राजिम छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद ज़िले में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन नगर है। अपनी गहरी सांस्कृतिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और पवित्र नदियों के संगम के कारण राजिम को सम्मानपूर्वक “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहा जाता है। यह स्थान केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि इतिहास, प्रकृति और लोकसंस्कृति का भी सुंदर मेल प्रस्तुत करता है। नीचे राजिम के महत्व को विस्तार से समझा जा सकता है।
1. त्रिवेणी संगम: तीन पवित्र नदियों का मिलन
राजिम का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ स्थित त्रिवेणी संगम है, जहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियाँ एक-दूसरे से मिलती हैं। यह संगम स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति प्राप्त होती है। संगम के तट पर सुबह और शाम का दृश्य बेहद शांत और मनोहारी होता है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।
2. प्रमुख धार्मिक एवं तीर्थ स्थल
राजिम में अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जो इसकी आध्यात्मिक पहचान को और भी सशक्त बनाते हैं।
· राजीव लोचन मंदिर: यह भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण 7वीं–8वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। यह मंदिर पंचायतन स्थापत्य शैली में बना हुआ है। इसकी भव्य संरचना, कलात्मक नक्काशी और मजबूत स्तंभ इसे स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण बनाते हैं।
· कुलेश्वर महादेव मंदिर: यह मंदिर संगम के मध्य भाग में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। चारों ओर बहती नदियों के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धा और शांति का विशेष केंद्र है।
· पंचकोशी परिक्रमा: राजिम को छत्तीसगढ़ की पंचकोशी यात्रा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस धार्मिक यात्रा में कोपेश्वर, ब्रह्मकेश्वर, पानेश्वर नाथ, चंपेश्वर नाथ और कुलेश्वर नाथ जैसे महत्वपूर्ण शिव मंदिरों की परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।
3. राजिम कुंभ (पुन्नी मेला)
हर वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि के बीच राजिम में भव्य राजिम कुंभ या पुन्नी मेला आयोजित किया जाता है। इसे आमतौर पर “छत्तीसगढ़ का कुंभ” कहा जाता है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत, नागा साधु और श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ एकत्र होते हैं। मेले के दौरान धार्मिक प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।
4. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
राजिम का इतिहास भी उतना ही समृद्ध है जितनी इसकी धार्मिक पहचान।
· नाम की कथा: लोकमान्यता के अनुसार, राजिम नाम की उत्पत्ति एक अत्यंत भक्त महिला से जुड़ी है, जिनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें अपना नाम प्रदान किया। उसी के आधार पर इस स्थान को राजिम कहा जाने लगा।
· प्राचीन राजवंशों के प्रमाण: इस क्षेत्र में नील वंश और कलचुरी वंश के शासनकाल से जुड़े अवशेष और उल्लेख मिलते हैं, जो इसके प्राचीन और समृद्ध अतीत की पुष्टि करते हैं।
· स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध: राजिम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और साहित्यकार पंडित सुंदरलाल शर्मा की कर्मभूमि भी रहा है। उन्होंने यहाँ रहकर समाज सुधार और राष्ट्रीय चेतना के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
5. राजिम तक कैसे पहुँचे
राजिम तक पहुँचना बेहद आसान है, क्योंकि यह सड़क और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
· सड़क मार्ग: राजिम, रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। छत्तीसगढ़ पर्यटन की बसों या निजी वाहनों के माध्यम से यहाँ सहजता से पहुँचा जा सकता है।
· हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा राजिम पहुँचना सुविधाजनक है।
निष्कर्ष
राजिम एक ऐसा स्थल है जहाँ धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ देखने को मिलता है। त्रिवेणी संगम की पवित्रता, प्राचीन मंदिरों की भव्यता, कुंभ मेले की आध्यात्मिक ऊर्जा और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा राजिम को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में शामिल करती है। जो भी व्यक्ति छत्तीसगढ़ की आत्मा को करीब से जानना चाहता है, उसके लिए राजिम की यात्रा निश्चय ही अविस्मरणीय अनुभव होगी।
