आज फसल का त्योहार लोहड़ी मनाया जा रहा है। यह मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह त्योहार पकी हुई फसलों की खुशी और सूर्य के उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान का प्रतीक है। लोग शाम को अलाव जलाते हैं, पारंपरिक गीत गाते हैं और परिवार और समाज के साथ खुशी के पल साझा करते हैं। यह त्योहार आपसी प्रेम और एकता का संदेश भी देता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज से शुरू हो रहे लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू के अवसर पर नागरिकों को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि ये त्योहार देश की समृद्ध कृषि परंपराओं के प्रतीक हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि ये त्योहार भारत की जीवंत और विविध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ये अवसर देश के किसानों की कड़ी मेहनत और समर्पण को सलाम करने का मौका देते हैं, जो राष्ट्र को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अथक परिश्रम करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले त्योहार प्रकृति के प्रति सामूहिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इस शुभ अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने आशा व्यक्त की कि समाज में प्रेम और एकजुटता की भावना और मजबूत होती रहेगी, जो सभी को एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करेगी।
पंजाब में लोहड़ी खुशी, स्नेह और भाईचारे का उत्सव है। यह त्योहार शाम को अलाव जलाने और मानव जाति की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने की रस्मों के साथ मनाया जाता है। हालांकि राज्य में ठंड के कारण बच्चे फिलहाल घर के अंदर ही हैं, लेकिन वे आज लोहड़ी के गीत गाते हुए घर-घर जाकर मिठाइयाँ बाँटेंगे।
नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के माता-पिता के लिए यह त्योहार और भी आनंदमय हो जाता है। राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर 'धियां दी लोहड़ी' मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो बेटियों के प्रति समाज की सोच में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं।
