"नवसंवत्सर के स्वामी हनुमान सज्जनों के लिए अतीव शुभकारी और दुर्जनों के अत्यंत कष्टकारी होंगे " Date : 09-Apr-2024 कालयुक्त (पंचांग भेद -यद्यपि क्रोधी)नवसंवत्सर चैत्र प्रतिपदा तदनुसार 9 अप्रैल से प्रारंभ हो गया है और भारतीय वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार 30 वर्षों बाद 5 राजयोग का अद्भुत संयोग बन गया है। ऐंसे में भारत के विभिन्न ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों में परस्पर 3 संबंध होते हैं जो क्रमशः युति संबंध, दृष्टि संबंध और राशि परिवर्तन संबंध हैं, उनका मानना है कि अशुभ घटनाएँ हो सकती हैं परंतु यह ध्यान रखें कि नवसंवत्सर के राजा मंगल हैं, तदनुसार उनके स्वामी हनुमान जी हैं और उनके मंत्री शनि हैं, तो मंगल के स्वामी हनुमान जी का शनि महाराज पर बड़ा उपकार है, क्योंकि हनुमान जी ने ही शनि महाराज को रावण से मुक्ति दिलाई थी, साथ ही एक बार शनि देव हनुमान जी से पराजय का स्वाद ले चुके हैं और शनि महाराज का उनको आशीर्वाद भी है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा और शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने से, शनि देव अनिष्ट नहीं करेंगे, इसलिए हनुमान जी की पूजा - अर्चना से सज्जनों के लिए नवसंवत्सर अतीव शुभकारी होगा और दुर्जनों के लिए अत्यंत कष्टकारी होगा। हिंदुओं का वर्षारंभ "नास्ति मातृ समोगुरुः" पर आधारित है, जिसका अर्थ है, माता के समान अन्य कोई गुरु नहीं है। गुरुरूपिणी माता की वंदना-उपासना से नए वर्ष का आरंभ होता है।अतः अशुभ स्वमेव शुभ में बदल जाएगा। हिंदू नववर्ष की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और शश राजयोग में हो गई है इसके अतिरिक्त वर्ष के पहले दिन रेवती और अश्विनी नक्षत्र भी संयोग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा गुरु की राशि मीन में होंगे, शनि देव स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान होकर शश राजयोग का भी निर्माण होगा। इसलिए चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है। कालयुक्त(पंचांग भेद - यद्यपि क्रोधी) "नव संवत्सर -"सूर्य संवेदना पुष्पैः, दीप्ति कारुण्यगंधने। लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सरवस्व मंगलम्।।"चैत्र नवरात्र के आलोक में सृष्टि सृजनोत्सव दिवस, हिन्दू नव वर्ष(वसुधैव कुटुम्बकम् के आलोक में संपूर्ण विश्व के लिए सर्वव्यापी एवं सनातन) भगवान् झूलेलाल प्रगटोत्सव दिवस, गुड़ी पड़वा सहित विभिन्न भारतीय पर्वों की हार्दिक बधाईयाँ | पञ्चसु महाभूतेषु पृथ्वीमहाभूतं चैत्रे मासि शुक्लपक्षस्य प्रथमे दिवसे सृष्टम्।"चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि"इति वचनमत्र प्रमाणम्।।अयं दिवसः पृथिव्या जन्मदिवसः।अद्य स एव दिवसः।पृथिव्याः मृण्मयत्वात् भूमेरपि अयं जन्मदिवसः। तस्मात् भूविज्ञानस्यापि जन्मदिवसः--(Birthday of Geological Science.)अद्य ( ९-४-२०२४)चैत्रशुक्लप्रतिपत्तिथिः।विश्वसृष्ट्यारम्भदिवसः। अतः विश्ववासिनां विश्वेषां सोदरकल्पानां जरायुजानां, स्वेदजानाम्,अण्डजानाम्, उद्भिदां कृते हार्दमभिनन्दनम्। चैत्र वर्ष प्रतिपदा (कालयुक्त पंचांग भेद से - यद्यपि क्रोधी )विक्रम संवत् २०८१, चेती चाँद, गुडी पड़वा, आदि शक्ति उपासना की हार्दिक शुभकामनाएं लेखक - डॉ.आनंद सिंह राणा