स्टॉकहोम में दो दिनों तक चली अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता रचनात्मक रही, जिसमें दोनों देशों ने मौजूदा टैरिफ युद्धविराम को 12 अगस्त की समय सीमा से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह युद्धविराम पहले 90 दिनों के लिए लागू किया गया था, जिससे दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार तनाव में कुछ राहत मिली थी।
चीन के वरिष्ठ व्यापार वार्ताकार ली चेंगगांग ने बताया कि दोनों पक्ष इस अस्थायी समझौते को बनाए रखना चाहते हैं, ताकि नए टैरिफ से बचा जा सके और व्यापार संवाद को जारी रखा जा सके। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस दौरान स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेना है। ट्रंप ने मीडिया को बताया कि उन्हें वार्ता की जानकारी दी गई है और वह जल्द ही इस पर कोई निर्णय लेंगे। हालांकि, वाशिंगटन लौटने के बाद उन्होंने फिर से कुछ टैरिफ बढ़ा दिए, जिससे स्थिति में अनिश्चितता बनी हुई है।
इस वर्ष अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे के कई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए, जिनमें से कुछ 30 प्रतिशत से अधिक थे। यदि युद्धविराम का विस्तार नहीं होता, तो ये टैरिफ दोबारा प्रभाव में आ सकते हैं। वार्ता में अन्य संवेदनशील मुद्दों जैसे दुर्लभ मृदा (rare earths), TikTok, और रूस व ईरान के साथ चीन के संबंधों पर भी चर्चा हुई।
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका चीन से पूरी तरह अलगाव नहीं चाहता, बल्कि रणनीतिक क्षेत्रों—जैसे सेमीकंडक्टर, चिकित्सा और दुर्लभ मृदा—में अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष अमेरिका चीन के साथ अपने व्यापार घाटे में 50 अरब डॉलर की कमी की दिशा में काम कर रहा है।
यह इस साल दोनों देशों के बीच तीसरी उच्चस्तरीय बैठक थी, जो दर्शाती है कि संवाद के रास्ते अभी भी खुले हैं, हालांकि तनावपूर्ण परिस्थितियों में।
