जयंती विशेष:- सच्ची सेवा भावना, सुभास चंद्र बोस | The Voice TV

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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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जयंती विशेष:- सच्ची सेवा भावना, सुभास चंद्र बोस

Date : 23-Jan-2024

 

सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी है जब कलकत्ता में भारी बाढ़ ने तबाही मचा रखी थी। बाढ़ के चलते जीवन अस्त व्यस्त हो चला था। लोगों के हाल बुरे हो गए थे। सभी को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। बाढ़ से हुए नुकसान से राहत पहुंचाने के लिए बहुत से स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाल रखा था। सभी स्वयंसेवक दिन रात एक करके लोगों की सेवा में ही लगे रहते थे। इन्हीं स्वयंसेवकों में सुभाष चंद्र बोस भी शामिल थे। वह भी इस नेक कार्य में अपना पूरा योगदान दे रहे थे। बहुत बार तो ऐसा भी होता था कि उन सेवकों को आराम करने तक का भी मौका नहीं मिल पाता था। सुभाष चंद्र बोस के माता-पिता को इस बात की बहुत चिंता रहती थी कि उनका बेटा खुद के लिए बिल्कुल भी समय नहीं निकालता। एक दिन जब बोस घर लौटे तो उनके पिताजी ने कहा, “बेटा, तुम बिना थके और बिना रुके दिन रात काम में लगे रहते हो। कभी तो फुर्सत से बैठकर खुद के लिए समय निकाला करो।

हम सभी का भी बहुत मन होता है तुम्हारे साथ बातचीत करने का। पर तुम्हें तो फुर्सत ही नहीं मिल पाती है। मैं यह नहीं कह रहा कि जो तुम कर रहे हो वह गलत है। पर इस चीज के चलते हम अपने आप को तो नहीं भूल सकते हैं ना।पिताजी की इस बात पर सुभाष चंद्र बोस ने कहा, “पिताजी, क्या आपको याद है कि आपने ही हम सभी को बचपन में सिखाया था कि सेवा से बढ़कर कोई दूसरा धन नहीं होता। तो मैं बस आपकी ही बात का अनुसरण कर रहा हूं। पिताजी ने कहा, हाँ, यह सच है कि सेवा से बढ़कर कोई दूसरा धन नहीं होता। पर अपने लिए भी जीवन जीना जरूरी है। अच्छा अब एक बात बताता हूं कि गाँव वालों ने परसों माँ दुर्गा का जागरण रखा है तो उसमें तुम्हें भी शामिल होना है।बोस ने कहा, “यह अच्छी बात है कि गाँव वालों ने माता का जागरण रखा है। पर पिताजी, मैं उसमें शामिल नहीं हो सकता हूं।

मुझे जागरण के सामने लोगों के दुख नजर रहे हैं। आप मुझे क्षमा करें। मैं जागरण का हिस्सा नहीं बन पाउंगा।ऐसा कहते ही बोस के आंखों से आंसू छलक पड़े। बोस के पिता को अपने बेटे की दृढ़निश्चयी और सेवाभावी सोच पर गर्व हो रहा था।

नेताजी के 5 प्रेरक कथन-

1.  यदि संघर्ष हो, जोखिम लिया जाए तो जीवन अपनी आधी रुचि खो देता है|

2.  आजादी दी नहीं जाती, ली जाती है |

3.   हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी आजादी की कीमत अपने खून से चुकाएं|

4.  सिर्फ खून ही आजादी की कीमत चुका सकता है. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा |

5.  एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है|

 

 

 


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