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भारत के अनोखे रेगिस्तान: थार से अलग 5 जगहें जहां दिखता है प्रकृति का अनोखा रूप

Date : 11-Mar-2026

 भारत में रेगिस्तान की बात होते ही सबसे पहले राजस्थान का थार रेगिस्तान और जैसलमेर की सुनहरी रेत याद आती है। ऊंट सफारी और रेत के टीलों का रोमांच लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में थार के अलावा भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां रेगिस्तान बिल्कुल अलग रूप में दिखाई देता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं यह रेगिस्तान बर्फीले पहाड़ों के बीच मौजूद है, तो कहीं सफेद नमक के मैदानों के रूप में फैला हुआ है। कुछ जगहों पर लाखों साल पुराने जीवाश्म मिलते हैं, तो कहीं लाल रेत के टीलों का अनोखा नजारा देखने को मिलता है। यही कारण है कि ये जगहें सामान्य रेगिस्तान से बिल्कुल अलग अनुभव देती हैं। अगर आप भी हर बार की रेगिस्तान यात्रा से हटकर कुछ नया एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो भारत की ये खास जगहें जरूर देखनी चाहिए।

1. लद्दाख का कोल्ड डेजर्ट और शानदार स्टारगेजिंग

लद्दाख को अक्सर भारत का “कोल्ड डेजर्ट” कहा जाता है। ऊंचाई पर स्थित यह इलाका बर्फ से ढके पहाड़ों और सूखे परिदृश्य के कारण किसी दूसरे ग्रह जैसा महसूस होता है। खासतौर पर नुब्रा वैली के आसपास का क्षेत्र अपने अनोखे रेगिस्तानी वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

यहां की सबसे खास बात रात का आसमान है। कम लाइट पॉल्यूशन और साफ वातावरण के कारण यहां स्टारगेजिंग का अनुभव बेहद शानदार होता है। लद्दाख घूमने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर के बीच माना जाता है।

2. कच्छ का रण: सफेद नमक का अद्भुत रेगिस्तान

गुजरात में फैला ग्रेट रण ऑफ कच्छ अपने विशाल सफेद नमक के मैदानों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मानसून के बाद जब यहां का पानी सूख जाता है, तो दूर-दूर तक फैला सफेद नमक का मैदान दिखाई देता है।

दिन में धूप में चमकता यह इलाका और रात में चांदनी में चांदी की तरह चमकता है। यहां हर साल आयोजित होने वाला रण उत्सव भी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस जगह घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है।

3. धोलावीरा के पास वुड फॉसिल पार्क

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में धोलावीरा के पास स्थित वुड फॉसिल पार्क एक अलग तरह का रेगिस्तानी अनुभव देता है। यहां जमीन के भीतर लाखों साल पुराने समुद्री जीवों के अवशेष और जीवाश्म पाए गए हैं।

ये अवशेष बताते हैं कि कभी यह इलाका समुद्र के नीचे हुआ करता था। इस जगह की खासियत यह है कि यहां रेगिस्तान के बीच इतिहास और भूगोल दोनों को करीब से समझने का मौका मिलता है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है।

4. नागालैंड-मणिपुर सीमा की जुकू वैली

नागालैंड और मणिपुर की सीमा पर स्थित जुकू वैली पारंपरिक रेगिस्तान जैसी नहीं है, लेकिन यहां की जलवायु और खुला परिदृश्य इसे एक अनोखा सूखा इलाका बनाते हैं। यह एक ऊंचाई पर स्थित घास का मैदान है, जो मौसम के अनुसार अपना रूप बदलता रहता है।

मानसून के दौरान यहां हरियाली और फूलों की खूबसूरत चादर दिखाई देती है, जबकि सर्दियों में यह इलाका शांत और अपेक्षाकृत सूखा नजर आता है। यहां ट्रैकिंग के लिए अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे बेहतर माना जाता है।

5. तमिलनाडु का थेरी काडू: लाल रेत का रेगिस्तान

तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में स्थित थेरी काडू अपने लाल रंग के रेत के टीलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की रेत में आयरन की अधिक मात्रा होने के कारण इसका रंग लाल दिखाई देता है, जिससे यह बाकी रेगिस्तानों से बिल्कुल अलग लगता है।

इसे “रेड सैंड डेजर्ट” भी कहा जाता है। इस इलाके में लाल रेत के टीलों के बीच नारियल और ताड़ के पेड़ तथा छोटे-छोटे गांव एक बेहद अनोखा दृश्य पेश करते हैं।


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