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महाशिवरात्रि: महंत आवास पर दूल्हे के रूप में सजेेंगे बाबा विश्वनाथ, रुद्राक्ष और मेवों से बने सेहरे से होगा विशेष श्रृंगार

Date : 09-Feb-2026

 वाराणसी, देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व भव्य और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। महापर्व पर काशीपुराधिश्वर बाबा विश्वनाथ दूल्हे के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इस अवसर पर बाबा के विशेष श्रृंगार में रुद्राक्ष, फल, मेवा और पुष्पों से निर्मित पारंपरिक सेहरा चढ़ाया जाएगा, जो शिव-विवाह की लोकपरंपरा और आस्था का प्रतीक है।

महाशिवरात्रि पर बाबा के दूल्हा स्वरूप का श्रृंगार काशी की सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार किया जाता है। दूल्हे के रूप में किए जाने वाले इस श्रृंगार में सेहरा विशेष महत्व रखता है। रुद्राक्ष से बना सेहरा बाबा की वैराग्य परंपरा और शिवतत्व का प्रतीक है, जबकि इसमें प्रयुक्त फल, मेवा और पुष्प लोकाचार और मंगल भाव को दर्शाते हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास से लेकर शिव बारात और श्री काशी विश्वनाथ धाम में रात्रिभर चलने वाली चारों पहर की आरतियों तक बाबा को यह सेहरा अर्पित किया जाएगा। यह सेहरा बाबा की चल प्रतिमा सहित मंदिर में संपन्न होने वाली समस्त आरतियों के दौरान विराजमान रहेगा।

महंत वाचस्पति तिवारी ने सोमवार को बताया कि सेहरा पूर्ण रूप से प्राकृतिक और धार्मिक सामग्री से तैयार किया जा रहा है। इसमें रुद्राक्ष के साथ मखाना, लौंग, इलायची, शिवलिंगी, अंगूर तथा विविध प्रकार के सुगंधित पुष्पों का प्रयोग किया जाएगा। इन सभी वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। रुद्राक्ष शिव का प्रिय है, शिवलिंगी संतान और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, वहीं फल और मेवा मंगलकामना और समर्पण भाव को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि पर काशी में शिव बारात का विशेष महत्व होता है। लोक परंपरा के अनुसार भगवान शिव दूल्हा बनकर माता गौरा को ब्याहने निकलते हैं। इसी परंपरा के निर्वहन में बाबा विश्वनाथ का दूल्हा स्वरूप श्रृंगार किया जाता है। सेहरा इसी श्रृंगार का प्रमुख अंग होता है, जो बाबा के मस्तक को अलौकिक सौंदर्य प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में चारों पहर की सप्तर्षि आरती का आयोजन किया जाएगा। यह आरती काशी की विशिष्ट परंपरा है, जिसमें सात ऋषियों के प्रतीक स्वरूप विशेष विधि-विधान से आरती संपन्न होती है। सप्तर्षि आरती का संचालन महंत परिवार के वरिष्ठ सदस्य और सप्तर्षि आरती के प्रधान पं. शशिभूषण त्रिपाठी ‘गुड्डु महाराज’ के नेतृत्व में किया जाएगा। पर्व पर पूरी रात्रि मंदिर में आरती, अभिषेक और विशेष पूजन का क्रम चलता है। श्रद्धालु पूरी रात बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतारों में लगे रहते हैं। बाबा के दूल्हा स्वरूप के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।


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