इतिहास के पन्नों में 27 दिसंबर | The Voice TV

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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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इतिहास के पन्नों में 27 दिसंबर

Date : 27-Dec-2023

 देश-दुनिया में यूं तो हर वक्त, हर पल कुछ न कुछ घटित होता रहता है, लेकिन कुछ घटनाएं इतनी महत्वपूर्ण होती हैं कि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं. और कभी- कभी इन्हीं घटनाओं के आधार पर भविष्य के फैसले भी लिए जाते हैं. इसके अलावा आने वाली पीढ़ी को इन घटनाओं के बारे में जानना भी जरूरी होता है. इसके अलावा ये घटनाएं प्रतियोगी परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए लहजे से भी महत्वपूर्ण होती हैं. तो आइए इस वीडियो में जानते हैं इतिहास में आज के दिन यानी 27 दिसंबर को इतिहास में क्या-क्या महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं. 1797 - उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब का जन्म हुआ था. 1861 - चाय की पहली सार्वजनिक नीलामी कलकत्ता में हुई थी. 1911 - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दौरान पहली बार 'जन गण मन' गाया गया. 1934- पर्सिया के शाह ने 'पर्सिया' का नाम बदलकर 'ईरान' करने की घोषणा की थी. 1939- तुर्की में भूकंप से लगभग 40,000 लोगों की मौत हो गई थी. 1945 में 29 सदस्य देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना की गयी. 1972- उत्तरी कोरिया में नया संविधान लागू हुआ | 

यह तारीख पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी तारीख को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी। बेनजीर भुट्टो किसी मुस्लिम देश की कमान संभालने वाली पहली महिला थीं।

वह 27 दिसंबर, 2007 की तारीख थी। 15 साल के बिलाल ने एक धमाका किया और बेनजीर की मौत हो गई। बेनजीर रावलपिंडी में चुनावी रैली में हिस्सा लेकर लौट रही थीं। बिलाल पहले उनकी कार के पास गया। धमाका किया। फिर उन्हें गोली मारी। इसके बाद खुद को उड़ा दिया। ऐसा दावा किया जाता है कि बिलाल यह हमला पाकिस्तानी तालिबान के हुक्म की तामील करते हुए किया।

बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पहले प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी थीं। जनरल जिया-उल-हक के जमाने में उनके पिता का सियासी सफर वक्त से पहले उस वक्त खत्म हो गया जब उन्हें फांसी दे दी गई थी। बेनजीर पाकिस्तान की दो बार प्रधानमंत्री बनीं लेकिन मुल्क की फौज ने उनपर भरोसा नहीं किया। भ्रष्टाचार के आरोपों की मदद से सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। बेनजीर भुट्टो अपनी मौत के वक्त तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए प्रचार कर रही थीं। बेनजीर की मौत के बाद पाकिस्तान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समर्थक सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह चक्काजाम हुआ। आगजनी हुई।


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