इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व देवों के देव महादेव को समर्पित है। सनातन परंपरा में भगवान शिव को अत्यंत गूढ़ और अलौकिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में उनके अनेक रूपों और अवतारों का वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि उन्होंने 19 प्रमुख अवतार धारण किए, जिनमें अधिकांश अधर्म के विनाश के लिए थे। इन्हीं में से एक है वृषभ (बैल) स्वरूप, जिसकी कथा विशेष महत्व रखती है।
समुद्र मंथन से आरंभ होती है कथा
पुराणों के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने समुद्र मंथन किया, तब अमृत प्रकट हुआ। उस समय भगवान विष्णु ने दैत्यों को छलने के लिए मोहिनी का मोहक रूप धारण किया। इसी प्रसंग में कुछ अप्सराओं की उत्पत्ति भी हुई, जिन्होंने असुरों को अपने प्रभाव में लेकर पाताल लोक की ओर मोड़ दिया। बाद में देवासुर संग्राम समाप्त हुआ और देवताओं को अमृत की प्राप्ति हुई।
पाताल लोक में घटित घटनाएँ
जब पाताल लोक में शांति स्थापित हुई, तब अप्सराएँ विष्णु के सौंदर्य पर मोहित हो गईं। उन्होंने कठोर तप कर भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे विष्णु को उनके पति रूप में प्रदान करें। भक्तों की भावना का सम्मान करते हुए शिव ने विष्णु को कुछ समय के लिए पाताल लोक में रहने की अनुमति दी।
इस अवधि में अप्सराओं और विष्णु से अनेक पुत्र उत्पन्न हुए। किंतु उनकी माताओं पर पूर्व में असुरों का प्रभाव रहा था, जिससे उन संतानों में उग्र और विनाशकारी स्वभाव आ गया। वे अत्यंत बलशाली बने और तीनों लोकों में उपद्रव फैलाने लगे। देवगण और ऋषि-मुनि उनके अत्याचारों से व्यथित हो उठे।
वृषभ अवतार का उद्देश्य
जब स्थिति असहनीय हो गई, तब धर्म की रक्षा हेतु भगवान शिव ने वृषभ का रूप धारण किया। वे बैल के स्वरूप में पाताल लोक पहुँचे और अपने प्रचंड सींगों से उन उग्र पुत्रों का संहार करने लगे।
यह दृश्य देखकर विष्णु क्रोधित हो उठे और शिव के साथ उनका घोर संघर्ष प्रारंभ हो गया। युद्ध लंबे समय तक चला, किंतु किसी की विजय नहीं हुई। अंततः अप्सराओं ने विष्णु को मोह-माया से मुक्त किया। जैसे ही उनका चित्त निर्मल हुआ, उन्हें शिव के इस अवतार का वास्तविक उद्देश्य समझ में आ गया।
तब विष्णु ने शिव की महिमा स्वीकार की और उनके निर्णय का सम्मान किया। अंततः शिव के मार्गदर्शन से विष्णु वैकुंठ लौट गए और तीनों लोकों में पुनः संतुलन स्थापित हुआ।
यह कथा दर्शाती है कि जब-जब संसार में संतुलन बिगड़ता है, तब-तब महादेव किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं।
