धर्मशाला, 06 जुलाई । निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को उनके 88वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन जश्न मनाने का एक विशेष दिन है। उन्होंने कहा कि आज का यह विशेष अवसर एक खुशहाल जीवन और शांतिपूर्ण दुनिया बनाने की दिशा में परमपावन दलाई लामा के अद्वितीय नेतृत्व और विरासत को कृतज्ञता और गर्व के साथ प्रतिबिंबित करने का भी है।
मैकलोड़गंज स्थित मुख्य बौद्ध मठ चुगलाखंग में आयोजित समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पेंपा सेरिंग ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में धर्मगुरु के प्रयासों से तिब्बती बौद्ध धर्म न केवल एक धर्म के रूप में, बल्कि बौद्ध विज्ञान और संस्कृति के भंडार के रूप में भी दुनिया भर में फला-फूला है। जो पिछले 1400 वर्षों में विकसित और फला-फूला है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के योगदान की बजह से ही कुछ वैज्ञानिक यह विचार व्यक्त कर रहे हैं कि बौद्ध विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ-साथ विज्ञान की एक शाखा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दलाई लामा ने इस बात पर जोर दिया है कि दयालु प्रेरणा किसी भी वैज्ञानिक अनुसंधान की आधारशिला होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसके परिणाम संवेदनशील प्राणियों और पर्यावरण के लिए नुकसान का कारण न बनें। दलाई लामा की वैज्ञानिकों के साथ बातचीत से न केवल धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोण में बदलाव आया है, बल्कि दुनिया भर में अनुसंधान के वैज्ञानिक क्षेत्र का क्षितिज भी व्यापक हुआ है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह, माइंड एंड लाइफ डायलॉग्स ने चिंतनशील प्रथाओं को अध्ययन के एक वैध क्षेत्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए प्रथाओं के लाभों को समझने में लाखों लोगों की रुचि को आकर्षित किया है।
इस मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद के अध्यक्ष खेनपो सोनम तेनफेल ने भी धर्मगुरु को जन्मदिन की बधाई देते हुए संदेश पढ़ा।
