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भारत की अध्यक्षता में ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ जारी, वैश्विक कृषि सहयोग का नया रोडमैप तैयार

Date : 13-Jun-2026

13 जून ।  भारत की अध्यक्षता में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन सर्वसम्मत ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के दौर में यह घोषणा-पत्र खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को नई दिशा देगा।

ब्रिक्स देशों की सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय दोनों बैठकें सफलतापूर्वक संपन्न हुईं, जिनमें सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित करीब 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42% हिस्सा इनके पास है और विश्व खाद्यान्न उत्पादन में भी इनका योगदान लगभग 42% है। ऐसे में इन देशों की सामूहिक पहल वैश्विक कृषि व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

खाद्य सुरक्षा, व्यापार और जलवायु पर रहा फोकस

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बैठकों में चार प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा हुई, जिनमें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु परिवर्तन के बीच सतत एवं रीजेनेरेटिव खेती तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि किसान, विशेषकर छोटे और सीमांत किसान, पूरी चर्चा के केंद्र में रहे।

‘इंदौर डिक्लेरेशन’ बना किसान-केंद्रित वैश्विक घोषणापत्र

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ का मूल केंद्र किसान है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, जलवायु-सहनीय खेती और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

प्राकृतिक खेती के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क

ब्रिक्स देशों ने ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर’ स्थापित करने पर सहमति जताई है। इसके माध्यम से प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और अनुभव साझा किए जाएंगे। भारत की ओर से मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डिजिटल कृषि को बढ़ावा देगा नया नेटवर्क

बैठक में ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ की स्थापना का भी निर्णय लिया गया। यह नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों पर सहयोग को बढ़ावा देगा। इसका समन्वय भारत में आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जाएगा।

किसानों के बीज अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनेगा वैश्विक मंच

ब्रिक्स देशों ने ‘ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स’ स्थापित करने पर भी सहमति बनाई। इसका उद्देश्य देशी बीजों की विविधता, पारंपरिक ज्ञान और किसानों के बीज संबंधी अधिकारों की रक्षा करना है। चौहान ने कहा कि आधुनिक बीजों के साथ-साथ पारंपरिक बीजों का संरक्षण भी खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए आवश्यक है।

कृषि संसाधनों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा

‘ब्रिक्स एग्रीएन’ (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) नामक नई पहल के तहत सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों, आनुवंशिक संसाधनों और तकनीकी सूचनाओं का आदान-प्रदान मजबूत किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर संसाधनों और जानकारी तक पहुंच मिल सकेगी।

लैब से खेत तक पहुंचेगा अनुसंधान

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहले से स्थापित ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाते हुए ‘नॉलेज टू एक्शन हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने इसे ‘लैब टू लैंड’ मॉडल को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कृषि व्यापार और सहयोग को मिलेगा नया आयाम

बैठक में निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय कृषि व्यापार व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ जैसी पहलों पर भी विचार-विमर्श हुआ। सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकों में व्यापारिक बाधाओं को कम करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादों के आदान-प्रदान को आसान बनाने पर चर्चा की गई।

जलवायु संकट और कार्बन क्रेडिट पर भी चर्चा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए रीजेनेरेटिव और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कार्बन क्रेडिट व्यवस्था को किसानों के लिए संभावित अवसर बताते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने वाले किसानों को इससे लाभ मिल सकता है। खाद्य हानि (फूड लॉस) कम करने और खाद्यान्न अपव्यय रोकने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराती रहेगी सरकार

उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यूरिया 266 रुपए प्रति बोरी और डीएपी 1,350 रुपए प्रति बोरी की दर से उपलब्ध है तथा बढ़ी हुई लागत का अतिरिक्त बोझ केंद्र सरकार स्वयं वहन कर रही है।

छोटे किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

चौहान ने कहा कि हर किसान महंगी मशीनें नहीं खरीद सकता, इसलिए देशभर में कस्टम हायरिंग सेंटर और समूह आधारित मॉडल के माध्यम से ड्रोन एवं आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकेंगे।

कृषि के भविष्य में युवाओं और महिलाओं की अहम भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलाव के लिए युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत में एग्री-स्टार्टअप, एग्री-बिजनेस और तकनीक आधारित कृषि सेवाओं के माध्यम से युवा बड़ी संख्या में कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ब्रिक्स देशों ने भी इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

इंदौर बना वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र

शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर की मेजबानी की सराहना करते हुए कहा कि शहर के आतिथ्य और सांस्कृतिक अनुभव ने सभी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मेघदूत गार्डन में वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ की स्थापना की। उन्होंने इस आयोजन को ‘टीम इंडिया’ और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच’ की सफलता का उदाहरण बताया


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