श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने संयुक्त राष्ट्र के ध्वजवाहक शोध पोत डॉ फ्रिड्टजॉफ नानसेन को श्रीलंकाई समुद्री क्षेत्र में प्रवेश की विशेष अनुमति प्रदान की है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, यह अनुमति संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के बार-बार किए गए अनुरोधों के बाद दी गई है। यह शोध पोत 15 जुलाई से 20 अगस्त तक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर अध्ययन करने के उद्देश्य से भेजा गया है।
हालांकि, एफएओ ने श्रीलंकाई प्रशासन की अनुमति में देरी पर चिंता जताई है और आशंका व्यक्त की है कि यह शोध मिशन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा नहीं हो पाएगा। संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि मिशन रद्द हुआ, तो श्रीलंका को 1 मिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और आगामी शोध अभियानों को 2030 तक के लिए टालना पड़ सकता है।
जनवरी 2025 में राष्ट्रपति दिसानायके की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने विदेशी अनुसंधान जहाजों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार करने तक उनकी पूर्व-मंजूरी पर रोक लगा दी थी। इसके तहत, एक समिति गठित की गई थी जो इन एसओपी का मसौदा तैयार कर रही है।
श्रीलंका ने पहले दिसंबर 2023 में सभी विदेशी शोध जहाजों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। यह निर्णय पूर्ववर्ती सरकार द्वारा समुद्री डेटा के संग्रह और साझाकरण को लेकर उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं के चलते लिया गया था।
इस बीच, राष्ट्रपति दिसानायके ने अपनी भारत यात्रा (दिसंबर 2024) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा (अप्रैल 2025) के दौरान स्पष्ट किया था कि वह श्रीलंका की भूमि या समुद्री क्षेत्र का किसी भी ऐसे तरीके से उपयोग नहीं होने देंगे जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुंचे।
