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कर्नाटक के लक्कुंडी में उत्खनन से राष्ट्रकूट काल के युद्ध इतिहास पर से उठा पर्दा

Date : 27-Jan-2026

गदग (कर्नाटक), 27 जनवरी । कर्नाटक के गदग ज़िले के ऐतिहासिक लक्कुंडी गाँव में पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे उत्खनन कार्य से राष्ट्रकूट काल के भीषण युद्ध इतिहास के कई अहम पहलू सामने आ रहे हैं। लगभग 50 वर्ष पहले खोजे गए वीरगल्लु (वीर शिलाएँ) एक बार फिर इतिहासकारों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

हांलाकि पिछले 10 दिनों से जारी उत्खनन का कार्य इन दिनों जोखिम भरे चरण में पहुँच गया है। लक्कुंडी किले के वीरभद्रेश्वर मंदिर के सामने उत्खनन स्थल पर दरारें पड़ने के कारण कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि लक्कुंडी विकास प्राधिकरण और पुरातत्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 10×10 मीटर के चार गढ्ढों में उत्खनन कार्य किया जा रहा है। इनमें से ए-1 ब्लॉक में गंभीर दरारें पाई गई हैं, जिससे किसी भी क्षण मिट्टी धंसने की आशंका बनी हुई है। वहीं बी-1 ब्लॉक में एक विशाल पत्थर मिला है, जिसके गिरने की संभावना से कर्मचारियों में भय का माहौल है। इसके अतिरिक्त, ए-ब्लॉक में बड़े-बड़े शिलाखंडों का समूह होने के कारण उत्खनन कार्य में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है। लगभग 35 से अधिक कर्मचारी अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में कार्य जारी रखे हुए हैं। स्थल पर भूस्खलन की आशंका को देखते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा के मद्देनज़र, लक्कुंडी विकास प्राधिकरण के आयुक्त शरणु गोगेरी ने चार बॉक्स में एक साथ कार्य करने के स्थान पर 10×10 मीटर के एक ही बॉक्स में उत्खनन जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

वीरगल्लुओं में सजीव हुआ राष्ट्रकूट काल का युद्ध इतिहास

लक्कुंडी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए उत्खनन और शोध कार्यों से मिली सामग्री को और राष्ट्रकूट काल की 15 दुर्लभ वीरगल्लुओं में अंकित विवरणों को इतिहास शोधकर्ताओं ने साझा किया है। ये वीरगल्लु 9वीं और 10वीं शताब्दी में हुए युद्धों के दृश्यों को शिल्पकला के माध्यम से जीवंत रूप में दर्शाते हैं। इन शिलाओं में युद्ध में वीरगति को प्राप्त दंडनायकों, शत्रुओं के साथ हुए संघर्षों तथा युद्ध में मारे गए योद्धाओं को वाद्य-यंत्रों के साथ देव लोक ले जाते हुए दृश्यों का अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावशाली चित्रण किया गया है।

इस विषय पर मीडिया से बातचीत करते हुए इतिहासकार अप्पन्ना हंचे ने बताया कि राष्ट्रकूट काल में युद्ध में बलिदान देने वाले दंडनायकों को देवतुल्य माना जाता था। वीरगल्लुओं में अप्सराओं के साथ योद्धाओं को स्वर्ग जाते हुए दर्शाया जाना उस समय के समाज की युद्ध मानसिकता और धार्मिक विश्वासों को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक वीरगल्लु की शिल्पकला उस युग की वीरता, बलिदान और युद्ध संस्कृति की गाथा कहती है। लक्कुंडी और बेटगेरी क्षेत्र राष्ट्रकूट काल के युद्ध इतिहास के महत्वपूर्ण साक्ष्य स्थल हैं। लक्कुंडी में जारी उत्खनन से आने वाले दिनों में और भी प्राचीन अवशेषों के मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं में गहरी उत्सुकता बनी हुई है।


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