"अनादि काल से माँ नर्मदा पर आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं, बम्बुलिया गीत " | The Voice TV

Quote :

“जो हम खुशी से सीखते हैं उसे हम कभी नहीं भूलते।” — अल्फ्रेड मर्सिएर

Editor's Choice

"अनादि काल से माँ नर्मदा पर आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं, बम्बुलिया गीत "

Date : 20-May-2024

आध्यात्मिक शक्ति से ओत-प्रोत ये गीत जहाँ एक ओर आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर मानसिक तनाव और अकेलापन दूर करते हैं तथा मनौती पूरी करते हैं|

बम्बुलिया गीत वस्तुतः महाकौशल के बुंदेलखंड की श्रुति परंपरा के रुप में उद्भूत हुए हैं, जिसके मूल में भगवान् शिव हैं और इन गीतों में बार - बार लम्बे आलाप या टेर होते हैं, इसलिए इन्हें लमटेरा भी कहा जाता है। तदुपरांत जब महाकौशल में श्रीराम का आगमन हुआ तब ये गीत रमटेरा के नाम से अभिहित किए गए साथ ही भगवान् कृष्ण माँ नर्मदा, श्रीगणेश, भगवान् भैरव, माँ गंगा के प्रति गहरी भक्ति भावना की अभिव्यक्ति की गई है। बम्बुलिया गीत धर्म और अध्यात्म के अलौकिक और लौकिक दोनों पक्षों को महत्व देते हैं। इनकी चार प्रमुख शैलियां हैं। जीवन के हर पड़ाव पर बम्बुलिया गीत रचे बसे हैं और सुख - दुख के साथी हैं। बम्बुलिया गीत भक्ति की सबसे सहज और सरल अभिव्यक्ति के प्रतीक हैं। वाचिक परंपरा के रुप में ये गीत महाकौशल के लोक संगीत की आत्मा हैं।
बम्बुलिया वास्तव में प्रकृति चित्रण, संवेदना, प्रकृतिकरण, मनोकामना की पूर्ति हेतु माँ नर्मदा पर अगाध आस्था और विश्वास के गीत हैं। जिसमें अनादि काल से चली आ रही माँ नर्मदा की सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग समाहित हैं।एक भौगोलिक अभिव्यक्ति के रुप नर्मदा नदी अपने गुण धर्म के कारण सनातन धर्म में देवी माँ के रुप स्थापित होकर तारणहार बन जाती है और जिसकी स्तुतियां लोक भाषा में वैदिक ऋचाओं की तरह बम्बुलिया के रुप पल्लवित और पुष्पित होती हैं। यही तो सनातन धर्म और संस्कृति का वैशिष्ट्य है। शोध आलेख नई दुनिया के वरेण्य पत्रकार श्रीयुत तरुण मिश्रा एवं उदीयमान पत्रकार श्रीयुत दीपक जैन जी के भगीरथ प्रयास से तैयार हुआ है। एतदर्थ आभार। 
 
 
 
लेखक - डॉ आनंद सिंह राणा

RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement