ढाका/वाशिंगटन — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश से आयातित वस्तुओं पर 1 अगस्त, 2025 से 35% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार संबंधों में तनाव की नई लहर ले आया है और विशेष रूप से बांग्लादेश के परिधान क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह निर्णय अप्रैल में घोषित 37% टैरिफ प्रस्ताव के संशोधित रूप में आया है, जिस पर अमेरिका ने 90 दिन की बातचीत की समयसीमा दी थी — जो 9 जुलाई को समाप्त हो रही है। लेकिन व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, नुकसान पहले ही हो चुका है, और अब बांग्लादेश की अमेरिका में ‘जीत-जीत’ की व्यापार स्थिति खतरे में है।
टैरिफ का प्रभाव:
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बांग्लादेश के निर्यात उद्योग, खासकर रेडीमेड गारमेंट (RMG) क्षेत्र पर व्यापक असर की आशंका है।
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वियतनाम, जो अमेरिका के साथ अपने टैरिफ को 46% से घटाकर 20% कर चुका है और अमेरिकी आयात पर शून्य शुल्क लागू करता है, बांग्लादेश के लिए गंभीर प्रतिस्पर्धा बन गया है।
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नया टैरिफ तीसरे देशों के ज़रिए ट्रांसशिपमेंट की संभावना पर भी लागू होगा, जिससे कोई भी पुनर्निर्देशित माल भी प्रभावित होगा।
ट्रंप का तर्क:
अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किए गए पत्र में ट्रंप ने बांग्लादेश के साथ "लंबे समय से चले आ रहे व्यापार असंतुलन" और "टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं" को इस फैसले का आधार बताया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश प्रतिशोधात्मक टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका और ऊंचे शुल्क के साथ जवाब देगा।
प्रतिक्रिया:
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वित्त सलाहकार डॉ. सालेहुद्दीन अहमद ने कहा, “अभी भी कुछ उम्मीद बची है,” और पुष्टि की कि बांग्लादेशी वाणिज्य सचिव वाशिंगटन रवाना हो रहे हैं ताकि आखिरी प्रयास के रूप में बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
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व्यापार जगत के कुछ लोग बांग्लादेशी वार्ता प्रस्तावों की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे टैरिफ में नरमी की संभावना और कम हो गई है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए पहले से ही संघर्ष कर रहा है। आगामी हफ्ते बांग्लादेश की राजनीतिक और आर्थिक कूटनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
