दक्षिणेश्वर काली मंदिर- कोलकाता के हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर काफी प्रसिद्ध है. मंदिर की अधिष्ठाता देवी भवतारिणी हैं. मंदिर की स्थापना 19वीं सदी के मध्य में रानी रश्मोनी द्वारा की गई थी. यह पश्चिम बंगाल के बड़े काली मंदिरों में एक है.
कालीघाट मंदिर- पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो 51 शक्ति पीठों में एक है. कहा जाता है कि इसी स्थान पर दक्षायणी या सती के दाहिने पैर की उंगली गिरी थी. लगभग 200 साल पुराना यह प्राचीन मंदिर पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय मंदिरों में एक है.
कृपामयी काली मंदिर- पश्चिम बंगाल के बारानगर में स्थित कृपामयी काली मंदिर को जॉय मित्र कालीबाड़ी भी कहा जाता है. यह हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर में काली देवी के रूप देवी कृपामयी की पूजा होती है. बताया जाता है कि, मंदिर का निर्माण 1848 में जमींदार जयराम द्वारा करवाया गया था.
वैदिक तारामंडल मंदिर- पश्चिम बंगाल के मायापुर में वैदिक तारामंडल मंदिर है, जिसे इस्कॉन द्वारा तैयार कराया जा रहा है. यह इस्कॉन (ISKCON) का विश्व मुख्यालय और निर्माणाधीन सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है. हालांकि मंदिर अभी श्रद्धालुओं के लिए खुला नहीं है, लेकिन 2026 में ही इस मंदिर को खोलने की उम्मीद है.
हैंगेश्वरी मंदिर- पंश्चिम बंगाल का यह मंदिर देवी हैंगेश्वरी को समर्पित. मंदिर में स्थानीय लोग और पर्यटकों की भीड़ रहती है. हैंगेश्वरी मंदिर का निर्माण राजा नृसिंह देव रॉय महाशय ने शुरू करवाया था, जिसे बाद में रानी शंकरी ने 1814 में पूरा करवाया. यह मंदिर अपनी अनूठी संरचना के लिए प्रसिद्ध है.
तारापीठ मंदिर- पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में रामपुरहाट के पास देवी तारा को समर्पित तारापीठ मंदिर. यह मंदिर साधक बामखेपा के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि, साधक बामखेपा ने अपना पूरा जीवन मां तारा की आराधना में समर्पित कर दिया.
