राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम मंदिर स्थित है, जिसे बाबा श्याम का धाम भी माना जाता है. राजस्थान के अलावा हरियाणा का भी खाटू बाबा से खास कनेक्शन है. यहां कई परिवारों में महाभारत काल से बाबा की पूजा कुलदेवता के रूप में की जा रही है. साथ ही नियमित रूप से उन्हें समर्पित व्रत-त्योहारों को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल से खाटू श्याम जी का खास कनेक्शन हरियाणा से है. दरअसल, द्वापर युग के अंत में जब बर्बरीक (खाटू श्याम बाबा) युद्ध देखने के लिए कुरुक्षेत्र जा रहे थे, तो बीच में हरियाणा के चुलकाना धाम में उनकी मुलाकात भगवान कृष्ण से हुई. कृष्ण जी ने इसी जगह पर दान में उनका सिर मांगा था. साथ ही कलियुग में श्याम बाबा के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था.
आस्था का केंद्र है चुलकाना धाम
हरियाणा के पानीपत जिले में समालखा कस्बे के पास चुलकाना धाम स्थित है, जहां खाटू श्याम जी का अत्यंत प्राचीन व पवित्र मंदिर स्थित है. यहां दर्शन करने के लिए रोजाना दूर-दूर से भक्तजन आते हैं. इसके अलावा बाबा को खुश करने के लिए कई लोग चुलकाना धाम मंदिर में कई दिनों तक सेवा भी करते हैं.
यहां कुलदेवता के रूप में पूजे जाते हैं खाटू बाबा
हरियाणा में अहीर व यादव समाज के कई परिवारों में खाटू श्याम बाबा की पूजा उनके कुलदेवता के रूप में की जाती है. यहां लोग कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजाना बाबा की पूजा करते हैं और उन्हें भोग लगाते हैं. साथ ही व्रत-त्योहार पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.
बर्बरीक कौन थे?
खाटू श्याम बाबा को महाभारत काल में बर्बरीक नाम से जाना जाता था. बर्बरीक एक महान योद्धा थे, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे. बर्बरीक जी ने अपनी तपस्या से बाण चलाने की विशेष क्षमता हासिल की थी. उनके तीन बाण से पूरा युद्ध समाप्त हो सकता था, इसलिए कृष्ण जी ने उनसे उनकी बलि मांगी थी.
खाटू श्याम बाबा के विभिन्न नाम
कलयुग यानी आज के समय में बर्बरीक जी को खाटू श्याम बाबा, तीन बाणधारी, हारे का सहारा श्याम हमारा और शीश के दानी आदि नामों से जाना जाता है
