बलिदान दिवस विशेष- अशफाक उल्ला खाँ | The Voice TV

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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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बलिदान दिवस विशेष- अशफाक उल्ला खाँ

Date : 19-Dec-2023

 

अशफाक उल्ला खाँ, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी और देश प्रेमी थे| जिस समय महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया था तो उस समय अशफाक उल्ला खाँ एक स्कूल छात्र थे, इस आंदोलन के प्रभाव ने इन्हें स्वतंत्रता सेनानी बनने के लिए प्रेरित किया। काकोरी में हुई ट्रेन लूटपाट में सक्रिय भागीदार होने के कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा इनको विद्रोही करार किया गया था।

अशफाक उल्ला खाँ ने जल्दी से जल्दी भारत को स्वतंत्र करने की ठान ली थी और वे उग्रवादियों से जुड़ गए | उस समयमैनपुरी षड़यंत्रका मामला चल रहा था | तब उनकी मुलाकात महान क्रन्तिकारी  राम प्रसाद बिस्मिल जी से हुई और तब दोनों की मित्रता हुई | भारत को ब्रिटिश शासन के बंधनों से मुक्त कराना दोनों उनका प्रमुख उद्देश्य था।

जब क्रांतिकारियों को यह लगने लगा कि अंग्रेजों से विनम्रता से बात करना या किसी भी प्रकार का आग्रह करना व्यर्थ है तो उन्होंने विस्फोट और गोलीबारी का प्रयोग करने की योजना बनाई| इस समय जो क्रांतिकारी विचारधारा विकसित हुई वह पुराने स्वतंत्रता सेनानियों और गांधी जी की विचारधारा से बिल्कुल अलग थी लेकिन इन सब सामग्रियों के लिए अधिकाधिक धन की आवश्यकता थी|

इसीलिए राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार के धन को लूटने का निश्चय किया| उन्होंने सहारनपुर-लखनऊ 8 डाउन पैसेंजर ट्रेन में जाने वाले धन को लूटने की योजना बनाई| 9 अगस्त, 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खाँ समेत आठ अन्य क्रांतिकारियों ने इस ट्रेन को लूटा|

ब्रिटिश सरकार क्रांतिकारियों के इस बहादुरी भरे कदम से भौंचक्की रह गई थी| इसलिए इस बात को बहुत ही गंभीरता से  लेते हुए सरकार ने कुख्यात स्कॉटलैंड यार्ड को इसकी जाच-पड़ताल में लगा दिए | एक महीने तक CID ने भी पूरी मेहनत से एक-एक सबूत जुटाएं और बहुत सारे क्रांतिकारियों को एक ही रात में गिरफ्तार करने में कामयाब रहे | 26 सितंबर 1925 को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को भी गिरफ्तार कर लिया गया| और सारे लोग भी शाहजहांपुर में ही पकड़े गए|

पर अशफाक बनारस भाग निकले| जहां से वो बिहार चले गए| वहां वो एक इंजीनियरिंग कंपनी में दस महीनों तक काम करते रहे| वो गदर क्रांति के लाला हरदयाल से मिलने विदेश भी जाना चाहते थे| अपने क्रांतिकारी संघर्ष के लिए अशफाक उनकी मदद चाहते थे| इसके लिए वो दिल्ली गए जहां से उनका विदेश जाने का प्लान था| पर उनके एक अफगान दोस्त ने, जिस पर अशफाक को बहुत भरोसा था, उन्हें धोखा दे दिया| और अशफाक को गिरफ्तार कर लिया गया और उनको फांसी की सजा सुनाई गई |

फांसी से पहले अशफाक उल्ला खाँ ने कुछ शब्द लिखे थे

कुरान मजीद खोलते ही पहले दो खाली पन्नों पर खुदा से दुआ करते हुए अशफाक लिखते हैं, ' मेरे पाक खुदा, मेरे गुनाह माफ़ फरमा और माफ़ी अदा फरमा और हिंदुस्तान की सरज़मीं पर आज़ादी का सूरज अब जल्द तुलुअ (निकलना) फरमा

 


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