केंद्रीयमंत्री राजीव रंजन सिंह पांच जनवरी को तेलंगाना में देश के पहले उष्णकटिबंधीय आरएएस आधारित स्मार्ट ग्रीन रेनबो ट्राउट फार्म का करेंगे उद्घाटन
नई दिल्ली, 04 जनवरी । केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह पांच जनवरी को तेलंगाना में देश के पहले व्यावसायिक-स्तरीय उष्णकटिबंधीय आरएएस आधारित स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट और अत्याधुनिक रेनबो ट्राउट सुविधा का उद्घाटन करेंगे। यह फार्म हैदराबाद की जलवायु में पहली बार सफलतापूर्वक सालभर रेनबो ट्राउट उत्पादन संभव बनाने वाला देश का पहला वाणिज्यिक मॉडल है, जो प्रजाति-पालन में जलवायु की बाधा की धारणा को तकनीक-आधारित समाधान से बदल देगा ।
केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, उद्घाटन पांचजनवरी को हैदराबाद में होने वाली सामान्य निकाय बैठक के बाद होगा। यह परियोजना रंगा रेड्डी जिले के कंदुकुर मंडल में स्थित है, जिसे स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड ने भारत के पहले वाणिज्यिक-स्तरीय उष्णकटिबंधीय आरएएस आधारित रेनबो ट्राउट एक्वाकल्चर फार्म एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित किया है। यह केंद्र युवाओं को उन्नत एक्वाकल्चर, ऑटोमेशन, बायो-सिक्योरिटी और नियंत्रित जैविक प्रणालियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी करेगा।
केंद्र सरकार ने 2015 से मत्स्य और एक्वाकल्चर क्षेत्र में 38,572 करोड़ रुपये के संचयी निवेश को विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत या घोषित किया है। ठंडे पानी की मत्स्य पालन गतिविधियां उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे हिमालयी एवं पर्वतीय राज्यों में तेजी से उच्च-संभावना वाले उप-क्षेत्र के रूप में उभर रही हैं।
मत्स्य विभाग ने बर्फ से पोषित जल संसाधनों का उपयोग करते हुए रेनबो ट्राउट हैचरी नेटवर्क का विस्तार किया है और 14 लाख ट्राउट बीज का वार्षिक उत्पादन हासिल किया है। इसी क्रम में उत्तराखंड ने जीवंत ग्राम योजना के तहत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ समझौता ज्ञापन कर सीमावर्ती गांवों में ट्राउट आपूर्ति सुनिश्चित की है।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ठंडे पानी के मत्स्य पालन क्लस्टर के विकास को अधिसूचित किया है। सरकार आरएएस, प्रजाति विविधीकरण, क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचा विस्तार के माध्यम से क्षेत्र को तकनीक-संचालित और बाजार-उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने पर जोर दे रही है।
