प्रेरक प्रसंग:- नम्रता का परिणाम | The Voice TV

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“जो हम खुशी से सीखते हैं उसे हम कभी नहीं भूलते।” — अल्फ्रेड मर्सिएर

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प्रेरक प्रसंग:- नम्रता का परिणाम

Date : 07-May-2024


एक बार चीनी संत चांग-चुआंग  बीमार पड़े, तब उन्हें देखने लाओत्से गए | लाओत्से ने उन्हें कुछ उपदेश देने की विनती की | चांग-चुआंग  ने पूछा, “जब कोई अपने पुराने गाँव जाता है, तो गाँव की सीमा पर पहुंचते ही अपनी गाड़ी से क्यों उतर जाता है ?” लाओत्से ने जवाब दिया, “इस प्रथा का यह तात्पर्य है कि मनुष्य को अपना उदगम न भूल जाना चाहिए |”
फिर चांग ने अपना मुँह खोलते हुए पूछा, “क्या मेरे मुख में दांत हैं ?” – “नहीं तो !” – लाओत्से ने जवाब दिया| “और जीभ ?” – चांग का आगला प्रश्न था | “वह तो है “ – लाओत्से बोले | “ ऐसा क्यों है, क्या कारण बता सकते हो ?” – चांग का अगला प्रश्न था | - “महोदय, मेरा विचार है कि नम्र होने से जीभ कायम है, जबकि दांत कड़े होने के कारण विनाश को प्राप्त हुए हैं | “

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