नई दिल्ली, 14 जून । देश में पिछले 12 वर्षों में अवसंरचना विकास और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार में अभूतपूर्व बदलाव दर्ज किया गया है। साल 2014 में सड़क नेटवर्क लगभग 91,287 किलोमीटर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 61 प्रतिशत बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर से अधिक हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के इस तीव्र विस्तार और वैश्विक स्तर की अवसंरचना ने देश की आर्थिक प्रगति को गति दी है और माल ढुलाई लागत को कम किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने रविवार को बताया कि साल 2013-14 में सड़क निर्माण की औसत गति 11.6 किलोमीटर प्रति दिन थी, जो साल 2025 में बढ़कर करीब 34 किलोमीटर प्रति दिन पहुंच चुकी है।
मंत्रालय ने बताया कि आईआईएम बैंगलोर के एक अध्ययन के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास से कारखानों तक पहुंच आसान हुई है, जिससे परिवहन लागत में भारी कमी आई है। साथ ही, प्रमुख 'भारतमाला परियोजना' के तहत 34,800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारा विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें से मार्च 2026 तक 22,590 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
मंत्रालय के अनुसार, करीब 1,386 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पूरा होने पर देश का सबसे लंबा नियंत्रित प्रवेश एक्सप्रेस-वे बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में 5 जून को इसके गुजरात खंड के किम-एना (36 किमी) और गंदेवा-एना (27.5 किमी) हिस्से का उद्घाटन किया है। इसके अलावा करीब 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे ने भी यात्रा समय को काफी घटाया है।
दिल्ली के द्वारका एक्सप्रेस-वे के दिल्ली खंड का उद्घाटन अगस्त 2025 में और हरियाणा खंड का उद्घाटन मार्च 2024 में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। वहीं, दक्षिण भारत में 118 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेस-वे ने यात्रा का समय 3 घंटे से घटाकर 75 मिनट कर दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 को हुआ था। इसमें राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा बनाया गया है।
