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सर्दियों की सुबह, धुंध और सैकड़ों पक्षी: यमुना घाट की खासियत

Date : 17-Jan-2026

 दिल्ली की तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच यमुना नदी के किनारे एक ऐसी जगह भी है, जहां सुबह का सुकून, पक्षियों की उड़ान और नदी की ठंडी हवा एक बिल्कुल अलग दुनिया का एहसास कराती है। कश्मीरी गेट के पास स्थित यमुना घाट इन दिनों लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है।

सुबह-सुबह यहां पहुंचते ही सूर्योदय का नज़ारा मन मोह लेता है। नदी के ऊपर छाई हल्की धुंध, ठंडी हवा और बदलते आसमान के रंग इस जगह को किसी हिल स्टेशन जैसा बना देते हैं। कई लोग तो इसकी तुलना कश्मीर के डल लेक से करने लगे हैं। एक तरफ नारंगी रंग में नहाया आसमान और दूसरी तरफ नीले शेड्स—यह दृश्य कैमरे में कैद करने लायक होता है।

यमुना घाट तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका मेट्रो है। कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन से आप ऑटो, ई-रिक्शा या पैदल घाट तक पहुंच सकते हैं। ऑटो का किराया लगभग 60 से 80 रुपये होता है, जबकि ई-रिक्शा 10 से 20 रुपये प्रति व्यक्ति लेता है। दिल्ली में यमुना के कई घाट मौजूद हैं, इसलिए सही घाट तक पहुंचना जरूरी है। बोटिंग और पक्षियों को दाना डालने वाला मुख्य घाट वही है, जिसके पास धर्म संघ गौ सेवा सदन स्थित है। यही वह जगह है जहां सुबह के समय सबसे ज्यादा लोग नजर आते हैं।

यहां की एक खास बात है सीगल्स को दाना डालना। जैसे ही लोग नदी में खाना डालते हैं, सैकड़ों पक्षी उड़ते हुए पास आ जाते हैं। उनका एक साथ उड़ना और पानी के ऊपर मंडराना बेहद खूबसूरत दृश्य पेश करता है। यही वजह है कि फोटोग्राफर्स और नेचर लवर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं।

यमुना घाट युवाओं के बीच भी काफी पसंद किया जा रहा है। सुबह के समय यहां गिटार बजाते, गाने गाते और तस्वीरें खींचते लोग आमतौर पर दिख जाते हैं। प्री-वेडिंग शूट के लिए भी यह घाट अब एक फेवरेट लोकेशन बन चुका है।

यहां बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। आमतौर पर वीकेंड पर बोटिंग का किराया 100 रुपये प्रति व्यक्ति होता है, जबकि पहले यह 50 रुपये था। वीकडेज पर किराया थोड़ा कम रहता है। नाव के जरिए यमुना के दूसरे किनारे भी जाया जा सकता है, जहां खुला इलाका है और पुल तक पैदल घूमने का मौका मिलता है। वहां से वापस लौटने के लिए नाव ही एकमात्र साधन होता है।

यमुना घाट सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। सदियों से यहां पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। यही वजह है कि यह घाट दिल्ली की आत्मा को करीब से महसूस करने की एक खास जगह बन जाता है।


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