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ओली ने चुनाव को देश बनाने और देश जलाने के बीच का जनमत संग्रह बताया

Date : 19-Feb-2026

 काठमांडू, 19 फ़रवरी । पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव को देश बनाने और देश जलाने वाली शक्तियों के बीच का जनमत-संग्रह करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव राष्ट्रवादियों और राष्ट्र-विरोधियों के बीच प्रतिस्पर्धा है।

नेकपा एमाले के अध्यक्ष ओली ने गुरुवार को काठमांडू में पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आगामी मतदान राष्ट्रवादियों और राष्ट्र-विरोधी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा है। यह देश बनाने वालों और देश जलाने वालों के बीच जनमत-संग्रह है। पुराने बनाम नए की बहस का कोई अर्थ नहीं है। एमाले ने विकास और सुशासन में स्वयं को पहले ही साबित किया है। ओली ने आलोचकों पर पीढ़ीगत परिवर्तन का भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि युवा आग है, उसे दिशा चाहिए। अनुभव प्रकाश है, उसे ऊर्जा चाहिए। देश का निर्माण युवा और अनुभव के समन्वय से होता है।” उन्होंने दावा किया कि एमाले युवा ऊर्जा और अनुभवी नेतृत्व को एकजुट करने में सक्षम है।

घोषणा पत्र में ओली ने 8 और 9 सितंबर को हुई घटनाओं को लेकर कई प्रश्न भी उठाए हैं। मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा कि जिस प्रकार जनता के स्थापित राजनीतिक दलों और नेताओं से प्रश्न हैं, उसी प्रकार उनके भी कुछ प्रश्न हैं। घोषणा–पत्र में कहा गया है कि 8 सितंबर से पहले देश प्रगति कर रहा था या पतन की ओर जा रहा था? या फिर समाज में आक्रोश फैलाने के लिए जानबूझकर देश को असफल दिखाने की कथा गढ़ी गई?

ओली ने प्रश्न किया कि 8 सितंबर को हुए जेन-जी प्रदर्शन में कौन घुसपैठ कर गया और आयोजकों द्वारा शांतिपूर्ण कार्यक्रम समाप्त होने की घोषणा के बाद घर लौट रहे युवाओं को निषिद्ध क्षेत्रों की ओर किसने मोड़ा? उन्होंने पूछा कि क्या 8 सितंबर की घटना स्वतःस्फूर्त थी या पूर्व नियोजित साजिश? या 9 सितंबर को हुई तोड़फोड़ की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए हिंसा भड़काई गई? घोषणा–पत्र में यह भी कहा गया है कि जेन-जी प्रदर्शनकारियों ने सरकार, संविधान या व्यवस्था के विरुद्ध कोई मांग नहीं उठाई थी। ओली ने सवाल किया कि फिर प्रतिनिधि सभा को इस तरह क्यों भंग किया गया मानो स्वयं व्यवस्था पर आक्रमण किया जा रहा हो, “जैसे कि कभी न की गई मांगों को पूरा किया जा रहा हो।”

उन्होंने यह भी पूछा कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग क्यों लगाई गई और विभिन्न जिलों में सामान्य पार्टी समर्थकों की निजी संपत्तियों में तोड़फोड़ और लूटपाट क्यों की गई? घोषणा–पत्र में कहा गया है कि यदि यह राजनीतिक प्रतिशोध था, तो अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे राज्य के सुरक्षा कर्मियों पर हमला क्यों किया गया? ओली ने स्पष्ट किया कि ये प्रश्न आंतरिक कमजोरियों को छिपाने के लिए गढ़ी गई साजिश-सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए उत्तर अपेक्षित मुद्दे हैं।

ओली ने कहा कि सिंहदरबार, संसद और न्यायपालिका को सुदृढ़ करने के लिए स्थिरता, अनुशासन और योजनाबद्ध कार्यक्रम आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी निर्वाचित होती है तो पहली मंत्रिपरिषद बैठक में ही घोषणा–पत्र की प्रतिबद्धताओं को तत्काल आगे बढ़ाया जाएगा।


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