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नेपाल में प्रचंड और बाबूराम भट्टराई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का परमादेश जारी

Date : 12-Jun-2026

 काठमांडू, 12 जून । पूर्व बाल सैनिकों से संबंधित मामले में नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को परमादेश जारी किया, जिससे देश के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों और माओवादी नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

माओवादी सशस्त्र सेना में रहे लेनिन बिष्ट और अन्य की ओर से दायर इस याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' और डॉ. बाबूराम भट्टराई को भी प्रतिवादी बनाया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रिट याचिका में उठाई गई मांगों के अनुरूप परमादेश जारी किया।

लंबे समय से चल रहे इस कानूनी मामले में न्यायालय का यह फैसला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस फैसले को नेपाल के सशस्त्र संघर्ष के दौरान बाल सैनिकों की भर्ती से जुड़े आरोपों पर आगे कानूनी प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसके वास्तविक कानूनी प्रभावों का निर्धारण न्यायालय के पूर्ण फैसले की सामग्री सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लेनिन बिष्ट ने न्याय और पूर्व बाल सैनिकों की एकता के अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बिष्ट ने कहा, “पूर्व बाल सैनिकों के लिए न्याय और एकता की लड़ाई में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई। आज हमने एक बड़ी लड़ाई जीत ली है। उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ ने परमादेश जारी किया है। आप सभी का एक बार फिर धन्यवाद।”

उच्चतम न्यायालय ने अभी फैसले का पूर्ण पाठ सार्वजनिक नहीं किया है, जिसकी प्रतीक्षा है।


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