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25 फरवरी जयंती विशेष: जनसंघ का पहला घोषणापत्र लिखने वाले राष्ट्रवादी बलराज मधोक

Date : 25-Feb-2024

 हमारे देश में समय-समय पर महान विभूतियाँ जन्म लेती रही है , उन्हीं में से एक थे प्रो. बलराज मधोक । 

 

बलराज मधोक का जन्म 25 फ़रवरी1920 को जम्मू एवं काश्मीर राज्य के अस्कार्डू में हुआ था। 

आज मधोक जी की वाणी सभी संघ के लोग बोल रहे हैं। कभी दीनदयाल उपाध्याय उनके मातहत थे। लालकृष्ण आडवाणी को उन्होंने ऊँगली पकड़कर राजनीति सिखाई थी। जनसंघ का पहला घोषणा पत्र मधोक जी ने तैयार किया था। 21 अक्टूबर,1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को संस्थापक अध्यक्ष और मधोक जी को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया था । मधोक जी दो बार सांसद रहे। पहली बार 1960 में नई दिल्ली और 1967 में दक्षिणी दिल्ली से निर्वाचित हुए। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. नीलम संजीव रेड्डी लोकसभा में स्पीकर थे तब उन्होंने कहा था कि मधोक जी अकेले ही 350 सांसदों पर भारी है। मधोक जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक , प्रजा परिषद् के संस्थापक और मंत्री , अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के संस्थापक तथा जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे।मधोक जी का जन्म 25 फरवरी 1920 को स्कर्दू नगर में हुआ । उनका बचपन स्कर्दू , लेह तथा कश्मीर घाटी के श्रीनगर और बारामुला में बीता।

22 अक्टूबर, 1947 में कबालियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था l महाराजा हरि सिंह जी ने इस संकट की घड़ी में श्रीनगर की सुरक्षा की जिम्मेदारी मधोक जी को सौंपी थी क्योंकि इनको कश्मीर की काफी जानकारी थी। मधोक जी के बड़े भाई बालकृष्ण मधोक जी का दामाद होने के कारण मधोक जी मेरे निवास पर या सरकारी गेस्ट हाउस में रुका करते थे। मीराबाई मार्ग स्थित गेस्ट हाउस में लिफ्ट ख़राब हो जाने के कारण हम दोनों ही उसमे काफी देर तक फंसे रहे थे। एक बार हरदोई जाने के लिए निवास से सुबह 5:00 बजे निकल पड़े , कार में अखिल भारतीय जनसंघ का झंडा लगा था l हम लोग संडीला में नाश्ता करने के लिए रुके l शरारती तत्वों ने गाड़ी के अगले दोनों पहियों के नट-बोल्ट ढीले कर दिए l संडीला से आगे एक नाला पड़ता है , वहां पर एक पुल बना हुआ है , जब हमारी गाड़ी उस पुल पर बढ़ रही थी तब एक झटके के साथ गाड़ी के दोनों पहिए खुल गए और गाड़ी गड्ढे में गिर गई l मुझे भी चोट आई और मधोक जी को भी काफी चोट आई थी l तभी संयोगवश उधर से जिलाधिकारी की जीप आ रही थी। जिलाधिकारी और ट्रक वालों ने हम लोगों को गड्ढे से निकाला और संडीला में उपचार कराने के उपरांत जिलाधिकारी ने कार रोककर बलरामपुर हॉस्पिटल, लखनऊ छुडवाया था l

 

इस दुर्घटना की सूचना उसी रात दूरदर्शन ने प्रसारित कर दी थी । दूसरे दिन सभी समाचार पत्रों में उनके एक्सीडेंट की खबर प्रकाशित हुई थी l पूरे भारतवर्ष से लगभग हजारों लोग मधोक जी का हाल-चाल लेने पहुंचे थे ,परंतु भाजपा के उच्च अधिकारी,जो मधोक जी के सहयोगी रह चुके थे, वह सभी चुप्पी साधे थे , कोई भी उनका हाल-चाल लेने नहीं आया। लोगों के आग्रह पर मधोक जी लखनऊ से सांसद के लिए लड़े। चुनाव लड़ने के लिए उनके पास केवल 7000 रूपये थे जिसे मेरी पत्नी यानि कि अपनी भतीजी (गायत्री पुरी) को रखने को दिया था और थोड़ा रुपया हमने दोस्तों से इकट्ठा किया था। दरअसल उगते सूर्य को सभी प्रणाम करते है। वह कहते थे क्यों हमारा पैसा ख़राब करते हो ? लोग टोंट कस्ते थे कि, उन्हें जीतना तो है नहीं। फिर भी किसी ने 500 रूपये तो किसी ने 1000 रूपये या ज्यादा से ज्यादा एक-आधे ने 2000 रूपये दिए। ऐसा लगता था जैसे चन्दा नहीं भीख दे रहे है। कद छोटा होने के कारण डी.सी.एम. में तख़्त लगाकर और उसपर खड़े होकर भाषण देते थे। भाजपा के लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे थे। संत कुमार यादव , प्रधान सिंह बग्गा जी थ्री व्हीलर से अनाउंस करते थे कि मधोक जी फलाने चौराहे पर भाषण देंगे। उनकी बेटी माधुरी और शक्ति भी प्रचार के लिए लखनऊ आई थी।

 

कई बैंकों ने पोस्टर बनवा कर दिए थे l चुनाव चिन्ह “तीर-कमान” और ऊपर हिंदू गौरव लिखा था। मधोक जी का नारा था – “जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा”। बीबीसी लंदन ने कहा था- मधोक जी एक लाख से अधिक वोंटों से जीतेंगे l इस खबर से अटल जी घबरा गए थे। अटल जी शायद कलकत्ता से वापस आ रहे थे l लखनऊ में एयरपोर्ट पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर उन्होंने प्रेस को बताया कि श्री मंधाता सिंह जी को हमारा समर्थन है , न कि मधोक जी को l केवल नवभारत टाइम्स में 2 लाइन की खबर छपी थी, लेकिन इसका भी असर पड़ा था, अटल जी अगर प्रेस कॉन्फ्रेंस न करते तो मधोक जी लखनऊ से सांसद होते l मधोक जी ने हिंदुत्व की अलख जगा दी , जिसका लाभ आने वाले नेताओं को मिला।

 

मैं और मेरी पत्नी मधोक जी से मिलने गए थे। मेरी अक्सर उनसे देश के बारे में चर्चा हो जाती थी। उन्होंने कह अगर मोदी जी प्रधानमंत्री बन जाए तो देश कि स्थिति भिन्न होगी। एक दिन ऐसा आ ही गया जब मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बन गए। मधोक जी जो देश के लिए चाहते थे मोदी जी ने काफी हद तक पूरी कर दी जैसे 370 धारा ख़त्म करना और श्री राम जन्मभूमि आदि। 1967 में लोकसभा में श्री राम जन्मभूमि , श्री कृष्ण जन्मभूमि एवं काशी विश्वनाथ मंदिर पर मुस्लिम शासकों द्वारा वास्तविक रूप नष्ट कर दिया था। ऐसा प्रश्न किया था, जिसका कांग्रेस मंत्री संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए थे l उपर्युक्त जगहों पर मधोक जी के साथ मुझे भी कई बार जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मधोक जी ने कई किताबें लिखी , उनमें से “रैशनल ऑफ़ हिन्दू स्टेट ” 1981 , “हिंदू राज्य तर्क तथ्य ” एवं “इतिहास की कसौटी पर” प्रमुख थी , जिसमें मुस्लिम सांसदों द्वारा प्रतिबन्ध की मांग की गई , लेकिन उसमे कुछ आपत्तिजनक न पाए जाने पर तात्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने मधोक जी को अपनी सरकार में शामिल होने के लिए न्योता दिया। अगर महत्वाकांक्षी होते तो कांग्रेस में मंत्री होते। कानों में बात पड़ी कि संजय गाँधी जी उनके प्रसंशक है और उनसे मिलना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि वह जब चाहे मुझसे मिलने आ सकते हैं। मेरे लिए उनके आवास पर जाना संभव नहीं होगा। उनके मित्रों ने कहा संजय जी का भी आपके निवास पर मिलना उचित नहीं होगा। तब यह तय हुआ कि किसी अन्य स्थान पर मिल लिया जाए। कुछ दिनों बाद बताया गया कि संजय गाँधी का व्यक्ति 23-06-1981 को आपके घर पर मिलने आएगा तथा समय और स्थान तय करेगा। मधोक जी अपनी दिनचर्या के अनुसार 23 जून को प्रातः काल समाचार पत्र पढ़ रहे थे कि सहसा टेलीफोन की घंटी बजी और मधोक जी को बताया गया कि संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हो गया है

 

दीनदयाल जी के निधन के बाद मधोक जी को जनसंघ कार्यालय में बुलाया गया कि प्रत्याशियों का चयन करना है। जबकि चुनाव नहीं थे , लोग कह रहे थे दीनदयाल जी के निधन के बाद जनता आपको ही जनसंघ का नेता मानती है। इसलिए आप जनसंघ के सदस्यता से त्यागपत्र दे दीजिये । इस बात पर मधोक जी ने कहा कि -“मैं जनसंघ का संस्थापक सदस्य हूँ , मैं त्यागपत्र क्यों दूँ ? आपलोग देना चाहते हो तो दे दीजिये। इस पर सब हक्के-बक्के रह गए।

मधोक जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश को समर्पित कर दिया इनका स्वर्गवास 2 मई 2016 को हुआ l


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