जमशेदजी टाटा संपूर्ण जमशेदजी नुसरवानजी टाटा समूह के संस्थापक थे जिन्होंने 1870 के दशक में मध्य भारत में एक कपड़ा मिल से शुरुआत की थी। वह एक अग्रणी उद्योगपति थे जिनकी दूरदर्शिता और महत्वाकांक्षी प्रयासों ने भारत को औद्योगिक देशों की श्रेणी में शामिल करने में मदद की।
वह एक देशभक्त और मानवतावादी थे जिनके विचारों और दूरदर्शिता ने एक असाधारण व्यापारिक समूह को आकार दिया। उनके गुण उन्हें एक असाधारण व्यक्ति के रूप में चिह्नित करते थे। उनकी मानवीयता के गुण ने उन्हें अद्वितीय बना दिया और उन्हें आधुनिक भारत के महानतम सपूतों की कतार में खड़ा कर दिया।
प्रारंभिक जीवन-
उनका जन्म 3 मार्च 1839 को नवसारी, गुजरात में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता नुसेरवानजी टाटा और माता जीवनबाई टाटा थीं। वह नुसरवानजी टाटा की पहली संतान और इकलौते बेटे थे। नुसेरवानजी परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने पुरोहिताई में शामिल होने की परंपरा को तोड़ दिया और व्यवसाय में अपना हाथ आजमाया। जमशेदजी का पालन-पोषण नवसारी में हुआ |
और जब वे 14 वर्ष के थे, तब वे अपने पिता के साथ बंबई चले गये। उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया और 1858 में 'ग्रीन स्कॉलर' के रूप में उत्तीर्ण हुए, जो आज के स्नातक के बराबर है। जमशेदजी टाटा ने छात्र रहते हुए हीराबाई डब्बू से शादी की।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह अपने पिता की निर्यात-व्यापार फर्म में शामिल हो गए और जापान, चीन, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में मजबूत शाखाएँ स्थापित करने में मदद की।
अंग्रेजों को दिया तगड़ा कॉम्पीटिशन
जमशेदजी बिजनेस में उस वक्त उतरे जब भारतीय लोग अंग्रेजों के शासन के चलते हताशा का अनुभव कर रहे थे. ऐसे समय में उन्होंने बिजनेस में उतरने का मन बनाया हालांकि, शुरुआत में उन्हें कुछ असफलताएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. इसके बाद 29 साल की उम्र में जमशेदजी ने 21,000 रुपये की पूंजी के साथ 1869 में बॉम्बे में एलेक्जेंड्रा मिल की स्थापना की. उनका यह फैसला टाटा ग्रुप के बिजनेस साम्राज्य की नींव बनी.
कर्मचारी कल्याण के लिए किए कई काम
जमशेदजी ने एम्प्रेस मिल्स में कर्मचारियों को भत्ते देने शुरू किए, जिससे टाटा ग्रुप की पहचान एम्पलाइ वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के तौर पर हुई. जमशेदजी ने 1880 से लेकर 1904 में तक अपनी आखिरी सांस तक टाटा ग्रुप को खड़ा कर दिया. शैक्षणिक संगठन से लेकर स्टील और मोटर इंडस्ट्री स्थापित कर दी थी|
आज की तारीख में टाटा ग्रुप अनेक कंपनियों का संचालन करता है, जिनमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा स्टील, टाइटन, तनिष्क, वोल्टास, टाटा केमिकल्स, टाटा कम्युनिकेशन, ट्रेंट और टाटा एलेक्सी शामिल है | इन सबमें से एक है प्रसिद्ध ताज होटल
विश्व प्रसिद्ध 'ताजमहल होटल' सिर्फ़ मुम्बई ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत में ख्यातिप्राप्त है। 'ताजमहल होटल' के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है। सिनेमा के जनक लुमायर भाईयों ने अपनी खोज के छ: महीनों बाद अपनी पहली फ़िल्म का शो मुम्बई में प्रदर्शित किया था। वैसे तो वे ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में उन्होंने मुम्बई में भी शो रखने की बात सोची। 7 जुलाई, 1896 को उन्होंने मुम्बई के तत्कालीन आलीशान वोटसन होटल में अपनी छ: अलग-अलग फ़िल्मों के शो आयोजित किए। इन शो को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोगों को ही आमंत्रित किया गया था, क्योंकि वोटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था कि "भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं"।
'टाटा समूह' के जमशेदजी टाटा भी लुमायर भाईयों की फ़िल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें वोटसन होटल में प्रवेश नहीं मिला। रंगभेद की इस घृणित नीति के ख़िलाफ़ उन्होंने आवाज भी उठाई। इस घटना के दो साल बाद ही वोटसन होटल की सारी शोभा धूमिल कर दे, एक ऐसे भव्य 'ताजमहल होटल' का निर्माण जमशेदजी ने शुरू करवा दिया। 1903 ई. में यह अति सुंदर होटल बनकर तैयार हो गया। कुछ समय तक इस होटल के दरवाज़े पर एक तख्ती भी लटकती थी, जिस पर लिखा होता था कि- "ब्रिटिश और बिल्लियाँ अंदर नहीं आ सकतीं।
तत्कालीन मुम्बई में ताज होटल की इमारत बिजली की रोशनी वाली पहली इमारत थी, इसीलिए इसकी चकाचौंध हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती थी। इसकी गणना संसार के सर्वश्रेष्ठ होटलों में की जाने लगी थी। जमशेदजी का यह उद्यम उनके अन्य उद्यमों की तुलना में बिल्कुल अलग था। सच तो यह था कि वे इसे उद्योग की तरह चलाना भी नहीं चाहते थे। इसीलिए उन्होंने खर्च का कभी हिसाब भी नहीं लगाया।
जमशेदजी टाटा: मृत्यु
19 मई 1904 को बैड नौहेम में उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन आज भी, वह दुनिया भर के उद्यमियों के लिए प्रेरणा और प्रेरणा का स्रोत हैं।
