काठमांडू, 20 फरवरी । नेपाल के आयात व्यापार में पड़ोसी देश भारत का एकाधिकार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चालू आर्थिक वर्ष 2025-26 के आखिरी छमाही तक नेपाल ने केवल भारत से ही 62,929 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सामान आयात किए हैं, जो कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा है। भारत के बाद चीन दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जहां से 23,538 करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं का आयात किया गया है।
नेपाल ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से 412 करोड़ रुपये, अमेरिका से 1744 करोड़ रुपये और इंडोनेशिया से 1283 करोड़ रुपये का सामान आयात क्या है। नेपाल के साथ व्यापारिक संबंधों वाले शीर्ष 10 देशों की सूची में थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, यूक्रेन और हांगकांग भी शामिल हैं। इन देशों से होने वाले आयात की तुलना में नेपाल का निर्यात हिस्सा अत्यंत कम है। निर्यात की स्थिति पर नजर डालें, तो नेपाल का सबसे बड़ा बाजार भी भारत ही है। सात महीनों में नेपाल ने भारत को 13,751 करोड़ रुपये मूल्य के सामान निर्यात किए हैं। हालांकि, भारत के साथ व्यापार घाटा 49,177 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
निर्यात के मामले में दूसरे स्थान पर अमेरिका है, जहां 1127 करोड़ रुपये मूल्य के नेपाली सामान निर्यात हुए हैं। इसी तरह, यूरोपीय देश जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम क्रमशः तीसरे और चौथे सबसे बड़े निर्यात गंतव्य बने हैं, जहां 289 करोड़ और 179 करोड़ रुपये मूल्य के नेपाली उत्पाद पहुंचे हैं।जापान, फ्रांस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, चीन और इटली भी नेपाल के शीर्ष 10 निर्यात गंतव्यों में शामिल हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि नेपाल चीन के साथ व्यापार में सबसे बड़ा असंतुलन झेल रहा है। चीन से 23,538 करोड़ रुपये से अधिक का आयात होने के बावजूद वहां निर्यात केवल 90 करोड़ रुपये तक सीमित रहा है।
इसी प्रकार यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भी नेपाल का व्यापार घाटा काफी अधिक है। शीर्ष 10 निर्यात गंतव्यों में भारत और अमेरिका को छोड़कर अन्य देशों को होने वाला निर्यात अरबों के स्तर पर बहुत कम है। समग्र रूप से देखा जाए तो आयात की तुलना में निर्यात की वृद्धि दर अत्यंत धीमी रहना और व्यापार का कुछ सीमित देशों तक ही केंद्रित होना, नेपाल की अर्थव्यवस्था में बढ़ते व्यापार घाटे के जोखिम को और अधिक स्पष्ट करता है।
