संघीय अदालत से राहत: हार्वर्ड में विदेशी छात्रों का नामांकन जारी रहेगा
संयुक्त राज्य अमेरिका में एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों के प्रवेश को रोकने के प्रयास पर रोक लगा दी है। बोस्टन की अमेरिकी जिला न्यायाधीश एलिसन बरोज़ ने एक दूसरा अस्थायी आदेश जारी करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका आकर हार्वर्ड में अध्ययन जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।
ट्रम्प प्रशासन का दबाव और जवाबी कार्रवाई
ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड पर शासन और नीतियों में बदलाव का दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया था। इस दबाव अभियान के तहत प्रशासन ने:
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हार्वर्ड को मिलने वाले 2.6 अरब डॉलर से अधिक के अनुसंधान अनुदानों में कटौती की,
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संघीय अनुबंध समाप्त किए,
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और विश्वविद्यालय के कर-मुक्त दर्जे को समाप्त करने की धमकी दी।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने हार्वर्ड को "उदारवाद का गढ़" बताया था और विश्वविद्यालय की स्वतंत्र नीतियों पर बार-बार सवाल उठाए थे।
हार्वर्ड की कानूनी लड़ाई और छात्रों का भविष्य
इस नीति के विरोध में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने मई में अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग पर मुकदमा दायर किया। विभाग ने स्कूल की वह प्रमाणिकता रद्द कर दी थी, जिससे विदेशी छात्रों को रखने और उनके वीज़ा से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की जाती थीं। अगर यह निर्णय लागू होता, तो हार्वर्ड के लगभग 7,000 विदेशी छात्रों को या तो अमेरिका छोड़ना पड़ता या अवैध रूप से रहना पड़ता।
न्यायिक आदेश का प्रभाव
जज बरोज़ के आदेश से न केवल हार्वर्ड के छात्रों को राहत मिली है, बल्कि यह फैसला अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बन गया है। यह आदेश शिक्षा की स्वतंत्रता, छात्र अधिकारों, और प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं पर एक स्पष्ट संदेश देता है।
ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के विरुद्ध न्यायपालिका की यह दखल न केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को संरक्षण प्रदान करती है, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को भी मजबूती देती है। आने वाले समय में इस मामले की अंतिम सुनवाई अमेरिका में शिक्षा, आव्रजन और नीतिगत संतुलन के लिए दिशा तय कर सकती है।
