13 जून । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को ‘भारत इनोवेट्स’ से जुड़े दो रणनीतिक दस्तावेज़ जारी किए। ये दस्तावेज़ उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों से जुड़े भारत के उभरते नवाचार और स्टार्टअप तंत्र को प्रदर्शित करते हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस दृष्टिकोण को मजबूती देती है, जिसका उद्देश्य भारत को ज्ञान के उपभोग वाले देश से ज्ञान सृजन, नवाचार और तकनीकी नेतृत्व करने वाले देश में बदलना है।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
दस्तावेज़ जारी करने के अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के मिशन डायरेक्टर दीपक बागला, शिक्षा मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा की संयुक्त सचिव सौम्या गुप्ता तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
एनईपी 2020 के विजन को करता है मजबूत
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक प्रमुख उद्देश्य भारत को ज्ञान के उपभोग वाली व्यवस्था से ज्ञान सृजन और नवाचार आधारित व्यवस्था में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ में शामिल स्टार्टअप देश के प्रमुख संस्थानों, इनक्यूबेटरों और अनुसंधान तंत्र से उभरकर सामने आए हैं, जो उच्च शिक्षा क्षेत्र की बढ़ती नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।
वैश्विक निवेशकों से जुड़ने का मिलेगा अवसर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का प्रतिबिंब है, जिसका उद्देश्य भारत की नवाचार क्षमताओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि यह पहल भारतीय स्टार्टअप्स को ऐसी वैश्विक निवेश फर्मों से जोड़ रही है, जो 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्तियों का प्रबंधन करती हैं और दुनिया भर में 12,000 से अधिक निवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 100 से अधिक वैश्विक निवेशकों और प्रमुख संस्थानों के शामिल होने की संभावना है, जो भारत के डीप-टेक और नवाचार तंत्र में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।
20 मिलियन डॉलर निवेश पर बातचीत अंतिम चरण में
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि निवेशकों ने इस पहल में पहले ही गहरी रुचि दिखाई है और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। भारतीय स्टार्टअप्स और वैश्विक निवेशकों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए पेरिस, टोक्यो और बेंगलुरु में रोडशो की श्रृंखला भी आयोजित की गई है।
आईआईटी और प्रमुख संस्थान प्रदर्शित करेंगे शोध परियोजनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईटी, आईआईएससी, बिट्स पिलानी और अन्य प्रमुख संस्थान ‘भारत इनोवेट्स’ के तहत अपनी प्रमुख शोध एवं नवाचार परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे। इससे राष्ट्रीय विकास में शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े नवाचारों के बढ़ते योगदान को रेखांकित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा
प्रधान ने बताया कि ‘इनक्यूबेटर इनोवेशन ब्रिज’ और ‘इंडस्ट्री इनोवेशन ब्रिज’ के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सहयोग के लिए व्यवस्थित मार्ग तैयार किया जा रहा है। इस पहल के जरिए भारतीय नवप्रवर्तकों को विश्व के प्रमुख संस्थानों, कॉर्पोरेट्स और नवाचार तंत्र से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि फ्रांस समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ नवाचार-केंद्रित 28 समझौता ज्ञापनों की पहचान की गई है।
डीप-टेक संस्कृति विकसित करने की जरूरत : प्रो. सूद
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप एजेंडा को आगे बढ़ाने में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को केवल डीप-टेक कंपनियां ही नहीं, बल्कि डीप-टेक नवाचार की मजबूत संस्कृति भी विकसित करनी होगी।
120 स्टार्टअप और 50 शोध परियोजनाओं का संकलन
जारी किए गए रणनीतिक दस्तावेज़ों में ‘भारत इनोवेट्स स्टार्टअप कम्पेंडियम’ शामिल है, जिसमें देशभर से चुने गए 120 उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स की जानकारी दी गई है। इसमें क्षेत्रवार बाजार विश्लेषण, तकनीकी रुझान, वैश्विक अवसरों की मैपिंग और रणनीतिक जुड़ाव के उपाय शामिल हैं। दूसरा दस्तावेज़ आईआईटी, आईआईएससी और अन्य प्रमुख संस्थानों की लगभग 50 अत्याधुनिक शोध एवं नवाचार परियोजनाओं को प्रस्तुत करता है।
फ्रांस में होगा भारत इनोवेट्स 2026 का आयोजन
इंडिया-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम में 3,000 से अधिक आवेदनों में से चुने गए 120 डीप-टेक नवप्रवर्तक भाग लेंगे, जो अंतरिक्ष, रक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भारत की शोध क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास सहित 15 प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान भाग लेंगे। इन संस्थानों के पास 1,500 से अधिक पेटेंट हैं और उन्होंने सामूहिक रूप से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। इनमें सूचीबद्ध कंपनियां आइडियाफोर्ज और एथर एनर्जी भी शामिल हैं।
