उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में गुरूवार को ऊर्जा-सेतु व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ होगा। विवि के पूर्व छात्रों के संगठन द्वारा नवाचार करते हुए व्याख्यान श्रृखला प्रारंभ की जा रही है। पहला व्याख्यान भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव और नई शिक्षा नीति क्रियान्वयन के प्रभारी रहे सेवानिवृत्त आईएएस अनिल स्वरूप का होगा।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बुधवार को बताया कि विश्वविद्यालय एल्यूमनाई एसोसिएशन के माध्यम से नई परम्परा शुरू की जा रही है, जिसके अंतर्गत ऊर्जा-सेतु व्याख्यान श्रृंखला प्रारंभ की जा रही है। आप इसे संभव बना सकते हैं... विषय पर पहला विशिष्ट अनिल स्वरूप गुरुवार देंगे।
कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के संगठन विक्रम विश्वविद्यालय एल्यूमनाई एसोसिएशन द्वारा यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजन विक्रमोत्सव-2026 के तहत विवि के स्वर्ण जयंती सभागार में दोपहर 12 बजे से होगा। यह आयोजन भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के बीच एक वैचारिक पुल के रूप में है। वक्ता अनिल स्वरूप अपनी प्रखर दृष्टि और अनुभव के आधार पर केवल प्रशासनिक कार्यों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा नीति निर्धारण और वर्तमान परिदृश्य को केंद्र में रखकर शिक्षकों , विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के समक्ष व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।
व्याख्यान का विषय यू कैन मेक इट हैपन को विद्यार्थियो को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अनिल स्वरूप ने अपने कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्रालय और शिक्षा नीति जैसे संवेदनशील विभागों में बुनियादी और क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सफलता प्राप्त की थी। उन्होने बताया कि विश्वविद्यालय पूर्व छात्र संघ द्वारा इस आयोजन का मूल उद्देश्य वर्तमान छात्रों और अनुभवी पूर्व छात्रों के बीच एक ऐसा सशक्त वैचारिक आदान-प्रदान करना है, जिससे नवागत पीढ़ी को भविष्य की ऊर्जा नीति और करियर की जटिल चुनौतियों से निपटने की दिशा मिल सके। आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक दुर्लभ अवसर है, जहां वे देश के समसामयिक विषयों पर सीधा संवाद कर सकेंगे।
कार्यक्रम का विशेष सत्र दोपहर 12 से 1.30 बजे तक चलेगा, जिसके पश्चात उपस्थित जनों के बीच संवाद भी रहेगा। विक्रमोत्सव-2082 के तत्वावधान में आयोजित इस व्याख्यान में अनिवार्य रूप से सम्मिलित होने के लिए एसोसिएशन ने समस्त संबंधित महाविद्यालयों, संस्थानों और विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रोफेशनल कोर्सेस के विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि श्री स्वरूप के इस प्रेरणादायी और नीतिगत उद्बोधन का पूर्ण लाभ उठा सकें
