भारतीय सेना का नेतृत्व करने वाले भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करिअप्पा, भारतीय कमांडर के पहले चीफ थे| इनका जन्म 28 जनवरी 1900 को कर्नाटक में हुआ था |1942 में करियप्पा लेफ्टिनेंट कर्नल का पद पाने वाले पहले भारतीय अफसर बने |1944 में उन्हें ब्रिगेडियर बनाया गया और बन्नू फ्रंटियर ब्रिगेड को कमांडर के तौर पर तैनात किया गया|
वास्तव में औप्निवेशिक शासन के दौरान भारतीय सैनिकों को सेना में उच्च पदों से वंचित रखा गया था | ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेना की उच्च अधिकारी पदों पर केवल अंग्रेज अधिकारियों को ही नियुक्त किया जाता था| भारतीय सेना दिवस का ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद 1949 में पहली बार भारतीय सेना के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया | भारत के स्वतंत्रता के बाद पहली बार 15 जनवरी 1949 को भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल केएम करिअप्पा को भारतीय सेना अध्यक्ष पद की कमान दी गई थी | इससे पहले इस पद पर चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर थे | लेफ्टिनेंट जनरल केएम करिअप्पा को भारतीय सेना के प्रथम भारतीय नागरिक थे | इस दिन को याद करने के लिए 15 जनवरी को भारतीय थल दिवस के रूप में मनाया जाता है |
1965 के युद्ध की है जब भारत-पाक के युद्ध का आखिरी दिन था |इस दिन स्क्वाड्रन लीडर केसी करियप्पा, एएस सहगल और कुक्के सुरेश को पाकिस्तानी ठिकानों पर बमबारी करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन बमबारी के पहले चक्कर में ही पाकिस्तानी सैनिकों ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से एएस सहदल के विमान पर हमला कर दिया | हालांकि इस हमले में एएस सहगल तो बच गए लेकिन उन्हें वापस बेस कैंप जाना पड़ा था | उनके जाने के बाद मैदान में केसी करियप्पा और कुक्के डटे रहे और अपने दुश्मनों के ठिकानों को तहस-नहस करने में जुटे हुए हैं| लेकिन इसी बीच करियप्पा का विमान लगातार पाकिस्तानी गोलियों का शिकार हो गया| करियप्पा विमान क्षतिग्रस्त हो गया और आग के गोले की तरह भारतीय इलाके में जा गिरा लेकिन करियप्पा का शरीर पाकिस्तान के हिस्से में गिरा| गिरने के बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया| जब केसी करियप्पा पकड़े गए तब उनसे पूछा गया कि क्या वे केएम करियप्पा के संबंधी हैं तो उन्हें पाकिस्तानियों को केवल अपना नाम और रैंक बताया|
जैसे ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खां को पता चला कि केएम करियप्पा के बेटे केसी करियप्पा को पाकिस्तान ने अपने हिरासत में ले लिया है तो उन्होंने तुरंत रेडियो से अनाउंसमेंट करा दी कि केएम करियप्पा के बेटे को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त के जरिए केएम करियप्पा तक जानकारी पहुंचाई कि यदि वे चाहे तो उनके बेटे को छोड़ा जा सकता है लेकिन अपने उसूलों के पक्के केएम करियप्पा ने मना कर दिया| उन्होंने कहा कि केसी करियप्पा केवल उनका नहीं पूरे देश का बेटा है अत: उसके साथ भी अन्य युद्धबंदियों जैसा ही व्यवहार किया जाए लेकिन अगर उसे छोड़ना है तो अन्य युद्धबंदियों को भी छोड़ना होगा| अन्य युद्धबंदी भी मेरे बेटे जैसे ही हैं| कई दिनों तक केसी करियप्पा पाकिस्तान की गिरफ्त में रहे और बाद में उन्हें अन्य कैदियों के साथ ही छोड़ा गया|
अनुशासन पसंद करियप्पा
करियप्पा का सबसे बड़ा योगदान था कि उन्होंने भारतीय सेना को राजनीति से दूर रखा | शायद यही कारण था कि उन्होंने आईएनए के सैनिकों को भारतीय सेना में लेने से इंकार कर दिया| उनका मानना था कि अगर वो ऐसा करते हैं तो भारतीन सेना राजनीति से अछूती नहीं रह सकेगी| अनुशासन का पालन करने में करियप्पा का कोई तुल्य नहीं था| यही कारण था कि उनके नजदीकी दोस्त भी उनसे आजादी लेने में थोड़े झिझकते थे|
मेजर जनरल वी के सिंह अपनी किताब 'लीडरशिप इन इंडियन आर्मी' में लिखते हैं, 'एक बार श्रीनगर में जनरल थिमैया जो उनके साथ दूसरे विश्व युद्ध और कश्मीर में साथ काम कर चुके थे, उनके साथ एक ही कार में बैठ कर जा रहे थे| थिमैया ने सिगरेट जला कर पहला कश ही लिया था कि करियप्पा ने उन्हें टोका कि सैनिक वाहन में धूम्रपान करना वर्जित है| थोड़ी देर बाद आदतन जनरल थिमैया ने एक और सिगरेट निकाल ली, लेकिन फिर करियप्पा की बात को याद करते हुए वापस पैकेट में रख दिया| करियप्पा ने इसको नोट किया और ड्राइवर को आदेश दिया कि वो कार रोकें ताकि थिमैया सिगरेट पी सकें|'
कुछ रोचक तथ्य:-
- के.एम. करिअप्पा इंडिया एक्स-सर्विसमैन लीग के संस्थापक सदस्यों में भी थे। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया।
- उनके साथियों द्वारा उन्हें किपर उपनाम दिया गया था। उनका सबसे प्रिय शौक टिकट संग्रह करना था।
- भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के रूप में भारतीय अधिकारी की नियुक्ति को भी सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है । यह अंग्रेजों के हाथों से भारतीयों के हाथों में सत्ता परिवर्तन की महत्वपूर्ण घटना को चिह्नित करने के लिए भी मनाया जाता था।
- फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा फील्ड मार्शल की पांच सितारा रैंक पाने वाले दो भारतीय सेना अधिकारियों में से एक थे। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ दूसरे अधिकारी थे।
- केएम करिअप्पा स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में दाखिला लेने वाले पहले भारतीय सैन्य अधिकारी थे। वह इंपीरियल डिफेंस कॉलेज, कैम्बर्ली, यूके में प्रशिक्षण के लिए चुने गए पहले दो भारतीयों में से एक थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों के खिलाफ बर्मा अभियान में उनकी भूमिका के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से भी सम्मानित किया गया था।
- करिअप्पा का विवाह एक वन अधिकारी की बेटी मुथु माचिया से हुआ था। बाद में वैचारिक मतभेदों और करिअप्पा की व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं के कारण, 1945 में उनका विवाह टूट गया। 1993 में 94 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।
