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"छोटा सा बदलाव ही जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है"।

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फिनलैंड के राष्ट्रपति ने किया मोदी के कूटनीतिक कौशल को सलाम

Date : 05-Mar-2026

 नई दिल्ली, 05 मार्च । फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारतीय विदेश नीति को एक व्यावहारिक और यथार्थवादी आधार पर लाने तथा बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग के विस्तार के साथ रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कूटनीतिक कौशल की आज मुक्त कंठ से प्रशंसा की। स्टब ने कहा कि इस उथल-पुथल भरे दौर में दुनिया को भारत के कूटनीतिक मार्ग को समझने एवं अनुसरण करने की जरूरत है।

 
भारत की यात्रा पर आये राष्ट्रपति स्टब ने यहां हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-फिनलैंड शिखर बैठक की सह-अध्यक्षता करने के बाद अपने वक्तव्य में यह टिप्पणी की और यह भी कहा कि भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक सीट अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति स्टब की प्रतिष्ठा विश्व में एक सम्मानित नेता, उत्कृष्ट विचारक एवं प्रभावशाली लेखक के रूप में है। वह यहां आज शुरू हुए तीन दिवसीय रायसीना डॉयलॉग में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने आए हैं।
 
राष्ट्रपति स्टब ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा, "मैं आपके कूटनीतिक कौशल को सलाम करता हूं जब आप कहते हैं कि हम यहां दो बड़े लोकतंत्रों के रूप में खड़े हैं। एक बड़ा और एक थोड़ा छोटा है, लेकिन मुझे लगता है कि मुख्य संदेश यह है कि हम मूल्यों को साझा करते हैं ... मैंने अभी नई दिल्ली की सड़कों पर देखा है और मैं शायद कुछ दिनों में मुंबई में बहुत कुछ देखूंगा, जो स्पष्ट है। यह एक आर्थिक चमत्कार है जिसे हम देख रहे हैं।"
 
मेहमान नेता ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली देशों में से एक है और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। जैसा कि हमने देखा है, अब भारत यूरोप के लिए एक प्रमुख रणनीतिक भागीदार है। विदेश एवं सुरक्षा नीति और व्यापार नीति में इसके महत्व को बढ़ा-चढ़ाकर बताना मुश्किल है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जिसे हम हर दिन यहां देख सकते हैं।
 
राष्ट्रपति स्टब ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा, "मैं आपकी विदेश नीति का वास्तव में सम्मान करता हूं कि आप कभी भी भ्रम में नहीं रहे हैं। आपने हमेशा अपनी विदेश नीति को एक व्यावहारिक और यथार्थवादी विश्वदृष्टि पर आधारित किया है। आपने बाकी दुनिया को दिखाया है कि बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग का समर्थन करते हुए रणनीतिक सावधानी और स्वायत्तता की रक्षा करना बहुत मायने रखता है। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि हम सभी को थोड़ा और भारतीय बनना चाहिए।"
 
स्टब ने कहा, "दुनिया बदल रही है, हम विश्व व्यवस्था में बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं और भारत, ग्लोबल साउथ में अपने मित्रों के साथ मिलकर यह तय करेगा कि यह व्यवस्था किस दिशा में जाएगी। आज हमने इस इलाके में सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। हमारे बीच दोनों इलाकों में, पश्चिम एशिया में और यूक्रेन में भी टकराव है। हमारे लिए यूक्रेन के खिलाफ रूस का आक्रामक युद्ध बहुत लंबे समय से, चार साल से चल रहा है। हम इस बात पर सहमत हुए कि युद्ध खत्म करना सभी के हित में है। एक स्थायी शांति तभी हो सकती है जब संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का सम्मान किया जाए।" उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता को समय की मांग बताते हुए कहा, "मुझे लगता है कि भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक सीट अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
 
राष्ट्रपति स्टब ने भारत एवं फिनलैंड के बीच आज की शिखर बैठक में हुई प्रगति के बारे में कहा कि हमने आज भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों पर भी चर्चा की और मुझे कहना है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच थोड़ी देर पहले जो व्यापार समझौता हुआ है और रणनीतिक साझीदारी बनी है, उसका बहुत महत्व है। जब दुनिया संक्रमण के दौर में है, अमेरिका, रूस, चीन और कई अन्य, यह तथ्य कि हम यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक मूल्य और हित आधारित साझीदारी कर सकते हैं, बहुत महत्वपूर्ण है। यह एक अच्छी शुरुआत है कि हमारे पास यहां 20 फिनिश कंपनियां हैं जो मेरे साथ यात्रा कर रही हैं और वे प्रौद्योगिकी से लेकर क्वांटम तक, उपग्रहों से लेकर नेटवर्क से लेकर भोजन और ग्रीन टेक तक उद्योगों की एक विस्तृत शृंखला को प्रतिबिंबित करतीं हैं।
 
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रपति स्टब का एक प्रसिद्ध विश्व नेता, एक सम्मानित विचारक और लेखक के रूप में परिचय कराया और उनके रायसीना डॉयलॉग में बतौर मुख्य अतिथि आने पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा, "आज विश्व एक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक- दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे वैश्विक वातावरण में, भारत और यूरोप- दुनिया की दो बड़ी राजनयिक शक्तियां, अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहीं हैं। हमारा बढ़ता सहयोग वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को नई मजबूती दे रहा है।"
 
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक राजनीति के बारे में कहा, "भारत और फिनलैंड, दोनों, कानून के राज, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम एकमत हैं कि केवल सैन्य संघर्ष से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता। यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर भी एकमत हैं कि बढ़ती हुईं वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों का सुधार आवश्यक ही नहीं, अपरिहार्य भी है। और आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझी प्रतिबद्धता है।"

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