भारत आज वै.श्विक आर्थिक मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ब्लैक रॉक के अध्यक्ष और सीईओ लैरी फिंक के हालिया बयान ने भारत के संदर्भ में जो कहा है, उसने आज हर भारतीय को गर्व और आशा से भर दिया है। फिंक के अनुसार आगामी दशक भारतीय अर्थव्यवस्था के के लिए सफलता भरा है, यह भारत का युग होगा, जिसमें देश की जीडीपी हर साल 8-10 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।
वस्तुत: फिंक ने भारतीयों से अपने पैसे को केवल बैंक जमा में रखने के बजाय पूंजी बाजारों में निवेश करने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने अमेरिका का उदाहरण चुना और बताया कि कैसे पूंजी बाजारों में निवेश करने वालों को चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में लंबी अवधि में बैंक बचत से कहीं अधिक लाभ वहां हुआ। यह भारतीय निवेशकों के लिए संदेश भी है कि समय रहते निवेश करना दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग है।
कहना होगा कि भारत की आर्थिक सफलता आज डिजिटल क्रांति, 5जी कनेक्टिविटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्टार्टअप इकोसिस्टम से तेजी से आगे बढ़ रही है। इन सभी कारणों ने भारत को वैश्विक तकनीकी नक्शे पर अग्रणी बना दिया है। आज भारत में 5जी नेटवर्क लगभग सभी गांवों तक पहुंच चुका है, जिसे आप दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कहीं अधिक व्यापक और किफायती मान सकते हैं। इस तकनीकी आधार ने व्यवसायों को नई दिशा दी है, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी बढ़ाई है।
इस संदर्भ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी का कथन भी उल्लेखित है, उन्होंने अपने आर्थिक आंकड़ों एवं देश में जिस तरह से नई- नई कंपनियां एवं प्रतिभाएं उभर रही हैं, उसके आधार पर बताया है कि भारत में नए स्टार्टअप्स और व्यवसायिक अवसरों की बाढ़ आने से शीघ्र ही देश में 100 नई रिलायंस जैसी कंपनियां उभरेंगी। निश्चित ही यह तथ्य हमारे लिए बहुत आशा जगाता है। वहीं अंबानी ने ध्यान दिलाया कि पिछले साल भारतीयों ने सोने में 60 अरब डॉलर और चांदी में 15 अरब डॉलर का निवेश किया। जोकि सीधे तौर पर भारतीयों की सुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
साथ ही मुकेश अंबानी ने तो भारतीयों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से डरने की बजाय इसे अपनाने की सलाह दी। एआई के माध्यम से भारत के 20 करोड़ बच्चों की शिक्षा में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और कराधान प्रक्रियाओं में दक्षता लाना संभव है। यह एक संकेत है कि भारत में तकनीक केवल व्यवसाय या उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और मानव विकास का एक प्रमुख आधार भी बन रही है।
यह भी एक तथ्य है कि देश में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और ब्लैक रॉक की साझेदारी ने निवेशकों के लिए एक नया मंच तैयार किया है। पिछले सात महीनों में, उनके फंड ने 10 लाख निवेशकों को जोड़ा, जिनमें से एक चौथाई निवेशकों ने पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश किया। वस्तुत: यह दर्शाता है कि भारतीय निवेशक अब वित्तीय साक्षरता और लंबी अवधि के निवेश के महत्व को समझने लगे हैं।
केवी कामथ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन की भी एक भविष्यवाणी हमारे सामने है, जिसके अनुसार आने वाले पांच वर्षों में म्यूचुअल फंडों के तहत परिसंपत्तियों की कुल मात्रा 80 लाख करोड़ रुपये से दोगुनी हो जाएगी। यह न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह दर्शाता है कि वित्तीय बाजारों में भागीदारी बढ़ाने के लिए सही समय अभी है।
विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी भारत की स्थिति की पुष्टि करते हैं। भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश के अनुपात में बढ़ोतरी हो रही है। उदाहरण के लिए, सरकार ने 2025-26 में शिक्षा और कौशल विकास पर लगभग 10 प्रतिशत अधिक बजट आवंटित किया, जिससे युवाओं को रोजगार और नवाचार के नए अवसर मिल रहे हैं। भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। अगले दशक में, भारत ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करने वाला देश नहीं रहेगा। अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं, और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही, भारत का ग्रीन एनर्जी निवेश वर्तमान में 20 अरब डॉलर से अधिक है, और यह संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।
इन तथ्यों के आधार पर कह सकते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से भी भारत तेजी से एक ग्लोबल इकोनॉमिक हब बनता जा रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले 10 वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं; युवा जनसंख्या, तकनीकी प्रगति, वित्तीय साक्षरता और स्थिर राजनीतिक नेतृत्व।
वस्तुत: इसी क्रम में, फिंक का यह कथन कि भारत का युग आ रहा है, वास्तविक आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति का परिणाम दर्शाता है। भारत आज अपने नागरिकों के लिए अनेक नए अवसर तो प्रदान कर ही रहा है, साथ में दुनिया के निवेशकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बनता जा रहा है।
ऐसे में कहना यही है कि भारत आज एक नई आर्थिक और तकनीकी क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। जिसे उनसे अपनी युवा शक्ति, तकनीकी नवाचार, वित्तीय जागरूकता और स्थिर नेतृत्व के सम्मिलित परिणाम से प्राप्त किया है। आज लैरी फिंक और मुकेश अंबानी जैसे वैश्विक और राष्ट्रीय नेतृत्व की दृष्टि यह स्पष्ट करती है कि भारत आने वाले दशक में केवल विकास के आकंड़ों में ही नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश और नवाचार के मानचित्र में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा। निश्चित ही हर भारतीय के लिए यह समय है सपनों को बड़ा देखने का, निवेश करने का और देश की प्रगति का हिस्सा बनने का।
