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गगनयान मिशन की तैयारियों को मजबूती, ड्रोग पैराशूट टेस्ट सफल

Date : 20-Feb-2026

 भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को बड़ी सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया।

मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में अहम कदम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित ‘गगनयान’ भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इस मिशन के तहत तीन सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में तीन दिन के लिए भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।

कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में ड्रोग पैराशूट की भूमिका

ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है, ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके। इस बार परीक्षण में पैराशूट को वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई।

कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित संचालन

परीक्षण के दौरान पैराशूट को असली मिशन से अधिक दबाव वाली स्थिति में जांचा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करेगी। इस सफलता से भारत ने उच्च क्षमता वाले पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता प्रदर्शित की है।

वैज्ञानिकों को बधाई, आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर टीमों को शुभकामनाएं दीं।

संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और टीबीआरएल की विशेषज्ञ टीमों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूत बनाती है तथा भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।


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