ईरान का IAEA से दूरी का संकेत: निगरानी प्रणाली पर गहराया संकट
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने एक ऐसे विधेयक को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है, जो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ देश के सहयोग को निलंबित कर सकता है। यह कदम हाल ही में ईरानी परमाणु स्थलों पर हुए कथित अमेरिकी और इज़राइली हमलों की प्रतिक्रिया में उठाया गया है, जिससे पहले से ही तनावग्रस्त पश्चिम एशिया में वैश्विक परमाणु निगरानी प्रणाली और कमजोर हो गई है।
प्रस्तावित कानून क्या कहता है?
इस विधेयक के अनुसार, जब तक ईरान को यह भरोसा नहीं हो जाता कि उसकी परमाणु सुविधाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक IAEA द्वारा निगरानी उपकरणों की तैनाती, निरीक्षण और रिपोर्टिंग जैसी गतिविधियाँ स्थगित कर दी जाएंगी। फिलहाल यह कानून संसद की पूर्ण मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
ईरानी अधिकारियों ने इस कदम को "सुरक्षा आधारित" करार देते हुए कहा है कि विदेशी हमलों की स्थिति में किसी बाहरी एजेंसी के साथ सहयोग "राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ" हो सकता है।
IAEA की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की चेतावनी
IAEA की ओर से अभी तक इस मसौदे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस प्रस्ताव को कानून में बदल देता है, तो यह वैश्विक परमाणु निगरानी ढांचे को एक ऐसे समय में गंभीर झटका देगा जब क्षेत्र में सैन्य तनाव और रणनीतिक अनिश्चितता चरम पर है।
नाटो महासचिव की टिप्पणी: सैन्य कार्रवाई बनाम परमाणु खतरा
हेग में नाटो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर बोलते हुए महासचिव मार्क रूटे ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हवाई हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। रूटे ने जोर दिया कि नाटो की प्राथमिक चिंता इन हमलों की वैधता नहीं, बल्कि ईरान की परमाणु क्षमताओं से उत्पन्न दीर्घकालिक रणनीतिक खतरा है।
उन्होंने नाटो पर "दोहरा मापदंड" अपनाने के आरोपों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि ईरान में शासन परिवर्तन न तो शिखर सम्मेलन के औपचारिक एजेंडे का हिस्सा है और न ही कोई सामूहिक उद्देश्य। हालांकि, कुछ सदस्य देशों के द्वारा इस मुद्दे को साइडलाइन चर्चाओं में उठाया जा सकता है।
ईरान का IAEA के साथ सहयोग सीमित करने का प्रस्ताव पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति में एक और गंभीर मोड़ है। जहां एक ओर ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय परमाणु निगरानी और पारदर्शिता की संभावित समाप्ति को लेकर चिंतित है। नाटो की ओर से दिए गए बयान इस टकराव को केवल सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखने की दिशा में इशारा करते हैं।
