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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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AI के भविष्य पर चर्चा के लिए दुनिया भर के देश भारत में जुटेंगे

Date : 10-Feb-2026

 भारत तेजी से तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और एआई इस विकास का बड़ा हिस्सा बन रहा है। इसी दिशा में भारत 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 का आयोजन करने जा रहा है। यह किसी भी विकासशील देश में होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन में दुनिया के 100 से ज्यादा देशों की भागीदारी होने जा रही है।

यह शिखर सम्मेलन तीन मुख्य सूत्रों — जन, पृथ्वी और प्रगति — पर आधारित है। इनका उद्देश्य एआई को मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के लिए उपयोग करना है। सम्मेलन में वैश्विक नेता, नीति निर्माता, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञ एआई के उपयोग और भविष्य पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन का मुख्य ढांचा सात चक्रों यानी सात कार्य समूहों पर आधारित है। हर चक्र एआई के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र पर काम करेगा। पहला चक्र मानव पूंजी पर केंद्रित है, जिसमें एआई के दौर के लिए लोगों को नई स्किल सिखाने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा। दूसरा चक्र सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य एआई के जरिए समाज के हर वर्ग तक सुविधाएं पहुंचाना है।

तीसरा चक्र सुरक्षित और भरोसेमंद एआई पर काम करेगा, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर होगा। चौथा चक्र विज्ञान से जुड़ा है, जिसमें एआई के जरिए वैज्ञानिक खोज और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। पांचवां चक्र सहनशीलता, नवाचार और कार्यकुशलता पर आधारित है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल और संसाधन बचाने वाली एआई तकनीक विकसित करने पर जोर रहेगा।

छठा चक्र एआई संसाधनों के जनतंत्रीकरण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य एआई तकनीक और डेटा तक सभी देशों और संस्थानों की समान पहुंच सुनिश्चित करना है। सातवां चक्र आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एआई के उपयोग पर काम करेगा।

भारत में एआई तेजी से अपनाई जा रही है। एआई स्किल और प्रतिभा के मामले में भारत दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। 2016 से अब तक भारत में एआई प्रतिभा घनत्व तीन गुना बढ़ा है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में एआई भर्ती में लगभग 33 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार एआई स्किल बढ़ाने के लिए पीएचडी, पोस्टग्रेजुएट और ग्रेजुएट छात्रों को समर्थन दे रही है। इसके अलावा भारत एआई स्टार्टअप को भी वैश्विक मंच पर आगे बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में एआई के कारण लाखों नए रोजगार बनने की संभावना है।

सामाजिक क्षेत्र में भी एआई का बड़ा योगदान है। भाषिणी प्लेटफॉर्म 36 से ज्यादा लिखित भाषाओं और कई बोलियों में काम करता है। किसान ई-मित्र एआई चैटबॉट किसानों की मदद कर रहा है और रोज हजारों सवालों का जवाब दे रहा है।

भारत एआई को सुरक्षित बनाने के लिए भी काम कर रहा है। सुरक्षित और जिम्मेदार एआई बनाने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान भी बनाया जा रहा है।

तकनीकी विकास में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत गिटहब पर जनरेटिव एआई प्रोजेक्ट में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन चुका है। कई बड़ी वैश्विक टेक कंपनियां भारत में एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही हैं।

विज्ञान और रिसर्च में भी एआई का उपयोग बढ़ रहा है। मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और ऊर्जा प्रबंधन में एआई का उपयोग किया जा रहा है। भारत पेटेंट फाइल करने वाले देशों में छठे स्थान पर है।

आर्थिक क्षेत्र में भी एआई का असर दिख रहा है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय व्यवस्था में एआई का उपयोग बढ़ रहा है। भारत के एआई तकनीक क्षेत्र से 2025 तक लगभग 280 बिलियन डॉलर राजस्व मिलने का अनुमान है। भारत में करीब 1.8 लाख स्टार्टअप हैं और 2024 में शुरू हुए लगभग 89 प्रतिशत स्टार्टअप एआई का उपयोग कर रहे हैं।

इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व में मजबूत स्थिति देगा। यह सम्मेलन जिम्मेदार और समावेशी एआई के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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