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नेपाल में संविधान संशोधन पर बैठक का, जेन जी नेताओं ने किया बहिष्कार

Date : 15-May-2026

 काठमांडू, 15 मई । नेपाल के जेनजी आन्दोलन के नेताओं ने सरकार द्वारा आहूत संविधान संशोधन संबंधी चर्चा का बहिष्कार करने की घाेषणा की है। उनका आराेप है कि सरकार उनके साथ पहले हुए समझौते को लागू करने की बजाए एकतरफा एवं अपारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत संविधान संशोधन बहसपत्र तैयार करने वाली कार्यदल ने बृहस्पतिवार को जेन जी अगुवा को पत्र भेजकर उन्हें संविधान संशोधन विषय पर शुक्रवार को होने वाली चर्चा में आमंत्रित किया था। शुक्रवार काे यहां एक संयुक्त वक्तव्य में जारी कर 25 आंदोलनकारियों और अधिकारवादियाें ने स्पष्ट किया कि वे उक्त चर्चा में भाग नहीं लेंगे।

आंदोलनकारियों ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए चर्चा का बहिष्कार करने के कई कारण बताए। वक्तव्य में कहा गया, “आंदोलन में शामिल होने के कारण आज भी सैकड़ों साथी झूठे मुकदमों का सामना कर रहे हैं, जबकि शहीद परिवार और घायल लोग न्याय की प्रतीक्षा में हैं।”

विज्ञप्ति में कहा गया कि नेपाल सरकार के साथ 10 दिसंबर 2025 को हुआ 10 सूत्रीय समझौता अब तक लागू नहीं किया गया है। जेनजी आंदोलन की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट भी औपचारिक रूप से सार्वजनिक और लागू नहीं की गई है।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि समझौते की धारा 5 में संविधान संशोधन सुझाव आयोग गठन करने का प्रावधान होने के बावजूद सरकार ने उसे नजरअंदाज करते हुए एकतरफा ढंग से बहसपत्र कार्यदल बना दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि लिखित समझौता लागू न करना, लेकिन केवल तीन मिनट सुझाव देने के लिए आमंत्रित करना महज औपचारिकता पूरी करने जैसा है।

वक्तव्य में यह भी कहा गया कि चर्चा में प्रतिभागियों के चयन की प्रक्रिया अपारदर्शी रही और आंदोलन में सक्रिय विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को आमंत्रित नहीं किया गया।

जेनजी आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने छह सूत्रीय मांगें भी रखी हैं—

1. 25 दिसंबर 2025 को हुए जेनजी जनआंदोलन के समझौते को अक्षरशः लागू किया जाए।

2. 8 और 9 सितंबर 2025 के आंदोलन में गिरफ्तार लोगों को तत्काल रिहा कर झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।

3. शहीद परिवारों और घायल आंदोलनकारियों को न्याय दिया जाए।

4. सितंबर 2025 के जेनजी आंदोलन सहित 1990 के प्रथम जनांदोलन, 2006 के दूसरे जनांदोलन, 2015 में हुए मधेश और थरुहट आंदोलनों से संबंधित जांच आयोगों की रिपोर्ट सार्वजनिक और लागू की जाए।

5. भूमिहीन, दलित और अव्यवस्थित वासियों पर राज्य द्वारा किए जा रहे दमन को तुरंत रोका जाए और न्यायसंगत व्यवस्थापन किया जाए।

6. समझौते की धारा 5 के अनुसार “संविधान संशोधन सुझाव आयोग” का गठन कर महिला, दलित, मधेशी, आदिवासी जनजाति तथा अन्य सभी हाशिए पर रहे समुदायों से स्थानीय से लेकर संघीय स्तर तक व्यापक परामर्श के बाद ही संशोधन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

जेन जी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार के तरफ से इन विषयों पर उपयुक्त परिस्थितियां बनाई जाती हैं, तो वे संविधान संशोधन संबंधी अपने सुझाव देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।

जारी संयुक्त वक्तव्य पर मिराज ढुंगाना, तनुजा पांडे, भावना राउत, अमृता वन, रक्षा बम, रुक्शना कपाली, विप्लवी न्यौपाने सहित 25 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।


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