प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से चाय निर्यात में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

International

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से चाय निर्यात में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग

Date : 16-May-2026

 काठमांडू, 16 मई। भारत द्वारा एक मई से लागू नई ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (एसओपी) के बाद नेपाल में चाय उद्योग गंभीर संकट में पड़ गया है। ऐसे में व्यवसायियों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से इस मुद्दे के समाधान की मांग की है।

नई निर्देशिका के अनुसार भारत में प्रवेश करने वाली नेपाली चाय के हर ट्रक और प्रत्येक खेप की अलग-अलग प्रयोगशाला जांच (लैब टेस्ट) अनिवार्य कर दी गई है।

व्यवसायियों के अनुसार नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भारत के वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय चाय बोर्ड के अधिकारियों के साथ लगातार संवाद कर अवरोध हटाने का अनुरोध किया है। चाय व्यवसायियों ने अब मांग की है कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री स्तर पर सीधा हस्तक्षेप होना चाहिए। उनका कहना है कि पहले भी ऐसे मामलों में तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने सीधे भारतीय समकक्ष से बात कर समस्या का समाधान कराया था, इसलिए इस बार भी उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद आवश्यक है।

व्यवसायियों का कहना है कि नेपाल की प्रमुख निर्यात योग्य कृषि ऊपज के बाजार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को तत्काल ठोस और प्रत्यक्ष पहल करनी चाहिए।

नेपाल चाय उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने बताया कि इस कड़े नियम के कारण पिछले आधे महीने से निर्यात लगभग बंद है।उनके अनुसार इस दौरान भारतीय खरीदारों ने अपने जोखिम पर बेहद कम मात्रा में केवल दो ट्रक चाय खरीदी है, जिसमें तराई क्षेत्र की लगभग 10–12 टन और पहाड़ी क्षेत्र की 4–5 टन चाय शामिल है।

उन्होंने कहा कि चाय का सीजन अभी शुरू ही हुआ है, इसलिए फिलहाल बहुत बड़ा व्यावसायिक नुकसान नहीं हुआ है लेकिन अच्छी बारिश के कारण अगले एक सप्ताह में उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। यदि तब तक निर्यात नहीं खुला, तो उद्योगियों और किसानों को भंडारण की कमी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

इसी तरह नेपाल टी एसोसिएसन के अध्यक्ष कमल मैनाली ने कहा कि भारत के नए नियमों से व्यापारियों का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि चाय 15 दिनों तक सीमा पर रुकी रहती है, तो उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है। साथ ही यदि चाय लैब टेस्ट में फेल हो जाए, तो उसे नष्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

मैनाली ने कहा कि रिपोर्ट आने से पहले चाय बेच नहीं सकते। अगर लैब टेस्ट में चाय फेल हो गई तो उसे नेपाल वापस लाने की भी अनुमति नहीं है। यदि वापस लानी पड़े तो 40 प्रतिशत कस्टम शुल्क और 13 प्रतिशत वैट देना होगा। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल प्रशासनिक या कूटनीतिक स्तर से हल होती नहीं दिख रही, इसलिए उच्च राजनीतिक हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो गया है।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement