भारत एक विशाल और आध्यात्मिक देश है, जहाँ असंख्य देवी-देवताओं के मंदिर विद्यमान हैं। देश के लगभग हर कोने में किसी न किसी देवता का पवित्र धाम देखने को मिल जाता है। किंतु करोड़ों हिंदुओं के हृदय में भगवान राम का स्थान सर्वोच्च और परम-पूजनीय है।
भगवान राम को भगवान विष्णु का सातवाँ अवतार माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य रामायण के नायक होने के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। अयोध्या के भव्य राम मंदिर के अतिरिक्त भारत में ऐसे अनेक प्रसिद्ध राम मंदिर हैं, जिनके दर्शन प्रत्येक श्रद्धालु को जीवन में एक बार अवश्य करने चाहिए।
नासिक का कालाराम मंदिर (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के नासिक में स्थित कालाराम मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध और आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण 1782 में भगवान राम के महान भक्त सरदार रंगराव ओढेकर ने करवाया था। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से परिवार में सामंजस्य बढ़ता है, मानसिक शांति मिलती है, कठिनाइयों का अंत होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
इस मंदिर की विशेषता यहाँ स्थापित भगवान राम की सात फीट ऊँची काले पत्थर की प्रतिमा है, जिसके कारण उन्हें कालाराम कहा जाता है। दर्शन से पूर्व भक्त पवित्र गोदावरी नदी में स्नान करते हैं, क्योंकि लोक मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान इसी नदी में स्नान किया था। यह मंदिर उसी स्थान पर स्थित है जहाँ भगवान राम ने वनवास के समय निवास किया था। कहा जाता है कि प्रतिमा निर्माण में 12 वर्षों का समय लगा और प्रतिदिन लगभग 2000 कारीगर कार्यरत थे।
ओरछा का श्रीराम राजा मंदिर (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित श्रीराम राजा मंदिर अपने आप में अनोखा है। यहाँ भगवान राम को एक राजा के रूप में पूजा जाता है और प्रेमपूर्वक राम राजा कहा जाता है, अर्थात ओरछा के शासक। विशेष बात यह है कि भगवान राम को प्रतिदिन पुलिस द्वारा रॉयल गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।
इतिहास के अनुसार यह स्थान मूल रूप से 16वीं सदी में बुंदेला वंश के राजा मधुकर शाह द्वारा बनवाया गया एक शाही महल था। किंवदंती है कि रानी गणेश कुंवर अयोध्या से भगवान राम की मूर्ति ला रही थीं, किंतु भगवान की आज्ञा से वह मूर्ति आगे नहीं बढ़ी। तभी निर्णय लिया गया कि इसी महल को मंदिर में परिवर्तित किया जाएगा। आज देशभर से हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
राम तीरथ मंदिर, अमृतसर (पंजाब)
पंजाब के अमृतसर में स्थित श्रीराम तीरथ मंदिर आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही आश्रम था जहाँ महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी। साथ ही इसे लव-कुश की जन्मस्थली भी माना जाता है।
मंदिर के समीप स्थित एक प्राचीन कुएँ के बारे में मान्यता है कि माता सीता यहाँ अपने दैनिक कार्य किया करती थीं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस पवित्र स्थल पर भगवान राम की पूजा करने से संतान-सुख, आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक समृद्धि की प्राप्ति होती है।
