ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने नया मोड़ ले लिया है, जब इजरायल ने ईरान के राष्ट्रीय प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) की इमारत पर हमला किया। इजरायली सैन्य अधिकारियों ने इसे ईरानी मिसाइल हमलों के प्रतिशोध के रूप में बताया, जिसमें तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में कई घर नष्ट हुए और नागरिकों की जान गई। IRIB पर हमला दर्शाता है कि अब दोनों देश नागरिक बुनियादी ढांचे को भी युद्ध का हिस्सा बना रहे हैं।
इस संघर्ष ने अब चौथे दिन में प्रवेश कर लिया है, जिसमें दोनों पक्ष मिसाइलों और ड्रोन से एक-दूसरे के सैन्य, परमाणु और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं। इस बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने कतर, सऊदी अरब और ओमान जैसे खाड़ी देशों से संपर्क कर राजनयिक मध्यस्थता की मांग की है। ईरान चाहता है कि ये देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाएं ताकि वे इजरायल को युद्धविराम के लिए राजी करें। इसके बदले में तेहरान ने परमाणु वार्ता में लचीलापन दिखाने का संकेत दिया है।
इस क्षेत्रीय संकट पर जी7 शिखर सम्मेलन में भी चर्चा हो रही है, जहां विश्व नेताओं ने चिंता जताई है कि यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा से बोलते हुए ईरान से कहा कि वह तुरंत परमाणु वार्ता में लौटे, ताकि "बहुत देर न हो जाए।" हालांकि अमेरिका ने अभी तक इजरायल को सीधे सैन्य सहायता नहीं दी है, लेकिन ट्रंप ने भविष्य में किसी भूमिका की संभावना को नकारा नहीं।
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यहां तक कहा कि वह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बना सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टकराव और गहरा सकता है। हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने खुलासा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही इस तरह की किसी योजना को अस्वीकार कर चुके हैं।
संघर्ष की गंभीरता को देखते हुए दोनों देशों ने प्रमुख शहरों के ऊपर हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है और प्रभावित इलाकों में नागरिकों को निकासी की चेतावनी जारी की गई है। फिर भी, नागरिक हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और हालात में तत्काल कोई नरमी नजर नहीं आ रही।
ईरान का रुख यह है कि अगर इजरायल हमले रोकता है, तो वह परमाणु वार्ता में लौटने को तैयार है। लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी सख्त स्थिति पर कायम हैं।
