़्बुल्लाह के विरोध के बावजूद लेबनान का प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग ले रहा है और उसने बातचीत में शत्रुता को समाप्त करने को प्राथमिकता दी है। इज़राइल का कहना है कि लेबनान के साथ किसी भी व्यापक शांति समझौते के तहत हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र किया जाना चाहिए।
वाशिंगटन में हुई बैठकें, जो दशकों में लेबनान और इज़राइल के बीच उच्चतम स्तर का संपर्क थीं, अब सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों को भी शामिल करने के लिए विकसित हो चुकी हैं। पिगोट ने X कार्यक्रम में कहा कि बातचीत का एक नया "सुरक्षा सत्र" 29 मई को पेंटागन में शुरू किया जाएगा, जबकि विदेश विभाग 2-3 जून को दोनों पक्षों को बातचीत के राजनीतिक सत्र के लिए फिर से बुलाएगा।
पिगोट ने कहा, "हमें उम्मीद है कि ये चर्चाएं दोनों देशों के बीच स्थायी शांति, एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पूर्ण मान्यता और उनकी साझा सीमा पर वास्तविक सुरक्षा स्थापित करने में सहायक होंगी।"
लेबनान के प्रतिनिधिमंडल ने एक बयान में कहा कि वे युद्धविराम से मिली गति को एक स्थायी शांति समझौते में बदलना चाहते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा, "युद्धविराम का विस्तार और अमेरिका द्वारा सुगम बनाए गए सुरक्षा मार्ग की स्थापना से हमारे नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत मिली है, राज्य संस्थाओं को मजबूती मिली है और स्थायी स्थिरता की दिशा में एक राजनीतिक मार्ग प्रशस्त हुआ है।"
अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि वार्ता "स्पष्ट और रचनात्मक" थी।
"उतार-चढ़ाव तो होंगे, लेकिन सफलता की अपार संभावनाएं हैं। वार्ता के दौरान सर्वोपरि हमारे नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा होगी," लीटर ने एक्स कार्यक्रम में कहा।
16 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान द हेग में भारतीय प्रवासी समुदाय और स्थानीय कलाकारों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भोजपुरी गीत गाकर और नारे लगाकर अपना उत्साह व्यक्त किया।
भारतीय प्रवासियों ने बातचीत करते हुए भोजपुरी गीत “ए राजा जी, एकरे त रहल हा जरूर, मुहूर्त खुबसूरत हो” गाया। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल पर “हर हर मोदी, घर-घर मोदी” और “देश का नेता कैसा हो, मोदी जी जैसा हो” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में शामिल नीदरलैंड के कलाकारों ने भी भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। एक कलाकार ने राम भजन प्रस्तुत करने के बाद बताया कि, “हमने एक सुंदर राम भजन प्रस्तुत किया। पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात थी। उनकी आंखों में चमक देखना बेहद सुखद था और उनके लिए प्रस्तुति देना सचमुच एक आशीर्वाद जैसा था।”
एक अन्य कलाकार ने कहा, “यह एक अनोखा अनुभव था। दुनिया के अग्रणी नेताओं में से एक पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।” शास्त्रीय कला प्रस्तुत करने वाले कलाकारों ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नीदरलैंड में प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रदर्शन करना उनके लिए ‘धन्य क्षण’ जैसा था। कलाकारों ने भारतीय दूतावास का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का मौका मिला।
भारतीय मूल के लोगों ने भी पीएम मोदी से मुलाकात को यादगार बताया। एक सदस्य ने कहा, “यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा दिन था। पीएम मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलना सचमुच एक आशीर्वाद जैसा है।”एक अन्य सदस्य ने कहा, “हम काफी देर से इंतजार कर रहे थे। वे सिर्फ हमारे प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि हमारे लिए सब कुछ हैं। उनसे मिलकर बेहद खुशी हुई।”
एक प्रवासी भारतीय ने पीएम मोदी को ‘वर्ल्ड लीडर’ बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत को मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों ने पीएम मोदी से हाथ मिलाने और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने को अपने जीवन का यादगार क्षण बताया।
16 मई। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार से पांच देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा के पहले चरण में वह संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे थे। वहीं दूसरे चरण में पीएम मोदी शनिवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इसके अलावा, इस आधिकारिक दौरे के तहत प्रधानमंत्री की किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से भी मुलाकात होगी।
पीएम मोदी 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे। प्रधानमंत्री का नीदरलैंड का यह दूसरा दौरा है। इससे पहले उन्होंने 2017 में यहां का दौरा किया था। मौजूदा दौरा भारत-नीदरलैंड के आपसी संबंधों के एक अहम मोड़ पर हो रहा है और इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को बढ़ाने के लिए अपने कई देशों के कूटनीतिक दौरे के तहत शुक्रवार शाम को नीदरलैंड पहुंचे। प्रधानमंत्री के इस दौरे का ऐलान करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “गुडडेवोंड नीदरलैंड! पीएम मोदी नीदरलैंड पहुंच गए हैं। यह दौरा भारत-नीदरलैंड की कई तरह की साझेदारी को और मजबूत करने और यूरोप के सबसे बड़े भारतीय समुदाय से जुड़ने का मौका देगा।”
इससे पहले, प्रधानमंत्री के दौरे पर एक खास ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, “पिछले कुछ सालों में व्यापार, निवेश के पारंपरिक क्षेत्र और डब्ल्यूएएच के जरूरी क्षेत्र, पानी, खेती और स्वास्थ्य, के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों में हमारी साझेदारी काफी गहरी हुई है। हाल के सालों में, तकनीक, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र जैसे रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग और बढ़ा है।”
लोगों के बीच संबंध भारत-नीदरलैंड के आपसी संबंध का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं। नीदरलैंड में 90,000 से ज्यादा नॉन-रेजिडेंट भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं, साथ ही सूरीनाम हिंदुस्तानी समुदाय के 200,000 से ज्यादा सदस्य भी रहते हैं। इसके अलावा, अभी देश भर की अलग-अलग यूनिवर्सिटी में करीब 3,500 भारतीय छात्र उच्च शिक्षा ले रहे हैं।
पीएम मोदी के इस दौरे का एक बड़ा और अहम एजेंडा है। उम्मीद है कि इससे दोनों देशों की लगातार कोशिशों से बनी साझेदारी के नए रणनीतिक पहलुओं को मजबूती मिलेगी।
काठमांडू, 16 मई। नेपाल-भारत सीमा नाकों पर दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर लगाए जा रहे कस्टम शुल्क पर नेपाल उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है।
काठमांडू, 15 मई । नेपाल में पिछले माह के मुकाबले अधिकांश पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में कमी आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि के बाद सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन सार्वजनिक अवकाश लागू करने के निर्णय का असर ईंधन की खपत पर पड़ा है।
सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की खपत कम करने के उद्देश्य से पिछले महीने से सप्ताह में दो दिन सार्वजनिक अवकाश देने का निर्णय लागू किया था। इसी नीति के बाद पेट्रोल, डीजल, मिट्टी तेल और खाना पकाने वाली गैस की मांग में गिरावट दर्ज की गई।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल, डीजल, मिट्टी तेल और एलपी गैस की खपत घटी है, जबकि हवाई ईंधन की खपत में कुछ वृद्धि हुई है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी गिरावट डीजल की खपत में देखी गई है।
15 मार्च से 15 अप्रैल तक 1 लाख 40 हजार 29 किलोलीटर डीजल की खपत हुई थी, जो 15 मई तक घटकर 1 लाख 2 हजार 71 किलोलीटर रह गई। यानी लगभग 37 हजार किलोलीटर की कमी आई।
इसी प्रकार पेट्रोल की खपत में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। पिछले महीने 59 हजार 938 किलोलीटर पेट्रोल की खपत हुई थी, जो इस महीने में घटकर 58 हजार 680 किलोलीटर रह गई।
मिट्टी तेल की खपत में भारी गिरावट देखी गई। पिछले महीने में 1 हजार 283 किलोलीटर मिट्टी तेल उपयोग हुआ था, जबकि इस महीने में यह घटकर केवल 248 किलोलीटर रह गया।
खाना पकाने वाली एलपी गैस की खपत भी कम हुई है। पिछले महीने में 38 हजार 799 मेट्रिक टन गैस की खपत हुई थी, जो इस महीने में घटकर 32 हजार 56 मेट्रिक टन पर पहुंच गई।
हालांकि अन्य सभी ईंधनों की खपत में कमी आई है लेकिन हवाई ईंधन की मांग बढ़ी है। पिछले महीने में 18 हजार 244 किलोलीटर हवाई ईंधन की खपत हुई थी, जो इस महीने में बढ़कर 19 हजार 552 किलोलीटर हो गई।
बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए सरकार ने 5 अप्रैल से शनिवार और रविवार को सार्वजनिक अवकाश लागू किया था। इसके बाद बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की मांग में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
अवकाश नीति लागू होने के बाद 22 अप्रैल से 12 मई तक पेट्रोल की खपत घटकर 38 हजार 622 किलोलीटर रह गई, जो पहले की तुलना में 4 हजार 510 किलोलीटर यानी लगभग 10.45 प्रतिशत कम है।
इसी तरह डीजल की खपत में और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाद के 21 दिनों में केवल 73 हजार 367 किलोलीटर डीजल की बिक्री हुई, जो पिछले अवधि की तुलना में 32 हजार 403 किलोलीटर यानी लगभग 30.63 प्रतिशत कम है।
नेपाल ऑयल निगम के प्रवक्ता मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश बढ़ने से पेट्रोल की खपत में कमी आना स्वाभाविक है लेकिन डीजल की खपत घटने के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि के कारण निर्माण कार्य सुस्त पड़ गया है, जिससे डीजल की खपत भी कम हुई है।”
निर्माण व्यवसायी विनोद घिमिरे ने कहा कि निर्माण सामग्री की अत्यधिक कीमतों के कारण देशभर में कई निर्माण कार्य बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा, “निर्माण क्षेत्र में पर्याप्त ईंधन की खपत नहीं हो रही है। अभी काम भी लगभग ठप है।”
इसके अलावा उद्योगों ने भी लागत बढ़ने के कारण उत्पादन क्षमता घटा दी है, जिससे परिवहन गतिविधियों में कमी आई है।
15 मई । जब सप्ताहांत में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को इस्तीफे के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ा, तो उनके स्वास्थ्य सचिव, वेस स्ट्रीटिंग, "द डेविल वियर्स प्राडा 2" देखने गए, एक ऐसी फिल्म जो एक कमजोर नेता को चुनौती देने वाले प्रतिद्वंद्वी को दर्शाती है।
