25 अगस्त 2003 : मुम्बई में दो आतंकवादी विस्फोट Date : 25-Aug-2024 ---54 नागरिकों की मौत : 244 लोग घायल अगस्त माह में भारत स्वतंत्र हुआ था । इस माह में पूरे भारतवासी स्वतंत्रता का उत्सव मनाते हैं।इतिहास के पन्नों में यह अगस्त माह देश के बड़े दर्द समेटे हैं । विभाजन की त्रासदी और मुस्लिम लीग के डायरेक्टर एक्शन का नर संहार, अगस्त क्रान्ति पर अंग्रेजों के गोली चालन । लेकिन यह सब स्वतंत्रता के पूर्व की स्मृतियाँ हैं । स्वतंत्रता के बाद से लगातार भारत की खुशियों को छीनने का षड्यंत्र होते रहे हैं। ऐसा ही एक कुचक्र 25 अगस्त 2003 को रचा गया जब मुंबई के दो स्थानों पर कार बम विस्फोट हुये जिसमें 54 निर्दोष लोगों के प्राण गये और 244 लोग घायल हुये । घायलों में कुछ और लोगों ने बाद में प्राण त्यागे । 25 अगस्त को एक धमाका गेटवे ऑफ इंडिया पर हुआ और दूसरा जावेरी बाजार में । ये दोनों धमाके ऐसे थे जिसमें न केवल मुम्बई अपितु पूरे देश में सनसनी फैल गई थी । जावेरी बाजार के धमाके में 29 लोगों की मौत हुई । यह धमाका इतना जबरदस्त था कि 200 मीटर दूर तक जमीन हिल गई और अनेक मकानों में तो दरार आ गई । एक ज्वैलरी स्टोर सहित कुछ दुकानों के शीशे टूट गए थे । पहला धमाका जावेरी बाजार में हुआ । पुलिस और प्रशासन बचाव के लिये वहाँ पहुँचा। अभी प्रशासन ठीक से बचाव कार्य शुरु भी नहीं कर पाया था कि गेटवे ऑफ इंडिया में दूसरा बम धमाका होने की खबर आ गयी । ये धमाका भी कार बम बिस्फोट था । गेटवे आफ इंडिया के धमाके में 25 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए । दोनों बम विस्फोट टैक्सियों में किये थे । आतंकवादी दोनों टैक्सियों में टाइमर लगाकर बम छोड़ गये थे । निर्धारित समय पर विस्फोट हुये । दोनों घटनाओं में आरोपियों ने पहले टैक्सी किराये पर ली और दोनों स्थानों पर टैक्सी से उतरे और ड्राइवर को जल्दी लौटने का कह कर चल दिये थे । जावेरी बाजार में टैक्सी ड्राइवर गाड़ी में बैठकर ही अपनी सवारी के वापस लौटने का इंतजार कर रहा था । विस्फोट में उसकी भी मौत हो गई । लेकिन गेटवे ऑफ इंडिया पर टैक्सी ड्राइवर की जान बच गई थी । सवारियाँ उतर कर जल्दी लौटने का कहकर चल दीं थीं। लेकिन यहाँ टैक्सी ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकलकर टहलने लगा था । जिससे बच गया था । इस ड्राइवर के ब्यान हुये आरोपियों का सुराग लगा और आरोपियों की पहचान हो गई । इसमें हनीफ, फहमीदा और अशरफ तीन लोग पकड़े गये । उन्होंने स्वीकार किया था कि वे पहले जावेरी बाजार में भी वे ही टैक्सी में बम से भरा बैग छोड़कर आगे बढ़े थे । और दूसरी टैक्सी लेकर गेटवे ऑफ इंडिया आये थे । यहाँ भी बम से भरा दूसरा झौला छोड़कर आगे बढ़े थे । ये तीनों पाकिस्तान से संबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर से जुड़े थे । टैक्सी ड्राइवर की पहचान पर तीनों बंदी बनाये गये और अदालत में पेश किया । 6 साल बाद अगस्त 2009 को अदालत से इन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई । लेकिन उन्होने हाईकोर्ट में अपील कर दी थी । मामला सोलह वर्षों तक अदालतों में घूमता रहा । लेखक - रमेश शर्मा