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जानें सेहत के लिए कैसे नुकसानदेह है फ्रोजन डेजर्ट, न्यूट्रिशनिस्ट ने दी बड़ी चेतावनी

Date : 12-Jun-2026

 गर्मी के मौसम में आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट की मांग तेजी से बढ़ जाती है. लेकिन हाल ही में क्वालिटी वॉल्स ने अपने उत्पादों में पाम ऑयल की जगह डेयरी आधारित सामग्री इस्तेमाल करने की घोषणा ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि आखिर फ्रोजन डेजर्ट और असली आइसक्रीम में क्या अंतर है और क्या फ्रोजन डेजर्ट वास्तव में सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं.

क्या है मामला?

क्वालिटी वॉल्स ने घोषणा की है कि वह 2027 तक अपने पूरे पोर्टफोलियो को पाम ऑयल आधारित फॉर्मूले से हटाकर दूध आधारित उत्पादों में बदलने की योजना बना रही है. कंपनी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब उपभोक्ताओं के बीच खाद्य उत्पादों की क्वालिटी और सामग्री को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस फैसले से पूरे फ्रोजन डेजर्ट उद्योग पर असर पड़ सकता है.

क्यों यह हमारे लिए नुकसानदायक?

एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूट्रिशनिस्ट मैक सिंह के अनुसार, आज की पीढ़ी पारंपरिक कुल्फी और घर में बनने वाली ठंडी मिठाइयों से दूर होकर फ्रोजन डेजर्ट की ओर बढ़ रही है. हालांकि, उनके मुताबिक इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्रियां स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मैक सिंह बताते हैं कि फ्रोजन डेजर्ट में अक्सर पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है. ज्यादा मात्रा में इसका सेवन हृदय स्वास्थ्य पर निगेटिव प्रभाव डाल सकता है और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है. इससे धमनियों में रुकावट का खतरा भी बढ़ सकता है.

मैक सिंह यह भी बताते हैं कि कई फ्रोजन डेजर्ट में असली दूध की जगह मिल्क सॉलिड्स या होल मिल्क पाउडर का उपयोग किया जाता है. उनका कहना है कि इनमें ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल मौजूद हो सकता है, जो ब्लड बेसल्स को नुकसान पहुंचाने और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाने से जुड़ा माना जाता है. यही वजह है कि ऐसे उत्पादों का नियमित सेवन स्वास्थ्य एक्सपर्ट की तरफ से उचित नहीं माना जाता. फ्रोजन डेजर्ट में लिक्विड ग्लूकोज का भी इस्तेमाल

इसके अलावा फ्रोजन डेजर्ट में लिक्विड ग्लूकोज का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो चीनी का एक प्रोसेस्ड रूप है. स्वाद और रंग को आकर्षक बनाने के लिए इनमें सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग भी मिलाए जाते हैं. कई उत्पादों में वेजिटेबल सोया प्रोटीन, स्टेबलाइजर्स, इमल्सीफायर्स और अन्य एडिटिव्स भी शामिल होते हैं. यही कारण है कि इन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में रखा जाता है.

कई शो में यह भी सामने आया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज, हार्ट रोग और खराब आंत हेल्थ जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है.  एक्सपर्ट का कहना है कि जब लोग ऐसे उत्पादों पर अधिक निर्भर हो जाते हैं, तो वे पोषक तत्वों से भरपूर नेचुरल खाद्य पदार्थों का सेवन कम कर देते हैं.

 


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