पृथ्वी की निचली कक्षा में अदृश्य की निगरानी | The Voice TV

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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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पृथ्वी की निचली कक्षा में अदृश्य की निगरानी

Date : 20-Feb-2026

 पृथ्वी की निचली कक्षा के शांत, निर्वात-भरे विस्तार में छुपा-छुपी का एक उच्च-दांव वाला खेल चल रहा है। आज अरबों डॉलर के उपग्रहों से लेकर अंतरिक्ष मलबे के नुकीले टुकड़ों तक 24,000 से अधिक वस्तुएं शून्य में तेजी से दौड़ रही हैं। पांच वर्षों के भीतर यह संख्या 70,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। देशों के लिए चुनौती अब केवल भीड़ और टक्कर के जोखिम का प्रबंधन करना नहीं रह गई है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनकी संपत्तियां शत्रुतापूर्ण या दुष्ट तत्वों द्वारा जानबूझकर किए जाने वाले हस्तक्षेप से सुरक्षित रहें।

विवादित वातावरण में केवल रडार पर किसी वस्तु को देखना ही नहीं, बल्कि उसके इरादे को समझना भी आवश्यक है। जब कोई उपग्रह नहीं चाहता कि उसे पाया जाए, या जब वह कोई अप्रत्याशित युद्धाभ्यास करता है, तो पारंपरिक ज़मीनी-आधारित ट्रैकिंग अक्सर विफल हो जाती है। इस अंतर को पाटने के लिए, अमेरिका के रक्षा विभाग की डिफेंस इनोवेशन यूनिट ने यूएस स्पेस फोर्सेज–इंडो-पैसिफिक और स्पेस डोमेन अवेयरनेस टूल्स, एप्लिकेशन्स एंड प्रोसेसिंग लैब के साथ साझेदारी में तथा भारत की इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस के समर्थन से, “ड्यूल होराइज़न्स: यूएस-इंडिया सैटेलाइट ट्रैकिंग चैलेंज” शुरू किया, जो अंतरिक्ष-डोमेन जागरूकता की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने का एक द्विपक्षीय प्रयास है।

समस्या को समझने के लिए कल्पना कीजिए कि बिना कैमरों या जीपीएस के एक रेगिस्तान में एक स्वचालित वाहन चलाया जा रहा है। उसके स्थान की पुष्टि करने का एकमात्र तरीका यह है कि उसके किसी निश्चित, स्थिर चेकपॉइंट से गुजरने का इंतजार किया जाए। अब इसमें 17,000 मील प्रति घंटे की गति से चल रहे हजारों अन्य वाहनों को जोड़ दीजिए। यदि कोई वाहन अचानक मुड़ जाता है, तो वह प्रभावी रूप से प्रणाली के लिए “खो” जाता है।

यही पारंपरिक अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता की वास्तविकता है। मानक तरीके पूर्वानुमेय कक्षीय गणित पर निर्भर करते हैं। यदि कोई उपग्रह “स्क्रिप्ट” के अनुसार चलता है तो हमें पता होता है कि वह कहां है, लेकिन आधुनिक विरोधी छुपाव और छलपूर्ण युद्धाभ्यास का उपयोग करके गायब हो जाते हैं। जैसे ही कोई उपग्रह अपने अनुमानित मार्ग से विचलित होता है उसे फिर से हासिल करने में घंटे या दिन लग सकते हैं, जिससे महत्वपूर्ण अवसंरचना असुरक्षित हो जाती है।

अमेरिका-भारत “ड्यूल होराइज़न्स” चैलेंज की विजेता दिगंतरा इंडो-पैसिफिक में “ब्लाइंड स्पॉट्स” को समाप्त करने वाली सैटेलाइट ट्रैकिंग प्रणाली के साथ अंतरिक्ष सुरक्षा को मजबूत कर रही है। ड्यूल होराइजन्स चैलेंज के विजेताओं में से एक, बेंगलुरु स्थित स्टार्ट-अप दिगंतरा के संस्थापक अनिरुद्ध शर्मा एक बड़े भौगोलिक जोखिम की ओर इशारा करते हैं। अमेरिका वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका में प्राथमिक सेंसर बनाए रखता है। शर्मा कहते हैं, “इनके बीच एक बहुत बड़ा अंतर है।” वे यह भी कहते हैं कि दिगंतरा इस क्षेत्र में उपग्रह गतिविधि को ट्रैक करने के लिए अमेरिकी एजेंसियों के साथ काम कर रही है।

दिगंतरा का विजेता समाधान, स्पेक्ट्रे इन ब्लाइंड स्पॉट्स को उजागर करने का लक्ष्य रखता है। ज़मीन से आकाश की ओर दृष्टिकोण बदलकर, स्पेक्ट्रे कक्षा से अंतरिक्ष वस्तुओं को ट्रैक करता है। शर्मा बताते हैं, “परंपरागत रूप से प्रणालियां जमीनी-आधारित होती हैं। हमारा समाधान कक्षा से ट्रैक करता है, जिसका अर्थ है कि हम वायुमंडलीय विकृतियों और रेंज से जुड़ी समस्याओं को पार कर जाते हैं।” अंतरिक्ष में एक गतिशील प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, दिगंतरा संपत्तियों पर एक सतत “दृश्य” प्राप्त करता है, जिससे अधिक बार डेटा संग्रह और कहीं अधिक सटीकता संभव होती है।

जहां अधिकांश व्यावसायिक कंपनियां आकाश में मौजूद वस्तुओं की जानकारी के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग के “कैटलॉग” पर निर्भर करती हैं, वहीं दिगंतरा अपना स्वयं का स्वतंत्र भंडार बना रही है। इसके सेंसर सॉफ़्टबॉल जितनी छोटी वस्तुओं का भी पता लगा सकते हैं, जो ख़ुफ़िया जानकारी की एक विशिष्ट परत प्रदान करते हैं। इस स्वतंत्रता ने स्टार्ट-अप को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार बनाया है।

दिगंतरा वर्तमान में अमेरिका के साथ डेटा-साझाकरण समझौते के तहत काम करती है, जिससे उसकी विशिष्ट ब्लाइंड-स्पॉट डेटा को मौजूदा अमेरिकी सैन्य कैटलॉग के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है। इंटरऑपरेबिलिटी इसकी सफलता का “प्लग-एंड-प्ले” रहस्य है। स्पेक्ट्रे को मौजूदा मिशन नेटवर्क में निर्बाध रूप से एकीकृत होने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे कमांडरों को बिना अपने सॉफ़्टवेयर को नए सिरे से बनाए वास्तविक समय का डेटा मिल सकता है। अब अमेरिका में कार्यालयों और इंडो-पैसिफ़िक में गहरे संबंधों के साथ, दिगंतरा एक सिस्टम्स इंटीग्रेटर के रूप में स्थापित है।

दिगंतरा की सफलता अमेरिका-भारत समन्वय का एक उदाहरण है। शर्मा कहते हैं, “हम अमेरिकी बाज़ार में विस्तार के हिस्से के रूप में अपने अमेरिकी कार्यालय में और निवेश करने की योजना बना रहे हैं। हम एक समर्पित टीम और सुविधा का निर्माण कर रहे हैं, जो सैटेलाइट और पेलोड असेंबली के साथ-साथ मिसाइल रक्षा अनुप्रयोगों पर केंद्रित होगी। हाल ही में अमेरिका आधारित एक कार्यक्रम के लिए हमारे चयन ने हमें यह निवेश करने और इस पहल को शुरू करने का आत्मविश्वास और आधार दिया है।”


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