छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार–भाटापारा ज़िले में स्थित सिमगा क्षेत्र का सोमनाथ तीर्थ स्थल धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह मंदिर उस दुर्लभ स्थल पर स्थित है जहाँ शिवनाथ नदी और खारून नदी का पावन संगम होता है। दो प्रमुख नदियों के संगम के कारण यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत, मनोहारी और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण प्रतीत होता है। चारों ओर फैली हरियाली, कल-कल बहती नदियाँ और ऊँचे टीले पर स्थित मंदिर इस स्थान को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।
सोमनाथ तीर्थ स्थल का सबसे प्रमुख आकर्षण यहाँ स्थापित भगवान शिव का लगभग तीन फीट ऊँचा गोलाकार शिवलिंग है, जिसे स्थानीय श्रद्धालु सोमनाथ महादेव के नाम से जानते हैं। यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन माना जाता है और मान्यता है कि यह उत्खनन (खुदाई) के दौरान इसी स्थान से प्राप्त हुआ था। इसकी प्राचीनता और स्वयंभू स्वरूप के कारण भक्तों की इसमें गहरी आस्था है। विशेष रूप से श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को यहाँ सैकड़ों नहीं बल्कि दूर–दराज़ से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
मंदिर परिसर में शिवलिंग के साथ-साथ शिव परिवार की भव्य प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं। इनमें माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज की मूर्तियाँ शामिल हैं। ये प्रतिमाएँ मंदिर की धार्मिक गरिमा को और भी बढ़ाती हैं। इसी मंदिर में उत्खनन के दौरान सोमनाथ महादेव शिवलिंग के प्रतिरूप एक अन्य शिवलिंग प्रतिमा भी प्राप्त हुई थी, जिसे बाद में निषाद समाज द्वारा निर्मित मंदिर में विधिवत रूप से स्थापित किया गया। यह तथ्य इस स्थल को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
भौगोलिक दृष्टि से सोमनाथ तीर्थ स्थल तक पहुँचना भी सरल है। धरसींवा से आगे सिमगा पहुँचने के बाद लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर, मुख्य मार्ग से बाईं ओर खारून नदी और शिवनाथ नदी के संगम की ओर जाने का रास्ता है। प्रमुख मार्ग से लगभग 3 किलोमीटर दूर खारून नदी के तट पर लखना ग्राम स्थित है, और लखना ग्राम से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र तीर्थ स्थल अवस्थित है। मंदिर खारून नदी एवं शिवनाथ नदी के संगम पर ऊँचे टीले पर स्थित है, जिससे संगम का दृश्य अत्यंत मनोरम दिखाई देता है।
संगम स्थल के दूसरे तट पर जमघट, कृतपुर, सहगाँव जैसे अनेक ग्राम बसे हुए हैं। शिवनाथ नदी के किनारे मछुआरों का एक समुदाय निवास करता है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी पारंपरिक नौकाओं के माध्यम से संगम स्थल और आसपास के तीर्थ स्थलों तक लाने-ले जाने का कार्य करता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
संगम के मध्य में भी एक छोटा मंदिर स्थित है, जहाँ शिवलिंग और हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित हैं। नदी के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है और यहाँ पहुँचकर भक्त आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो सोमनाथ तीर्थ स्थल न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ का एक अत्यंत मनोहारी पर्यटन स्थल भी है। यहाँ प्रकृति, आस्था, इतिहास और लोक-संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को भी समान रूप से आकर्षित करता है।
