आंजन धाम: जहां मां अंजनी की गोद में विराजते हैं बाल हनुमान | The Voice TV

Quote :

"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

Travel & Culture

आंजन धाम: जहां मां अंजनी की गोद में विराजते हैं बाल हनुमान

Date : 20-Feb-2026

   झारखंड के गुमला जिले से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित आंजन धाम आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। घने जंगल, पहाड़ी श्रृंखलाएं और शांत वातावरण इस स्थल को आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी खास बनाते हैं। मान्यता है कि यही वह पावन धरती है जहां भगवान हनुमान का अवतार हुआ था, इसलिए यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक मान्यता और जन्मस्थली

कथाओं के अनुसार, माता अंजनी ने आंजन गांव की एक गुफा में हनुमानजी को जन्म दिया था। इसी कारण गांव का नाम भी अंजनी माता के नाम पर पड़ा। शिव गुफा के समीप स्थित उस गुफा में आज भी बाल रूप में हनुमान की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे माता की गोद में विराजमान दिखाई देते हैं।

लोकविश्वास है कि माता अंजनी ने यहां तप और अनुष्ठान किए थे। कहा जाता है कि प्राचीन समय में यहां 365 शिवलिंग, उतने ही सरोवर और महुआ के वृक्ष मौजूद थे। माता प्रतिदिन स्नान, पूजन और साधना करती थीं। समय के साथ इनमें से कई अवशेष लुप्त हो गए, फिर भी कुछ चिन्ह आज भी देखे जा सकते हैं।

परंपरा और पूजा-पद्धति

इस तीर्थस्थल पर आज भी स्थानीय नागपुरी रीति से पूजा-अर्चना की जाती है। यहां के पाहन (स्थानीय पुजारी) धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची भावना से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फलित होती है, यही कारण है कि दूर-दराज़ से भक्त यहां पहुंचते हैं।

पहाड़ी शिखर पर भव्य मंदिर

आंजन पहाड़ी की चोटी पर हनुमानजी का आकर्षक मंदिर स्थित है। इसे देश का अनूठा मंदिर माना जाता है, जहां हनुमान अपनी माता की गोद में विराजमान हैं। शिखर तक पहुंचने के लिए पक्की सीढ़ियां तथा अन्य मार्ग उपलब्ध हैं। ऊपर पहुंचकर आसपास के गांवों और हरियाली का विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है। परिसर में अंजनी माता, राम-सीता-लक्ष्मण, राधा-कृष्ण और भगवान शिव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

गुफाएं और अन्य दर्शनीय स्थल

आंजन क्षेत्र में कई प्राचीन गुफाएं मौजूद हैं। यहां लगभग 360 शिवलिंग और कई प्राचीन जलाशय बताए जाते हैं। चक्रधारी मंदिर में कतारबद्ध शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर के नीचे एक लंबी गुफा भी है, जिसे पहले बंद रखा जाता था। अब इसे श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है। यह गुफा लगभग 1500 फीट से अधिक लंबी बताई जाती है।

प्रकृति की गोद में सुकून

हरियाली से आच्छादित यह इलाका शांति और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी से दिखाई देने वाला दृश्य बेहद मनोहारी और यादगार होता है।

पहुंचने की जानकारी

यह स्थल गुमला से लगभग 21 किमी, रांची से 120 किमी, लोहरदगा से 50 किमी और सिमडेगा से करीब 100 किमी दूर है। गांव तक पक्की सड़क उपलब्ध है और मुख्य मंदिर तक भी वाहन पहुंच सकते हैं। स्थानीय परिवहन की सुविधा मिल जाती है, लेकिन ठहरने की व्यवस्था यहां नहीं है। इसलिए गुमला में रुकना बेहतर विकल्प है। साथ में आवश्यक सामान और पेयजल ले जाना सुविधाजनक रहेगा।

आंजन धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि इतिहास, भक्ति और प्राकृतिक छटा का अनोखा संगम है, जो हर आगंतुक को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।

 


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload









Advertisement